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Tuesday, June 23, 2015

अधिकार और अधिकारी


   हमारे चर्च के लोग चर्च के नए भवन के निर्माण को लेकर बहुत उत्साहित थे। प्रति इतवार वे सब उस भवन के निर्माण के लिए ज़मीन में करी गई खुदाई को देखते; निर्माण कार्य बढ़ तो रहा था किंतु उसकी गति बहुत धीमी थी। इस धीमी गति का कारण था पानी - जो एक स्थान पर आवश्यकता से अधिक था तो दूसरे स्थान पर आवश्यकता से कम! खुदाई के एक किनारे पर पानी का एक भूमिगत सोता था, इसलिए जब तक कि निर्माण की देखरेख करने वाले इस बात से सन्तुष्ट नहीं हो जाते कि वह पानी किसी अन्य वाजिब स्थान की ओर भलि-भांतिमोड़ दिया गया है, वहाँ निर्माण आगे नहीं बढ़ सकता था। दूसरी ओर नगरपालिका अधिकारियों का कहना था कि हमारे पास भवन में अनिवार्यतः लगाए जाने वाली आग बुझाने की सुविधा की आवश्यकतानुसार पर्याप्त पानी का स्त्रोत नहीं था इसलिए जब तक पानी के नए पाईप डालकर उस सुविधा की आवश्यकतानुसार पर्याप्त दबाव के साथ सही मात्रा में पानी उपलब्ध नहीं हो जाता तब तक निर्माण आगे नहीं बढ़ सकता था। हम में से कोई नहीं चाहता था कि इन नियमों के कारण निर्माण का कार्य धीमा हो किंतु हमें यह भी एहसास था कि यदि नियमानुसार कार्य नहीं किया गया तो आगे चलकर हमें बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, समय और संसाधन दोनों का भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है और भवन भी क्षतिग्रस्त हो सकता है।

   कई बार हम सरकारी और अन्य अधिकारियों को लेकर कुड़कुड़ाते हैं, परन्तु अधिकारियों और अधिकारों को उचित आदर देना परमेश्वर को आदर देना है। प्रेरित पौलुस की अधिकारियों के साथ अपनी ही समस्याएं रहती थीं, परन्तु फिर भी उसने परमेश्वर के पवित्र आत्मा की अगुवाई में रोम के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में उन्हें सिखाया, "हर एक व्यक्ति प्रधान अधिकारियों के आधीन रहे; क्योंकि कोई अधिकार ऐसा नहीं, जो परमेश्वर की ओर से न हो; और जो अधिकार हैं, वे परमेश्वर के ठहराए हुए हैं" और "...यदि तू हाकिम से निडर रहना चाहता है, तो अच्छा काम कर और उस की ओर से तेरी सराहना होगी" (रोमियों 13:1, 3)।

   हम मसीही विश्वासियों को भी परमेश्वर का पवित्र आत्मा यही सिखाता है - अधिकारियों और अधिकारों के प्रति स्वस्थ रवैया बनाए रखें; यह हमारे और हमारी मसीही गवाही के लिए भला होगा और इन सबसे बढ़कर हमारे द्वारा परमेश्वर की महिमा के लिए होगा। - डेव ब्रैनन


हमारे द्वारा अधिकारों को दिया गया आदर, परमेश्वर को आदर देता है।

परमेश्वर का नाम युगानुयुग धन्य है; क्योंकि बुद्धि और पराक्रम उसी के हैं। समयों और ऋतुओं को वही पलटता है; राजाओं का अस्त और उदय भी वही करता है; बुद्धिमानों को बुद्धि और समझ वालों को समझ भी वही देता है; - दानिय्येल 2:20-21

बाइबल पाठ: रोमियों 13:1-7
Romans 13:1 हर एक व्यक्ति प्रधान अधिकारियों के आधीन रहे; क्योंकि कोई अधिकार ऐसा नहीं, जो परमेश्वर की ओर से न हो; और जो अधिकार हैं, वे परमेश्वर के ठहराए हुए हैं। 
Romans 13:2 इस से जो कोई अधिकार का विरोध करता है, वह परमेश्वर की विधि का साम्हना करता है, और साम्हना करने वाले दण्ड पाएंगे। 
Romans 13:3 क्योंकि हाकिम अच्छे काम के नहीं, परन्तु बुरे काम के लिये डर का कारण हैं; सो यदि तू हाकिम से निडर रहना चाहता है, तो अच्छा काम कर और उस की ओर से तेरी सराहना होगी; 
Romans 13:4 क्योंकि वह तेरी भलाई के लिये परमेश्वर का सेवक है। परन्तु यदि तू बुराई करे, तो डर; क्योंकि वह तलवार व्यर्थ लिये हुए नहीं और परमेश्वर का सेवक है; कि उसके क्रोध के अनुसार बुरे काम करने वाले को दण्ड दे। 
Romans 13:5 इसलिये आधीन रहना न केवल उस क्रोध से परन्तु डर से अवश्य है, वरन विवेक भी यही गवाही देता है। 
Romans 13:6 इसलिये कर भी दो, क्योंकि शासन करने वाले परमेश्वर के सेवक हैं, और सदा इसी काम में लगे रहते हैं। 
Romans 13:7 इसलिये हर एक का हक चुकाया करो, जिस कर चाहिए, उसे कर दो; जिसे महसूल चाहिए, उसे महसूल दो; जिस से डरना चाहिए, उस से डरो; जिस का आदर करना चाहिए उसका आदर करो।

एक साल में बाइबल: 
  • एस्तेर 9-10
  • प्रेरितों 7:1-21