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Tuesday, June 30, 2015

अनुग्रह


   एक संध्या मैं एक नर्सिंग होम गया, मुझे आया देखकर वहाँ भर्ती एक व्यक्ति टॉम मुझसे बातचीत करने के लिए अपने कमरे से बाहर निकल आया। कुछ देर बात करने के पश्चात टॉम ने पूछा, "क्या परमेश्वर इस बात से अपमानित अनुभव करेगा कि मैं इतने वर्षों के बाद अब मसीही विश्वासी बनना चाहता हूँ?" मेरे लिए टॉम का यह प्रश्न आश्चर्यजनक नहीं था। एक पास्टर होने के नाते मैंने इसी प्रश्न को भिन्न रूपों में अनेक वृद्धों से सुना है, उन से सुना है जो नशीली पदार्थों की लत से निकलना चाहते हैं और उन से भी जो अपने दुषकर्मों के कारण जेल में सज़ा काट रहे हैं। इन सब, और इनके समान ही अन्य लोगों को भी लगता है कि उनका वर्तमान या बीता हुआ जीवन उन्हें परमेश्वर के निकट आने या उसके लिए उपयोगी होने में आड़े आएगा और परमेश्वर उन्हें ग्रहण नहीं करेगा। ऐसा सोचने या मानने वाले सभी लोगों के लिए यह खुशखबरी है कि प्रभु यीशु संसार के पापियों के लिए ही आया (मरकुस 2:17) और वे सब उसको प्रीय हैं, उसे ग्रहणयोग्य हैं।

   टॉम के इस प्रश्न के उत्तर में मैंने उसके साथ परमेश्वर के वचन बाइबल के अध्ययन में थोड़ा समय बिताया और उसमें दिए गए कुछ उन लोगों के उदाहरणों को देखा जो अपने बीते या वर्तमान जीवन के कारण यह सोच सकते थे कि वे परमेश्वर को ग्रहणयोग्य नहीं रहे या उसके लिए उपयोगी नहीं रहे किंतु परमेश्वर ने उन्हें ग्रहण भी किया और उपयोग भी किया। जिन लोगों के उदाहरणों को हमने देखा उनमें रहाब नामक वेश्या भी थी (यहोशु 2:12-14; इब्रानियों 11:31) और ज़क्कई नामक चुँगी लेने वाला भी (लूका 19:1-8)। इन सब ने संसार के लोगों को अस्वीकारीय अपने चरित्र और कर्मों के बावजूद प्रभु परमेश्वर की ओर हाथ बढ़ाया और प्रभु ने उन्हें थामा, अपना बनाकर उनके जीवनों को सुधारा और परिवर्तित किया, और अपने लिए उपयोगी भी बनाया।

   हमने बाइबल से प्रभु यीशु द्वारा दाख की बारी में मज़दूरी करने वालों के दृष्टांत को भी देखा (मत्ती 20:1-16) जहाँ दिन के आरंभ में कार्य करने को लिए गए लोग स्वामी के लिए अधिक कार्य कर सके परन्तु दिन ढलते हुए रखे लोग उतना कार्य नहीं कर सके, किंतु दाख की बारी के स्वामी ने दोनों के काम को समान महत्व दिया और समान ही मेहनताना भी दिया। उस स्वामी ने ना किसी को कमतर जाना और ना ही किसी के प्रति अपने अनुग्रह में फर्क रखा।

   हमारा भूतकाल या वर्तमान जैसा भी हो, परमेश्वर हम सबसे प्रेम करता है और अपने प्रेम को हम पर प्रगट करने की लालसा रखता है, हम पर अनुग्रह करना चाहता है, हमारे साथ एक गहरा और स्थाई संबंध बनाना चाहता है। उसके इस अनुग्रह और प्रेम को स्वीकार करना या अस्वीकार करना, यह निर्णय हमारा है। - रैंडी किल्गोर


आज अपना जीवन प्रभु यीशु को समर्पित करने का तात्पर्य है उसे अनन्तकाल के लिए आशीषित तथा सुरक्षित कर लेना।

यीशु ने यह सुनकर, उन से कहा, भले चंगों को वैद्य की आवश्यकता नहीं, परन्तु बीमारों को है: मैं धर्मियों को नहीं, परन्तु पापियों को बुलाने आया हूं। - मरकुस 2:17

बाइबल पाठ: मत्ती 20:1-16
Matthew 20:1 स्वर्ग का राज्य किसी गृहस्थ के समान है, जो सबेरे निकला, कि अपने दाख की बारी में मजदूरों को लगाए। 
Matthew 20:2 और उसने मजदूरों से एक दीनार रोज पर ठहराकर, उन्हें अपने दाख की बारी में भेजा। 
Matthew 20:3 फिर पहर एक दिन चढ़े, निकल कर, और औरों को बाजार में बेकार खड़े देखकर, 
Matthew 20:4 उन से कहा, तुम भी दाख की बारी में जाओ, और जो कुछ ठीक है, तुम्हें दूंगा; सो वे भी गए। 
Matthew 20:5 फिर उसने दूसरे और तीसरे पहर के निकट निकलकर वैसा ही किया। 
Matthew 20:6 और एक घंटा दिन रहे फिर निकलकर औरों को खड़े पाया, और उन से कहा; तुम क्यों यहां दिन भर बेकार खड़े रहे? उन्हों ने उस से कहा, इसलिये, कि किसी ने हमें मजदूरी पर नहीं लगाया। 
Matthew 20:7 उसने उन से कहा, तुम भी दाख की बारी में जाओ। 
Matthew 20:8 सांझ को दाख बारी के स्‍वामी ने अपने भण्‍डारी से कहा, मजदूरों को बुलाकर पिछलों से ले कर पहिलों तक उन्हें मजदूरी दे दे। 
Matthew 20:9 सो जब वे आए, जो घंटा भर दिन रहे लग