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Monday, January 4, 2016

यात्रा


   आज ही के दिन, 80 वर्ष से कुछ अधिक समय पूर्व एक 9 वर्षीय बालक, क्लेयर ने प्रभु यीशु से प्रार्थना करी कि वे उसके जीवन के उद्धारकर्ता हों। उस बालक की माँ ने अपने परिवार की स्मृति पुस्तक में उस दिन लिखा: "आज क्लेयर ने आरंभ किया है।"

   क्लेयर, जो मेरे पिता हैं, अपने प्रभु यीशु मसीह के पीछे चल पड़ने का निर्णय लेने वाले उस दिन को अपनी यात्रा के आरंभ का दिन कहते हैं। आत्मिक बढ़ोतरी एक बार होने वाली घटना नहीं वरन जीवन पर्यन्त चलती रहने वाली प्रक्रिया है। तो एक नया मसीही विश्वासी अपने विश्वास में दृढ़ और आत्मिक जीवन में बढ़ोतरी कैसे करता है? ऐसा करने के संबंध में कुछ बातें हैं जो मैंने अपने पिता के जीवन से सीखीं हैं, वर्षों से जिन्हें मैंने उन्हें करते हुए देखा है। ये बाते हैं:
  • प्रतिदिन परमेश्वर के वचन बाइबल को पढ़ने से, और साथ ही दैनिक प्रार्थना समय को जीवन का अभिन्न अंग बनाने से हम परमेश्वर और उसकी योजनाओं को अधिकाई से जानते समझते रहते हैं (1 इतिहास 16:11; 1 थिस्सुलुनिकीयों 5:17)
  • बाइबल अध्ययन और प्रार्थना में बिताए समय द्वारा हम ना केवल परमेश्वर की निकटता में बढ़ते हैं वरन प्रलोभनों पर भी जयवन्त होते हैं (भजन 119:11; मत्ती 26:41; इफिसीयों 6:11; 2 तिमुथियुस 3:16-17; 1 पतरस 2:2)
  • प्रभु यीशु पर विश्वास लाने, उसे अपना जीवन को समर्पित करने, और प्रभु की आज्ञाकारिता में चलने का निर्णय लेने के समय से ही पवित्र आत्मा हम में आत्मा के फल विकसित करना आरंभ कर देता है (गलतियों 5:22-23)
  • परमेश्वर के प्रति हमारा प्रेम उसके वचन के प्रति हमारे प्रेम और उस वचन की आज्ञाकारिता से प्रगट होता है (यूहन्ना 14:21, 23)

   हमारी आत्मिक जीवन यात्रा एक प्रक्रिया है। यह हमारा कैसा अद्भुत सौभाग्य है कि हम परमेश्वर के साथ सम्बंध में आ जाते हैं जिसमें "हमारे प्रभु, और उद्धारकर्ता यीशु मसीह के अनुग्रह और पहचान में बढ़ते जाओ..." (2 पतरस 3:18)। - सिंडी हैस कैस्पर


उद्धार पाना क्षण भर की घटना है; मसीही जीवन सारी उम्र का परिश्रम है।

सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्‍टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गईं। - 2 कुरिन्थियों 5:17

बाइबल पाठ: 2 पतरस 1:5-11
2 Peter 1:5 और इसी कारण तुम सब प्रकार का यत्‍न कर के, अपने विश्वास पर सद्गुण, और सद्गुण पर समझ। 
2 Peter 1:6 और समझ पर संयम, और संयम पर धीरज, और धीरज पर भक्ति। 
2 Peter 1:7 और भक्ति पर भाईचारे की प्रीति, और भाईचारे की प्रीति पर प्रेम बढ़ाते जाओ। 
2 Peter 1:8 क्योंकि यदि ये बातें तुम में वर्तमान रहें, और बढ़ती जाएं, तो तुम्हें हमारे प्रभु यीशु मसीह के पहचानने में निकम्मे और निष्‍फल न होने देंगी। 
2 Peter 1:9 और जिस में ये बातें नहीं, वह अन्‍धा है, और धुन्‍धला देखता है, और अपने पूर्वकाली पापों से धुल कर शुद्ध होने को भूल बैठा है। 
2 Peter 1:10 इस कारण हे भाइयों, अपने बुलाए जाने, और चुन लिये जाने को सिद्ध करने का भली भांति यत्‍न करते जाओ, क्योंकि यदि ऐसा करोगे, तो कभी भी ठोकर न खाओगे। 
2 Peter 1:11 वरन इस रीति से तुम हमारे प्रभु और उद्धारकर्ता यीशु मसीह के अनन्त राज्य में बड़े आदर के साथ प्रवेश करने पाओगे।

एक साल में बाइबल: 

  • उत्पत्ति 27-28
  • मत्ती 8:18-34