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सोमवार, 4 जनवरी 2016

यात्रा


   आज ही के दिन, 80 वर्ष से कुछ अधिक समय पूर्व एक 9 वर्षीय बालक, क्लेयर ने प्रभु यीशु से प्रार्थना करी कि वे उसके जीवन के उद्धारकर्ता हों। उस बालक की माँ ने अपने परिवार की स्मृति पुस्तक में उस दिन लिखा: "आज क्लेयर ने आरंभ किया है।"

   क्लेयर, जो मेरे पिता हैं, अपने प्रभु यीशु मसीह के पीछे चल पड़ने का निर्णय लेने वाले उस दिन को अपनी यात्रा के आरंभ का दिन कहते हैं। आत्मिक बढ़ोतरी एक बार होने वाली घटना नहीं वरन जीवन पर्यन्त चलती रहने वाली प्रक्रिया है। तो एक नया मसीही विश्वासी अपने विश्वास में दृढ़ और आत्मिक जीवन में बढ़ोतरी कैसे करता है? ऐसा करने के संबंध में कुछ बातें हैं जो मैंने अपने पिता के जीवन से सीखीं हैं, वर्षों से जिन्हें मैंने उन्हें करते हुए देखा है। ये बाते हैं:
  • प्रतिदिन परमेश्वर के वचन बाइबल को पढ़ने से, और साथ ही दैनिक प्रार्थना समय को जीवन का अभिन्न अंग बनाने से हम परमेश्वर और उसकी योजनाओं को अधिकाई से जानते समझते रहते हैं (1 इतिहास 16:11; 1 थिस्सुलुनिकीयों 5:17)
  • बाइबल अध्ययन और प्रार्थना में बिताए समय द्वारा हम ना केवल परमेश्वर की निकटता में बढ़ते हैं वरन प्रलोभनों पर भी जयवन्त होते हैं (भजन 119:11; मत्ती 26:41; इफिसीयों 6:11; 2 तिमुथियुस 3:16-17; 1 पतरस 2:2)
  • प्रभु यीशु पर विश्वास लाने, उसे अपना जीवन को समर्पित करने, और प्रभु की आज्ञाकारिता में चलने का निर्णय लेने के समय से ही पवित्र आत्मा हम में आत्मा के फल विकसित करना आरंभ कर देता है (गलतियों 5:22-23)
  • परमेश्वर के प्रति हमारा प्रेम उसके वचन के प्रति हमारे प्रेम और उस वचन की आज्ञाकारिता से प्रगट होता है (यूहन्ना 14:21, 23)

   हमारी आत्मिक जीवन यात्रा एक प्रक्रिया है। यह हमारा कैसा अद्भुत सौभाग्य है कि हम परमेश्वर के साथ सम्बंध में आ जाते हैं जिसमें "हमारे प्रभु, और उद्धारकर्ता यीशु मसीह के अनुग्रह और पहचान में बढ़ते जाओ..." (2 पतरस 3:18)। - सिंडी हैस कैस्पर


उद्धार पाना क्षण भर की घटना है; मसीही जीवन सारी उम्र का परिश्रम है।

सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्‍टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गईं। - 2 कुरिन्थियों 5:17

बाइबल पाठ: 2 पतरस 1:5-11
2 Peter 1:5 और इसी कारण तुम सब प्रकार का यत्‍न कर के, अपने विश्वास पर सद्गुण, और सद्गुण पर समझ। 
2 Peter 1:6 और समझ पर संयम, और संयम पर धीरज, और धीरज पर भक्ति। 
2 Peter 1:7 और भक्ति पर भाईचारे की प्रीति, और भाईचारे की प्रीति पर प्रेम बढ़ाते जाओ। 
2 Peter 1:8 क्योंकि यदि ये बातें तुम में वर्तमान रहें, और बढ़ती जाएं, तो तुम्हें हमारे प्रभु यीशु मसीह के पहचानने में निकम्मे और निष्‍फल न होने देंगी। 
2 Peter 1:9 और जिस में ये बातें नहीं, वह अन्‍धा है, और धुन्‍धला देखता है, और अपने पूर्वकाली पापों से धुल कर शुद्ध होने को भूल बैठा है। 
2 Peter 1:10 इस कारण हे भाइयों, अपने बुलाए जाने, और चुन लिये जाने को सिद्ध करने का भली भांति यत्‍न करते जाओ, क्योंकि यदि ऐसा करोगे, तो कभी भी ठोकर न खाओगे। 
2 Peter 1:11 वरन इस रीति से तुम हमारे प्रभु और उद्धारकर्ता यीशु मसीह के अनन्त राज्य में बड़े आदर के साथ प्रवेश करने पाओगे।

एक साल में बाइबल: 

  • उत्पत्ति 27-28
  • मत्ती 8:18-34


गुरुवार, 4 जून 2015

बढ़ते रहें बढ़ाते रहें


   मसीही पुरुषों के एक सम्मेलन में मैं अपने एक पुराने मित्र क्लाईड से, जो अनेक वर्षों से मेरा प्रोत्साहन और मार्गदर्शन करता रहा है, मिला और बातचीत करी। क्लाईड के साथ चीन से आए हुए दो युवक भी थे जो विश्वास में नए थे और क्लाईड की मित्रता तथा आत्मिक बढोतरी में सहायता के लिए बहुत कृतज्ञ थे। क्लाईड जो अब 80 वर्ष का होने वाला है, बहुत उत्साहित तथा प्रफुल्लित था और कह रहा था, "मसीह यीशु को जानने और उससे प्रेम करने को लेकर जितना मैं आज उत्साहित हूँ उतना पहले कभी नहीं था।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस द्वारा फिलिप्पियों की मसीही विश्वासी मण्डली को लिखी पत्री में हम पौलुस के मन और उद्देश्य को देखते हैं जो समय के साथ कभी धूमिल नहीं हुआ: "मैं उसको और उसके मृत्युंजय की सामर्थ को, और उसके साथ दुखों में सहभागी हाने के मर्म को जानूँ, और उस की मृत्यु की समानता को प्राप्त करूं" (फिलिप्पियों 3:10)। प्रभु यीशु के साथ पौलुस के संबंध से उसके अन्दर यह कभी कम ना होने वाली लालसा जागी कि उसके द्वारा अन्य लोग भी मसीही विश्वास को जान सकें। पौलुस प्रभु यीशु में पापों की क्षमा और उद्धार के सुसमाचार को प्रचार करने से तथा इस बात से कि उसे देखकर अन्य लोग मसीही विश्वास में साहसी बनते हैं, आनन्दित होता था (फिलिप्पियों 1:12-14)।

   यदि हमारे मसीही विश्वास के जीवन का उद्देश्य केवल प्रभु यीशु के लिए सेवकाई करना मात्र ही है, तो कभी ना कभी हम थक कर बैठ जाएंगे। परन्तु यदि पौलुस और क्लाईड और उनके जैसे अनेक अन्य लोगों के समान हमारा उद्देश्य मसीह यीशु को और गहराई से जानना, उससे और अधिक प्रेम करना है, तो हम पाएंगे कि प्रभु हमें सामर्थ देगा कि हम दूसरों को उसके बारे में बता सकें, उन्हें प्रभु के निकट ला सकें।

   प्रभु परमेश्वर से मिलने वाली सामर्थ में आनन्दित रहकर आत्मिक जीवन में स्वयं भी आगे बढ़ते रहें तथा दूसरों को भी बढ़ाते रहें। - डेविड मैक्कैसलैंड


मसीह यीशु से सीखें, फिर दूसरों को उसके बारे में सिखाएं।

... उदास मत रहो, क्योंकि यहोवा का आनन्द तुम्हारा दृढ़ गढ़ है। - नहेम्याह 8:10

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 1:12-18; 3:8-11
Philippians 1:12 हे भाइयों, मैं चाहता हूं, कि तुम यह जान लो, कि मुझ पर जो बीता है, उस से सुसमाचार ही की बढ़ती हुई है। 
Philippians 1:13 यहां तक कि कैसरी राज्य की सारी पलटन और शेष सब लोगों में यह प्रगट हो गया है कि मैं मसीह के लिये कैद हूं। 
Philippians 1:14 और प्रभु में जो भाई हैं, उन में से बहुधा मेरे कैद होने के कारण, हियाव बान्‍ध कर, परमेश्वर का वचन निधड़क सुनाने का और भी हियाव करते हैं। 
Philippians 1:15 कितने तो डाह और झगड़े के कारण मसीह का प्रचार करते हैं और कितने भली मनसा से। 
Philippians 1:16 कई एक तो यह जान कर कि मैं सुसमाचार के लिये उत्तर देने को ठहराया गया हूं प्रेम से प्रचार करते हैं। 
Philippians 1:17 और कई एक तो सीधाई से नहीं पर विरोध से मसीह की कथा सुनाते हैं, यह समझ कर कि मेरी कैद में मेरे लिये क्‍लेश उत्पन्न करें। 
Philippians 1:18 सो क्या हुआ? केवल यह, कि हर प्रकार से चाहे बहाने से, चाहे सच्चाई से, मसीह की कथा सुनाई जाती है, और मैं इस से आनन्‍दित हूं, और आनन्‍दित रहूंगा भी। 
Philippians 3:8 वरन मैं अपने प्रभु मसीह यीशु की पहिचान की उत्तमता के कारण सब बातों को हानि समझता हूं: जिस के कारण मैं ने सब वस्‍तुओं की हानि उठाई, और उन्हें कूड़ा समझता हूं, जिस से मैं मसीह को प्राप्त करूं। 
Philippians 3:9 और उस में पाया जाऊं; न कि अपनी उस धामिर्कता के साथ, जो व्यवस्था से है, वरन उस धामिर्कता के साथ जो मसीह पर विश्वास करने के कारण है, और परमेश्वर की ओर से विश्वास करने पर मिलती है। 
Philippians 3:10 और मैं उसको और उसके मृत्युंजय की सामर्थ को, और उसके साथ दुखों में सहभागी हाने के मर्म को जानूँ, और उस की मृत्यु की समानता को प्राप्त करूं। 
Philippians 3:11 ताकि मैं किसी भी रीति से मरे हुओं में से जी उठने के पद तक पहुंचूं।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 21-22
  • यूहन्ना 14


बुधवार, 3 जुलाई 2013

मन खोल के

   बसन्त ऋतु के आरंभ में मुझे और मेरी पत्नि को हमारी रसोई की खिड़की से एक रोचक दृश्य देखने को मिला। एक पक्षी युगल अपनी चोंच में घास और तिनके लिए पड़ौसी के घर की दीवार में बने एक छेद में आते और जाते थे। फिर कुछ सप्ताह बाद वहाँ से ज़ोर से चहचहाने की आवाज़ें आने लगीं और चिड़िया के चार बच्चे उस छेद से सिर निकाल और पूरा मूँह खोल कर, अपने माता-पिता से भोजन माँगते दिखने लगे; तथा चिड़िया माता पिता बारी बारी उनके लिए भोजन लाकर उनके मूँह और पेट भरने के प्रयास में लगे हुए दिखने लगे।

   चिड़िया के बच्चों के चौड़े खुले मूँह और अपना पेट भरा होने की तीव्र लालसा देख कर मुझे स्मरण हो आया कि कैसे परमेश्वर का वचन बाइबल हम मसीही विश्वासीयों को आत्मिक भोजन की लालसा रखने को कहती है। प्रेरित पतरस ने अपनी पहली पत्री में इस बात को समझाने के लिए छोटे बच्चों की भोजन पाते रहने की लालसा की उपमा दी है: "नये जन्मे हुए बच्‍चों की नाईं निर्मल आत्मिक दूध की लालसा करो, ताकि उसके द्वारा उद्धार पाने के लिये बढ़ते जाओ" (1 पतरस 2:2)। जिस शब्द का अनुवाद "लालसा" हुआ है वह एक संयुक्त शब्द है जिसका मूल युनानी भाषा में अर्थ है एक अति तीव्र इच्छा या बड़ी उत्सुकता से किसी चीज़ को पाने की इच्छा रखना।

   यह विचित्र लग सकता है कि परमेश्वर का वचन हम मसीही विश्वासियों को किसी चीज़ को पाने की तीव्र या उत्सुकता से इच्छा रखने की आज्ञा देता है। लेकिन पक्षियों या मनुष्य के भूखे बच्चों के व्यवहार के विपरीत, हम व्यसक विश्वासीयों को यह स्मरण दिलाने की आवश्यकता रहती है कि हमारी आत्मा को भी उपयुकत भोजन की, जो यथासमय और पौष्टिक हो, की आवश्यकता रहती है। चाहे हम ने बीते समय में बाइबल का अध्ययन किया हो, तो भी हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि शारीरिक भोजन की आवश्यकता के समान ही हमारी आत्मा को भी समय समय पर आत्मिक भोजन की आवश्यकता रहती है, और यदि समय समय पर यह आवश्यकता पूरी नहीं की गई तो हम आत्मिक रीति से कमज़ोर होते जाएंगे।

   परमेश्वर ने अपने बच्चों को भरपेट आत्मिक भोजन भी देने का प्रबंध किया हुआ है, बस हमें मन खोल कर उसे ग्रहण करने भर की आवश्यकता है। - डेनिस फिशर


परमेश्वर के वचन की उपेक्षा आपकी आत्मा को कमज़ोर कर देगा; लेकिन उस पर मनन करते रहने से आप आत्मिक रीति से बलवंत होते जाएंगे।

नये जन्मे हुए बच्‍चों की नाईं निर्मल आत्मिक दूध की लालसा करो, ताकि उसके द्वारा उद्धार पाने के लिये बढ़ते जाओ। - 1 पतरस 2:2

बाइबल पाठ: 1 पतरस 2:1-5
1 Peter 2:1 इसलिये सब प्रकार का बैर भाव और छल और कपट और डाह और बदनामी को दूर करके।
1 Peter 2:2 नये जन्मे हुए बच्‍चों की नाईं निर्मल आत्मिक दूध की लालसा करो, ताकि उसके द्वारा उद्धार पाने के लिये बढ़ते जाओ।
1 Peter 2:3 यदि तुम ने प्रभु की कृपा का स्‍वाद चख लिया है।
1 Peter 2:4 उसके पास आकर, जिसे मनुष्यों ने तो निकम्मा ठहराया, परन्तु परमेश्वर के निकट चुना हुआ, और बहुमूल्य जीवता पत्थर है।
1 Peter 2:5 तुम भी आप जीवते पत्थरों की नाईं आत्मिक घर बनते जाते हो, जिस से याजकों का पवित्र समाज बन कर, ऐसे आत्मिक बलिदान चढ़ाओ, जो यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर को ग्राह्य हों।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्युब 25-27 
  • प्रेरितों 12


सोमवार, 20 अगस्त 2012

परिपक्व


   एक दिन एक दुकान पर जन्मदिन की बधाई सन्देश के कार्ड देखते समय मुझे एक कार्ड दिखाई दिया जिसपर लिखा था, "बचपन सब के लिए एक ही बार आता है किंतु कुछ लोगों के लिए बचपना सारी उम्र बना रहता है।" इस कार्ड का सन्देश मुझे बड़ा रोचक लगा; बचपन की बातों में बने रहने और कभी बड़े ना होने में कुछ आकर्षक लगता है। लेकिन हम सभी जानते हैं कि सदा अपरिपक्व रहना भी ठीक नहीं है, और उम्र के साथ यदि परिपक्वता ना हो तो यह चिंता का विषय बन जाता है।

   मसीही विश्वासियों को भी अपने विश्वास में परिपक्व होना अनिवार्य है। पापों के पश्चाताप और क्षमा तथा नए जन्म के बाद जब हम प्रभु यीशु के अनुयायी बनते हैं तो अत्मिक बचपने से परिपक्वता और प्रौढ़ होना भी हम में दिखना चाहिए। परमेश्वर का वचन हम विश्वासियों को चुनौती देता है कि प्रभु की समानता में बढ़ने और परिपक्व होने में प्रयत्नशील रहें।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में समस्याओं से भरी कुरिन्थुस की मण्डली को प्रेरित पौलुस ने लिखा कि उनकी समस्याओं की जड़ उनकी आत्मिक अपरिपक्वता में है: "हे भाइयों, मैं तुम से इस रीति से बातें न कर सका, जैसे आत्मिक लोगों से; परन्‍तु जैसे शारीरिक लोगों से, और उन से जो मसीह में बालक हैं" (१ कुरिन्थियों ३:१)।

   हम कैसे आत्मिक बचपन से मसीही परिपक्वता में आ सकते हैं? प्रेरित पतरस ने लिखा, "पर हमारे प्रभु, और उद्धारकर्ता यीशु मसीह के अनुग्रह और पहचान में बढ़ते जाओ" (२ पतरस ३:१८)। यह बढ़ना परमेश्वर के वचन पर मनन करने और प्रार्थना करने में समय बिताने के द्वारा होता है (भजन ११९:९७-१०४; प्रेरितों १:१४)।

   समस्याओं से भरी कुरिन्थुस की उस अपरिपक्व मण्डली के समान, क्या हमारे जीवनों की समस्याओं का कारण हमारी आत्मिक अपरिपक्वता तो नहीं? कहीं यह हमारे अपरिपक्वता से परिपक्वता की ओर बढ़ने का समय तो नहीं? - बिल क्राउडर


जब विश्वास को सींचा जाता है तो आत्मिक वृद्धि होती है।

हे भाइयों, मैं तुम से इस रीति से बातें न कर सका, जैसे आत्मिक लोगों से; परन्‍तु जैसे शारीरिक लोगों से, और उन से जो मसीह में बालक हैं। - १ कुरिन्थियों ३:१

बाइबल पाठ: १ कुरिन्थियों ३:१-१७
1Co 3:1  हे भाइयों, मैं तुम से इस रीति से बातें न कर सका, जैसे आत्मिक लोगों से; परन्‍तु जैसे शारीरिक लोगों से, और उन से जो मसीह में बालक हैं। 
1Co 3:2  में ने तुम्हें दूध पिलाया, अन्न न खिलाया; क्‍योंकि तुम उस को न खा सकते थे; वरन अब तक भी नहीं खा सकते हो। 
1Co 3:3  क्‍योंकि अब तक शारीरिक हो, इसलिये, कि जब तुम में डाह और झगड़ा है, तो क्‍या तुम शारीरिक नहीं और मनुष्य की रीति पर नहीं चलते? 
1Co 3:4  इसलिये कि जब एक कहता है, कि मैं पौलुस का हूं, और दूसरा कि मैं अपुल्लोस का हूं, तो क्‍या तुम मनुष्य नहीं? 
1Co 3:5  अपुल्लोस क्‍या है? और पौलुस क्‍या? केवल सेवक, जिन के द्वारा तुम ने विश्वास किया, जैसा हर एक को प्रभु ने दिया। 
1Co 3:6  मैं ने लगाया, अपुल्लोस ने सींचा, परन्‍तु परमेश्वर ने बढ़ाया। 
1Co 3:7  इसलिये न तो लगाने वाला कुछ है, और न सींचने वाला, परन्‍तु परमेश्वर जो बढ़ाने वाला है। 
1Co 3:8  लगाने वाला और सींचने वाला दानों एक हैं; परन्‍तु हर एक व्यक्ति अपने ही परिश्रम के अनुसार अपनी ही मजदूरी पाएगा। 
1Co 3:9  क्‍योंकि हम परमेश्वर के सहकर्मी हैं; तुम परमेश्वर की खेती और परमेश्वर की रचना हो। 
1Co 3:10  परमेश्वर के उस अनुग्रह के अनुसार, जो मुझे दिया गया, मैं ने बुद्धिमान राजमिस्त्री की नाईं नेव डाली, और दूसरा उस पर रद्दा रखता है; परन्‍तु हर एक मनुष्य चौकस रहे, कि वह उस पर कैसा रद्दा रखता है। 
1Co 3:11  क्‍योंकि उस नेव को छोड़ जो पड़ी है, और वह यीशु मसीह है कोई दूसरी नेव नहीं डाल सकता। 
1Co 3:12  और यदि कोई इस नेव पर सोना या चान्‍दी या बहुमोल पत्थर या काठ या घास या फूस का रद्दा रखता है। 
1Co 3:13  तो हर एक का काम प्रगट हो जाएगा, क्‍योंकि वह दिन उसे बताएगा; इसलिये कि आग के साथ प्रगट होगा: और वह आग हर एक का काम परखेगी कि कैसा है? 
1Co 3:14   जिस का काम उस पर बना हुआ स्थिर रहेगा, वह मजदूरी पाएगा। 
1Co 3:15  और यदि किसी का काम जल जाएगा, तो हानि उठाएगा; पर वह आप बच जाएगा परन्‍तु जलते जलते।
1Co 3:16  क्‍या तुम नहीं जानते, कि तुम परमेश्वर का मन्‍दिर हो, और परमेश्वर का आत्मा तुम में वास करता है? 
1Co 3:17  यदि कोई परमेश्वर के मन्‍दिर को नाश करेगा तो परमेश्वर उसे नाश करेगा; क्‍योंकि परमेश्वर का मन्‍दिर पवित्र है, और वह तुम हो।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन १०५-१०६ 
  • १ कुरिन्थियों ३


मंगलवार, 14 दिसंबर 2010

चेतावनी के संकेत

जब मैंने अपनी कार चालू करने को चाबी घुमाई तो उसे चालू होने में थोड़ा सा वक्त लगा और एक छोटी पीली बत्ती संकेत देने लगी "अपना इंजन जांचिये"; मुझे नहीं लगा कि यह कोई ऐसी गम्भीर समस्या है जिस पर मुझे तुरंत ध्यान देने की आवश्यक्ता है। मैंने कार चालू करी और अपने काम पर निकल गया। लेकिन अगली सुबह जब मैंने कार चालू करने की कोशिश करी तो वह चालू नहीं हुई। इस बात पर मेरी पहली प्रतिक्रिया थी खिसियाहट की, यह सोच कर कि अब इससे मुझे समय और पैसे का नुकसान तथा असुविधा का सामना करना पड़ेगा। कुछ समय के बाद मेरी दूसरी प्रतिक्रिया विधिसंगत थी - मैंने निर्णय लिया कि अब से मैं चेतावनी के संकेतों को नज़रांदाज़ नहीं करूंगा, वे वास्तव में किसी गंभीर समस्या के सूचक हो सकते हैं।

बाइबल में परमेश्वर ने योएल नबी के द्वारा अपने लोगों को उनके आत्मिक जीवन से संबंधित उसकी चेतावनियों पर ध्यान देने के लिये उकसाया (योएल २:१२-१७)। समृद्धी के कारण वे लोग परमेश्वर के प्रति उदासीन और लापरवाह हो गए थे। उनका विश्वास खोखला तथा ऊपरी तौर से केवल रिवाज़ों को मनाने तक सीमित रह गया था, और उनके जीवन में आत्मिक दिवालियापन तथा नैतिक पतन आ गया था। उन्हें चिताने के लिये परमेश्वर ने उनकी फसल को टिड्डियों से बरबाद होने दिया, जिससे वे अपने व्यवहार को बदलें और परमेश्वर की ओर सच्चे मन से फिरें।

प्रभु यीशु मसीह ने अपने चेलों को चिताया "...चौकस रहो, और हर प्रकार के लोभ से अपने आप को बचाए रखो: क्‍योंकि किसी का जीवन उस की संपत्ति की बहुतायत से नहीं होता। उस ने उन से एक दृष्‍टान्‍त कहा, कि किसी धनवान की भूमि में बड़ी उपज हुई। तब वह अपने मन में विचार करने लगा, कि मैं क्‍या करूं, क्‍योंकि मेरे यहां जगह नहीं, जहां अपनी उपज इत्यादि रखूं। और उस ने कहा मैं यह करूंगा: मैं अपनी बखारियां तोड़ कर उन से बड़ी बनाऊंगा और वहां अपना सब अन्न और संपत्ति रखूंगा: और अपने प्राण से कहूंगा, कि प्राण, तेरे पास बहुत वर्षों के लिये बहुत संपत्ति रखी है; चैन कर, खा, पी, सुख से रह। परन्‍तु परमेश्वर ने उस से कहा हे मूर्ख, इसी रात तेरा प्राण तुझ से ले लिया जाएगा: तब जो कुछ तू ने इकट्ठा किया है, वह किस का होगा? ऐसा ही वह मनुष्य भी है जो अपने लिये धन बटोरता है, परन्‍तु परमेश्वर की दृष्‍टि में धनी नहीं।" (लूका १२:१५-२१)

क्या आपके जीवन में परमेश्वर की ओर से कोई चेतावनी का संकेत आ रहा है? क्या आपके जीवन में ऐसा कुछ है जिसे परमेश्वर के सन्मुख अंगीकार और पश्चाताप द्वारा ठीक करना बाकी है? समय रहते चेत जाइये और सब कुछ परमेश्वर के साथ ठीक कर लीजिये; बात को नज़रंदाज़ करना या टालना नुकसानदेह या घातक भी हो सकता है। - मार्विन विलियम्स


मन की बेचैनी परमेश्वर की ओर से चेतावनी का संकेत भी हो सकती है।

तौभी यहोवा की यह वाणी है, अभी भी सुनो, उपवास के साथ रोते-पीटते अपने पूरे मन से फिर कर मेरे पास आओ। - योएल २:१२


बाइबल पाठ: योएल २:१२-१७

तौभी यहोवा की यह वाणी है, अभी भी सुनो, उपवास के साथ रोते-पीटते अपने पूरे मन से फिर कर मेरे पास आओ।
अपने वस्त्र नहीं, अपने मन ही को फाड़ कर अपने परमेश्वर यहोवा की ओर फिरो; क्योंकि वह अनुग्रहकारी, दयालु, विलम्ब से क्रोध करने वाला, करूणानिधान और दु:ख देकर पछतानेहारा है।
क्या जाने वह फिर कर पछताए और ऐसी आशीष दे जिस से तुम्हारे परमेश्वर यहोवा को अन्नबलि और अर्घ दिया जाए।
सिय्योन में नरसिंगा फूंको, उपवास का दिन ठहराओ, महासभा का प्रचार करो;
लोगों को इकट्ठा करो। सभा को पवित्र करो, पुरनियों को बुला लो, बच्चों और दूधपीउवों को भी इकट्ठा करो। दुल्हा अपनी कोठरी से, और दुल्हिन भी अपने कमरे से निकल आएं।
याजक[पुरोहित] जो यहोवा के टहलुए हैं, वे आंगन और वेदी के बीच में रो रोकर कहें, हे यहोवा अपनी प्रजा पर तरस खा और अपने निज भाग की नामधराई न होने दे, न अन्यजातियां उसकी उपमा देने पाएं। जाति जाति के लोग आपस में क्यों कहने पाएं, कि उनका परमेश्वर कहां रहा?

एक साल में बाइबल:
  • योएल १-३
  • प्रकाशितवाक्य ५