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Thursday, January 28, 2016

बाधाएं तथा असुविधाएं


   बाधाएं कोई नई बात नहीं हैं; हमारा शायद ही कोई दिन पूर्णतयः पूर्वनियोजित रीति से निकल पाता होगा। जीवन असुविधाओं से भरा रहता है; हमारी योजनाएं हमारे नियंत्रण से बाहर बातों के द्वारा प्रभावित तथा कुंठित होती रहती हैं। ऐसा करने वाली बाधाओं और असुविधाओं की सूचि लंबी और बदलती रहने वाली है - बीमारी, संघर्ष और विरोध, यातायात में अटकना या फंसना, उपकरणों का ठीक काम ना करना, व्यवहार में अशिष्टता, सुस्ती और टालना, अधीरता, अयोग्यता या अक्षमता आदि जैसे अनेकों कारण हमारी योजनाओं पर पानी फेरते रहते हैं, उन्हें बदलते या बिगाड़ते रहते हैं।

   लेकिन इन असुविधाओं और बाधाओं का एक दूसरा पक्ष भी है जिसे अकसर हम नहीं देख पाते हैं। हमारा विचार होता है कि हमें निराश और हताश करने, हमारे जीवन को कठिन बनाने और हमारी योजनाओं को व्यर्थ करने के इलावा इन बाधाओं और असुविधाओं का कोई अन्य उद्देश्य नहीं है। किंतु ये बाधाएं और असुविधाएं हमें किसी अनजाने और अनदेखे खतरे से बचा कर रखने का परमेश्वर का तरीका, या फिर हमारे द्वारा दूसरों के प्रति परमेश्वर के समान अनुग्रह और क्षमा को प्रदर्शित करने अवसर भी हो सकती हैं। ये परिस्थितियाँ परमेश्वर द्वारा हमारी अपनी आशा और योजना से कुछ बेहतर के आरंभ करने का, या फिर विपरीत परिस्थितियों के प्रति हमारे प्रत्युत्तर और हमारी भावनाओं को हमारे समक्ष लाने का माध्यम भी हो सकती हैं जिससे हम अपना आंकलन कर सकें और समय रहते अपने आपको सुधार सकें। इन बाधाओं और असुविधाओं का कारण चाहे जो भी हो, चाहे हम परमेश्वर की बातों और उद्देश्यों ना भी समझने पाएं, तो भी हम मसीही विश्वासी इस बात पर भरोसा रख सकते हैं, उसे लेकर निश्चिंत रह सकते हैं कि सभी बातों के द्वारा परमेश्वर हमारा भला कर रहा है (रोमियों 8:28), हमें हमारा उद्धारकर्ता प्रभु यीशु की समानता में ढालता जा रहा है और हमारे द्वारा अपने स्वर्गीय राज्य का प्रचार और प्रसार कर रहा है।

   यह कहना कि संपूर्ण इतिहास में परमेश्वर के अनुयायी बाधाओं तथा असुविधाओं में रहे हैं कोई अतिश्योक्ति नहीं है; लेकिन परमेश्वर के उन अनुयायियों के जीवन इस बात के भी गवाह हैं कि इन सब बातों के द्वारा परमेश्वर के बड़े उद्देश्यों की पूर्ति और उसकी महिमा उनके जीवन से हुई है। यह जानते और समझते हुए, हमें बाधाओं तथा असुविधाओं के लिए भी परमेश्वर के धन्यवादी होना चाहिए, इस विश्वास के साथ कि वह हमें समय के सदुपयोग का अवसर दे रहा है (इफिसियों 5:16, 20)। - जूली ऐकैअरमैन लिंक


हमारे साथ जो होता है वह इतना महत्वपूर्ण नहीं है जितना वह जो परमेश्वर हम में और हमारे द्वारा कर रहा है।

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28

बाइबल पाठ: इफिसियों 5:15-21
Ephesians 5:15 इसलिये ध्यान से देखो, कि कैसी चाल चलते हो; निर्बुद्धियों की नाईं नहीं पर बुद्धिमानों की नाईं चलो। 
Ephesians 5:16 और अवसर को बहुमूल्य समझो, क्योंकि दिन बुरे हैं। 
Ephesians 5:17 इस कारण निर्बुद्धि न हो, पर ध्यान से समझो, कि प्रभु की इच्छा क्या है? 
Ephesians 5:18 और दाखरस से मतवाले न बनो, क्योंकि इस से लुचपन होता है, पर आत्मा से परिपूर्ण होते जाओ। 
Ephesians 5:19 और आपस में भजन और स्‍तुतिगान और आत्मिक गीत गाया करो, और अपने अपने मन में प्रभु के साम्हने गाते और कीर्तन करते रहो। 
Ephesians 5:20 और सदा सब बातों के लिये हमारे प्रभु यीशु मसीह के नाम से परमेश्वर पिता का धन्यवाद करते रहो। 
Ephesians 5:21 और मसीह के भय से एक दूसरे के आधीन रहो।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 19-20
  • मत्ती 18:21-35