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Tuesday, April 19, 2016

व्यवस्थित


   जिस भी बात पर मैं ध्यान करती हूँ, वही मेरी इस धारणा की पुष्टि करती है कि व्यवस्थित होना स्वाभाविक नहीं है। उदाहरण के लिए चाहे मेरे कार्यस्थल को ही ले लीजिए, मैं चकित हूँ कि कितनी शीघ्रता से, बिना किसी प्रयास के भी, मेरा दफतर अव्यवस्थित हो जाता है; लेकिन उसे पुनः व्यवस्थित करने के लिए प्रयास और समय लगता है। व्यवस्था लाने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ता है; व्यवस्था स्वतः नहीं आ जाती।

   लेकिन इस बात को लेकर मुझे चकित नहीं होना चाहिए; आखिरकर परमेश्वर का वचन बाइबल भी तो बारंबार यही बात दिखाती है; और यह भी कि अव्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए परमेश्वर को प्रयास और हस्तक्षेप करना ही पड़ता है। इसका एक प्रमुख उदाहरण हमें परमेश्वर द्वारा इस्त्राएल को मिस्त्र की ग़ुलाम प्रजा से एक स्वाधीन राष्ट्र के रूप में स्थापित किए जाने के समय की घटनाओं में देखते हैं (निर्गमन 7-14 अध्याय)। जब परमेश्वर ने मिस्त्र के राजा फिरौन के पास इस्त्राएल को मुक्त कर देने का सन्देश मूसा और हारून के द्वारा भेजा तो फिरौन ने इसका विरोध किया। मिस्त्र की अर्थव्यवस्था और समृद्धि इस्त्राएली गुलामों द्वारा किए जा रहे कठिन श्रम पर निर्भर थी, इसलिए फिरौन उन्हें जाने नहीं देना चाहता था। फिरौन की मनशा बदलने के लिए परमेश्वर ने दस विपत्तियाँ मिस्त्र पर भेजीं। फिरौन के जादूगर पहली दो विपत्तियों की नकल तो करने पाए किंतु शेष आठ की नकल कर पाने में वे असमर्थ रहे; लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि उन दस विपत्तियों में से किसी एक को भी वे जादूगर पलट नहीं सके। वे दो बार अव्यवस्था तो लाने पाए किंतु पुनः व्यवस्था बहाल करना उनके बस की बात नहीं थी; हर बार केवल परमेश्वर ने ही उन विपत्तियों को पलटा और व्यवस्था को बहाल किया। केवल परमेश्वर ही अव्यवस्था को व्यवस्थित कर सकता है।

   एक बात और है, प्रयास करके हम अपने निवास या कार्य स्थान को व्यवस्थित तो कर सकते हैं, उसे कुछ समय तक व्यवस्थित बनाए भी रख सकते हैं; लेकिन अपने आत्मिक और भावनात्मक जीवन की अव्यवस्था को हम कभी स्वयं व्यवस्थित नहीं कर सकते या रख सकते। यह कार्य भी केवल परमेश्वर ही कर सकता है। जब हम परमेश्वर की इच्छानुसार भले कार्यों में लगे रहते हैं, आज्ञाकारिता का जीवन व्यतीत करते हैं, किसी से बुरा नहीं बोलते, नम्र और शांतिप्रीय होकर रहते हैं, सबके साथ कोमलता दिखाते हैं (तीतुस 3:1-2) इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं कि परमेश्वर ने हमारे जीवनों की अव्यवस्था को व्यवस्थित कर दिया है। - जूली ऐकैअरमैन लिंक


जब हम अपनी समस्याएं परमेश्वर के हाथों में डाल देते हैं तो वह भी अपनी शांति हमारे हृदयों में डाल देता है।

लोगों को सुधि दिला, कि हाकिमों और अधिकारियों के आधीन रहें, और उन की आज्ञा मानें, और हर एक अच्‍छे काम के लिये तैयार रहें। किसी को बदनाम न करें; झगडालू न हों: पर कोमल स्‍वभाव के हों, और सब मनुष्यों के साथ बड़ी नम्रता के साथ रहें। - तीतुस 3:1-2

बाइबल पाठ: निर्गमन 8:1-15
Exodus 8:1 और तब यहोवा ने फिर मूसा से कहा, फिरौन के पास जा कर कह, यहोवा तुझ से इस प्रकार कहता है, कि मेरी प्रजा के लोगों को जाने दे जिस से वे मेरी उपासना करें। 
Exodus 8:2 और यदि उन्हें जाने न देगा तो सुन, मैं मेंढ़क भेज कर तेरे सारे देश को हानि पहुंचाने वाला हूं। 
Exodus 8:3 और नील नदी मेंढ़कों से भर जाएगी, और वे तेरे भवन में, और तेरे बिछौने पर, और तेरे कर्मचारियों के घरों में, और तेरी प्रजा पर, वरन तेरे तन्दूरों और कठौतियों में भी चढ़ जाएंगे। 
Exodus 8:4 और तुझ पर, और तेरी प्रजा, और तेरे कर्मचारियों, सभों पर मेंढ़क चढ़ जाएंगे। 
Exodus 8:5 फिर यहोवा ने मूसा को आज्ञा दी, कि हारून से कह दे, कि नदियों, नहरों, और झीलों के ऊपर लाठी के साथ अपना हाथ बढ़ाकर मेंढकों को मिस्र देश पर चढ़ा ले आए। 
Exodus 8:6 तब हारून ने मिस्र के जलाशयों के ऊपर अपना हाथ बढ़ाया; और मेंढ़कों ने मिस्र देश पर चढ़कर उसे छा लिया। 
Exodus 8:7 और जादूगर भी अपने तंत्र-मंत्रों से उसी प्रकार मिस्र देश पर में