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Friday, December 8, 2017

सिद्ध भेंट


   प्रति वर्ष हमारा स्थानीय वनस्पति उद्यान संसार भर में अपनी अपनी रीति से मनाए जा रहे क्रिसमस के नाटक के दृश्य प्रदर्शित करता है। मेरा पसन्दीदा दृश्य फ्रांस के क्रिसमस नाटक का होता है। पारंपरिक दृश्य में गडरिये, तथा सोना, मुर्र, लोबान की भेंट लिए हुए ज्योतिषी चरनी के चारों ओर एकत्रित हुए दिखाए जाते हैं। परन्तु फ्रांस के दृश्य में फ्रांसिसी ग्रामीणों को दिखाया जाता है, जो अपनी भेंटें शिशु यीशु के लिए लेकर आए हैं। उनकी भेंटें उनके द्वारा बनाई गई ब्रेड, दाखरस, पनीर, फूल और अन्य ऐसी वस्तुएं होती हैं, जिन्हें बनाने या उपजाने की परमेश्वर ने उन्हें योग्यता दी है।

   इससे मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल के पुराने नियम का वह खण्ड स्मरण हो आता है जिसमें परमेश्वर ने अपनी प्रजा इस्त्राएल को आज्ञा दी कि वे लोग अपने परिश्रम के प्रथम फल प्रभु परमेश्वर के भवन में ला कर परमेश्वर को अर्पित करें (निर्गमन 23:16-19)। क्रिसमस का वह फ्रांसिसी दृश्य दिखाता है कि जो कुछ भी हमारे पास है वह परमेश्वर से आया है, इसलिए जो भी हम परमेश्वर को अर्पित करते हैं वह पहले परमेश्वर द्वारा हमें दिया गया है।

   जब पौलुस ने रोमियों से कहा कि वे अपने आप को एक जीवित बलिदान करके परमेश्वर को अर्पित करें, तो वह उन से कह रहा था कि परमेश्वर को वह वापस लौटा कर दें जो परमेश्वर ने उन्हें दिया है - स्वयं उनका अपना अस्तित्व (रोमियों 12:1)। इसमें वे भेंटें भी सम्मिलित हैं जो परमेश्वर ने उन्हें दीं थीं, तथा उनकी जीविका अर्जित करने की क्षमता भी। हम जानते हैं कि परमेश्वर लोगों को कुछ विशेष योग्यताएं देता है। कुछ, दाऊद के समान, संगीत में निपुण होते हैं (1 शमूएल 16:18)। कुछ अन्य, बसलेल और ओहोलिआब के समान कलात्मक कार्यों में कुशल कारीगर होते हैं (निर्गमन 35:30-35)। कुछ लोगों के पास लिखने, पढ़ाने, बागबानी करने, और अन्य अनेकों प्रकार के कार्य करने की योग्यताएं होती हैं।

   जब हम परमेश्वर को वह अर्पित करते हैं जो पहले उसने ही हमें दिया है - अपने आप को, तो हम उसे सिद्ध भेंट अर्पित करते हैं। - जूली ऐकैरमैन लिंक


अपने आप को मसीह को समर्पित कर दें; 
उसने भी अपना सर्वस्व आपके लिए बलिदान कर दिया है।

यहोवा के नाम की ऐसी महिमा करो जो उसके योग्य है; भेंट ले कर उसके आंगनों में आओ! - भजन 96:8

बाइबल पाठ: रोमियों 12:1-8
Romans 12:1 इसलिये हे भाइयों, मैं तुम से परमेश्वर की दया स्मरण दिला कर बिनती करता हूं, कि अपने शरीरों को जीवित, और पवित्र, और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान कर के चढ़ाओ: यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है। 
Romans 12:2 और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो। 
Romans 12:3 क्योंकि मैं उस अनुग्रह के कारण जो मुझ को मिला है, तुम में से हर एक से कहता हूं, कि जैसा समझना चाहिए, उस से बढ़कर कोई भी अपने आप को न समझे पर जैसा परमेश्वर ने हर एक को परिमाण के अनुसार बांट दिया है, वैसा ही सुबुद्धि के साथ अपने को समझे। 
Romans 12:4 क्योंकि जैसे हमारी एक देह में बहुत से अंग हैं, और सब अंगों का एक ही सा काम नहीं। 
Romans 12:5 वैसे ही हम जो बहुत हैं, मसीह में एक देह हो कर आपस में एक दूसरे के अंग हैं। 
Romans 12:6 और जब कि उस अनुग्रह के अनुसार जो हमें दिया गया है, हमें भिन्न भिन्न वरदान मिले हैं, तो जिस को भविष्यद्वाणी का दान मिला हो, वह विश्वास के परिमाण के अनुसार भविष्यद्वाणी करे। 
Romans 12:7 यदि सेवा करने का दान मिला हो, तो सेवा में लगा रहे, यदि कोई सिखाने वाला हो, तो सिखाने में लगा रहे। 
Romans 12:8 जो उपदेशक हो, वह उपदेश देने में लगा रहे; दान देने वाला उदारता से दे, जो अगुआई करे, वह उत्साह से करे, जो दया करे, वह हर्ष से करे।

एक साल में बाइबल: 
  • दानिय्येल 8-10
  • 3 यूहन्ना