बाइबल और मसीही विश्वास सम्बन्धी अपने प्रश्नों के लिए यहाँ क्लिक करें:

GotQuestions?org

Tuesday, August 7, 2018

बचाव


       जब कैथलीन के शिक्षक ने उसे कक्षा के सामने बुलाकर एक वाक्य की व्याकरण का विश्लेषण करने को कहा, तो वह घबरा गई। वह हाल ही में एक अन्य विद्यालय से आई थी, और उसने अभी ऐसे विश्लेषण करना नहीं सीखा था। उसकी घबराहट को देखकर कक्षा के विद्यार्थी उस पर हँसने लगे।

      तुरंत ही शिक्षक उसका बचाव करने के लिए आगे आ गया, और बोला “वह तुम में से किसी से भी, कभी भी, कहीं अच्छा लिख सकती है!” इस घटना के कई वर्ष के बाद कैथलीन ने कृतज्ञता के साथ उस पल को स्मरण करते हुए कहा: “उस दिन मैंने वैसे अच्छा लिखना आरंभ कर दिया जैसा उन्होंने मेरे लिए कहा था।” आगे चलकर कैथलीन पार्कर ने उत्कृष्ठ लेखकों को दिया जाने वाला पुलिट्ज़र पुरुस्कार भी जीता।

      जैसे कैथलीन के शिक्षक ने किया था, प्रभु यीशु ने भी असहायों और असुरक्षित लोगों का साथ दिया। जब शिष्यों ने बच्चों को प्रभु के पास आने से रोकने का प्रयास किया, तो प्रभु ने उन्हें डांटा और, “यीशु ने यह देख क्रुध हो कर उन से कहा, बालकों को मेरे पास आने दो और उन्हें मना न करो, क्योंकि परमेश्वर का राज्य ऐसों ही का है” (मरकुस 10:14)। उन्होंने एक दूसरे की सहायता करने और एक दूसरी की देखभाल करने को समझाने के लिए अपने द्वारा दिए गए दृष्टांत में एक सामरी व्यक्ति को उस दृष्टांत का नायक बनाया (लूका 10:25-37), जबकि यहूदी लोग सामरियों को तुच्छ जानते थे और उनसे संपर्क तथा व्यवहार नहीं रखते थे। प्रभु ने एक बदनाम सामरी स्त्री को अनन्त जीवन की आशा प्रदान की, और उस तुच्छ समझी जाने वाली महिला के द्वारा सारे गाँव को अपने उद्धारकर्ता होने की जानकारी दी (यूहन्ना 4:1-26)। उन्होंने व्यभिचार में फंसाई गई एक महिला की रक्षा की और उसके पापों को क्षमा किया। और यद्यपि हम अपने पापों के दण्ड से बच निकलने में बिलकुल असमर्थ तथा असहाय थे, प्रभु यीशु ने हम सभी मनुष्यों के लिए अपने आप को बलिदान कर दिया जिससे हम उनमें लाए गए विश्वास के द्वारा पापों की क्षमा और उद्धार पा सकें (रोमियों 5:6)।

      जब हम असहाय और समाज द्वारा ठुकराए गए लोगों को सच्चे प्रेम का अनुभव देते हैं, तो एक छोटे किन्तु महत्वपूर्ण तरीके से हम उनके सामने प्रभु यीशु के हृदय को प्रकट करते हैं। जब हम उनका साथ देते हैं, उनका बचाव, उनकी सहायता करते हैं, तो हम उन्हें अवसर देते हैं कि वे अपने महत्व और उपयोगिता को समझ सकें, समाज में आदर का स्थान पा सकें। - टिम गुस्ताफसन


औरों से प्रेम करे बिना मसीह यीशु से प्रेम करना असंभव है।

परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा। - रोमियों 5:8

बाइबल पाठ: मरकुस 10:13-16
Mark 10:13 फिर लोग बालकों को उसके पास लाने लगे, कि वह उन पर हाथ रखे, पर चेलों ने उन को डांटा।
Mark 10:14 यीशु ने यह देख क्रुध हो कर उन से कहा, बालकों को मेरे पास आने दो और उन्हें मना न करो, क्योंकि परमेश्वर का राज्य ऐसों ही का है।
Mark 10:15 मैं तुम से सच कहता हूं, कि जो कोई परमेश्वर के राज्य को बालक के समान ग्रहण न करे, वह उस में कभी प्रवेश करने न पाएगा।
Mark 10:16 और उसने उन्हें गोद में लिया, और उन पर हाथ रखकर उन्हें आशीष दी।


एक साल में बाइबल: 
  • भजन 72-73
  • रोमियों 9:1-15