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Monday, August 13, 2018

भरोसा



      यद्यपि मैं प्रतिदिन अपने काम को करने के लिए टेक्नालॉजी पर निर्भर करता हूँ, मैं यह नहीं समझ पाता हूँ कि वह कैसे कार्य करती है। मैं अपने कम्प्यूटर को चालू करता हूँ, लिखने के लिए वर्ड डॉक्यूमेंट खोलता हूँ, और लिखने के अपने काम को करने लगता हूँ। लिखने के मेरे कार्य में मेरा माईक्रोचिप्स, हार्ड ड्राईव, वाई-फाई कनेक्शन, रंगीन डिस्प्ले आदि की टेक्नालॉजी की कार्यविधि को नहीं समझ पाना बाधा नहीं बनता है।

      एक प्रकार से यही बात हमारे और परमेश्वर के संबंधों को समझने पर भी लागू होती है। परमेश्वर के वचन बाइबल में यशायाह 55:8-9 हमें स्मरण दिलाता है कि परमेश्वर हम से बहुत बढ़कर और अति महान है: “क्योंकि यहोवा कहता है, मेरे विचार और तुम्हारे विचार एक समान नहीं है, न तुम्हारी गति और मेरी गति एक सी है। क्योंकि मेरी और तुम्हारी गति में और मेरे और तुम्हारे सोच विचारों में, आकाश और पृथ्वी का अन्तर है।”

      चाहे हम परमेश्वर के बारे में सब कुछ समझ नहीं पाएँ, लेकिन इसे उस पर हमें भरोसा करने में बाधा नहीं बनना चाहिए। उसने हमारे प्रति अपने प्रेम को बारम्बार प्रमाणित किया है। प्रेरित पौलुस ने लिखा, “परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा” (रोमियों 5:8)। परमेश्वर के इस प्रेम पर भरोसा बनाए रखते हुए हम उसके साथ चलते रह सकते हैं, चाहे जीवन की बातें हमारी समझा में आएँ अथवा नहीं। - बिल क्राउडर


यदि परमेश्वर हमारी बुद्धि के द्वारा समझा जा सकता, 
तो हमारी उपासना के योग्य नहीं होता।

परखकर देखो कि यहोवा कैसा भला है! क्या ही धन्य है वह पुरूष जो उसकी शरण लेता है। हे यहोवा के पवित्र लोगो, उसका भय मानो, क्योंकि उसके डरवैयों को किसी बात की घटी नहीं होती! – भजन 34:8-9

बाइबल पाठ: यशायाह 55:6-13
Isaiah 55:6 जब तक यहोवा मिल सकता है तब तक उसकी खोज में रहो, जब तक वह निकट है तब तक उसे पुकारो;
Isaiah 55:7 दुष्ट अपनी चालचलन और अनर्थकारी अपने सोच विचार छोड़कर यहोवा ही की ओर फिरे, वह उस पर दया करेगा, वह हमारे परमेश्वर की ओर फिरे और वह पूरी रीति से उसको क्षमा करेगा।
Isaiah 55:8 क्योंकि यहोवा कहता है, मेरे विचार और तुम्हारे विचार एक समान नहीं हैं, न तुम्हारी गति और मेरी गति एक सी है।
Isaiah 55:9 क्योंकि मेरी और तुम्हारी गति में और मेरे और तुम्हारे सोच विचारों में, आकाश और पृथ्वी का अन्तर है।
Isaiah 55:10 जिस प्रकार से वर्षा और हिम आकाश से गिरते हैं और वहां यों ही लौट नहीं जाते, वरन भूमि पर पड़कर उपज उपजाते हैं जिस से बोने वाले को बीज और खाने वाले को रोटी मिलती है,
Isaiah 55:11 उसी प्रकार से मेरा वचन भी होगा जो मेरे मुख से निकलता है; वह व्यर्थ ठहरकर मेरे पास न लौटेगा, परन्तु, जो मेरी इच्छा है उसे वह पूरा करेगा, और जिस काम के लिये मैं ने उसको भेजा है उसे वह सफल करेगा।
Isaiah 55:12 क्योंकि तुम आनन्द के साथ निकलोगे, और शान्ति के साथ पहुंचाए जाओगे; तुम्हारे आगे आगे पहाड़ और पहाडिय़ां गला खोल कर जयजयकार करेंगी, और मैदान के सब वृक्ष आनन्द के मारे ताली बजाएंगे।
Isaiah 55:13 तब भटकटैयों के स्थान पर सनौवर उगेंगे; और बिच्छु पेड़ों के स्थान पर मेंहदी उगेगी; और इस से यहोवा का नाम होगा, जो सदा का चिन्ह होगा और कभी न मिटेगा।


एक साल में बाइबल: 
  • भजन 87-88
  • रोमियों 13