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Tuesday, November 6, 2018

सुरक्षित स्थान



      एक युवा जापानी व्यक्ति को समस्या थी – उसे अपना घर छोड़ने में घबराहट होती थी। अन्य लोगों के संपर्क में आने से बचने के लिए वह दिन में सोता रहता था, और रात भर जागकर टेलिविज़न देखता रहता था। वह एक हिकिकोमोरी अर्थात आधुनिक सन्यासी बन गया था। उसकी समस्या का आरंभ स्कूल के समय में कक्षा में उसके कम अंक आने से हुई; लगातार कम अंक लाते रहने के कारण उसने स्कूल जाना छोड़ दिया, और सबसे अलग होकर रहने लगा। जितना अधिक वह समाज से दूर रहता गया, अपने आप को उतना ही अधिक समाज में अनुपयुक्त समझता चला गया। अन्ततः उसने परिवार और मित्र जनों से अभी संपर्क तोड़ लिए। उसे फिर से समाज से जुड़ने में सहायता करने के लिए टोक्यो शहर के एक युवकों के क्लब में, जिसे इबाशो कहते हैं, जाना पड़ा, जो कि एक ऐसा सुरक्षित स्थान है जहाँ अन्दर से टूटे हुए लोगों को फिर से समाज के साथ जोड़ने और स्थापित करने के लिए उनकी सहायता की जाती है।

      कैसा रहे यदि हम भी चर्च को एक इबाशो, या उससे भी बढ़कर समझें; एक ऐसा सुरक्षित स्थान जहाँ पाप और सँसार से आहात एवं टूटे हुए लोगों को पुनःस्थापित करने के लिए सहायता उपलब्ध रहती है। क्योंकि, निःसंदेह हम अन्दर से टूटे हुए लोगों का समाज हैं। जब परमेश्वर के वचन बाइबल में हम कोरिन्थ के मसीही विश्वासियों को लिखी पौलुस की पहली पत्री को पढ़ते हैं, तो उसमें पाते हैं कि वह मसीही विश्वास में आने से पहले के उनके जीवन और व्यवहार के बारे में उन्हें स्मरण करवाता है, कि कैसे वे समाज-विरोधी, स्वयँ तथा औरों के लिए हानिकारक तथा खतरनाक जीवन जी रहे थे (1 कुरिन्थियों 6:9-10)। परन्तु प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास लाने के द्वारा उनके जीवन में बड़ा परिवर्तन आया, और उनके जीवन बिलकुल बदल गए। पौलुस ने इन परिवर्तित लोगों को प्रोत्साहित किया कि वे एक दूसरे से प्रेम रखें, एक दूसरे के प्रति धीराजवंत और सहनशील रहें, ईर्षालु, अहंकारी और अशिष्ट न हों (1 कुरिन्थियों 13:4-7)।

      चर्च को भी सँसार के सभी लोगों के लिए एक ऐसा ही इबाशो अर्थात सुरक्षित स्थान होना है, जहाँ आने से कोई भी व्यक्ति, वह चाहे कैसी भी समस्या से जूझ रहा हो, किसी भी बात से टूट गया हो, परमेश्वर के प्रेम और करुणा का अनुभव कर सकता है। जहाँ प्रभु यीशु मसीह के अनुयायियों से सँसार के दुखी लोग्शान्ति और सांत्वना पा सकें। - पो फैंग चिया


केवल परमेश्वर ही पाप से बिगड़ी हुई आत्मा को 
अनुग्रह से सुधरी हुई उत्कृष्ठ कलाकृति बना सकता है।

सो जब हम विश्वास से धर्मी ठहरे, तो अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर के साथ मेल रखें। - रोमियों 5:1

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 6:9-11; 13:4-7
1 Corinthians 6:9 क्या तुम नहीं जानते, कि अन्यायी लोग परमेश्वर के राज्य के वारिस न होंगे? धोखा न खाओ, न वेश्यागामी, न मूर्तिपूजक, न परस्त्रीगामी, न लुच्‍चे, न पुरूषगामी।
1 Corinthians 6:10 न चोर, न लोभी, न पियक्कड़, न गाली देने वाले, न अन्‍धेर करने वाले परमेश्वर के राज्य के वारिस होंगे।
1 Corinthians 6:11 और तुम में से कितने ऐसे ही थे, परन्तु तुम प्रभु यीशु मसीह के नाम से और हमारे परमेश्वर के आत्मा से धोए गए, और पवित्र हुए और धर्मी ठहरे।
1 Corinthians 13:4 प्रेम धीरजवन्‍त है, और कृपाल है; प्रेम डाह नहीं करता; प्रेम अपनी बड़ाई नहीं करता, और फूलता नहीं।
1 Corinthians 13:5 वह अनरीति नहीं चलता, वह अपनी भलाई नहीं चाहता, झुंझलाता नहीं, बुरा नहीं मानता।
1 Corinthians 13:6 कुकर्म से आनन्‍दित नहीं होता, परन्तु सत्य से आनन्‍दित होता है।
1 Corinthians 13:7 वह सब बातें सह लेता है, सब बातों की प्रतीति करता है, सब बातों की आशा रखता है, सब बातों में धीरज धरता है।


एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 37-39
  • इब्रानियों 3