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Wednesday, July 3, 2019

समर्पण



      लेख लिख कर भेजने का अंतिम समय मेरे सामने था, परन्तु मेरे मन में उस प्रातः मेरे पति के साथ हुआ वाद-विवाद गूंज रहा था। मेरी उँगलियाँ कम्प्यूटर के की-बोर्ड पर थीं, और मेरी आँखें सामने के कर्सर पर, परन्तु मैं कुछ भी लिख पाने की मानसिक स्थिति में नहीं थी। मैंने मन ही मन प्रभु से कहा, “परन्तु गलती तो उनकी भी थी न।”

      थोड़ी देर में बिना किसी गतिविधि के कारण कम्प्यूटर का स्क्रीन बन्द हो गया और उस काले स्क्रीन में से मेरा प्रतिबिंब त्यौरियां चढ़ाए हुए दिख रहा था। मेरे द्वारा की गई गलतियाँ, जिनका मैंने अंगीकार नहीं किया था, वे मेरे काम ही में बाधा नहीं बन रही थीं। उनके कारण मेरे पति और मेरे परमेश्वर दोनों के साथ मेरे संबंधों में तनाव आ रहा था।

      मैंने अपना सेल-फोन उठाया, अपने अहम को दबाया, और क्षमायाचना की। मेरे पति ने भी मुझ से क्षमा माँगी और पुनःस्थापित हुए संबंधों की शान्ति का आनन्द लेते हुए, मैंने परमेश्वर का भी धन्यवाद किया, और अपने लेख को लिख कर समय से समर्पित कर सकी।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि इस्राएलियों ने भी अपने पापों के कष्ट तथा पुनर्स्थापन के सुख का अनुभव लिया। यहोशू ने परमेश्वर के लोगों को सचेत किया था कि यरीहो के युद्ध में अपने लिए कुछ लूट न लें (यहोशू 6:18), परन्तु आकान ने अनाज्ञाकारिता की, लूट में से कुछ भाग लेकर अपने तम्बू में ले जाकर छिपा दिया (7:1)। परिणामस्वरूप, इस्राएल तब तक परमेश्वर के साथ शान्ति का आनन्द नहीं ले सका जब तक कि आकान का पाप प्रगट करके उसका समाधान नहीं कर दिया गया (आयतें 4-12)।

      आकान के समान ही, हम भी अनेकों बार इस बात की अनदेखी कर देते हैं कि पाप करके अपने जीवन में छुपा लेने से हमारे मन परमेश्वर से दूर हो जाते हैं और हमारे पाप का दुष्प्रभाव हमारे आस-पास के लोगों पर भी जाता है। यीशु मसीह को अपना प्रभु मान लेने, उसके सामने अपन पापों का अंगीकार करने, और उससे क्षमायाचना करने से परमेश्वर तथा औरों के साथ एक स्वस्थ संबंध बनाने की नींव पड़ती है। प्रतिदिन हमारे प्रेमी सृजनहार और पालनहार प्रभु परमेश्वर के प्रति समर्पण करने के द्वारा, हम उसकी सेवा भी कर सकते हैं और उसकी संगति का आनन्द ले सकते हैं। - जोशील डिक्सन


परमेश्वर हमारे हृदय से उस पाप को हटा सकता है 
जिसके कारण उसके तथा औरों के साथ हमारे संबंधों पर आंच आती है।

सुनो, यहोवा का हाथ ऐसा छोटा नहीं हो गया कि उद्धार न कर सके, न वह ऐसा बहिरा हो गया है कि सुन न सके; परन्तु तुम्हारे अधर्म के कामों ने तुम को तुम्हारे परमेश्वर से अलग कर दिया है, और तुम्हारे पापों के कारण उस का मुँह तुम से ऐसा छिपा है कि वह नहीं सुनता। - यशायाह 59:1-2

बाइबल पाठ: यहोशू 7:1-12
Joshua 7:1 परन्तु इस्राएलियों ने अर्पण की वस्तु के विषय में विश्वासघात किया; अर्थात यहूदा के गोत्र का आकान, जो जेरहवंशी जब्दी का पोता और कर्म्मी का पुत्र था, उसने अर्पण की वस्तुओं में से कुछ ले लिया; इस कारण यहोवा का कोप इस्राएलियों पर भड़क उठा।
Joshua 7:2 और यहोशू ने यरीहो से ऐ नाम नगर के पास, जो बेतावेन से लगा हुआ बेतेल की पूर्व की ओर है, कितने पुरूषों को यह कहकर भेजा, कि जा कर देश का भेद ले आओ। और उन पुरूषों ने जा कर ऐ का भेद लिया।
Joshua 7:3 और उन्होंने यहोशू के पास लौटकर कहा, सब लोग वहां न जाएं, कोई दो या तीन हजार पुरूष जा कर ऐ को जीत सकते हैं; सब लोगों को वहां जाने का कष्ट न दे, क्योंकि वे लोग थोड़े ही हैं।
Joshua 7:4 इसलिये कोई तीन हजार पुरूष वहां गए; परन्तु ऐ के रहने वालों के साम्हने से भाग आए,
Joshua 7:5 तब ऐ के रहने वालों ने उन में से कोई छत्तीस पुरूष मार डाले, और अपने फाटक से शबारीम तक उनका पीछा कर के उतराई में उन को मारते गए। तब लोगों का मन पिघलकर जल सा बन गया।
Joshua 7:6 तब यहोशू ने अपने वस्त्र फाड़े, और वह और इस्राएली वृद्ध लोग यहोवा के सन्दूक के साम्हने मुंह के बल गिरकर पृथ्वी पर सांझ तक पड़े रहे; और उन्होंने अपने अपने सिर पर धूल डाली।
Joshua 7:7 और यहोशू ने कहा, हाय, प्रभु यहोवा, तू अपनी इस प्रजा को यरदन पार क्यों ले आया? क्या हमें एमोरियों के वश में कर के नष्ट करने के लिये ले आया है? भला होता कि हम संतोष कर के यरदन के उस पार रह जाते।
Joshua 7:8 हाय, प्रभु मैं क्या कहूं, जब इस्राएलियों ने अपने शत्रुओं को पीठ दिखाई है!
Joshua 7:9 क्योंकि कनानी वरन इस देश के सब निवासी यह सुनकर हम को घेर लेंगे, और हमारा नाम पृथ्वी पर से मिटा डालेंगे; फिर तू अपने बड़े नाम के लिये क्या करेगा?
Joshua 7:10 यहोवा ने यहोशू से कहा, उठ, खड़ा हो जा, तू क्यों इस भांति मुंह के बल पृथ्वी पर पड़ा है?
Joshua 7:11 इस्राएलियों ने पाप किया है; और जो वाचा मैं ने उन से अपने साथ बन्धाई थी उसको उन्होंने तोड़ दिया है, उन्होंने अर्पण की वस्तुओं में से ले लिया, वरन चोरी भी की, और छल कर के उसको अपने सामान में रख लिया है।
Joshua 7:12 इस कारण इस्राएली अपने शत्रुओं के साम्हने खड़े नहीं रह सकते; वे अपने शत्रुओं को पीठ दिखाते हैं, इसलिये कि वे आप अर्पण की वस्तु बन गए हैं। और यदि तुम अपने मध्य में से अर्पण की वस्तु को सत्यानाश न कर डालोगे, तो मैं आगे को तुम्हारे संग नहीं रहूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 25-27
  • प्रेरितों 12