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Monday, March 19, 2012

वास्तविक सौन्दर्य

   मैं जब भी किराने की दुकान से सामान खरीदने जाता हूँ तो पैसे चुकाने के स्थान के साथ रखी हुई पत्रिकाओं के मंच पर लगाई गई पत्रिकाओं के मुख-चित्रों तथा शीर्षकों पर नज़र डालता हूँ। मैंने देखा है कि वे पत्रिकाएं या तो भोजन, शरीर को स्वस्थ और दुरुस्त रखने, शरीर और चेहरे को सुन्दर बनाने, शारीरिक व्यायाम के बारे में होती हैं या आर्थिक विष्यों पर अन्यथा विलास और वासना से संबंधित होती हैं। आत्मिक बातों के लिए कुछ नहीं मिलता।

   यह एक बड़ी समस्या है; लोगों का ध्यान अपने शरीर और उसकी लालसाओं पर इतना अधिक केंद्रित हो गया है कि वे उस से संबंधित सब कुछ पढ़ने मानने को तैयार रहते हैं, चाहे झूठ या मनगढ़ंत, कुछ भी हो। इसी कारण ऐसी पत्रिकाओं की बिकरी है और इन्हें छापने वाले लोगों के पास, दूसरों के अन्ध विश्वास के कारण, धन का कमाने का साधन है। अपने शरीर पर केंद्रित रहने के कारण लोग अपनी तुलना दूसरों से करते हैं, उनके समान दिखने के प्रयास करते हैं और फिर अपने ही जीवन में व्यर्थ बेचैनीयों और निराशाओं का सामना करते हैं।

   कुछ वर्ष पहले मेरे एक मित्र ने एक किशोर युवती के साथ हुई उसकी वार्तालाप के बारे में बताया। मेरे मित्र ने उस किशोरी से कहा, "आप बड़ी आत्मविश्वास से भरी लगती हैं; इसका क्या कारण है?" किशोरी ने उत्तर दिया; "हाँ मैं आत्मविश्वास से भरी हूँ क्योंकि मैं सुडौल और सुन्दर हूँ।" मेरे मित्र ने विलक्षण बुद्धिमता के साथ उसे उत्तर दिया, "क्षमा कीजिए, मुझे यह सुनकर दुख हुआ।" इस बात को सुनकर उस किशोरी ने विसमय से मेरे मित्र से पूछा, "ऐसा क्यों?" मेरे मित्र ने उत्तर दिया, "क्योंकि ऐसा नहीं है कि सदा ही आप ऐसी सुडौल और सुन्दर बनी रहेंगी। कभी भी कुछ भी हो सकता है; जब सुडौल और सुन्दर नहीं रहेंगी तब आपका क्या होगा?"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन की पुस्तक में बताया गया है कि आकर्षक होना मिथिया है और सुन्दरता क्षणिक है (नीतिवचन ३१:३०)। शारीरिक सुन्दरता के जाते रहने में कोई विशेष समय नहीं लगता; कोई उसे बनाए रखने के कितने भी प्रयास क्यों न कर ले, शारीरिक सुन्दरता कभी न कभी समाप्त होती ही है। लेकिन एक और सुन्दरता है जो समय के साथ निखरती जाती है - आत्मा की सुन्दरता; जो ना कभी धूमिल होती है और ना ही कभी समाप्त होती है।

   यही वह वास्तविक सौन्दर्य है जो सदा बना रहता है; क्योंकि यह विश्वास और पश्चाताप द्वारा तथा परमेश्वर के भय में बने रहने वालों को प्रभु यीशु से प्राप्त होता है और अनादि अनन्त परमेश्वर के समान, उन लोगों में अनन्त काल के लिए बना रहता है।

   क्षणिक और मिट जाने वाली शरीरिक सुन्दरता की चिंता छोड़ कर अनन्तकाल तक बनी रहने वाली आत्मिक सुन्दरता को प्रभु यीशु से प्राप्त कर लीजिए। - डेविड रोपर


मन की धार्मिकता चरित्र में सुन्दरता उत्पन्न करती है।

शोभा तो झूठी और सुन्दरता व्यर्थ है, परन्तु जो स्त्री यहोवा का भय मानती है, उसकी प्रशंसा की जाएगी।

बाइबल पाठ: नीतिवचन ३१:२१-३१
Pro 31:21  वह अपने घराने के लिये हिम से नहीं डरती, क्योंकि उसके घर के सब लोग लाल कपड़े पहिनते हैं।
Pro 31:22  वह तकिये बना लेती है, उसके वस्त्र सूक्ष्म सन और बैंजनी रंग के होते हैं।
Pro 31:23  जब उसका पति सभा में देश के पुरनियों के संग बैठता है, तब उसका सम्मान होता है।
Pro 31:24  वह सन के वस्त्र बनाकर बेचती है, और व्योपारी को कमरबन्द देती है।
Pro 31:25  वह बल और प्रताप का पहिरावा पहिने रहती है, और आने वाले काल के विषय पर हंसती है।
Pro 31:26  वह बुद्धि की बात बोलती है, और उसके वचन कृपा की शिक्षा के अनुसार होते हैं।
Pro 31:27  वह अपने घराने के चालचलन को ध्यान से देखती है, और अपनी रोटी बिना परिश्रम नहीं खाती।
Pro 31:28  उसके पुत्र उठ उठकर उसको धन्य कहते हैं, उनका पति भी उठकर उसकी ऐसी प्रशंसा करता है:
Pro 31:29  बहुत सी स्त्रियों ने अच्छे अच्छे काम तो किए हैं परन्तु तू उन सभों में श्रेष्ट है।
Pro 31:30  शोभा तो झूठी और सुन्दरता व्यर्थ है, परन्तु जो स्त्री यहोवा का भय मानती है, उसकी प्रशंसा की जाएगी।
Pro 31:31  उसके हाथों के परिश्रम का फल उसे दो, और उसके कार्यों से सभा में उसकी प्रशंसा होगी।


एक साल में बाइबल: 

  • यहोशू १-३ 
  • मरकुस १६