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Saturday, May 31, 2014

गलत सोच


   एक प्रचलित हास्य लघु कथा है: एक छोटे हवाई जहाज़ में चार लोग यात्रा कर रहे थे - जहाज़ का पायलेट, एक विद्वान, एक पादरी और एक सामान्य व्यक्ति। हवाई जहाज़ में कुछ खराबी आ गई और उसके इंजन चलने बन्द हो गए। पायलेट ने कहा, "अब कुछ नहीं हो सकता, अपनी जान बचाने के लिए पैराशूट के सहारे कूद जाईए, लेकिन पैराशूट केवल तीन हैं, एक को तो मरना ही होगा" और यह कहकर वह एक पैराशूट के साथ कूद गया; तुरंत ही विद्वान बोला, "संसार को मेरे ज्ञान और काबलियत की बहुत आवश्यकता है, इसलिए मेरा ज़िंदा रहना तो बहुत ही आवश्यक है", और वह भी दूसरा पैराशूट लेकर कूद गया; पादरी ने संगी यात्री से कहा, "मैं स्वार्थी नहीं हूँ, तुम वह अन्तिम पैराशूट लेकर अपनी जान बचा लो", यात्री ने मुस्कुराते हुए कहा, "नहीं, हम दोनों ही बच सकते हैं क्योंकि पैराशूट तो दो हैं; वह विद्वान पैराशूट की बजाए मेरा थैला लेकर कूद गया था!"

   उस विद्वान ने सोचा कि वह बुद्धिमता कर रहा है और सुरक्षित बच जाएगा, लेकिन उसका सोचना गलत था; जब तक सच उसके सामने आया तब तक बहुत देर हो चुकी थी, कुछ बदल नहीं सकता था; जिसे उसने जीवन का मार्ग समझा था वह वास्तव में उसके विनाश का मार्ग निकला। इसी प्रकार बहुत से लोगों को यह लगता है कि वे अपने ज्ञान, युक्ति, विधियों, धर्म के तथा भले कार्यों आदि के करने से उद्धार पा सकते हैं, इसलिए वे परमेश्वर द्वारा प्रभु यीशु में सारे जगत को सेंत-मेंत उपलब्ध कराए गए पाप क्षमा और उद्धार का तिरिस्कार कर, अपने ही तरीकों से उद्धार पाने के असफल यत्न करते रहते हैं। अनेक इसाई धर्म के मानने वाले भी यह मानते हैं कि चर्च जाने, बप्तिस्मा लेने, रीति-रिवाज़ों और अनुष्ठानों को पूरा करते रहने, भले कार्य करने, आदि के कारण वे परमेश्वर के राज्य में प्रवेश पा लेंगे, लेकिन यह सब गलत सोच है जो परमेश्वर के वचन बाइबल की शिक्षाओं के अनुसार नहीं है और किसी को भी परमेश्वर के राज्य में प्रवेश नहीं दिला सकती।

   बाइबल बताती है कि सब मनुष्यों ने पाप किया है और इस कारण सब परमेश्वर से दूर और परमेश्वर से बैर की दशा में हैं। लेकिन साथ ही बाइबल यह भी बताती है कि प्रभु यीशु ने समस्त मानव जाति के समस्त पापों के लिए अपने आप को बलिदान किया और अब जो कोई प्रभु यीशु के इस बलिदान पर विश्वास करके उससे अपने पापों की क्षमा माँग लेता है, अपना जीवन उसे समर्पित कर देता है, उसके पाप क्षमा हो जाते हैं तथा उसका मेल-मिलाप परमेश्वर से हो जाता है और वह परमेश्वर की सन्तान हो जाता है (रोमियों 3:23; 5:8-10; यूहन्ना1:12-13)। जो प्रभु यीशु ने हमारे लिए किया, उस अपना लेने के द्वारा ही हम पापों के दोष से मुक्त, परमेश्वर की नज़रों में धर्मी तथा उसके स्वर्ग के राज्य में प्रवेश के योग्य ठहरते हैं; प्रभु यीशु ही स्वर्ग में हमारे अनन्त जीवन का आश्वासन है।

   आज आपकी सोच क्या है? क्या आपने प्रभु यीशु में पापों की क्षमा और उद्धार पर विश्वास किया है? यदि नहीं, तो गलत सोच में पड़े ना रहें; अपने अनन्त को सही करने के लिए आज और अभी ही प्रभु यीशु पर विश्वास लाएं, उसे अपना निज उद्धारकर्ता स्वीकार करें, उस से पापों की क्षमा माँगकर अपना जीवन उसे समर्पित करें। - ऐनी सेटास


यदि मनुष्य अपने प्रयत्नों और साधनों से मोक्ष या उद्धार पा सकता तो प्रभु यीशु को यह प्रदान करने के लिए अपना बलिदान कभी देना नहीं पड़ता।

ऐसा भी मार्ग है, जो मनुष्य को सीधा देख पड़ता है, परन्तु उसके अन्त में मृत्यु ही मिलती है। - नीतिवचन 16:25

बाइबल पाठ: रोमियों 5:6-12, 17-19
Romans 5:6 क्योंकि जब हम निर्बल ही थे, तो मसीह ठीक समय पर भक्तिहीनों के लिये मरा। 
Romans 5:7 किसी धर्मी जन के लिये कोई मरे, यह तो र्दुलभ है, परन्तु क्या जाने किसी भले मनुष्य के लिये कोई मरने का भी हियाव करे। 
Romans 5:8 परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा। 
Romans 5:9 सो जब कि हम, अब उसके लोहू के कारण धर्मी ठहरे, तो उसके द्वारा क्रोध से क्यों न बचेंगे? 
Romans 5:10 क्योंकि बैरी होने की दशा में तो उसके पुत्र की मृत्यु के द्वारा हमारा मेल परमेश्वर के साथ हì