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Wednesday, November 18, 2015

पुनःस्वागत


   जिम ने दस वर्ष की आयु में प्रभु यीशु के पीछे चलने का निर्णय किया था। इसके पन्द्रह वर्ष बाद उसका यह समर्पण फीका पड़ चुका था। उसने परिस्थिति और आवश्यकतानुसार जीवन जीने का दृष्टिकोण अपना लिया था और उसके जीवन में अनेक बुरी आदतें और बातें आ गई थीं। फिर उसका जीवन बिखर सा गया; उसके कार्य में समस्याएं आईं, उसके परिवार के तीन सदस्य एक के बाद एक करके जाते रहे, जिम को डर और संदेह सताने लगे, और कोई भी, कुछ भी उसकी सहायता नहीं कर पा रहा था। एक दिन जिम ने परमेश्वर के वचन बाइबल से भजन 121:2 पढ़ा: "मुझे सहायता यहोवा की ओर से मिलती है, जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है"; बाइबल के इन शब्दों ने उसके मन से सारी निराशा, संदेह और डर को निकाल डाला। वह सहायता के लिए परमेश्वर की ओर मुड़ा, और परमेश्वर ने सहर्ष उसे अपने पास स्वीकार कर लिया (लूका 15:22, 24)।

   जिम के आत्मिक जीवन की यह यात्रा मुझे प्राचीन इस्त्राएल के इतिहास की याद दिलाती है। परमेश्वर के साथ इस्त्रएलियों का एक अनूठा रिश्ता था - वे उसके चुने हुए लोग थे (नहेम्याह 9:1-15)। लेकिन फिर भी उन इस्त्राएलियों ने अनेक वर्ष परमेश्वर की भलाईयों को नज़रंदाज़ करने, अपनी इच्छानुसार चलने और परमेश्वर के निर्देशों तथा शिक्षाओं के विरुद्ध बलवा करने में बिताए थे (नहेम्याह 9:16-21)। लेकिन जब वे इस्त्राएली अपने पापों से पश्चाताप करके परमेश्वर की ओर मुड़े तो परमेश्वर ने उन्हें स्वीकार कर लिया क्योंकि वह "...क्षमा करने वाला अनुग्रहकारी और दयालु, विलम्ब से कोप करने वाला, और अतिकरुणामय ईश्वर है" (नहेम्याह 9:17)।

   परमेश्वर के ये गुण हमें उत्साहित करते हैं कि हम परमेश्वर की निकटता में आएं - चाहे हम उससे कितने भी समय पहले, कितनी ही दूर ही क्यों ना चले गए हों। हम जब भी नम्र मन के साथ उसे समर्पित रहने, अपने विरोधी स्वभाव को त्यागकर पुनः परमेश्वर की इच्छानुसार चलने का निर्णय लेते हैं, वह अपने अनुग्रह और दया में होकर हमारा पुनःस्वागत करता है, हमें फिर से अपने साथ ले लेता है। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


परमेश्वर की बाहें हमारा स्वागत करने के लिए सदा खुली रहती हैं।

परन्तु पिता ने अपने दासों से कहा; फट अच्‍छे से अच्छा वस्‍त्र निकाल कर उसे पहिनाओ, और उसके हाथ में अंगूठी, और पांवों में जूतियां पहिनाओ। क्योंकि मेरा यह पुत्र मर गया था, फिर जी गया है: खो गया था, अब मिल गया है: और वे आनन्द करने लगे। - लूका 15:22, 24

बाइबल पाठ: नहेम्याह 9:7-21
Nehemiah 9:7 हे यहोवा! तू वही परमेश्वर है, जो अब्राहाम को चुनकर कसदियों के ऊर नगर में से निकाल लाया, और उसका नाम इब्राहीम रखा; 
Nehemiah 9:8 और उसके मन को अपने साथ सच्चा पाकर, उस से वाचा बान्धी, कि मैं तेरे वंश को कनानियों, हित्तियों, एमोरियों, परिज्जियों, यबूसियों, और गिर्गाशियों का देश दूंगा; और तू ने अपना वह वचन पूरा भी किया, क्योंकि तू धमीं है। 
Nehemiah 9:9 फिर तू ने मिस्र में हमारे पुरखाओं के दु:ख पर दृष्टि की; और लाल समुद्र के तट पर उनकी दोहाई सुनी। 
Nehemiah 9:10 और फ़िरौन और उसके सब कर्मचारी वरन उसके देश के सब लोगों को दण्ड देने के लिये चिन्ह और चमत्कार दिखाए; क्योंकि तू जानता था कि वे उन से अभिमान करते हैं; और तू ने अपना ऐसा बड़ा नाम किया, जैसा आज तक वर्तमान है। 
Nehemiah 9:11 और तू ने उनके आगे समुद्र को ऐसा दो भाग किया, कि वे समुद्र के बीच स्थल ही स्थल चलकर पार हो गए; और जो उनके पीछे पड़े थे, उन को तू ने गहिरे स्थानों में ऐसा डाल दिया, जैसा पत्थर महाजलराशि में डाला जाए। 
Nehemiah 9:12 फिर तू ने दिन को बादल के खम्भे में हो कर और रात को आग के खम्भे में हो कर उनकी अगुआई की, कि जिस मार्ग पर उन्हें चलना था, उस में उन को उजियाला मिले। 
Nehemiah 9:13 फिर तू ने सीनै पर्वत पर उतर कर आकाश में से उनके साथ बातें की, और उन को सीधे नियम, सच्ची व्यवस्था, और अच्छी विधियां, और आज्ञाएं दीं। 
Nehemiah 9:14 और उन्हें अपने पवित्र विश्राम दिन का ज्ञान दिया, और अपने दास मूसा के द्वारा आज्ञाएं और विधिया