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Saturday, September 2, 2017

नींव


   दो जन एक ही स्थान पर भवन निर्माण का कार्य कर रहे थे। जब उनसे पूछा गया कि वे क्या बना रहे हैं, तो एक ने कहा कि वह गैराज बना रहा है, और दूसरे ने कहा कि वह बड़ा सा आराधनालय बना रहा है। इसके एक दिन पश्चात वहाँ केवल एक ही व्यक्ति ईंटें लगाने का काम कर रहा था। जब उससे दूसरे व्यक्ति के बारे में पूछा गया, तो उसने उत्तर दिया, "उसे काम से निकाल दिया गया, क्योंकि वह दृढ़ संकल्प था कि वह गैराज नहीं वरन आराधनालय ही बना रहा है।"

   कुछ ऐसा ही परमेश्वर के वचन बाइबल में वर्णित एक घटना में एक प्राचीन स्थान बाबुल में हुआ। लोगों के समूह ने कल्पना की कि वे मिलकर एक नगर और एक मीनार बनाएंगे जो आकाश तक ऊँची हो, और वे सब एक ही स्थान पर एकत्रित होकर रहेंगे, और वे ईंटें बनाकर मिट्टी के गारे से ऐसी गगनचुँबी मीनार बनाने का व्यर्थ यत्न करने लगे (उत्पत्ति 11:3-4)। परन्तु परमेश्वर की योजना थी कि मनुष्य सारी पृथ्वी पर फैले और उसे अपने वश में कर ले: "और परमेश्वर ने उन को आशीष दी: और उन से कहा, फूलो-फलो, और पृथ्वी में भर जाओ, और उसको अपने वश में कर लो; और समुद्र की मछलियों, तथा आकाश के पक्षियों, और पृथ्वी पर रेंगने वाले सब जन्तुओ पर अधिकार रखो" (उत्पत्ति 1:28)। परमेश्वर नहीं चाहता था कि मनुष्य किसी ऐसे व्यर्थ तथा असंभव कार्य में लग जाए जिसका प्रभाव मनुष्यों में अपनी ही क्षमता और योग्यता पर झूठा भरोसा स्थापित करना, और अपने कार्यों द्वारा अपने अन्दर अहंकार जागृत करना हो। इसलिए परमेश्वर नीचे उतर आया, उनके इस कार्य को रुकवा दिया और उन्हें सारी पृथ्वी पर फैला दिया (पद 8-9)।

   परमेश्वर चाहता था कि मनुष्य प्रत्येक बात के लिए उस पर भरोसा रखें, अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए उससे कहें, और व्यर्थ बातों में अपने आप को व्यय न करें। परमेश्वर ने संसार के सभी लोगों के लिए अपनी योजना अब्राहम को बताई (उत्पत्ति 12:1-3)। वह चाहता था कि अबाहम और उसके वंशजों के समान सभी मनुषय उस पर विश्वास करें और वे अब्राहम ही के समान एक स्थिर नींव वाले नगर की बाट जोहें, जैसे अब्राहम एक "स्थिर नेव वाले नगर की बाट जोहता था, जिस का रचने वाला और बनाने वाला परमेश्वर है" (इब्रानियों 11:8-10)।

   परमेश्वर में हमारा विश्वास हमारी कल्पनाओं और हमारी सीमित बुद्धि से निकले समाधानों नींव पर न हो; वरन हमारे विश्वास की नींव स्वयं परमेश्वर, उसके गुण, और जो वह हम में होकर और हमारे लिए कर सकता है वही हो। - मार्ट डीहॉन


परमेश्वर वही करना चाहता है 
जो वह हमारे लिए और हम में होकर कर सकता है।

क्योंकि उस नींव को छोड़ जो पड़ी है, और वह यीशु मसीह है कोई दूसरी नींव नहीं डाल सकता। - 1 कुरिन्थियों 3:11

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 11:1-9
Genesis 11:1 सारी पृथ्वी पर एक ही भाषा, और एक ही बोली थी। 
Genesis 11:2 उस समय लोग पूर्व की और चलते चलते शिनार देश में एक मैदान पाकर उस में बस गए। 
Genesis 11:3 तब वे आपस में कहने लगे, कि आओ; हम ईंटें बना बना के भली भाँति आग में पकाएं, और उन्होंने पत्थर के स्थान में ईंट से, और चूने के स्थान में मिट्टी के गारे से काम लिया। 
Genesis 11:4 फिर उन्होंने कहा, आओ, हम एक नगर और एक गुम्मट बना लें, जिसकी चोटी आकाश से बातें करे, इस प्रकार से हम अपना नाम करें ऐसा न हो कि हम को सारी पृथ्वी पर फैलना पड़े। 
Genesis 11:5 जब लोग नगर और गुम्मट बनाने लगे; तब इन्हें देखने के लिये यहोवा उतर आया। 
Genesis 11:6 और यहोवा ने कहा, मैं क्या देखता हूं, कि सब एक ही दल के हैं और भाषा भी उन सब की एक ही है, और उन्होंने ऐसा ही काम भी आरम्भ किया; और अब जितना वे करने का यत्न करेंगे, उस में से कुछ उनके लिये अनहोना न होगा। 
Genesis 11:7 इसलिये आओ, हम उतर के उनकी भाषा में बड़ी गड़बड़ी डालें, कि वे एक दूसरे की बोली को न समझ सकें। 
Genesis 11:8 इस प्रकार यहोवा ने उन को, वहां से सारी पृथ्वी के ऊपर फैला दिया; और उन्होंने उस नगर का बनाना छोड़ दिया। 
Genesis 11:9 इस कारण उस नगर को नाम बाबुल पड़ा; क्योंकि सारी पृथ्वी की भाषा में जो गड़बड़ी है, सो यहोवा ने वहीं डाली, और वहीं से यहोवा ने मनुष्यों को सारी पृथ्वी के ऊपर फैला दिया।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 137-139
  • 1 कुरिन्थियों 13