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बुधवार, 7 जून 2023

Miscellaneous Questions / कुछ प्रश्न - 29 - Lord Jesus Between 12 to 30 years / प्रभु यीशु 12 - 30 की आयु के दौरन


यीशु के 12 से 30 साल तक के जीवन के विषय में क्या बाईबल शान्त है?


    परमेश्वर के वचन बाइबल में हमारे लिए परमेश्वर, उसके राज्य, उसके साथ हमारे संबंध, उसके कार्य, गुण, कार्यविधि, नियम, आज्ञाओं इत्यादि के विषय बहुत कुछ दिया गया है, किन्तु परमेश्वर और उसके बारे में सब कुछ नहीं दिया गया है; क्योंकि परमेश्वर ने अपने वचन में हमारे लिए वही सब लिखवाया है जो वह चाहता है कि हम जानें और मानें और जिससे हम उसकी निकटता में आएँ, उद्धार पाएँ और उसके परिवार का भाग बन जाएँ।

    यद्यपि बाइबल में प्रभु यीशु के लड़कपन, 12 वर्ष से लेकर उनके सेवकाई आरंभ करने,30 वर्ष की आयु तक का विवरण नहीं दिया गया है, किन्तु बाइबल इसके विषय में बिलकुल शान्त भी नहीं है। यह परमेश्वर और प्रभु यीशु के विरोधियों द्वारा फैलाया गया भ्रम है कि बाइबल उनके 12 से 30 वर्ष की आयु के बारे में कुछ नहीं बताती है; और अपने द्वारा फैलाए गए इस भ्रम के आधार पर वे यह एक और झूठ फैलाते हैं कि प्रभु यीशु भारत आए थे यहाँ से सीख कर वापस इस्राएल आए और उन शिक्षाओं के अनुसार प्रचार किया। सच तो यह है कि बाइबल स्पष्ट बताती है कि प्रभु यीशु वहीं इस्राएल में अपने परिवार के साथ ही रहे थे। इस संदर्भ में बाइबल में, सुसमाचारों में, दिए गए कुछ पदों को देखिए:

  •  मत्ती 13:54 “और अपने देश में आकर उन की सभा में उन्हें ऐसा उपदेश देने लगाकि वे चकित हो कर कहने लगेकि इस को यह ज्ञान और सामर्थ के काम कहां से मिले?
  • मरकुस 6:2-3 “सब्त के दिन वह आराधनालय में उपदेश करने लगाऔर बहुत लोग सुनकर चकित हुए और कहने लगेइस को ये बातें कहां से आ गईंऔर यह कौन सा ज्ञान है जो उसको दिया गया हैऔर कैसे सामर्थ के काम इसके हाथों से प्रगट होते हैंक्या यह वही बढ़ई नहींजो मरियम का पुत्रऔर याकूब और योसेस और यहूदा और शमौन का भाई हैऔर क्या उस की बहिनें यहां हमारे बीच में नहीं रहतींइसलिये उन्होंने उसके विषय में ठोकर खाई।”
  • लूका 2:39-40 “और जब वे प्रभु की व्यवस्था के अनुसार सब कुछ निपटा चुके तो गलील में अपने नगर नासरत को फिर चले गए। और बालक बढ़ताऔर बलवन्‍त होताऔर बुद्धि से परिपूर्ण होता गयाऔर परमेश्वर का अनुग्रह उस पर था।”
  • लूका 2:51-52 “तब वह उन के साथ गयाऔर नासरत में आयाऔर उन के वश में रहाऔर उस की माता ने ये सब बातें अपने मन में रखीं। और यीशु बुद्धि और डील-डौल में और परमेश्वर और मनुष्यों के अनुग्रह में बढ़ता गया।”
  • लूका 4:16 “और वह नासरत में आयाजहां पाला पोसा गया थाऔर अपनी रीति के अनुसार सब्त के दिन आराधनालय में जा कर पढ़ने के लिये खड़ा हुआ
  • यूहन्ना 7:15 “तब यहूदियों ने अचम्भा कर के कहाकि इसे बिन पढ़े विद्या कैसे आ गई?

    ध्यान कीजिए, मत्ती, मरकुस और यूहन्ना के हवाले यह स्पष्ट दिखा रहे हैं कि प्रभु यीशु की शिक्षाओं को सुनकर सब को अचम्भा होता था कि उन्होंने ‘बिना पढ़े’ वह सब कैसे जान लिया जो वे प्रचार करते थे। अर्थात, वे लोग जानते थे कि प्रभु यीशु कभी कहीं शिक्षा पाने नहीं गए थे, उन्हीं के मध्य रहे थे, परन्तु फिर भी इतना कुछ सीख गए थे, अद्भुत प्रचार कर सकते थे। यदि प्रभु यीशु कहीं गए होते, तो लोग फिर यह कहते कि “उन्होंने समझ लिया कि वह यह सब उस परदेश से सीख कर आया था जहाँ वह गया हुआ था” – किन्तु किसी ने भी कभी भी ऐसा कुछ नहीं कहा। दूसरी बात, प्रभु यीशु ने जो भी प्रचार किया वह परमेश्वर के वचन के उस भाग, जिसे हम आज बाइबल के पुराने नियम के नाम से जानते है, से था। यदि प्रभु कहीं बाहर से कुछ सीखकर आए होते तो पुराने नियम से नहीं सिखाते वरन उस “ज्ञान” के अनुसार सिखाते जिसे वे सीख कर आए थे – किन्तु ऐसा कदापि नहीं था। उनकी सारी शिक्षाएँ परमेश्वर के वचन के पुराने नियम पर आधारित थीं।

    लूका के हवालों पर ध्यान कीजिए – ये तीनों हवाले स्पष्ट दिखाते हैं कि प्रभु यीशु की परवरिश वहीं इस्राएल में, गलील के नासरत में, जो उनका निवास-स्थान था, हुई थी।

    इसलिए चाहे बाइबल में उनकी 12 से 30 वर्ष की आयु के बारे में कोई विस्वितृत वरण नहीं है, किन्तु इतना अवश्य प्रगट है कि प्रभु वहीं इस्राएल के नासरत में अपने परिवार के साथ ही रहे थे और लोगों ने उन्हें बड़े होते हुए देखा और जाना था।

    यदि आपने प्रभु की शिष्यता को अभी तक स्वीकार नहीं किया है, तो अपने अनन्त जीवन और स्वर्गीय आशीषों को सुनिश्चित करने के लिए अभी प्रभु यीशु के पक्ष में अपना निर्णय कर लीजिए। जहाँ प्रभु की आज्ञाकारिता है, उसके वचन की बातों का आदर और पालन है, वहाँ प्रभु की आशीष और सुरक्षा भी है। प्रभु यीशु से अपने पापों के लिए क्षमा माँगकर, स्वेच्छा से तथा सच्चे मन से अपने आप को उसकी अधीनता में समर्पित कर दीजिए - उद्धार और स्वर्गीय जीवन का यही एकमात्र मार्ग है। आपको स्वेच्छा और सच्चे मन से प्रभु यीशु मसीह से केवल एक छोटी प्रार्थना करनी है, और साथ ही अपना जीवन उसे पूर्णतः समर्पित करना है। आप यह प्रार्थना और समर्पण कुछ इस प्रकार से भी कर सकते हैं, “प्रभु यीशु, मैं अपने पापों के लिए पश्चातापी हूँ, उनके लिए आप से क्षमा माँगता हूँ। मैं आपका धन्यवाद करता हूँ कि आपने मेरे पापों की क्षमा और समाधान के लिए उन पापों को अपने ऊपर लिया, उनके कारण मेरे स्थान पर क्रूस की मृत्यु सही, गाड़े गए, और मेरे उद्धार के लिए आप तीसरे दिन जी भी उठे, और आज जीवित प्रभु परमेश्वर हैं। कृपया मुझे और मेरे पापों को क्षमा करें, मुझे अपनी शरण में लें, और मुझे अपना शिष्य बना लें। मैं अपना जीवन आप के हाथों में समर्पित करता हूँ।” सच्चे और समर्पित मन से की गई आपकी एक प्रार्थना आपके वर्तमान तथा भविष्य को, इस लोक के और परलोक के जीवन को, अनन्तकाल के लिए स्वर्गीय एवं आशीषित बना देगी।

कृपया इस संदेश के लिंक को औरों को भी भेजें और साझा करें
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Is the Bible silent about Jesus’ life between 12 to 30 years of age?


    Very many things have been given to us in God’s Word the Bible about God, His kingdom, our relationship with Him, His works, attributes, Laws, Commandments etc. but not everything about God has been given in the Bible. God in His Word has got written that which He wants us to know and follow so that we can draw near to Him, be saved, and become members of His family.

    Although the Bible does not give us any details about Lord Jesus since the time He was a boy of 12 to the time when He started His ministry at the age of 30but the Bible is not entirely silent about this time period either. This is a misinformation spread by those who oppose God and the Lord Jesus that the Bible is silent about the Lord’s life between 12 and 30 years of ageand based upon this misinformation they spread another falsehood that the Lord Jesus between this time period had gone to India, learnt spiritual things here and then returned to Israel to preach them. The fact is that the Bible very clearly states that the Lord Jesus has always lived with His family in Israel. In this context, take a look at some verses from the Gospel accounts from the Bible:

  • Matthew 13:54 “And when He had come to His own country, He taught them in their synagogue, so that they were astonished and said, "Where did this Man get this wisdom and these mighty works?
  • Mark 6:2-3 “And when the Sabbath had come, He began to teach in the synagogue. And many hearing Him were astonished, saying, "Where did this Man get these things? And what wisdom is this which is given to Him, that such mighty works are performed by His hands! Is this not the carpenter, the Son of Mary, and brother of James, Joses, Judas, and Simon? And are not His sisters here with us?" And they were offended at Him.”
  • Luke 2:39-40 “So when they had performed all things according to the law of the Lord, they returned to Galilee, to their own city, Nazareth. And the Child grew and became strong in spirit, filled with wisdom; and the grace of God was upon Him.”
  • Luke 2:51-52 “Then He went down with them and came to Nazareth, and was subject to them, but His mother kept all these things in her heart. And Jesus increased in wisdom and stature, and in favor with God and men.”
  • Luke 4:16 “So He came to Nazareth, where He had been brought up. And as His custom was, He went into the synagogue on the Sabbath day, and stood up to read.”
  • John 7:15 “And the Jews marveled, saying, "How does this Man know letters, having never studied?"”

    Take note that the references from Matthew, Mark, and John clearly show that everybody was amazed at the Lord’s teachings, as to how did He learn all that He preached ‘having never studied’. In other words, the people knew that the Lord Jesus had never gone anywhere to learnHe had remained amongst themyet He had learnt such wonderful thingsand preached so amazingly and magnificentlyHad the Lord gone anywherethen it would have been written about Him that the people realized or understood that He had learnt it all in the foreign place He had gone to” – but nobody ever said this about Him. Secondly, all that the Lord Jesus preached was based upon and quoted the part of the Bible we now know as the Old TestamentHad the Lord learnt something anywhere else then He would not have taught from the Old Testament but would have then taught according to the ‘knowledge’ He had acquired from outside – but it was never so. All His teachings were based on the Old Testament part of God’s Word.

    Take note of the references from Luke – these three references very clearly show that the Lord Jesus’s upbringing was in Nazareth of Galileethe place where He resided with His family.

    So although the Bible may not provide any details about the life of Lord Jesus between 12 and 30 years of agebut it does inform us that He was always there in Nazareth, in Israel during that time period and the people had seen Him live and grow up in that region.

    If you have not yet accepted the discipleship of the Lord, make your decision in favor of the Lord Jesus now to ensure your eternal life and heavenly blessings. Where there is obedience to the Lord, where there is respect and obedience to His Word, there is also the blessing and protection of the Lord. Repenting of your sins, and asking the Lord Jesus for forgiveness of your sins, voluntarily and sincerely, surrendering yourself to Him - is the only way to salvation and heavenly life. You only have to say a short but sincere prayer to the Lord Jesus Christ willingly and with a penitent heart, and at the same time completely commit and submit your life to Him. You can also make this prayer and submission in words something like, “Lord Jesus, I am sorry for my sins and repent of them. I thank you for taking my sins upon yourself, paying for them through your life.  Because of them you died on the cross in my place, were buried, and you rose again from the grave on the third day for my salvation, and today you are the living Lord God and have freely provided to me the forgiveness, and redemption from my sins, through faith in you. Please forgive my sins, take me under your care, and make me your disciple. I submit my life into your hands." Your one prayer from a sincere and committed heart will make your present and future life, in this world and in the hereafter, heavenly and blessed for eternity.

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सोमवार, 7 सितंबर 2020

देखभाल

 

         मैं जब हाई-स्कूल की पढ़ाई कर रहा था, तब मैं अपने विश्वविद्यालय की टेनिस टीम में भी खेला करता था। मेरे घर के पास ही चार टेनिस कोर्ट्स थे, जिन पर मैंने अपनी किशोरावस्था के बहुत घंटे अपने कौशल को और विकसित करने तथा सुधारने के लिए बिताए थे। पढ़ाई पूरी होने के पश्चात मैं विश्वविद्यालय और उस शहर से चला गया।

         पिछली बार जब मैं उस शहर में गया, तो वहाँ पहुँचकर मेरे सबसे आरंभिक कार्यों में से एक था, कार लेकर उन टेनिस कोर्ट्स पर जाना। मेरी आशा थी कि वहाँ पर अभी भी लोग खेल रहे होंगे, और मैं उन्हें देखूँगा, और अपनी यादों को ताज़ा करूँगा। परन्तु वहाँ पहुंचकर मैंने देखा कि वे पुरानी कोर्ट्स जो मेरी यादों में बसी हुई थीं, अब वहाँ नहीं हैं; उनके स्थान पर एक खाली मैदान था, जिसमें उगी हुई कुछ घास हवा में लहरा रही थी।

         उस दिन की वह दोपहर आज भी मेरी यादों में इस बात का प्रमाण बनकर बसी हुई है कि जीवन कितना क्षणभंगुर है। उन स्थानों में से एक, जहाँ मैंने अपनी युवावस्था की सामर्थ्य का सबसे उत्तम उपयोग किया था, उसका अब अस्तित्व ही नहीं रहा। बाद में अपने इस अनुभव पर मनन करते हुए मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल में वृद्ध हो रहे राजा दाऊद द्वारा व्यक्त की गई बात स्मरण हो आई, मनुष्य की आयु घास के समान होती है, वह मैदान के फूल की नाईं फूलता है, जो पवन लगते ही ठहर नहीं सकता, और न वह अपने स्थान में फिर मिलता है। परन्तु यहोवा की करूणा उसके डरवैयों पर युग युग, और उसका धर्म उनके नाती- पोतों पर भी प्रगट होता रहता है” (भजन 103:15-17)।

         हम आयु में बढ़ते जाते हैं और हमारे आस-पास का संसार भी बदलता जाता है, परन्तु परमेश्वर का प्रेम न तो कभी पुराना होता है और न कभी बदलता है। हम उस पर हमेशा भरोसा कर सकते हैं कि जितनों ने उस पर अपना विश्वास रखा है, वह उनकी देखभाल सदा करता रहेगा। - जेम्स बैंक्स

 

इस बदलते हुए संसार में हम अपने कभी न बदलने वाले 

परमेश्वर पर सदा भरोसा बनाए रख सकते हैं।


क्योंकि मैं यहोवा बदलता नहीं; इसी कारण, हे याकूब की सन्तान तुम नाश नहीं हुए। - मलाकी 3:6

बाइबल पाठ:  भजन 103:13-22

भजन संहिता 103:13 जैसे पिता अपने बालकों पर दया करता है, वैसे ही यहोवा अपने डरवैयों पर दया करता है।

भजन संहिता 103:14 क्योंकि वह हमारी सृष्टि जानता है; और उसको स्मरण रहता है कि मनुष्य मिट्टी ही है।

भजन संहिता 103:15 मनुष्य की आयु घास के समान होती है, वह मैदान के फूल के समान फूलता है,

भजन संहिता 103:16 जो पवन लगते ही ठहर नहीं सकता, और न वह अपने स्थान में फिर मिलता है।

भजन संहिता 103:17 परन्तु यहोवा की करुणा उसके डरवैयों पर युग युग, और उसका धर्म उनके नाती-पोतों पर भी प्रगट होता रहता है,

भजन संहिता 103:18 अर्थात उन पर जो उसकी वाचा का पालन करते और उसके उपदेशों को स्मरण कर के उन पर चलते हैं।

भजन संहिता 103:19 यहोवा ने तो अपना सिंहासन स्वर्ग में स्थिर किया है, और उसका राज्य पूरी सृष्टि पर है।

भजन संहिता 103:20 हे यहोवा के दूतों, तुम जो बड़े वीर हो, और उसके वचन के मानने से उसको पूरा करते हो उसको धन्य कहो!

भजन संहिता 103:21 हे यहोवा की सारी सेनाओं, हे उसके टहलुओं, तुम जो उसकी इच्छा पूरी करते हो, उसको धन्य कहो!

भजन संहिता 103:22 हे यहोवा की सारी सृष्टि, उसके राज्य के सब स्थानों में उसको धन्य कहो। हे मेरे मन, तू यहोवा को धन्य कह!

  

एक साल में बाइबल: 

  • नीतिवचन 1-2
  • 1 कुरिन्थियों 16

शनिवार, 14 दिसंबर 2019

सहायता



      जैसे-जैसे मेरी आयु बढ़ रही है, मैं अधिकाधिक जोड़ों के दर्द को अनुभव कर रही हूँ, विशेषकर तब जब मौसम ठण्डा होता है। कुछ दिन तो ऐसे होते हैं जिनमें मैं अपने अप को विजेता काम और वृद्धावस्था की चुनौतियों से हारी हुए वरिष्ठ नागरिक अधिक अनुभव करती हूँ।

      इसीलिए मेरा एक नायक परमेश्वर के वचन बाइबल में मुझ से अधिक आयु वाला व्यक्ति कालेब है। कालेब उन बारह भेदियों में से एक था जिन्हें मूसा ने वाचा किए हुए देश कनान का भेद लेने के लिए भेजा था (गिनती 13-14)। उन बारहों, जिनपर परमेश्वर का अनुग्रह हुआ कि वे वाचा किए हुए देश में प्रवेश करें, में से केवल कालेब और यहोशू ही थे जिन्होंने वहाँ की अच्छी रिपोर्ट नहीं दी; शेष सभी ने उस देश के विषय बुरी रिपोर्ट ही दी। अब गिनती 14 में कालेब के लिए समय आ गया है कि वह अपने हिस्से की भूमि को प्राप्त करे। किन्तु वहाँ पर अभी भी शत्रु थे, जिन्हें भगाना शेष था। कालेब सेवानिवृत्ति लेकर युद्ध को जवान पीढ़ी के लिए छोड़ने वालों में से नहीं था। कालेब ने कहा, “इसलिये अब वह पहाड़ी मुझे दे जिसकी चर्चा यहोवा ने उस दिन की थी; तू ने तो उस दिन सुना होगा कि उस में अनाकवंशी रहते हैं, और बड़े बड़े गढ़ वाले नगर भी हैं; परन्तु क्या जाने सम्भव है कि यहोवा मेरे संग रहे, और उसके कहने के अनुसार मैं उन्हें उनके देश से निकाल दूं” (यहोशू 14:12)।

      सम्भव है कि यहोवा मेरे संग रहे” यही वह मानसिकता है जिससे कालेब युद्ध के लिए सदा सक्षम रहा करता था। उसका ध्यान अपनी सामर्थ्य अथवा बढ़ती हुई आयु पर नहीं वरन परमेश्वर की सामर्थ्य पर लगा रहता था। उसका भरोसा था कि जो कुछ भी करना आवश्यक होगा, परमेश्वर वह करने में उसकी सहायता करेगा।

      हम से अधिकाँश एक आयु पर पहुंच जाने के पश्चात कोई बड़ा काम हाथ में लेना नहीं चाहते हैं। परन्तु हमारी आयु चाहे जो भी हो, हम परमेश्वर के लिए फिर भी बड़े कार्य कर सकते हैं। जब कालेब के समान अवसर हमारे सामने आएं, तो हमें उन से बच कर निकलने का प्रयास नहीं करना चाहिए। परमेश्वर की सहायता से, हम उनपर विजयी हो सकते हैं। - लिंडा वॉशिंगटन

जो मुझे सामर्थ्य देता है उस में मैं सब कुछ कर सकता हूं। - फिलिप्पियों 4:13

धर्मी लोग खजूर के समान फूले फलेंगे, और लबानोन के देवदार के समान बढ़ते रहेंगे। वे यहोवा के भवन में रोपे जा कर, हमारे परमेश्वर के आंगनों में फूले फलेंगे। वे पुराने होने पर भी फलते रहेंगे, और रस भरे और लहलहाते रहेंगे – भजन 92:12-14

बाइबल पाठ: यहोशू 14:7-15
Joshua 14:7 जब यहोवा के दास मूसा ने मुझे इस देश का भेद लेने के लिये कादेशबर्ने से भेजा था तब मैं चालीस वर्ष का था; और मैं सच्चे मन से उसके पास सन्देश ले आया।
Joshua 14:8 और मेरे साथी जो मेरे संग गए थे उन्होंने तो प्रजा के लोगों को निराश कर दिया, परन्तु मैं ने अपने परमेश्वर यहोवा की पूरी रीति से बात मानी।
Joshua 14:9 तब उस दिन मूसा ने शपथ खाकर मुझ से कहा, तू ने पूरी रीति से मेरे परमेश्वर यहोवा की बातों का अनुकरण किया है, इस कारण नि:सन्देह जिस भूमि पर तू अपने पांव धर आया है वह सदा के लिये तेरा और तेरे वंश का भाग होगी।
Joshua 14:10 और अब देख, जब से यहोवा ने मूसा से यह वचन कहा था तब से पैंतालीस वर्ष हो चुके हैं, जिन में इस्राएली जंगल में घूमते फिरते रहे; उन में यहोवा ने अपने कहने के अनुसार मुझे जीवित रखा है; और अब मैं पचासी वर्ष का हूं।
Joshua 14:11 जितना बल मूसा के भेजने के दिन मुझ में था उतना बल अभी तक मुझ में है; युद्ध करने, वा भीतर बाहर आने जाने के लिये जितनी उस समय मुझ मे सामर्थ्य थी उतनी ही अब भी मुझ में सामर्थ्य है।
Joshua 14:12 इसलिये अब वह पहाड़ी मुझे दे जिसकी चर्चा यहोवा ने उस दिन की थी; तू ने तो उस दिन सुना होगा कि उस में अनाकवंशी रहते हैं, और बड़े बड़े गढ़ वाले नगर भी हैं; परन्तु क्या जाने सम्भव है कि यहोवा मेरे संग रहे, और उसके कहने के अनुसार मैं उन्हें उनके देश से निकाल दूं।
Joshua 14:13 तब यहोशू ने उसको आशीर्वाद दिया; और हेब्रोन को यपुन्ने के पुत्र कालेब का भाग कर दिया।
Joshua 14:14 इस कारण हेब्रोन कनजी यपुन्ने के पुत्र कालेब का भाग आज तक बना है, क्योंकि वह इस्राएल के परमेश्वर यहोवा का पूरी रीति से अनुगामी था।
Joshua 14:15 पहिले समय में तो हेब्रोन का नाम किर्यतर्बा था; वह अर्बा अनाकियों में सब से बड़ा पुरूष था। और उस देश को लड़ाई से शान्ति मिली।

एक साल में बाइबल: 
  • योएल 1-3
  • प्रकाशितवाक्य 5



मंगलवार, 29 जनवरी 2019

अनन्त



      जेरलीन टैली की मृत्यु जून 2015 में हुई, वह उस समय सँसार का सबसे वृद्ध व्यक्ति था – 116 वर्ष की आयु का। यरूशलेम शहर ने 1995 में अपना 3000वां जन्मदिन मनाया। मनुष्य के लिए 116 वर्ष की आयु बहुत वृद्ध होना है, और एक शहर के लिए 3000 वर्ष का होना बहुत प्राचीन होना है; परन्तु ऐसे भी पेड़ हैं जो इससे भी पुरातन हैं। कैलिफोर्निया के एक इलाके में स्थित एक देवदार के वृक्ष की आयु 4800 वर्ष की आंकी गई है, जिससे वह कुलपति अब्राहम से भी 800 वर्ष पुराना ठहरता है!

      जब यहूदी धर्म के अगुवों ने प्रभु यीशु मसीह को उसकी पहचान के विषय उसे चुनौती दी, तो “यीशु ने उन से कहा; मैं तुम से सच सच कहता हूं; कि पहिले इसके कि इब्राहीम उत्पन्न हुआ मैं हूं” (यूहन्ना  8:58)। ऐसा कहकर उसने यह दावा किया कि वह अब्राहम से भी पहले से है। उसके इस दृढ़ कथन से उसे चुनौती देने वाले हतप्रभ रह गए और उन्होंने उसे पत्थरवाह करके मारने का प्रयास किया, क्योंकि वे समझ गए कि वह अपनी शारीरिक आयु की बात नहीं कर रहा था परन्तु अपने आप को अनन्त और परमेश्वर के प्राचीन नाम “मैं हूँ” बता कर स्वयँ को परमेश्वर जता रहा था (देखें निर्गमन 3:14)। परन्तु त्रिएक परमेश्वर का अंग होने के नाते प्रभु यीशु वैध रूप से यह दावा कर सकता था।

      प्रभु यीशु ने यूहन्ना 17:3 में प्रार्थना की “और अनन्त जीवन यह है, कि वे तुझ अद्वैत सच्चे परमेश्वर को और यीशु मसीह को, जिसे तू ने भेजा है, जाने” उस अनन्त परमेश्वर ने समय में प्रवेश किया जिससे हमें अनन्त जीवन का उपहार दे सके। उसने अपना यह उद्देश्य हमारे स्थान पर मृत्यु दण्ड सहकर, और फिर मृतकों में से पुनरुत्थान के द्वारा, पूर्ण और प्रमाणित किया। उसके इस बलिदान के कारण हम उसके साथ उस भविष्य की बाट जोह रहे हैं जहाँ समय की कोई सीमा नहीं होगी, हम अनन्तकाल तक उसके साथ बने रहेंगे।

      हमारा प्रभु परमेश्वर अनन्त है, वह हमें भी अनन्त बना रहा है। - बिल क्राउडर


मसीह में सब वस्तुएँ स्थिर रहती हैं। - कुलुस्सियों 1:17

बाइबल पाठ: यूहन्ना 8:48-59
John 8:48 यह सुन यहूदियों ने उस से कहा; क्या हम ठीक नहीं कहते, कि तू सामरी है, और तुझ में दुष्टात्मा है?
John 8:49 यीशु ने उत्तर दिया, कि मुझ में दुष्टात्मा नहीं; परन्तु मैं अपने पिता का आदर करता हूं, और तुम मेरा निरादर करते हो।
John 8:50 परन्तु मैं अपनी प्रतिष्‍ठा नहीं चाहता, हां, एक तो है जो चाहता है, और न्याय करता है।
John 8:51 मैं तुम से सच सच कहता हूं, कि यदि कोई व्यक्ति मेरे वचन पर चलेगा, तो वह अनन्त काल तक मृत्यु को न देखेगा।
John 8:52 यहूदियों ने उस से कहा, कि अब हम ने जान लिया कि तुझ में दुष्टात्मा है: इब्राहीम मर गया, और भविष्यद्वक्ता भी मर गए हैं और तू कहता है, कि यदि कोई मेरे वचन पर चलेगा तो वह अनन्त काल तक मृत्यु का स्‍वाद न चखेगा।
John 8:53 हमारा पिता इब्राहीम तो मर गया, क्या तू उस से बड़ा है? और भविष्यद्वक्ता भी मर गए, तू अपने आप को क्या ठहराता है।
John 8:54 यीशु ने उत्तर दिया; यदि मैं आप अपनी महिमा करूं, तो मेरी महिमा कुछ नहीं, परन्तु मेरी महिमा करनेवाला मेरा पिता है, जिसे तुम कहते हो, कि वह हमारा परमेश्वर है।
John 8:55 और तुम ने तो उसे नहीं जाना: परन्तु मैं उसे जानता हूं; और यदि कहूं कि मैं उसे नहीं जानता, तो मैं तुम्हारे समान झूठा ठहरूंगा: परन्तु मैं उसे जानता हूं, और उसके वचन पर चलता हूं।
John 8:56 तुम्हारा पिता इब्राहीम मेरा दिन देखने की आशा से बहुत मगन था; और उसने देखा, और आनन्द किया।
John 8:57 यहूदियों ने उस से कहा, अब तक तू पचास वर्ष का नहीं; फिर भी तू ने इब्राहीम को देखा है?
John 8:58 यीशु ने उन से कहा; मैं तुम से सच सच कहता हूं; कि पहिले इसके कि इब्राहीम उत्पन्न हुआ मैं हूं।
John 8:59 तब उन्होंने उसे मारने के लिये पत्थर उठाए, परन्तु यीशु छिपकर मन्दिर से निकल गया।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 21-22
  • मत्ती 19



बुधवार, 1 अगस्त 2018

सर्वोत्तम



      आपके जीवन के सर्वोत्तम दिन आपके पीछे छूट चुके हैं या आगे आने वाले हैं? इस प्रश्न का हमारा उत्तर, और जीवन के प्रति हमारा दृष्टिकोण, दोनों ही समय के साथ बदल सकते हैं। जब हम बचपन में होते हैं, तो हम सामने की ओर देखते हैं, उम्र में और बढ़ना चाहते हैं। एक बार जब हम उम्र में बढ़ जाते हैं, तो फिर अतीत की ओर देखने लगते हैं, फिर से बचपन और जवानी की लालसा करने लगते हैं। परन्तु जब हम परमेश्वर के साथ चलते हैं तो हमारी आयु चाहे जो भी हो, हमारे लिए सर्वोत्तम अभी आना शेष रहता है।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि अपने जीवन के लंबे काल के दौरान मूसा ने परमेश्वर द्वारा किए गए अनेकों अद्भुत कार्यों को देखा, और उनमें से कई कार्य ऐसे थे जो तब घटित हुए जब वह जवान नहीं रहा था। मूसा 80 वर्ष का था जब उसने फिरौन का सामना किया और परमेश्वर का अपने लोगों को दासत्व से आश्चर्यकर्मों के द्वारा छुड़ाना देखा (निर्गमन 3-13)। मूसा ने लाल सागर को विभाजित होते हुए, मन्ना को स्वर्ग से गिरते हुए भी देखा, और परमेश्वर से “आमने-सामने” बातें भी कीं (14:21; 16:4; 33:11)।

      अपने जीवन पर्यन्त, मूसा इस आशा के साथ जिया, कि अब आगे परमेश्वर क्या करेगा (इब्रानियों 11:24-27)। अपने जीवन के अंतिम वर्ष में वह 120  वर्ष का था, और तब भी उसने समझ लिया कि परमेश्वर के साथ उसके जीवन का यह आरंभ ही है, और वह परमेश्वर की महानता और प्रेम का अन्त कभी नहीं देखेगा।

      हमारी आयु चाहे जो भी हो, “अनादि परमेश्वर तेरा गृहधाम है, और नीचे सनातन भुजाएं हैं...” (व्यवस्थाविवरण 33:27) जो प्रतिदिन हमें उठाए हुए उसके आनन्द में, उस सर्वोत्तम की ओर लिए चलती हैं। - जेम्स बैंक्स


जब हम परमेश्वर के साथ चलते हैं, तो सर्वोत्तम आना शेष रहता है।

परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएंगे, वे उकाबों के समान उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे। - यशायाह 40:31

बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण 34:1-12
Deuteronomy 34:1 फिर मूसा मोआब के अराबा से निबो पहाड़ पर, जो पिसगा की एक चोटी और यरीहो के साम्हने है, चढ़ गया; और यहोवा ने उसको दान तक का गिलाद नाम सारा देश,
Deuteronomy 34:2 और नप्ताली का सारा देश, और एप्रैम और मनश्शे का देश, और पच्छिम के समुद्र तक का यहूदा का सारा देश,
Deuteronomy 34:3 और दक्खिन देश, और सोअर तक की यरीहो नाम खजूर वाले नगर की तराई, यह सब दिखाया।
Deuteronomy 34:4 तब यहोवा ने उस से कहा, जिस देश के विषय में मैंने इब्राहीम, इसहाक, और याकूब से शपथ खाकर कहा था, कि मैं इसे तेरे वंश को दूंगा वह यही है। मैं ने इस को तुझे साक्षात दिखला दिया है, परन्तु तू पार हो कर वहां जाने न पाएगा।
Deuteronomy 34:5 तब यहोवा के कहने के अनुसार उसका दास मूसा वहीं मोआब देश में मर गया,
Deuteronomy 34:6 और उसने उसे मोआब के देश में बेतपोर के साम्हने एक तराई में मिट्टी दी; और आज के दिन तक कोई नहीं जानता कि उसकी कब्र कहां है।
Deuteronomy 34:7 मूसा अपनी मृत्यु के समय एक सौ बीस वर्ष का था; परन्तु न तो उसकी आंखें धुंधली पड़ीं, और न उसका पौरूष घटा था।
Deuteronomy 34:8 और इस्राएली मोआब के अराबा में मूसा के लिये तीस दिन तक रोते रहे; तब मूसा के लिये रोने और विलाप करने के दिन पूरे हुए।
Deuteronomy 34:9 और नून का पुत्र यहोशू बुद्धिमानी की आत्मा से परिपूर्ण था, क्योंकि मूसा ने अपने हाथ उस पर रखे थे; और इस्राएली उस आज्ञा के अनुसार जो यहोवा ने मूसा को दी थी उसकी मानते रहे।
Deuteronomy 34:10 और मूसा के तुल्य इस्राएल में ऐसा कोई नबी नहीं उठा, जिस से यहोवा ने आमने-सामने बातें कीं,
Deuteronomy 34:11 और उसको यहोवा ने फिरौन और उसके सब कर्मचारियों के सामने, और उसके सारे देश में, सब चिन्ह और चमत्कार करने को भेजा था,
Deuteronomy 34:12 और उसने सारे इस्राएलियों की दृष्टि में बलवन्त हाथ और बड़े भय के काम कर दिखाए।


एक साल में बाइबल: 
  • भजन 57-59
  • रोमियों 4



सोमवार, 26 फ़रवरी 2018

देखभाल


   मैंने यूँ ही हलके में, उस 84 वर्षीय वृद्धा और मेरी मित्र से पूछा, “कैसी हैं माताजी?” उन्होंने अपने दुखते जोड़ों की ओर संकेत करते हुए कहा, “बुढ़ापा बहुत कठिन होता है!” परन्तु फिर साथ ही बड़ी निष्ठा के साथ यह भी कहा, “परन्तु परमेश्वर मेरे साथ भला रहा है और अभी भी है।”

   सुप्रसिद्ध सुसमाचार प्रचारक बिली ग्राहम ने अपनी पुस्तक Nearing Home में लिखा है, “वृद्ध होना मेरे जीवन का सबसे बड़ा आश्चर्य रहा है।” परन्तु बिली ग्राहम ने इस संदर्भ में, परमेश्वर के वचन बाइबल के बारे में यह भी बताया है कि, “यद्यपि बाइबल हमारे वृद्ध होने में अनुभव की जाने वाले समस्याओं को छुपाती या नज़रंदाज़ तो नहीं करती है, लेकिन साथ ही बाइबल वृद्धावस्था को तुच्छ या दांत किटकिटा कर बस सहन करते रहने वाला बोझ भी नहीं बताती है।” फिर बिली ग्राहम ने कुछ प्रश्नों का उल्लेख किया जिनका सामना वृद्ध होते हुए उन्हें करना पड़ा है; जैसे कि “हम कैसे आयु के साथ बढ़ने वाले उन भय, संघर्षों और बढ़ती सीमाओं का न केवल सामना कर सकते हैं वरन उन सब के होते हुए भी अन्दर से और भी बलवंत हो सकते हैं।”

   बाइबल ही में हमें परमेश्वर का आश्वासन मिलता है, “तुम्हारे बुढ़ापे में भी मैं वैसा ही बना रहूंगा और तुम्हारे बाल पकने के समय तक तुम्हें उठाए रहूंगा। मैं ने तुम्हें बनाया और तुम्हें लिये फिरता रहूंगा”(यशायाह 46:4)।

   हम नहीं जानते हैं कि पृथ्वी पर हमें कितने समय और जीवित रहना है; न ही यह जानते हैं कि पृथ्वी पर अपने समय के दौरान हमें किन परिस्थितियों और कठिनाईयों का सामना करना पद सकता है। परन्तु इस सब में एक बात तो निश्चित है: हमारा प्रभु परमेश्वर हमारे जीवन भर हमारी देखभाल करता रहेगा। - लौरेंस दर्मानी


वृद्धावस्था से न घबाराएं; परमेश्वर सदा आपके साथ बना रहेगा।

हम को अपने दिन गिनने की समझ दे कि हम बुद्धिमान हो जाएं। - भजन 90:12

बाइबल पाठ: यशायाह 46:4-13
Isaiah 46:3 हे याकूब के घराने, हे इस्राएल के घराने के सब बचे हुए लोगो, मेरी ओर कान लगाकर सुनो; तुम को मैं तुम्हारी उत्पत्ति ही से उठाए रहा और जन्म ही से लिये फिरता आया हूं।
Isaiah 46:4 तुम्हारे बुढ़ापे में भी मैं वैसा ही बना रहूंगा और तुम्हारे बाल पकने के समय तक तुम्हें उठाए रहूंगा। मैं ने तुम्हें बनाया और तुम्हें लिये फिरता रहूंगा;
Isaiah 46:5 मैं तुम्हें उठाए रहूंगा और छुड़ाता भी रहूंगा।। तुम किस से मेरी उपमा दोगे और मुझे किस के समान बताओगे, किस से मेरा मिलान करोगे कि हम एक समान ठहरें?
Isaiah 46:6 जो थैली से सोना उण्डेलते वा कांटे में चान्दी तौलते हैं, जो सुनार को मजदुरी देकर उस से देवता बनवाते हैं, तब वे उसे प्रणाम करते वरन दण्डवत भी करते हैं!
Isaiah 46:7 वे उसको कन्धे पर उठा कर लिये फिरते हैं, वे उसे उसके स्थान में रख देते और वह वहीं खड़ा रहता है; वह अपने स्थान से हट नहीं सकता; यदि कोई उसकी दोहाई भी दे, तौभी न वह सुन सकता है और न विपत्ति से उसका उद्धार कर सकता है।।
Isaiah 46:8 हे अपराधियों, इस बात को स्मरण करो और ध्यान दो, इस पर फिर मन लगाओ।
Isaiah 46:9 प्राचीनकाल की बातें स्मरण करो जो आरम्भ ही से है; क्योंकि ईश्वर मैं ही हूं, दूसरा कोई नहीं; मैं ही परमेश्वर हूं और मेरे तुल्य कोई भी नहीं है।
Isaiah 46:10 मैं तो अन्त की बात आदि से और प्राचीनकाल से उस बात को बताता आया हूं जो अब तक नहीं हुई। मैं कहता हूं, मेरी युक्ति स्थिर रहेगी और मैं अपनी इच्छा को पूरी करूंगा।
Isaiah 46:11 मैं पूर्व से एक उकाब पक्षी को अर्थात दूर देश से अपनी युक्ति के पूरा करने वाले पुरूष को बुलाता हूं। मैं ही ने यह बात कही है और उसे पूरी भी करूंगा; मैं ने यह विचार बान्धा है और उसे सफल भी करूंगा।
Isaiah 46:12 हे कठोर मनवालो तुम जो धर्म से दूर हो, कान लगाकर मेरी सुनो।
Isaiah 46:13 मैं अपनी धामिर्कता को समीप ले आने पर हूं वह दूर नहीं है, और मेरे उद्धार करने में विलम्ब न होगा; मैं सिय्योन का उद्धार करूंगा और इस्राएल को महिमा दूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 15-16
  • मरकुस 6:1-29



शनिवार, 2 सितंबर 2017

नींव


   दो जन एक ही स्थान पर भवन निर्माण का कार्य कर रहे थे। जब उनसे पूछा गया कि वे क्या बना रहे हैं, तो एक ने कहा कि वह गैराज बना रहा है, और दूसरे ने कहा कि वह बड़ा सा आराधनालय बना रहा है। इसके एक दिन पश्चात वहाँ केवल एक ही व्यक्ति ईंटें लगाने का काम कर रहा था। जब उससे दूसरे व्यक्ति के बारे में पूछा गया, तो उसने उत्तर दिया, "उसे काम से निकाल दिया गया, क्योंकि वह दृढ़ संकल्प था कि वह गैराज नहीं वरन आराधनालय ही बना रहा है।"

   कुछ ऐसा ही परमेश्वर के वचन बाइबल में वर्णित एक घटना में एक प्राचीन स्थान बाबुल में हुआ। लोगों के समूह ने कल्पना की कि वे मिलकर एक नगर और एक मीनार बनाएंगे जो आकाश तक ऊँची हो, और वे सब एक ही स्थान पर एकत्रित होकर रहेंगे, और वे ईंटें बनाकर मिट्टी के गारे से ऐसी गगनचुँबी मीनार बनाने का व्यर्थ यत्न करने लगे (उत्पत्ति 11:3-4)। परन्तु परमेश्वर की योजना थी कि मनुष्य सारी पृथ्वी पर फैले और उसे अपने वश में कर ले: "और परमेश्वर ने उन को आशीष दी: और उन से कहा, फूलो-फलो, और पृथ्वी में भर जाओ, और उसको अपने वश में कर लो; और समुद्र की मछलियों, तथा आकाश के पक्षियों, और पृथ्वी पर रेंगने वाले सब जन्तुओ पर अधिकार रखो" (उत्पत्ति 1:28)। परमेश्वर नहीं चाहता था कि मनुष्य किसी ऐसे व्यर्थ तथा असंभव कार्य में लग जाए जिसका प्रभाव मनुष्यों में अपनी ही क्षमता और योग्यता पर झूठा भरोसा स्थापित करना, और अपने कार्यों द्वारा अपने अन्दर अहंकार जागृत करना हो। इसलिए परमेश्वर नीचे उतर आया, उनके इस कार्य को रुकवा दिया और उन्हें सारी पृथ्वी पर फैला दिया (पद 8-9)।

   परमेश्वर चाहता था कि मनुष्य प्रत्येक बात के लिए उस पर भरोसा रखें, अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए उससे कहें, और व्यर्थ बातों में अपने आप को व्यय न करें। परमेश्वर ने संसार के सभी लोगों के लिए अपनी योजना अब्राहम को बताई (उत्पत्ति 12:1-3)। वह चाहता था कि अबाहम और उसके वंशजों के समान सभी मनुषय उस पर विश्वास करें और वे अब्राहम ही के समान एक स्थिर नींव वाले नगर की बाट जोहें, जैसे अब्राहम एक "स्थिर नेव वाले नगर की बाट जोहता था, जिस का रचने वाला और बनाने वाला परमेश्वर है" (इब्रानियों 11:8-10)।

   परमेश्वर में हमारा विश्वास हमारी कल्पनाओं और हमारी सीमित बुद्धि से निकले समाधानों नींव पर न हो; वरन हमारे विश्वास की नींव स्वयं परमेश्वर, उसके गुण, और जो वह हम में होकर और हमारे लिए कर सकता है वही हो। - मार्ट डीहॉन


परमेश्वर वही करना चाहता है 
जो वह हमारे लिए और हम में होकर कर सकता है।

क्योंकि उस नींव को छोड़ जो पड़ी है, और वह यीशु मसीह है कोई दूसरी नींव नहीं डाल सकता। - 1 कुरिन्थियों 3:11

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 11:1-9
Genesis 11:1 सारी पृथ्वी पर एक ही भाषा, और एक ही बोली थी। 
Genesis 11:2 उस समय लोग पूर्व की और चलते चलते शिनार देश में एक मैदान पाकर उस में बस गए। 
Genesis 11:3 तब वे आपस में कहने लगे, कि आओ; हम ईंटें बना बना के भली भाँति आग में पकाएं, और उन्होंने पत्थर के स्थान में ईंट से, और चूने के स्थान में मिट्टी के गारे से काम लिया। 
Genesis 11:4 फिर उन्होंने कहा, आओ, हम एक नगर और एक गुम्मट बना लें, जिसकी चोटी आकाश से बातें करे, इस प्रकार से हम अपना नाम करें ऐसा न हो कि हम को सारी पृथ्वी पर फैलना पड़े। 
Genesis 11:5 जब लोग नगर और गुम्मट बनाने लगे; तब इन्हें देखने के लिये यहोवा उतर आया। 
Genesis 11:6 और यहोवा ने कहा, मैं क्या देखता हूं, कि सब एक ही दल के हैं और भाषा भी उन सब की एक ही है, और उन्होंने ऐसा ही काम भी आरम्भ किया; और अब जितना वे करने का यत्न करेंगे, उस में से कुछ उनके लिये अनहोना न होगा। 
Genesis 11:7 इसलिये आओ, हम उतर के उनकी भाषा में बड़ी गड़बड़ी डालें, कि वे एक दूसरे की बोली को न समझ सकें। 
Genesis 11:8 इस प्रकार यहोवा ने उन को, वहां से सारी पृथ्वी के ऊपर फैला दिया; और उन्होंने उस नगर का बनाना छोड़ दिया। 
Genesis 11:9 इस कारण उस नगर को नाम बाबुल पड़ा; क्योंकि सारी पृथ्वी की भाषा में जो गड़बड़ी है, सो यहोवा ने वहीं डाली, और वहीं से यहोवा ने मनुष्यों को सारी पृथ्वी के ऊपर फैला दिया।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 137-139
  • 1 कुरिन्थियों 13


शुक्रवार, 1 सितंबर 2017

आयु


   दाँतों के रोगों की चिकित्सा संबंधी अपनी लैब में 50 वर्ष कार्य करने के पश्चात डेव बाउमैन ने सेवा-विवृत होकर आराम का जीवन बिताने का निर्णय लिया। मधुमेह और हृदय के रोग के लिए हुए ऑपरेशन ने उसके इस निर्णय को और पक्का कर दिया। परन्तु जब उसने अफ्रीका में स्थित सूडान देश से आए शरणार्थियों के बारे में सुना, जिन्हें सहायता की बहुत आवश्यकता थी, उसने एक जीवन बदल देने वाला निर्णय लिया। उसने उनमें से पाँच का आर्थिक संरक्षक बनना स्वीकार कर लिया।

   जैसे जैसे डेव उन सूडानी जवानों के बारे में और अधिक जानता गया, उसे ज्ञात हुआ कि वे कभी किसी डॉक्टर या दन्त चिकित्सक के पास जाने ही नहीं पाए थे। फिर एक दिन किसी ने चर्च में परमेश्वर के वचन बाइबल के एक पद का उल्लेख किया: "इसलिये यदि एक अंग दु:ख पाता है, तो सब अंग उसके साथ दु:ख पाते हैं; और यदि एक अंग की बड़ाई होती है, तो उसके साथ सब अंग आनन्द मनाते हैं" (1 कुरिन्थियों 12:26)। यह पद उसके मन में गूँजता ही रहा। सूडानी मसीही विश्वासी दुःख उठा रहे थे, उन्हें चिकित्सा सहायता की आवश्यकता थी, और डेव को आभास हुआ कि परमेश्वर उसे इसके बारे कुछ करने को प्रोत्साहित कर रहा है। परन्तु क्या?

   अपनी आयु और खराब स्वास्थ्य के बावजूद, डेव ने सूडान में एक चिकित्सालय बनाने की संभावना के बारे में खोज-बीन करनी आरंभ कर दी। धीरे-धीरे परमेश्वर लोगों और संसाधनों को जोड़ता चला गया, और फिर 2008 में मेमोरियल मसीही अस्पताल ने अपने द्वार मरीज़ों के लिए खोल दिए। तब से सैंकड़ों बीमार और घायल लोगों का वहाँ इलाज हो चुका है।

   मेमोरियल मसीही अस्पताल वहाँ इस तथ्य की गवाही के रूप में खड़ा है कि जब लोग दुःखी होते हैं तो परमेश्वर उनकी चिंता करता है; और अधिकांशतः परमेश्वर मेरे और आपके जैसे सामान्य लोगों में होकर सहायता कार्य को करता है - चाहे हमारी आयु कितनी भी हो, चाहे हम यह सोच बैठे हों कि अब मेरा कार्यकारी जीवन पूरा हो चुका है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


जब लोग दुःखी होते हैं, परमेश्वर देखभाल करता है।

धर्मी लोग खजूर के समान फूले फलेंगे, और लबानोन के देवदार के समान बढ़ते रहेंगे। वे यहोवा के भवन में रोपे जा कर, हमारे परमेश्वर के आंगनों में फूले फलेंगे। वे पुराने होने पर भी फलते रहेंगे, और रस भरे और लहलहाते रहेंगे, जिस से यह प्रगट हो, कि यहोवा सीधा है; वह मेरी चट्टान है, और उस में कुटिलता कुछ भी नहीं। - भजन 92:12-15

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 12:12-26
1 Corinthians 12:12 क्योंकि जिस प्रकार देह तो एक है और उसके अंग बहुत से हैं, और उस एक देह के सब अंग, बहुत होने पर भी सब मिलकर एक ही देह हैं, उसी प्रकार मसीह भी है। 
1 Corinthians 12:13 क्योंकि हम सब ने क्या यहूदी हो, क्या युनानी, क्या दास, क्या स्‍वतंत्र एक ही आत्मा के द्वारा एक देह होने के लिये बपतिस्मा लिया, और हम सब को एक ही आत्मा पिलाया गया। 
1 Corinthians 12:14 इसलिये कि देह में एक ही अंग नहीं, परन्तु बहुत से हैं। 
1 Corinthians 12:15 यदि पांव कहे कि मैं हाथ नहीं, इसलिये देह का नहीं, तो क्या वह इस कारण देह का नहीं? 
1 Corinthians 12:16 और यदि कान कहे; कि मैं आंख नहीं, इसलिये देह का नहीं, तो क्या वह इस कारण देह का नहीं? 
1 Corinthians 12:17 यदि सारी देह आंख ही होती तो सुनना कहां से होता? यदि सारी देह कान ही होती तो सूंघना कहां होता? 
1 Corinthians 12:18 परन्तु सचमुच परमेश्वर ने अंगो को अपनी इच्छा के अनुसार एक एक कर के देह में रखा है। 
1 Corinthians 12:19 यदि वे सब एक ही अंग होते, तो देह कहां होती? 
1 Corinthians 12:20 परन्तु अब अंग तो बहुत से हैं, परन्तु देह एक ही है। 
1 Corinthians 12:21 आंख हाथ से नहीं कह सकती, कि मुझे तेरा प्रयोजन नहीं, और न सिर पांवों से कह सकता है, कि मुझे तुम्हारा प्रयोजन नहीं। 
1 Corinthians 12:22 परन्तु देह के वे अंग जो औरों से निर्बल दिख पड़ते हैं, बहुत ही आवश्यक हैं। 
1 Corinthians 12:23 और देह के जिन अंगो को हम आदर के योग्य नहीं समझते हैं उन्‍ही को हम अधिक आदर देते हैं; और हमारे शोभाहीन अंग और भी बहुत शोभायमान हो जाते हैं। 
1 Corinthians 12:24 फिर भी हमारे शोभायमान अंगो को इस का प्रयोजन नहीं, परन्तु परमेश्वर ने देह को ऐसा बना दिया है, कि जिस अंग को घटी थी उसी को और भी बहुत आदर हो। 
1 Corinthians 12:25 ताकि देह में फूट न पड़े, परन्तु अंग एक दूसरे की बराबर चिन्‍ता करें। 
1 Corinthians 12:26 इसलिये यदि एक अंग दु:ख पाता है, तो सब अंग उसके साथ दु:ख पाते हैं; और यदि एक अंग की बड़ाई होती है, तो उसके साथ सब अंग आनन्द मनाते हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 135-136
  • 1 कुरिन्थियों 12


रविवार, 30 जुलाई 2017

सामर्थ्य


   हॉलेंड की कलाकार योनी लेफेवरे ने एक योजना बनाई; वह निदरलैंड्स में वृद्धावस्था में चल रहे लोगों के जीवनों की सामर्थ्य को दिखाना चहाती थी। उसने बच्चों से कहा कि वे अपने दादा-दादी, नाना-नानी के रेखा-चित्र बनाएं जिनमें वह दिखाया गया हो जो कुछ वे लोग वृद्धावस्था में करते हैं। क्योंकि लेफेवरे उन वृद्धों को एक वास्तविक और शुद्ध दृष्टिकोण से देखना और प्रस्तुत करना चाहती थी, इसलिए उसने बच्चों को यह करने के लिए चुना। उन बच्चों द्वारा बनाए गए रेखा-चित्रों ने वृद्धों के जीवन-सामर्थ्य का एक नया और सक्रीय दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन चित्रों में वे वृद्ध टैनिस खेलते, बाग़बानी करते, चित्रकारी करते, और ऐसे ही अनेकों कार्य करते दिखाए गए हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में, प्राचीन इस्त्राएल के एक पात्र कालेब के विषय आया है कि अपनी वृद्धावस्था में भी वह सक्रीय और सामर्थी था। अपनी जवानी में वह इस्त्राएल के अन्य लोगों के साथ, परमेश्वर द्वारा इस्त्राएलियों को वाचा में दिए गए देश कनान की जानकारी लेने के लिए गया था जिससे इस्त्राएलियों को उस देश के विषय में आश्वस्त कर सके। कनान देश की टोह लेकर वापस आने पर कालेब और यहोशू का मानना था कि परमेश्वर की सहायता से वे कनान देश को जीत लेंगे, परन्तु उनके साथ गए अन्य भेदियों ने इस्त्राएलियों को डरा दिया (यहोशू 14:8)। यहोशू और कालेब के परमेश्वर में विश्वास के कारण परमेश्वर ने उन दोनों को और 45 वर्ष तक जीवित बनाए रखा, जब तक इस्त्राएलई कनान देश में नहीं पहुँच कर वहाँ अच्छे से बस नहीं गए; परन्तु उनके साथ गए अन्य लोग तथा परमेश्वर पर अविश्वास करने वाली पीढ़ी, बिना कनान देश तक पहुँचे, चालीस वर्ष की जंगल की यात्रा में ही ढेर हो गई। जब कनान देश में प्रवेश करने और अपनी भूमि को कनानियों से जीत लेने का समय आया, तब 85 वर्षीय कालेब ने कहा, "जितना बल मूसा के भेजने के दिन मुझ में था उतना बल अभी तक मुझ में है; युद्ध करने, वा भीतर बाहर आने जाने के लिये जितनी उस समय मुझ मे सामर्थ्य थी उतनी ही अब भी मुझ में सामर्थ्य है" (यहोशू 14:11)। परमेश्वर की सहायता से उसने अपनी वृद्धावस्था में भी अपने हिस्से की भूमि पर सफलतापूर्वक कबज़ा कर लिया (गिनती 14:24)।

   हमारे आयु में बढ़ने पर परमेश्वर हमें भुला नहीं देता है। चाहे हमारे शरीर वृद्ध हो जाएं और हमारा स्वास्थ्य हमारा साथ न दे, परन्तु परमेश्वर का पवित्र-आत्मा हमें प्रतिदिन नया सामर्थ्य देता रहता है (2 कुरिन्थियों 4:16)। परमेश्वर हमारे लिए संभव करता है कि अपने जीवन के प्रत्येक पड़ाव में, अपनी प्रत्येक आयु में उसपर विश्वास करने और उसे समर्पित रहने वाले हम मसीही विश्वासी परमेश्वर के लिए महत्वपूर्ण और उपयोगी बने रहें। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


यदि परमेश्वर की सामर्थ्य का पीछे से सहारा है, 
और उसके हाथ नीचे से आपको थामे हुए हैं, 
तो आगे जो कुछ भी हो, आप निःसंकोच उसका सामना कर सकते हैं।

इसलिये हम हियाव नहीं छोड़ते; यद्यपि हमारा बाहरी मनुष्यत्‍व नाश भी होता जाता है, तौभी हमारा भीतरी मनुष्यत्‍व दिन प्रतिदिन नया होता जाता है। - 2 कुरिन्थियों 4:16

बाइबल पाठ: यहोशू 14:6-12
Joshua 14:6 तब यहूदी यहोशू के पास गिलगाल में आए; और कनजी यपुन्ने के पुत्र कालेब ने उस से कहा, तू जानता होगा कि यहोवा ने कादेशबर्ने में परमेश्वर के जन मूसा से मेरे और तेरे विषय में क्या कहा था। 
Joshua 14:7 जब यहोवा के दास मूसा ने मुझे इस देश का भेद लेने के लिये कादेशबर्ने से भेजा था तब मैं चालीस वर्ष का था; और मैं सच्चे मन से उसके पास सन्देश ले आया। 
Joshua 14:8 और मेरे साथी जो मेरे संग गए थे उन्होंने तो प्रजा के लोगों को निराश कर दिया, परन्तु मैं ने अपने परमेश्वर यहोवा की पूरी रीति से बात मानी। 
Joshua 14:9 तब उस दिन मूसा ने शपथ खाकर मुझ से कहा, तू ने पूरी रीति से मेरे परमेश्वर यहोवा की बातों का अनुकरण किया है, इस कारण नि:सन्देह जिस भूमि पर तू अपने पांव धर आया है वह सदा के लिये तेरा और तेरे वंश का भाग होगी। 
Joshua 14:10 और अब देख, जब से यहोवा ने मूसा से यह वचन कहा था तब से पैंतालीस वर्ष हो चुके हैं, जिन में इस्राएली जंगल में घूमते फिरते रहे; उन में यहोवा ने अपने कहने के अनुसार मुझे जीवित रखा है; और अब मैं पचासी वर्ष का हूं। 
Joshua 14:11 जितना बल मूसा के भेजने के दिन मुझ में था उतना बल अभी तक मुझ में है; युद्ध करने, वा भीतर बाहर आने जाने के लिये जितनी उस समय मुझ मे सामर्थ्य थी उतनी ही अब भी मुझ में सामर्थ्य है। 
Joshua 14:12 इसलिये अब वह पहाड़ी मुझे दे जिसकी चर्चा यहोवा ने उस दिन की थी; तू ने तो उस दिन सुना होगा कि उस में अनाकवंशी रहते हैं, और बड़े बड़े गढ़ वाले नगर भी हैं; परन्तु क्या जाने संभव है कि यहोवा मेरे संग रहे, और उसके कहने के अनुसार मैं उन्हें उनके देश से निकाल दूं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 51-53
  • रोमियों 2


शनिवार, 13 जुलाई 2013

उपयोगी

   अपना 60वाँ जन्म दिन मनाने पर जीवन के प्रति मेरा दृष्टिकोण बहुत बदल गया, क्योंकि मैं सोचा करता था कि 60 वर्ष के लोग वास्तव में बहुत बुढ़े हो जाते हैं। अब मैं विचार करने और गिनने लगा कि मेरे जीवन में और कितने उपयोगी वर्ष बचे हैं, और मैंने अपने अन्दाज़े से 10 वर्ष और निर्धारित कर लिए। मैं इसी सीमा को ध्यान में रखे हुए कार्य करता रहा, जब तक कि मुझे ध्यान नहीं आया कि मेरा एक सहयोगी है जो अब 85 वर्ष का है और अपनी कार्य क्षमता के कारण अभी भी बहुत उपयोगी बना हुआ है। इसलिए मैं उसके पास गया और उससे पूछा कि उसके अनुभव के आधार पर 60 वर्ष की आयु के बाद जीवन कैसा होता है? उसने मुझे बताया कि पिछले 25 वर्षों में प्रभु ने उसे अद्भुत रीति से उपयोग किया है और सेवकाई के बहुत से अवसर दिए हैं; आयु बढ़ने से प्रभु के लिए उसकी उपयोगिता बिलकुल भी कम नहीं हुई है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस अपने लिए एक स्थान पर "बूढ़ा" शब्द प्रयोग करता है, जो मेरी विचारधारा के अनुरूप प्रतीत होता है: "तौभी मुझ बूढ़े पौलुस को जो अब मसीह यीशु के लिये कैदी हूं, यह और भी भला जान पड़ा कि प्रेम से बिनती करूं। मैं अपने बच्‍चे उनेसिमुस के लिये जो मुझ से मेरी कैद में जन्मा है तुझ से बिनती करता हूं (फिलेमौन 1:9-10)। इस पत्री में पौलुस अपने मित्र फिलेमौन से आग्रह कर रहा था कि वह अपने भगोड़े दास ओनिसिमस को वापस स्वीकार कर ले, क्योंकि ओनिसेमस भी अब प्रभु यीशु का अनुयायी और पौलुस का सहयोगी हो गया था। बाइबल विशेषज्ञों का मानना है कि जब पौलुस ने यह पत्री लिखी थी तब संभवतः उसकी आयु 40-50 वर्ष के आस-पास की होगी; आज के मापदण्डों के हिसाब से वह एक प्रौढ़ नागरिक तो कतई नहीं माना जाता - लेकिन उन दिनों जीवन काल छोटे ही होते थे। अपनी उम्र का अंदाज़ा करते हुए भी पौलुस आगे भी कई वर्षों तक प्रभु की सेवा करता रहा और प्रभु यीशु के लिए उपयोगी बना रहा।

   हो सकता है कि हम शारीरिक परिस्थितियों या अन्य किसी गतिरोध का सामना कर रहे हों, लेकिन ये बातें हमें हमारे उद्धारकर्ता प्रभु यीशु के लिए हमें उपयोगी होने से कभी रोक नहीं सकतीं; उन परिस्थितियों में भी हम से जो भी जैसा भी बन पड़ता है हम प्रभु के लिए करते रहें। संसार तो हमें एक आयु के बाद अपनी सेवा से हटा देता है - हमें ’सेवा-निवृत’ कर देता है, हमारे लिए आमदनी के द्वार बन्द कर देता है; लेकिन हमारा प्रेमी परमेश्वर पिता हमें अपने लिए सदा उपयोगी बनाए रखता है और हमारे लिए उससे मिलने वाली आशीषों के द्वार कभी बन्द नहीं होते। इस पृथ्वी के जीवन से विदा लेकर हमारे उसके पास पहुँचने तक उसके लिए हमारी उपयोगिता और हमारे लिए उससे मिलने वाले आशीषें एकत्रित करने के अवसर सदा बने ही रहते हैं। - डेनिस फिशर


यदि आप राज़ी हैं तो परमेश्वर किसी भी उम्र में आपको अपने लिए उपयोगी बना सकता है।

तौभी मुझ बूढ़े पौलुस को जो अब मसीह यीशु के लिये कैदी हूं, यह और भी भला जान पड़ा कि प्रेम से बिनती करूं। मैं अपने बच्‍चे उनेसिमुस के लिये जो मुझ से मेरी कैद में जन्मा है तुझ से बिनती करता हूं। - फिलेमौन 1:9-10

बाइबल पाठ: फिलेमौन 1:1-9
Philemon 1:1 पौलुस की ओर से जो मसीह यीशु का कैदी है, और भाई तिमुथियुस की ओर से हमारे प्रिय सहकर्मी फिलेमोन।
Philemon 1:2 और बहिन अफिफया, और हमारे साथी योद्धा अरखिप्‍पुस और फिलेमोन के घर की कलीसिया के नाम।
Philemon 1:3 हमारे पिता परमेश्वर और प्रभु यीशु मसीह की ओर से अनुग्रह और शान्‍ति तुम्हें मिलती रहे।
Philemon 1:4 मैं तेरे उस प्रेम और विश्वास की चर्चा सुन कर, जो सब पवित्र लोगों के साथ और प्रभु यीशु पर है।
Philemon 1:5 सदा परमेश्वर का धन्यवाद करता हूं; और अपनी प्रार्थनाओं में भी तुझे स्मरण करता हूं।
Philemon 1:6 कि तेरा विश्वास में सहभागी होना तुम्हारी सारी भलाई की पहिचान में मसीह के लिये प्रभावशाली हो।
Philemon 1:7 क्योंकि हे भाई, मुझे तेरे प्रेम से बहुत आनन्द और शान्‍ति मिली, इसलिये, कि तेरे द्वारा पवित्र लोगों के मन हरे भरे हो गए हैं।
Philemon 1:8 इसलिये यद्यपि मुझे मसीह में बड़ा हियाव तो है, कि जो बात ठीक है, उस की आज्ञा तुझे दूं।
Philemon 1:9 तौभी मुझ बूढ़े पौलुस को जो अब मसीह यीशु के लिये कैदी हूं, यह और भी भला जान पड़ा कि प्रेम से बिनती करूं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 7-9 
  • प्रेरितों 18


मंगलवार, 21 मई 2013

सदा जवान


   हाल ही में मैंने एक सुन्दर, सफेद बालों वाली वृद्ध महिला को देखा, उसकी टी-शर्ट पर लिखा था, "मैं 80 की नहीं, 18 की ही हूँ; साथ में बस 62 का अनुभव है।" समाचार पत्रों के निधन एवं शोक सूचनाओं में छपी तस्वीरें और उनके नीचे लिखे वाक्य भी कभी कभी रोचक होते हैं; वहाँ एक नौजवान फौजी के मुस्कुराते हुए चेहरे की तस्वीर के नीचे लिखा मिलेगा "उम्र 92 वर्ष; देश के लिए दूसरे विश्व युद्ध में भाग लिया"। या किसी चमकती हुई आंखों वाली नवयुवती की तस्वीर के नीचे लिखा होगा, "89 वर्ष की जवान; आर्थिक मन्दी के काल में पली-बड़ी हुई।" इन सभी सन्देशों का अर्थ स्पष्ट है - "हम सदा ही ऐसे नहीं थे; कभी हम भी जवान थे।"

   अकसर जो एक लंबा जीवन जी चुके होते हैं वे अपने आप को घर-परिवार तथा समाज में हाशिए पर रखा हुआ अनुभव करते हैं, मानो कि अब उनका समय बीत गया है, उनकी उपयोगिता समाप्त हो गई है और अब बस समय पूरा होने का ही इंतिज़ार है। लेकिन परमेश्वर का वचन बाइबल हमें इससे अलग ही दृष्टिकोण देती है। भजन 92 हमें बताता है कि हम चाहे उम्र में कितने भी वृद्ध हों लेकिन हम फिर भी नए फलों से लदे जीवन व्यतीत कर सकते हैं। परमेश्वर के विश्वासी, सदा उपजाऊ रहने वाली तथा भली भांति सींची हुई भूमि के बगीचे में रोपे गए वृक्ष अर्थात परमेश्वर की संगति में रोपे गए हैं और "वे पुराने होने पर भी फलते रहेंगे, और रस भरे और लहलहाते रहेंगे" (भजन 92:14)। प्रभु यीशु ने अपने अनुयायियों से वायदा किया कि "मैं दाखलता हूं: तुम डालियां हो; जो मुझ में बना रहता है, और मैं उस में, वह बहुत फल फलता है..." (यूहन्ना 15:5)।

   हाँ, एक अवस्था में आकर माँसपेशियाँ दुखने लगती हैं, जोड़ों में दर्द रहने लगता है, जीवन की गति कुछ शिथिल पड़ जाती है, लेकिन हर मसीही विश्वासी को परमेश्वर का यह आश्वासन है: "इसलिये हम हियाव नहीं छोड़ते; यद्यपि हमारा बाहरी मनुष्यत्‍व नाश भी होता जाता है, तौभी हमारा भीतरी मनुष्यत्‍व दिन प्रतिदिन नया होता जाता है" (2 कुरिन्थियों 4:16)। यदि हम परमेश्वर की संगति में बने रहे हैं तो हमारी शारीरिक अवस्था चाहे कितनी भी क्यों ना हो जाए, हम मन से सदा ’जवानी और उसके साथ कुछ वर्षों के अनुभव वाल’ ही रह सकते हैं; ऐसे अनुभव जो बहुमूल्य हैं, परमेश्वर की संगति से मिले हैं और हर उम्र के व्यक्ति के लिए लाभकारी हैं तथा जिनकी उपयोगिता हमें जवानों के समान ही उपयोगी और फलवन्त बनाए रखती है। - सिंडी हैस कैस्पर


विश्वासयोग्यता परमेश्वर की माँग है; फलवन्त जीवन उसका पुरुस्कार।

वे पुराने होने पर भी फलते रहेंगे, और रस भरे और लहलहाते रहेंगे - भजन 92:14

बाइबल पाठ: भजन 92
Psalms 92:1 यहोवा का धन्यवाद करना भला है, हे परमप्रधान, तेरे नाम का भजन गाना;
Psalms 92:2 प्रात:काल को तेरी करूणा, और प्रति रात तेरी सच्चाई का प्रचार करना,
Psalms 92:3 दस तार वाले बाजे और सारंगी पर, और वीणा पर गम्भीर स्वर से गाना भला है।
Psalms 92:4 क्योंकि, हे यहोवा, तू ने मुझ को अपने काम से आनन्दित किया है; और मैं तेरे हाथों के कामों के कारण जयजयकार करूंगा।
Psalms 92:5 हे यहोवा, तेरे काम क्या ही बड़े हैं! तेरी कल्पनाएं बहुत गम्भीर हैं!
Psalms 92:6 पशु समान मनुष्य इस को नहीं समझता, और मूर्ख इसका विचार नहीं करता:
Psalms 92:7 कि दुष्ट जो घास की नाईं फूलते-फलते हैं, और सब अनर्थकारी जो प्रफुल्लित होते हैं, यह इसलिये होता है, कि वे सर्वदा के लिये नाश हो जाएं,
Psalms 92:8 परन्तु हे यहोवा, तू सदा विराजमान रहेगा।
Psalms 92:9 क्योंकि हे यहोवा, तेरे शत्रु, हां तेरे शत्रु नाश होंगे; सब अनर्थकारी तितर बितर होंगे।
Psalms 92:10 परन्तु मेरा सींग तू ने जंगली सांढ़ का सा ऊंचा किया है; मैं टटके तेल से चुपड़ा गया हूं।
Psalms 92:11 और मैं अपने द्रोहियों पर दृष्टि कर के, और उन कुकर्मियों का हाल मेरे विरुद्ध उठे थे, सुनकर सन्तुष्ट हुआ हूं।
Psalms 92:12 धर्मी लोग खजूर की नाईं फूले फलेंगे, और लबानोन के देवदार की नाईं बढ़ते रहेंगे।
Psalms 92:13 वे यहोवा के भवन में रोपे जा कर, हमारे परमेश्वर के आंगनों में फूले फलेंगे।
Psalms 92:14 वे पुराने होने पर भी फलते रहेंगे, और रस भरे और लहलहाते रहेंगे,
Psalms 92:15 जिस से यह प्रगट हो, कि यहोवा सीधा है; वह मेरी चट्टान है, और उस में कुटिलता कुछ भी नहीं।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 इतिहास 13-15 
  • यूहन्ना 7:1-27


रविवार, 14 अप्रैल 2013

उद्देश्य


   अपनी पुस्तक Life after Heart Surgery (हृदय शल्य चिकित्सा के बाद जीवन) में डेविड बर्क ने मृत्यु से अपना आमना-सामना होने के बारे में बताया है। अपने हृदय पर हुए दूसरे ऑपरेशन के बाद अस्पताल के बिस्तर पर लेटे हुए उसे असहनीय पीड़ा हुई और उसके लिए सांस लेना भी दूभर हो गया। यह समझकर कि अब अन्त निकट है और वह अनन्त में प्रवेश करने वाला है उसने एक बार फिर परमेश्वर से प्रार्थना करी, पापों से मिली क्षमा के लिए धन्यवाद किया और उस पर अपना विश्वास पुनः व्यक्त किया।

   डेविड स्वर्ग पहुँच कर अपने पिता से मिलने के बारे में सोचने लगा जिनकी मृत्यु कई वर्ष पहले हो गई थी, इतने में नर्स ने पूछा कि वह अब कैसा अनुभव कर रहा है। डेविड ने उत्तर दिया कि "ठीक है! बस अब  स्वर्ग जाकर परमेश्वर से मिलने की प्रतीक्षा में हूँ।" नर्स ने उसे उत्तर दिया, "मित्र, मेरे कार्य समय में तो मैं यह नहीं होने दूँगी!" और थोड़े ही समय में डॉक्टर फिर से उसका ऑपरेशन कर रहे थे। उसकी छाती फिर से खोली गई और वहाँ एकत्रित दो लिटर पानी निकाला गया। इसके पश्चात डेविड स्वस्थ होने लगा और ठीक होकर घर जा सका।

   हमारे लिए यह विचार करना कि पृथ्वी पर हमारे अन्तिम क्षण कैसे होंगे, और हम उनका सामना कैसे करेंगे कोई सामान्य बात नहीं है। लेकिन जो प्रभु यीशु में पापों की क्षमा और उद्धार पाने के बाद मृत्यु प्राप्त करते हैं उन्हें यह पता है कि वे धन्य हैं (प्रकशितवाक्य 14:13) और परमेश्वर की नज़रों में उनकी मृत्यु बहुमूल्य है (भजन 116:15)।

   हमारे अस्तित्व में आने से पहले ही परमेश्वर ने हमारे समयों और दिनों को निर्धारित कर दिया था (भजन 139:16) और हम आज केवल इसलिए जीवित हैं क्योंकि सर्वशक्तिमान की श्वास से हमें जीवन मिलता है (अय्युब 33:4)। यद्यपि हम यह नहीं जानते कि हमारी कितनी सांसें शेष हैं, लेकिन हमें यह आशवासन है कि परमेश्वर इस बात को जानता है।

   हमारा उद्देश्य अपने जीवन के शेष समय के बारे में चिंतित होना नहीं वरन इस बात की चिंता हो कि जीवन और मृत्यु दोनों में हम परमेश्वर को भाते रहें (2 कुरिन्थियों 5:9) और हमारे जीवन तथा मृत्यु, दोनों ही से परमेश्वर की महिमा हो। तब ही हम प्रेरित पौलुस के समान कह सकेंगे: "क्योंकि मेरे लिये जीवित रहना मसीह है, और मर जाना लाभ है" (फिलिप्पियों 1:21)। सिंडी हैस कैस्पर


अपनी पहली श्वास से लेकर अन्तिम श्वास तक हम परमेश्वर की देखरेख में रहते हैं।

मुझे ईश्वर की आत्मा ने बनाया है, और सर्वशक्तिमान की सांस से मुझे जीवन मिलता है। - अय्युब 33:4 

बाइबल पाठ: भजन 139:13-18
Psalms 139:13 मेरे मन का स्वामी तो तू है; तू ने मुझे माता के गर्भ में रचा।
Psalms 139:14 मैं तेरा धन्यवाद करूंगा, इसलिये कि मैं भयानक और अद्भुत रीति से रचा गया हूं। तेरे काम तो आश्चर्य के हैं, और मैं इसे भली भांति जानता हूं।
Psalms 139:15 जब मैं गुप्त में बनाया जाता, और पृथ्वी के नीचे स्थानों में रचा जाता था, तब मेरी हडि्डयां तुझ से छिपी न थीं।
Psalms 139:16 तेरी आंखों ने मेरे बेडौल तत्व को देखा; और मेरे सब अंग जो दिन दिन बनते जाते थे वे रचे जाने से पहिले तेरी पुस्तक में लिखे हुए थे।
Psalms 139:17 और मेरे लिये तो हे ईश्वर, तेरे विचार क्या ही बहुमूल्य हैं! उनकी संख्या का जोड़ कैसा बड़ा है।
Psalms 139:18 यदि मैं उन को गिनता तो वे बालू के किनकों से भी अधिक ठहरते। जब मैं जाग उठता हूं, तब भी तेरे संग रहता हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 25-26
  • लूका 12:32-59


रविवार, 26 अगस्त 2012

बुज़ुर्ग या बेहतर?


   हम जानने लगते हैं कि हम उम्र में बढ़ रहे हैं जब हम कहना आरंभ कर देते हैं कि, "क्या आप विश्वास कर सकते हैं कि ये व्यावासायिक खिलाड़ी कितनी कम उम्र के हैं?" और बुज़ुर्ग होने का यह निश्चित चिन्ह है जब आप अपने किसी हम-उम्र मित्र से मिलने पर उससे यह नहीं पूछते, "कैसे हो?" परन्तु, जैसे उसे देखकर अचरज हुआ हो, उस से कहते हैं, "अरे तुम तो बड़े अच्छे और स्वस्थ दिख रहे हो!"

   उम्र में बढ़ना अवश्यंभावी है, इसे टाला या रोका नहीं जा सकता। दुर्भाग्यवश हमारा समाज हमें इसे छुपाना और इससे भयभीत रहना सिखाता है। परन्तु उम्र में बढ़ना मसीही विश्वासियों के लिए अद्भुत बात है और और उनके बेहतर होते जाने का समय भी। जैसे प्रेरित पौलुस ने परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखा : "इसलिये हम हियाव नहीं छोड़ते; यद्यपि हमारा बाहरी मनुष्यत्‍व नाश भी होता जाता है, तौभी हमारा भीतरी मनुष्यत्‍व दिन प्रतिदिन नया होता जाता है" (२ कुरिन्थियों ४:१६)।

   जैसे कि शारीरिक चिन्ह प्रगट करते हैं कि हम उम्र में बढ़ रहे हैं, वैसे ही कुछ बातें प्रगट करती हैं कि हम बेहतर हो रहे हैं। बजाए इसके कि उम्र के साथ साथ वे अधिक चिड़चिड़ाने और खिसियाने वाले बनें, या असहनशील होते जाएं, या लोगों से प्रेमपूर्ण व्यवाहार छोड़ दें, एक प्रौढ़ मसीही विश्वासी क्षमा करने, दूसरों की चिंता और देखभाल करने तथा प्रेमपूर्ण व्यवाहार प्रदर्शित करने में और बेहतर होता जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि उसके लिए बढ़ती उम्र अपने उद्धारकर्ता प्रभु यीशु की समानता में बढ़ते जाने की जीवन यात्रा का एक भाग ही है। इसका तात्पर्य है कि मसीही विश्वासियों के लिए समय के साथ साथ मसीह की समानता में अपने मन और अपनी प्रवृत्तियों को ढालते जाना एक स्वाभाविक बात है और उनके जीवन मसीह के चरित्र और दिल जीत लेने वाले स्वभाव को अधिकाधिक प्रतिबिंबित करते रहते हैं।

   इसलिए आइये, उम्र बढ़ने के साथ मसीह की समानता में और अधिक ढलने के अवसर का और भी अधिक लाभ उठाएं। तब हमारे मित्र तथा आस-पास वाले पहचानेंगे कि हम बुज़ुर्ग नहीं बेहतर होते जा रहे हैं। - जो स्टोवैल


मसीह के अनुयायी होने के कारण केवल बुज़ुर्ग ही ना हों, वरन साथ ही बेहतर भी होते जाएं।

इसलिये हम हियाव नहीं छोड़ते; यद्यपि हमारा बाहरी मनुष्यत्‍व नाश भी होता जाता है, तौभी हमारा भीतरी मनुष्यत्‍व दिन प्रतिदिन नया होता जाता है। - २ कुरिन्थियों ४:१६

बाइबल पाठ: २ कुरिन्थियों ४:१६-१८
2Co 4:16  इसलिये हम हियाव नहीं छोड़ते; यद्यपि हमारा बाहरी मनुष्यत्‍व नाश भी होता जाता है, तौभी हमारा भीतरी मनुष्यत्‍व दिन प्रतिदिन नया होता जाता है। 
2Co 4:17  क्‍योंकि हमारा पल भर का हल्का सा क्‍लेश हमारे लिये बहुत ही महत्‍वपूर्ण और अनन्‍त जीवन महिमा उत्‍पन्न करता जाता है। 
2Co 4:18  और हम तो देखी हुई वस्‍तुओं को नहीं परन्‍तु अनदेखी वस्‍तुओं को देखते रहते हैं, क्‍योंकि देखी हुई वस्‍तुएं थोड़े ही दिन की हैं, परन्‍तु अनदेखी वस्‍तुएं सदा बनी रहती हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन ११९:८९-१७६ 
  • १ कुरिन्थियों ८