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Saturday, October 14, 2017

भरोसा


   जनवरी 1915 में, एन्डयोरेंस नामक जलपोत अन्टारिकटिका के तट के निकट बर्फ में फंसकर नष्ट हो गया। उस जलपोत में सवार, अर्नेस्ट शैकलटन के नेतृत्व में दक्षिणी ध्रुव पर खोज करने आए लोगों का दल, बचने के लिए तीन छोटी नौकाओं में होकर एलीफेंट द्वीप पहुँचा। अब वे एक ऐसे निर्जन द्वीप पर फंस गए थे जो सामान्य व्यापारी जल मार्गों से दूर स्थित था। उनके पास एक ही आशा थी; 24 अप्रैल 1916 को 22 लोगों के सामने शैकलटन और उसके पाँच साथी, एक छोटी नौका पर 800 मील दूर स्थित एक अन्य द्वीप, साऊथ जौर्जिया, के लिए निकल पड़े। परिस्थितियाँ और संभावनाएं असंभव प्रतीत होती थीं, और यदि वे नाविक अपने इस प्रयास में विफल हो जाते तो सभी की मृत्यु निश्चित थी। सोचिए वह कितने आनन्द का समय था, जब चार माह से भी अधिक समय के बाद एलीफेंट द्वीप पर प्रतीक्षा कर रहे उन 22 लोगों ने क्षितिज पर एक नौका को आते देखा और उस नौका में सबसे आगे शैकलटन खड़े थे, और ऊँची आवाज़ में पूछ रहे थे, "क्या आप सब ठीक हैं?" और द्वीप से उत्तर मिला, "सब ठीक! सब सुरक्षित!"

   उन लोगों को इतने महीनों तक एक साथ और सुरक्षित तथा जीवित किस बात ने रखा? एक व्यक्ति में रखे गए भरोसे ने; उन्हें विश्वास था कि शैकलटन उन्हें बचाने के लिए कोई न कोई उपाय अवश्य निकाल लेंगे।

   भरोसे और आशा का इस मानवीय उदाहरण में, परमेश्वर के वचन बाइबल में, इब्रानियों 11 में दिए गए विश्वास के नायकों के भरोसे की गूँज है। इन नायकों के "विश्वास आशा की हुई वस्‍तुओं का निश्‍चय, और अनदेखी वस्‍तुओं का प्रमाण है" (इब्रानियों 11:1) में भरोसे ने उन्हें बड़ी कठिनाईयों और परीक्षाओं में भी परमेश्वर में अपने विश्वास में स्थिर बनाए रखा।

   आज जब हम अपने जीवन की परिस्थितियों और कठिनाईयों की ओर देखते हैं, तो उनसे अभिभूत होकर हताश न हो जाएं। हम अपने उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह पर अपने भरोसे में दृढ़ बने रहें - वह अपने वायदे के अनुरूप सदा हमारी भलाई के लिए कार्यरत रहता है। - रैंडी किल्गोर


हमारे सबसे अन्धकारमय दिन में भी, प्रभु यीशु में आशा तेज़ी से चमकती रहती है।

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रो्मियों 8:28

बाइबल पाठ: इब्रानियों 11:8-16
Hebrews 11:8 विश्वास ही से इब्राहीम जब बुलाया गया तो आज्ञा मानकर ऐसी जगह निकल गया जिसे मीरास में लेने वाला था, और यह न जानता था, कि मैं किधर जाता हूं; तौभी निकल गया। 
Hebrews 11:9 विश्वास ही से उसने प्रतिज्ञा किए हुए देश में जैसे पराए देश में परदेशी रह कर इसहाक और याकूब समेत जो उसके साथ उसी प्रतिज्ञा के वारिस थे, तम्बूओं में वास किया। 
Hebrews 11:10 क्योंकि वह उस स्थिर नेव वाले नगर की बाट जोहता था, जिस का रचने वाला और बनाने वाला परमेश्वर है। 
Hebrews 11:11 विश्वास से सारा ने आप बूढ़ी होने पर भी गर्भ धारण करने की सामर्थ पाई; क्योंकि उसने प्रतिज्ञा करने वाले को सच्चा जाना था। 
Hebrews 11:12 इस कारण एक ही जन से जो मरा हुआ सा था, आकाश के तारों और समुद्र के तीर के बालू के समान, अनगिनित वंश उत्पन्न हुआ।
Hebrews 11:13 ये सब विश्वास ही की दशा में मरे; और उन्होंने प्रतिज्ञा की हुई वस्तुएं नहीं पाईं; पर उन्हें दूर से देखकर आनन्‍दित हुए और मान लिया, कि हम पृथ्वी पर परदेशी और बाहरी हैं। 
Hebrews 11:14 जो ऐसी ऐसी बातें कहते हैं, वे प्रगट करते हैं, कि स्‍वदेश की खोज में हैं। 
Hebrews 11:15 और जिस देश से वे निकल आए थे, यदि उस की सुधि करते तो उन्हें लौट जाने का अवसर था। 
Hebrews 11:16 पर वे एक उत्तम अर्थात स्‍वर्गीय देश के अभिलाषी हैं, इसी लिये परमेश्वर उन का परमेश्वर कहलाने में उन से नहीं लजाता, सो उसने उन के लिये एक नगर तैयार किया है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 43-44
  • 1 थिस्सलुनीकियों 2