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मंगलवार, 21 अक्टूबर 2025

Worship – 16 - The Material Blessings of Worship (2) / आराधना – 16 - आराधना के भौतिक लाभ (2)

 

आराधना – 16

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आराधना के भौतिक लाभ (2)

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    पिछले लेख में हमने देखना आरम्भ किया था कि परमेश्वर की आराधना के न केवल आत्मिक लाभ हैं, बल्कि भौतिक लाभ भी हैं। किन्तु इसे परमेश्वर से अपनी इच्छा के अनुसार कुछ प्राप्त करने के लिए, अथवा बाइबल के प्रतिकूल और भ्रष्ट “सुसमाचार द्वारा संपन्नता” की धारणा का समर्थन करने के लिए प्रयोग नहीं किया जा सकता है। हमने इस आराधना को समझने की श्रृंखला के आरंभिक लेखों में देखा था कि आराधना परमेश्वर को देना हैं और इस का एक स्वरूप परमेश्वर को भौतिक वस्तुएं अर्पित करना भी है। परमेश्वर का वचन हमें सिखाता है, “धोखा न खाओ, परमेश्वर ठट्ठों में नहीं उड़ाया जाता, क्योंकि मनुष्य जो कुछ बोता है, वही काटेगा” (गलातियों 6:7); और इसी बात को थोड़े से भिन्न रूप में, प्रभु के काम के लिए भौतिक वस्तुओं को देने के सन्दर्भ में इस प्रकार से कहा गया है “परन्तु बात तो यह है, कि जो थोड़ा बोता है वह थोड़ा काटेगा भी; और जो बहुत बोता है, वह बहुत काटेगा” (2 कुरिन्थियों 9:6)। दूसरे शब्दों में, चाहे आत्मिक लाभ हों या शारीरिक अथवा भौतिक लाभ, प्रभु से मिलने वाला परिणाम, हमारे द्वारा मात्रा एवं गुणवत्ता में प्रभु को दिए जाने पर ही निर्भर है।

    जैसा हम पहले देख चुके हैं, प्रार्थना के द्वारा हम उतना ही प्राप्त करने की आशा रख सकते हैं, जितना हमारे विचारों और हमारी समझ के अनुसार हमारी आवश्यकताओं की सीमा है। किन्तु आराधना, अर्थात विभिन्न रीतियों से परमेश्वर को अपना प्रेम और आदर अर्पित करना, हमें हमारी कल्पना की सीमाओं से परे आशीषित करता है (1 कुरिन्थियों 2:9)।

    मैं यह अपने व्यक्तिगत अनुभव, तथा परमेश्वर के अनेकों अन्य लोगों के अनुभवों के आधार पर कहता हूँ - परमेश्वर को महिमा दीजिए, वह आपको महिमान्वित करवाएगा, उसे आदर दीजिए, वह आपका आदर करवाएगा, उसका ध्यान रखिए, वह आपका ध्यान रखवाएगा, उसे श्रद्धा और भक्ति दीजिए, वह आपके प्रति लोगों में सम्मान और श्रद्धा उत्पन्न करेगा, उसकी प्रशंसा और गुणानुवाद कीजिए, वह आपकी प्रशंसा करवाएगा, उसे अपना समय और योग्यताएँ दीजिए, वह आपको और अधिक समय और योग्यता देगा, उसे अपने जीवन में प्राथमिकता दीजिए, वह आपको प्राथमिकता देगा, आप उसके लिए कार्य कीजिए, वह आपके लिए कार्य करेगा, आप पृथ्वी पर उसकी आवश्यकताओं की पूर्ति कीजिए, और वह पृथ्वी तथा स्वर्ग दोनों स्थानों पर आपकी आवश्यकताएँ पूरी करेगा। यह सभी कठिन और समझने से बाहर प्रतीत हो सकता है; किन्तु विश्वास के साथ आगे बढ़िए, करना आरंभ कीजिए, और परमेश्वर आपको कभी निराश नहीं करेगा; उसने स्वयं ही कहा है, “परखकर देखो कि यहोवा कैसा भला है! क्या ही धन्य है वह पुरुष जो उसकी शरण लेता है” (भजन 34:8)।

    परमेश्वर का अपने लोगों के लिए हमेशा ही यह वायदा रहा है कि उनके सोचने-समझने से बढ़कर बहुतायत का प्रतिफल उसने उनके लिए तैयार रखा हुआ है, जो परमेश्वर के निर्देशों के अनुसार उसके लिए कार्य करते हैं। जब परमेश्वर ने इस्राएलियों को अपनी व्यवस्था और निर्देश दिए थे, तो उस व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण भाग परमेश्वर के समक्ष, उसके भवन में उसके लोगों के द्वारा उनके दशमांश और भौतिक समृद्धि के भाग को लाना, तथा निर्धनों की आवश्यकताओं को पूरा करना था; अर्थात परमेश्वर को देना, भौतिक वस्तुओं को अर्पित करने के द्वारा उसकी आराधना करना था। और यदि यह खराई से किया जाये, तो परमेश्वर का वायदा है कि प्रतिफल के रूप में, उन्हें हमेशा उसकी सुरक्षा, सहायता, स्वास्थ्य, और भरपूरी के साथ उनकी सभी आवश्यकताओं की पूर्ति होती रहेगी।

    किन्तु इसके साथ ही हम इस्राएल के इतिहास से यह भी देखते हैं कि जब भी परमेश्वर के लोगों ने अपनी भेंट, बलिदानों, और आराधना में केवल औपचारिकता पूरा करने के लिये, परमेश्वर को उत्तम वस्तुओं तथा प्रथम-फलों के स्थान पर खराब या घटिया वस्तुएँ भेंट बलिदानों में अर्पित कीं, उनके साथ परिणाम बुरा ही हुआ। इसे हम पुराने नियम की अन्तिम पुस्तक, मलाकी में परमेश्वर के द्वारा कही गई बातों (मलाकी 1:6-10) से स्पष्ट देख सकते हैं। इस भाग में ऐसा करने को परमेश्वर ने उसका निरादर और अपमान करना, बुरा करना, उसे अशुद्ध ठहराना, आदि कहता है। फिर पद 9 में इसके बारे में उन्हें चेतावनी देता है, और पद 10 में व्यर्थ भेंट लाने की बजाए, मंदिर को ही बन्द कर देने के लिये कहता है। और इसके बाद, नए नियम का आरम्भ होने तक, लगभग 400 वर्ष तक, फिर परमेश्वर ने इस्राएल से कोई बात नहीं की, कोई निर्देश नहीं दिये, कोई नबी नहीं भेजा, उनकी ढिठाई के कारण शान्त होकर पीछे हट गया।

    अगले लेख से हम बाइबल में दिये गये इस्राएल के इतिहास से इन बातों के कुछ ठोस उदाहरण देखेंगे, और परमेश्वर की इस विश्वासयोग्यता के बारे में समझेंगे।

    यदि आपने प्रभु की शिष्यता को अभी तक स्वीकार नहीं किया है, तो अपने अनन्त जीवन और स्वर्गीय आशीषों को सुनिश्चित करने के लिए अभी प्रभु यीशु के पक्ष में अपना निर्णय कर लीजिए। जहाँ प्रभु की आज्ञाकारिता है, उसके वचन की बातों का आदर और पालन है, वहाँ प्रभु की आशीष और सुरक्षा भी है। प्रभु यीशु से अपने पापों के लिए क्षमा माँगकर, स्वेच्छा से तथा सच्चे मन से अपने आप को उसकी अधीनता में समर्पित कर दीजिए – उद्धार और स्वर्गीय जीवन का यही एकमात्र मार्ग है। आपको स्वेच्छा और सच्चे मन से प्रभु यीशु मसीह से केवल एक छोटी प्रार्थना करनी है, और साथ ही अपना जीवन उसे पूर्णतः समर्पित करना है। आप यह प्रार्थना और समर्पण कुछ इस प्रकार से भी कर सकते हैं, “प्रभु यीशु मैं आपका धन्यवाद करता हूँ कि आपने मेरे पापों की क्षमा और समाधान के लिए उन पापों को अपने ऊपर लिया, उनके कारण मेरे स्थान पर क्रूस की मृत्यु सही, गाड़े गए, और मेरे उद्धार के लिए आप तीसरे दिन जी भी उठे, और आज जीवित प्रभु परमेश्वर हैं। कृपया मेरे पापों को क्षमा करें, मुझे अपनी शरण में लें, और मुझे अपना शिष्य बना लें। मैं अपना जीवन आप के हाथों में समर्पित करता हूँ।” सच्चे और समर्पित मन से की गई आपकी एक प्रार्थना आपके वर्तमान तथा भविष्य को, इस लोक के और परलोक के जीवन को, अनन्तकाल के लिए स्वर्गीय एवं आशीषित बना देगी।


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Worship – 16

English Translation

The Material Blessings of Worship (2)

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Discussion Audio                                                           Discussion Video


    In the last article we had begun seeing that worshipping God not only has spiritual benefits, but also has material benefits as well. But this cannot be used to try to manipulate God into doing or providing certain things according to our fancy; nor is it meant to support the UnBiblical and corrupt concept generally known as “the prosperity gospel.” We had seen in the initial part of this series on Understanding Worship, that a form of worship, i.e., of giving to God, is through offering material things to God. God’s Word also teaches: “Do not be deceived, God is not mocked; for whatever a man sows, that he will also reap” (Galatians 6:7); and this is stated in a slightly different form, in context of giving out of material possessions for the Lord’s work as, “But this I say: He who sows sparingly will also reap sparingly, and he who sows bountifully will also reap bountifully” (2 Corinthians 9:6). In other words, whether spiritually or materially, our input for the Lord, in quantity as well as quality determines the output we will receive from the Lord.

    As we have seen earlier, through prayer we will only get that which is within the limits of our thoughts and perceived needs; but worship, i.e., expressing our love and adoration for the Lord God in various ways, will enrich and bless us beyond the limits of our imagination (1 Corinthians 2:9).

    I say this from personal experience, and on the basis of experiences of many other people of God – give glory to God, He will give glory back to you; give honor, get back honor; give respect, get back respect; give awe and reverence, get back awe and reverence; exalt Him, He will exalt you; give Him of your time and talents, He will give time and talents back into your lives; give Him priority, He will provide priority for you; work for Him, He will work for you; fulfill His needs on earth, He will fulfill your needs not only on earth but in heaven as well. All this may seem difficult and inexplicable; but step out in faith, start doing it, and God will not let you down; for He Himself has said “Oh, taste and see that the Lord is good; Blessed is the man who trusts in Him!” (Psalm 34:8).

    An abundant-beyond-belief return on any investments kept ready and available by God to give to those who work for Him as per His instructions, has always been an assurance from God for His people. When God gave His Law to the Israelites, a significant section of the law was on bringing tithes, offerings, first-fruits of produce and of material increase to the house of the Lord, and on meeting the needs of the poor; i.e., giving to God, worshipping God through material things. And when this was done sincerely, then as reward, He has promised to give them continual safety, help, health, and meeting all their needs in abundance.

    But along with this, we also see from the history of Israel, that whenever the people of God started to offer poor quality things instead of the first-fruits and the best, as had been instructed, just to fulfill a formality, the outcome was always bad. We see this very clearly from the book of Malachi, the last book of the Old Testament, from Malachi 1:6-10. We see in these verses that God calls doing this as dishonoring and despising Him, defiling Him, doing evil, etc. Then, in verse 9 He warns them for doing this, in verse 10 says that instead of bringing vain offerings, it is better to shut the Temple. Then after this, till the beginning of the New Testament there is a 400 years period where God stopped communicating with Israel, gave no instructions, sent no prophets, because of their stubbornness, He became silent and stepped back from them.

    From the next article we will start seeing some solid examples about this, and understand God's faithfulness on this count.

    If you have not yet accepted the discipleship of the Lord Jesus, then to ensure your eternal life and heavenly rewards, take a decision in favor of the Lord Jesus now. Wherever there is surrender and obedience towards the Lord Jesus, the Lord’s blessings and safety are also there. If you are still not Born Again, have not obtained salvation, or have not asked the Lord Jesus for forgiveness for your sins, then you have the opportunity to do so right now. A short prayer said voluntarily with a sincere heart, with heartfelt repentance for your sins, and a fully submissive attitude, “Lord Jesus, I confess that I have disobeyed You, and have knowingly or unknowingly, in mind, in thought, in attitude, and in deeds, committed sins. I believe that you have fully borne the punishment of my sins by your sacrifice on the cross, and have paid the full price of those sins for all eternity. Please forgive my sins, change my heart and mind towards you, and make me your disciple, take me with you." God longs for your company and wants to see you blessed, but to make this possible, is your personal decision. Will you not say this prayer now, while you have the time and opportunity to do so – the decision is yours.


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मंगलवार, 13 अप्रैल 2021

साथ

 

          जब उसकी पत्नी एक ऐसी घातक बीमारी से ग्रसित हुई, जिसका कोई इलाज नहीं था, और उसके जीवन के दिन थोड़े ही रह गए, तब माइकल की बहुत लालसा थी, कि उसके समान उसकी पत्नी भी परमेश्वर के साथ अपने संबंध ठीक कर ले और परमेश्वर की अद्भुत शान्ति को अपने जीवन में अनुभव कर ले। माइकल अपनी पत्नी के साथ अपने मसीही विश्वास को बाँट चुका था, लेकिन उसे प्रभु में कोई रुचि नहीं थी। एक दिन जब वह एक स्थानीय पुस्तकों की दुकान में घूम रहा था, तो उसका ध्यान एक पुस्तक पर गया, जिसका शीर्षक था God, Are You There? (परमेश्वर, क्या आप मौजूद हैं?); लेकिन वह निर्णय नहीं कर पा रहा था कि उस पुस्तक के प्रति उसकी पत्नी की प्रतिक्रिया क्या होगी। इसी असमंजस में वह कई बार उस पुस्तकों की दुकान के अन्दर और बाहर आया और गया। आखिरकार उसने उस पुस्तक को खरीद लिया, और अपनी पत्नी को दे दिया; और उसे यह देख कर अचंभा हुआ कि उसकी पत्नी ने उस पुस्तक को स्वीकार कर लिया, और वह उसे पढ़ने लगी। उस पुस्तक ने माइकल की पत्नी के मन को छूआ, और उसने बाइबल पढ़ना भी आरंभ कर दिया। इसके दो सप्ताह पश्चात, माइकल की पत्नी का देहांत हो गया, लेकिन तब तक वह उस अनन्त शान्ति को ग्रहण कर चुकी थी जो प्रभु यीशु से मिलती है, और आश्वस्त थी कि अब यह शान्ति उससे किसी के भी द्वारा, कभी भी नहीं ले ली जाएगी।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि जब परमेश्वर ने मूसा को बुलाया कि उसके लोगों को मिस्र के दासत्व में से निकालकर लाए, तब परमेश्वर ने इसके लिए उसे कोई विशिष्ट अद्भुत ताकत देने का वायदा नहीं किया। वरन परमेश्वर ने उससे यह वायदा किया कि वह स्वयं सदा मूसा के साथ बना रहेगा, “उसने कहा, निश्चय मैं तेरे संग रहूंगा” (निर्गमन 3:12)। प्रभु यीशु द्वारा अपने क्रूस पर चढ़ाए जाने से पहले शिष्यों से कहे गए अंतिम शब्दों में, प्रभु ने भी शिष्यों से परमेश्वर के उनके साथ बने रहने का वायदा किया, जो पवित्र आत्मा के मिलने के द्वारा उनके लिए पूरा होगा (यूहन्ना 15:26)।

          जीवन की चुनौतियों का सामना करने में सहायक होने के लिए परमेश्वर अनेकों बातें हमें दे सकता है, जैसे कि भौतिक सुविधाएँ, चंगाइयाँ, या समस्याओं के तुरन्त समाधान, आदि। वह कभी कभी ऐसा करता भी है। लेकिन जो सर्वोत्तम उपहार वह हमें दे सकता है वह है स्वयं हमारे साथ सदा बने रहना। हमारे लिए सबसे अधिक शान्ति की बात यही है – वह हमें कभी नहीं छोड़ेगा, कभी नहीं त्यागेगा, सदा हमारे साथ बना रहेगा। - लेस्ली कोह

 

परमेश्वर अपनी संतानों के साथ सर्वदा बना रहता है।


तुम्हारा स्वभाव लोभरहित हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा। - इब्रानियों 13:5

बाइबल पाठ: निर्गमन 3:11-14

निर्गमन 3:11 तब मूसा ने परमेश्वर से कहा, मैं कौन हूं जो फिरौन के पास जाऊं, और इस्राएलियों को मिस्र से निकाल ले आऊं?

निर्गमन 3:12 उसने कहा, निश्चय मैं तेरे संग रहूंगा; और इस बात का कि तेरा भेजने वाला मैं हूं, तेरे लिये यह चिन्ह होगा कि जब तू उन लोगों को मिस्र से निकाल चुके तब तुम इसी पहाड़ पर परमेश्वर की उपासना करोगे।

निर्गमन 3:13 मूसा ने परमेश्वर से कहा, जब मैं इस्राएलियों के पास जा कर उन से यह कहूं, कि तुम्हारे पितृों के परमेश्वर ने मुझे तुम्हारे पास भेजा है, तब यदि वे मुझ से पूछें, कि उसका क्या नाम है? तब मैं उन को क्या बताऊं?

निर्गमन 3:14 परमेश्वर ने मूसा से कहा, मैं जो हूं सो हूं। फिर उसने कहा, तू इस्राएलियों से यह कहना, कि जिसका नाम मैं हूं है उसी ने मुझे तुम्हारे पास भेजा है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • 1 शमूएल 22-24
  • लूका 12:1-31

गुरुवार, 16 जुलाई 2020

विश्वासयोग्य


     जब भी कोई ऐसा व्यक्ति, जिसका पिछला इतिहास लिए गए कर्जे के प्रति समय से न चुकाने, या चुकाने में रूचि न रखने का रहा हो, किसी नए क़र्ज़ को लेना चाहता है, तो कर्जा देने वाले उसे क़र्ज़ देने से हिचकिचाते हैं, वे उसके साथ जोखिम उठाना नहीं चाहते हैं। तब वह कर्ज़ा लेने की इच्छा रखने वाला किसी ऐसे व्यक्ति को ढूँढ़ता है जो अपने कर्जे चुकाने के इतिहास में सही रहा हो, और फिर उस व्यक्ति से अपना नाम भी उस कर्ज़ा लेने में जोड़ने का निवेदन करता है। उस साथ में नाम लिखवाने और हस्ताक्षर करने वाले के द्वारा कर्ज़ा देने वालों को आश्वस्त किया जाता है कि लिया गया कर्ज़ा समय से चुकाया जाएगा।

     जब कोई व्यक्ति हमसे कोई वायदा करता है – चाहे आर्थिक, वैवाहिक, या अन्य किसी बात के सम्बन्ध में, तो हमारी अपेक्षा रहती है कि वह उन वायदों को पूरा भी करेगा। यदि हम आश्वास्त होना चाहते हैं कि परमेश्वर भी अपने वायदों को पूरा करेगा, तो परमेश्वर के वचन बाइबल में परमेश्वर द्वारा अब्राहम को दिए गए वायदों को देखें। परमेश्वर ने अब्राहम से वायदा किया कि वह उसे आशीषित करेगा और बहुत वंशज देगा (देखें उत्पत्ति 22:17; इब्रानियों 6:14), और अब्राहम ने परमेश्वर की बात पर विश्वास किया। सारी सृष्टि का सृष्टिकर्ता होने के कारण, परमेश्वर से बढ़कर कोई नहीं है; इसलिए केवल परमेश्वर स्वयं ही अपने वायदे की पूर्ति का आश्वासन दे सकता था।

     अब्राहम को अपने पुत्र के जन्म लेने की प्रतीक्षा करनी पड़ी (इब्रानियों 6:15), किन्तु स्वयं नहीं देख सका कि उसके वंशज कितने अधिक हो जाएँगे, परन्तु परमेश्वर अपने वायदे में विश्वासयोग्य रहा। जब परमेश्वर हमसे वायदा करता है कि सदैव हमारे साथ रहेगा (इब्रानियों 13:5, 6), हमें अपने हाथों में सुरक्षित सम्भाले रखेगा (यूहन्ना 10:29), और हमें शान्ति तथा सांत्वना देगा (2 कुरिन्थियों 1:3-4), तो हम भरोसा रख सकते हैं कि वह अपने वायदे के प्रति विश्वासयोग्य रहेगा। - कर्स्टन होल्मबर्ग

 

परमेश्वर के वायदे पक्के होते हैं।


तुम्हारा स्‍वभाव लोभरिहत हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा। इसलिये हम बेधड़क हो कर कहते हैं, कि प्रभु, मेरा सहायक है; मैं न डरूंगा; मनुष्य मेरा क्या कर सकता है। - इब्रानियों 13:5-6

बाइबल पाठ: इब्रानियों 6:13-20

इब्रानियों 6:13 और परमेश्वर ने इब्राहीम को प्रतिज्ञा देते समय जब कि शपथ खाने के लिये किसी को अपने से बड़ा न पाया, तो अपनी ही शपथ खाकर कहा।

इब्रानियों 6:14 कि मैं सचमुच तुझे बहुत आशीष दूंगा, और तेरी सन्तान को बढ़ाता जाऊंगा।

इब्रानियों 6:15 और इस रीति से उसने धीरज धर कर प्रतिज्ञा की हुई बात प्राप्त की।

इब्रानियों 6:16 मनुष्य तो अपने से किसी बड़े की शपथ खाया करते हैं और उन के हर एक विवाद का फैसला शपथ से पक्का होता है।

इब्रानियों 6:17 इसलिये जब परमेश्वर ने प्रतिज्ञा के वारिसों पर और भी साफ रीति से प्रगट करना चाहा, कि उसकी मनसा बदल नहीं सकती तो शपथ को बीच में लाया।

इब्रानियों 6:18 ताकि दो बे-बदल बातों के द्वारा जिन के विषय में परमेश्वर का झूठा ठहरना अन्‍होना है, हमारा दृढ़ता से ढाढ़स बन्ध जाए, जो शरण लेने को इसलिये दौड़े है, कि उस आशा को जो साम्हने रखी हुई है प्राप्त करें।

इब्रानियों 6:19 वह आशा हमारे प्राण के लिये ऐसा लंगर है जो स्थिर और दृढ़ है, और परदे के भीतर तक पहुंचता है।

इब्रानियों 6:20 जहां यीशु मलिकिसिदक की रीति पर सदा काल का महायाजक बन कर, हमारे लिये अगुआ की रीति पर प्रवेश हुआ है।    

 

एक साल में बाइबल: 

  • भजन 16-17
  • प्रेरितों 20:1-16



शुक्रवार, 10 मई 2019

आश्वासन



      हम पारिवारिक अवकाश का समय बिता कर घर लौट रहे थे, और हमारा मार्ग एक वीरान क्षेत्र से होकर जाता था। सूर्यास्त के भी लगभग दो घंटे बाद तक हम गहरी घाटियों और बंजर पठारों से होकर निकलते रहे। उस अन्धकार में, उस मार्ग पर चलने वाली बीस से भी कम गाड़ियों की हेडलाइट्स दिखाई पड़ रही थीं। कुछ समय बाद चन्द्रमा उदय हुआ, जो हमको तभी दिखाई देता था जब हम पहाड़ियों पर होते थे; जब मार्ग घाटी से होकर निकलता था तो चन्द्रमा भी दिखना बन्द हो जाता था। मेरी बेटी ने चाँद की ज्योति पर टिप्पणी करते हुए उसे परमेश्वर की उपस्थिति की स्मृति बताया। मैंने उससे पूछा कि क्या परमेश्वर की उपस्थति के बोध के लिए उसे चाँद को देखना आवश्यक था, तो उसने उत्तर दिया, “नहीं, किन्तु देखने से अच्छा अवश्य लगता है।”

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि मूसा की मृत्यु के पश्चात इस्राएलियों का नेतृत्व करने का दायित्व यहोशू पर आया, और उसे परमेश्वर के लोगों को वाचा किए हुए देश में लेकर जाने की जिम्मेदारी सौंपी गई। यद्यपि उसे यह दायित्व ईश्वरीय अधिकार से मिला था, किन्तु इस कार्य को करना यहोशू के लिए चुनौती पूर्ण अवश्य था। परमेश्वर ने अपने अनुग्रह में यहोशू को आश्वासन प्रदान किया कि वह इस कार्य में सहायक बनकर उसके साथ रहेगा (यहोशू 1:9)।

      जीवन का मार्ग बहुधा अनजाने मार्गों से होकर जाता है। हमें ऐसे क्षेत्रों से निकलना पड़ता है जहाँ आगे का मार्ग स्पष्ट दिखाई नहीं देता है। परमेश्वर की योजना सदा ही हमें दिखाई नहीं देती है, परन्तु हम मसीही विश्वासियों से उसका वायदा है कि “जगत के अन्त तक” (मत्ती 28:20) भी वह सदा हमारे साथ बना रहेगा। इससे बढ़कर और क्या आश्वासन हो सकता है कि हमारे सामने चाहे कोई भी अनिश्चितता, कोई भी चुनौती क्यों न हो, हमारा सहायक और मार्गदर्शक परमेश्वर सदा हमारे साथ है। चाहे मार्ग अंधकारमय हो, किन्तु जगत की ज्योति के साथ बने रहने का आश्वासन हमारे साथ है। - कर्स्टेन होम्बर्ग


वह चाहे हमें दिखाई न दे, परन्तु परमेश्वर सदा हमारे साथ रहता है।

तुम्हारा स्‍वभाव लोभरिहत हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा। - इब्रानियों 13:5

बाइबल पाठ: यहोशू 1:1-9
Joshua 1:1 यहोवा के दास मूसा की मृत्यु के बाद यहोवा ने उसके सेवक यहोशू से जो नून का पुत्र था कहा,
Joshua 1:2 मेरा दास मूसा मर गया है; सो अब तू उठ, कमर बान्ध, और इस सारी प्रजा समेत यरदन पार हो कर उस देश को जा जिसे मैं उन को अर्थात इस्राएलियों को देता हूं।
Joshua 1:3 उस वचन के अनुसार जो मैं ने मूसा से कहा, अर्थात जिस जिस स्थान पर तुम पांव धरोगे वह सब मैं तुम्हे दे देता हूं।
Joshua 1:4 जंगल और उस लबानोन से ले कर परात महानद तक, और सूर्यास्त की ओर महासमुद्र तक हित्तियों का सारा देश तुम्हारा भाग ठहरेगा।
Joshua 1:5 तेरे जीवन भर कोई तेरे साम्हने ठहर न सकेगा; जैसे मैं मूसा के संग रहा वैसे ही तेरे संग भी रहूंगा; और न तो मैं तुझे धोखा दूंगा, और न तुझ को छोडूंगा।
Joshua 1:6 इसलिये हियाव बान्धकर दृढ़ हो जा; क्योंकि जिस देश के देने की शपथ मैं ने इन लोगों के पूर्वजों से खाई थी उसका अधिकारी तू इन्हें करेगा।
Joshua 1:7 इतना हो कि तू हियाव बान्धकर और बहुत दृढ़ हो कर जो व्यवस्था मेरे दास मूसा ने तुझे दी है उन सब के अनुसार करने में चौकसी करना; और उस से न तो दाहिने मुड़ना और न बांए, तब जहां जहां तू जाएगा वहां वहां तेरा काम सफल होगा।
Joshua 1:8 व्यवस्था की यह पुस्तक तेरे चित्त से कभी न उतरने पाए, इसी में दिन रात ध्यान दिए रहना, इसलिये कि जो कुछ उस में लिखा है उसके अनुसार करने की तू चौकसी करे; क्योंकि ऐसा ही करने से तेरे सब काम सफल होंगे, और तू प्रभावशाली होगा।
Joshua 1:9 क्या मैं ने तुझे आज्ञा नहीं दी? हियाव बान्धकर दृढ़ हो जा; भय न खा, और तेरा मन कच्चा न हो; क्योंकि जहां जहां तू जाएगा वहां वहां तेरा परमेश्वर यहोवा तेरे संग रहेगा।

एक साल में बाइबल:  
  • 2 राजा 10-12
  • यूहन्ना 1:29-51



रविवार, 17 मार्च 2019

भरोसा



      कुछ संस्कृतियों में यह अपेक्षा की जाती है कि आयु में कम व्यक्ति अपने से बड़े को कमरे में पहले जाने देगा; जबकि कुछ अन्य में इस बात का ध्यान रखा जाता है कि जिसका ओहदा अधिक ऊँचा होगा, वह पहले प्रवेश करेगा। हमारी परम्पराएँ चाहे जो भी हों, ऐसे समय भी आते हैं जब यह चुनना कठिन होता है कि महत्वपूर्ण मामलों में पहले कौन होगा, विशेषकर तब जब पहले होने का विशेषाधिकार हमारा अपना होता है।

      परमेश्वर के वचन बाइबल के एक नायक, अब्राहम, के विषय हम देखते हैं कि उसके तथा उसके भतीजे लूत के पास इतना पशु-धन और नौकर थे कि उनके सेवकों में बारंबार होने वाली नोक-झोंक के कारण उनका साथ रहना और यात्रा करना कठिन होने लगा था। संघर्ष से बच कर रहने के लिए अब्राहम ने सलाह दी कि वे दोनों अलग हो जाएँ, और उदारतापूर्वक लूत को अधिकार दिया कि वह पहला चुनाव करे कि उसे किस ओर जाना है “तब अब्राम लूत से कहने लगा, मेरे और तेरे बीच, और मेरे और तेरे चरवाहों के बीच में झगड़ा न होने पाए; क्योंकि हम लोग भाई बन्धु हैं। क्या सारा देश तेरे साम्हने नहीं? सो मुझ से अलग हो, यदि तू बाईं ओर जाए तो मैं दाहिनी ओर जाऊंगा; और यदि तू दाहिनी ओर जाए तो मैं बाईं ओर जाऊंगा” (उत्पत्ति 13:8-9)। लूत ने अपने लिए यार्दन नदी की घाटी का उपजाऊ इलाका चुना, और अब्राहम के लिए शेष इलाका जो उसके समान उपजाऊ नहीं था, छोड़ दिया।

      बड़ा होने पर भी अब्राहम ने इस परिस्थिति में अपने विशेषाधिकार पर बल नहीं दिया, परन्तु अपने भविष्य को परमेश्वर के हाथों में छोड़ दिया। लूत के चुनाव ने आगे चलाकर उसके तथा उसके परिवार के लिए बहुत परेशानी खड़ी कर दी (देखें उत्पत्ति 19)। किन्तु अब्राहम परमेश्वर की अगुवाई और अनुग्रह में बढ़ता तथा सामर्थी होता चला गया।

      आज जब हमारे समक्ष अनेकों प्रकार के विकल्प और चुनाव होते हैं, तो हम अपने स्वर्गीय पिता पर भरोसा रखें कि वह हमारा मार्गदर्शन करेगा, हमें सही मार्ग पर ले जाएगा। उसका हमसे वायदा है कि वह हमारी देखभाल करेगा, हमारी प्रत्येक आवश्यकता को पूरा करेगा; हम उसपर भरोसा बनाए रखें। - डेविड मैक्कैस्लैंड


जो चुनाव परमेश्वर पर छोड़ देते हैं, परमेश्वर उन्हें सदा सर्वोत्तम ही देता है। - जिम ईलियट

और जब कभी तुम दाहिनी वा बाईं ओर मुड़ने लगो, तब तुम्हारे पीछे से यह वचन तुम्हारे कानों में पड़ेगा, मार्ग यही है, इसी पर चलो। – यशायाह 30:21

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 13:1-18
Genesis 13:1 तब अब्राम अपनी पत्नी, और अपनी सारी सम्पत्ति ले कर, लूत को भी संग लिये हुए, मिस्र को छोड़ कर कनान के दक्खिन देश में आया।
Genesis 13:2 अब्राम भेड़-बकरी, गाय-बैल, और सोने-रूपे का बड़ा धनी था।
Genesis 13:3 फिर वह दक्खिन देश से चलकर, बेतेल के पास उसी स्थान को पहुंचा, जहां उसका तम्बू पहले पड़ा था, जो बेतेल और ऐ के बीच में है।
Genesis 13:4 यह स्थान उस वेदी का है, जिसे उसने पहले बनाई थी, और वहां अब्राम ने फिर यहोवा से प्रार्थना की।
Genesis 13:5 और लूत के पास भी, जो अब्राम के साथ चलता था, भेड़-बकरी, गाय-बैल, और तम्बू थे।
Genesis 13:6 सो उस देश में उन दोनों की समाई न हो सकी कि वे इकट्ठे रहें: क्योंकि उनके पास बहुत धन था इसलिये वे इकट्ठे न रह सके।
Genesis 13:7 सो अब्राम, और लूत की भेड़-बकरी, और गाय-बैल के चरवाहों के बीच में झगड़ा हुआ: और उस समय कनानी, और परिज्जी लोग, उस देश में रहते थे।
Genesis 13:8 तब अब्राम लूत से कहने लगा, मेरे और तेरे बीच, और मेरे और तेरे चरवाहों के बीच में झगड़ा न होने पाए; क्योंकि हम लोग भाई बन्धु हैं।
Genesis 13:9 क्या सारा देश तेरे साम्हने नहीं? सो मुझ से अलग हो, यदि तू बाईं ओर जाए तो मैं दाहिनी ओर जाऊंगा; और यदि तू दाहिनी ओर जाए तो मैं बाईं ओर जाऊंगा।
Genesis 13:10 तब लूत ने आंख उठा कर, यरदन नदी के पास वाली सारी तराई को देखा, कि वह सब सिंची हुई है। जब तक यहोवा ने सदोम और अमोरा को नाश न किया था, तब तक सोअर के मार्ग तक वह तराई यहोवा की बाटिका, और मिस्र देश के समान उपजाऊ थी।
Genesis 13:11 सो लूत अपने लिये यरदन की सारी तराई को चुन के पूर्व की ओर चला, और वे एक दूसरे से अलग हो गए।
Genesis 13:12 अब्राम तो कनान देश में रहा, पर लूत उस तराई के नगरों में रहने लगा; और अपना तम्बू सदोम के निकट खड़ा किया।
Genesis 13:13 सदोम के लोग यहोवा के लेखे में बड़े दुष्ट और पापी थे।
Genesis 13:14 जब लूत अब्राम से अलग हो गया तब उसके पश्चात यहोवा ने अब्राम से कहा, आंख उठा कर जिस स्थान पर तू है वहां से उत्तर-दक्खिन, पूर्व-पश्चिम, चारों ओर दृष्टि कर।
Genesis 13:15 क्योंकि जितनी भूमि तुझे दिखाई देती है, उस सब को मैं तुझे और तेरे वंश को युग युग के लिये दूंगा।
Genesis 13:16 और मैं तेरे वंश को पृथ्वी की धूल के किनकों के समान बहुत करूंगा, यहां तक कि जो कोई पृथ्वी की धूल के किनकों को गिन सकेगा वही तेरा वंश भी गिन सकेगा।
Genesis 13:17 उठ, इस देश की लम्बाई और चौड़ाई में चल फिर; क्योंकि मैं उसे तुझी को दूंगा।
Genesis 13:18 इसके पशचात्‌ अब्राम अपना तम्बू उखाड़ कर, माम्रे के बांजों के बीच जो हेब्रोन में थे जा कर रहने लगा, और वहां भी यहोवा की एक वेदी बनाई।

एक साल में बाइबल:  
  • व्यवस्थाविवरण 30-31
  • मरकुस 15:1-25



शनिवार, 14 अक्टूबर 2017

भरोसा


   जनवरी 1915 में, एन्डयोरेंस नामक जलपोत अन्टारिकटिका के तट के निकट बर्फ में फंसकर नष्ट हो गया। उस जलपोत में सवार, अर्नेस्ट शैकलटन के नेतृत्व में दक्षिणी ध्रुव पर खोज करने आए लोगों का दल, बचने के लिए तीन छोटी नौकाओं में होकर एलीफेंट द्वीप पहुँचा। अब वे एक ऐसे निर्जन द्वीप पर फंस गए थे जो सामान्य व्यापारी जल मार्गों से दूर स्थित था। उनके पास एक ही आशा थी; 24 अप्रैल 1916 को 22 लोगों के सामने शैकलटन और उसके पाँच साथी, एक छोटी नौका पर 800 मील दूर स्थित एक अन्य द्वीप, साऊथ जौर्जिया, के लिए निकल पड़े। परिस्थितियाँ और संभावनाएं असंभव प्रतीत होती थीं, और यदि वे नाविक अपने इस प्रयास में विफल हो जाते तो सभी की मृत्यु निश्चित थी। सोचिए वह कितने आनन्द का समय था, जब चार माह से भी अधिक समय के बाद एलीफेंट द्वीप पर प्रतीक्षा कर रहे उन 22 लोगों ने क्षितिज पर एक नौका को आते देखा और उस नौका में सबसे आगे शैकलटन खड़े थे, और ऊँची आवाज़ में पूछ रहे थे, "क्या आप सब ठीक हैं?" और द्वीप से उत्तर मिला, "सब ठीक! सब सुरक्षित!"

   उन लोगों को इतने महीनों तक एक साथ और सुरक्षित तथा जीवित किस बात ने रखा? एक व्यक्ति में रखे गए भरोसे ने; उन्हें विश्वास था कि शैकलटन उन्हें बचाने के लिए कोई न कोई उपाय अवश्य निकाल लेंगे।

   भरोसे और आशा का इस मानवीय उदाहरण में, परमेश्वर के वचन बाइबल में, इब्रानियों 11 में दिए गए विश्वास के नायकों के भरोसे की गूँज है। इन नायकों के "विश्वास आशा की हुई वस्‍तुओं का निश्‍चय, और अनदेखी वस्‍तुओं का प्रमाण है" (इब्रानियों 11:1) में भरोसे ने उन्हें बड़ी कठिनाईयों और परीक्षाओं में भी परमेश्वर में अपने विश्वास में स्थिर बनाए रखा।

   आज जब हम अपने जीवन की परिस्थितियों और कठिनाईयों की ओर देखते हैं, तो उनसे अभिभूत होकर हताश न हो जाएं। हम अपने उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह पर अपने भरोसे में दृढ़ बने रहें - वह अपने वायदे के अनुरूप सदा हमारी भलाई के लिए कार्यरत रहता है। - रैंडी किल्गोर


हमारे सबसे अन्धकारमय दिन में भी, प्रभु यीशु में आशा तेज़ी से चमकती रहती है।

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रो्मियों 8:28

बाइबल पाठ: इब्रानियों 11:8-16
Hebrews 11:8 विश्वास ही से इब्राहीम जब बुलाया गया तो आज्ञा मानकर ऐसी जगह निकल गया जिसे मीरास में लेने वाला था, और यह न जानता था, कि मैं किधर जाता हूं; तौभी निकल गया। 
Hebrews 11:9 विश्वास ही से उसने प्रतिज्ञा किए हुए देश में जैसे पराए देश में परदेशी रह कर इसहाक और याकूब समेत जो उसके साथ उसी प्रतिज्ञा के वारिस थे, तम्बूओं में वास किया। 
Hebrews 11:10 क्योंकि वह उस स्थिर नेव वाले नगर की बाट जोहता था, जिस का रचने वाला और बनाने वाला परमेश्वर है। 
Hebrews 11:11 विश्वास से सारा ने आप बूढ़ी होने पर भी गर्भ धारण करने की सामर्थ पाई; क्योंकि उसने प्रतिज्ञा करने वाले को सच्चा जाना था। 
Hebrews 11:12 इस कारण एक ही जन से जो मरा हुआ सा था, आकाश के तारों और समुद्र के तीर के बालू के समान, अनगिनित वंश उत्पन्न हुआ।
Hebrews 11:13 ये सब विश्वास ही की दशा में मरे; और उन्होंने प्रतिज्ञा की हुई वस्तुएं नहीं पाईं; पर उन्हें दूर से देखकर आनन्‍दित हुए और मान लिया, कि हम पृथ्वी पर परदेशी और बाहरी हैं। 
Hebrews 11:14 जो ऐसी ऐसी बातें कहते हैं, वे प्रगट करते हैं, कि स्‍वदेश की खोज में हैं। 
Hebrews 11:15 और जिस देश से वे निकल आए थे, यदि उस की सुधि करते तो उन्हें लौट जाने का अवसर था। 
Hebrews 11:16 पर वे एक उत्तम अर्थात स्‍वर्गीय देश के अभिलाषी हैं, इसी लिये परमेश्वर उन का परमेश्वर कहलाने में उन से नहीं लजाता, सो उसने उन के लिये एक नगर तैयार किया है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 43-44
  • 1 थिस्सलुनीकियों 2


शुक्रवार, 13 अक्टूबर 2017

साथ


   उत्तरी अमेरिका के मूल-विवासियों की एक प्राचीन कहानी है; कबीले की प्रथा के अनुसार, उसके साहस की परीक्षा के लिए, एक युवक को शरद ऋतु की एक रात अकेले जंगल में बिताने के लिए भेजा गया। संध्या को वह घर से निकला और जंगल में चला गया। शीघ्र ही अन्धेरा हो गया, रात्रि की आवाज़ें जंगल में आने लगीं। कहीं पेड़ चरमरा रहे थे तो कभी हवा से पत्ते सरसरा रहे थे; रात्रि में विचरण करने वाले विभिन्न जान्वरों और पक्षियों की आवाज़ें आ रहीं थीं। वह युवक भयभीत तो था किंतु फिर भी दृढ़ता से डटा रहा, जैसी कि उसकी परीक्षा की आवश्यकता थी। अन्ततः प्रातः हुई, और आकाश के प्रकाशमान होने के साथ ही उसने देखा कि एक और व्यक्ति भी उसके निकट ही था; सारी रात उसके दादा वहीं उसके पास डटे रहे थे, उसका ध्यान रख रहे थे।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के एक प्रमुख पात्र मूसा ने जंगल में एकान्त में एक चकित करने वाला दृष्य देखा, एक झाड़ी जल तो रही थी परन्तु भस्म नहीं हो रही थी। जब वह निकट गया तो उसने परमेश्वर की आवाज़ सुनी; परमेश्वर उसे मिस्त्र में जाकर इस्त्राएलियों को क्रूर दासत्व से छुड़ाकर लाने के लिए कह रहा था। अनिच्छुक मूसा ने बच निकलने के लिए परमेश्वर से प्रश्न करने आरंभ किए: अपने भय के कारण मूसा ने कहा, "मैं हूँ कौन, कि मैं जाऊँ?" परमेश्वर ने उत्तर दिया, "मैं तेरे साथ रहूँगा।" मूसा ने फिर कहा, "मान लो मैं जाकर कहता हूँ, ’तुम्हारे पित्रों के परमेश्वर ने मुझे भेजा है’, और वे मुझसे पूछें, ’अच्छा! तो भला उसका नाम क्या है?’ तो मैं उन्हें क्या उत्तर दूँगा?" परमेश्वर ने उत्तर दिया, "उनसे कहना, ’मैं जो हूँ सो हूँ’...उनसे कहना, मैं जो हूँ सो हूँ ने मुझे भेजा है" (निर्गमन 31:1-14)।

   वाक्यांश, ’मैं जो हूँ सो हूँ’ को ’मैं जो होऊँगा सो होऊँगा’ भी लिखा जा सकता है, और यह परमेश्वर के अनन्त और हर बात, हर परिस्थिति, हर आवश्यकता के लिए पूर्णतः पर्याप्त चरित्र को दिखाता है। परमेश्वर का सदा ही वायदा रहा है कि वह अपने लोगों के साथ, उनके जिन्होंने प्रभु यीशु पर विश्वास किया है, बना रहेगा। चाहे जीवन की परिस्थितियाँ कितनी भी भयावह, कठिन या अन्धकारमय क्यों न लगें, हमारा अदृश्य परमेश्वर पिता सदा हमारे साथ और हमारे निकट बना रहता है। वह हमारी प्रत्येक आवश्यकता के लिए उप्युक्त उत्तर देने को सदा उपलब्ध रहता है। - डेव एग्नर


अपने बच्चों के जीवन में परमेश्वर सदा उपस्थित तथा कार्यरत रहता है।

तुम्हारा स्‍वभाव लोभरिहत हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा। इसलिये हम बेधड़क हो कर कहते हैं, कि प्रभु, मेरा सहायक है; मैं न डरूंगा; मनुष्य मेरा क्या कर सकता है। - इब्रानियों 13:5-6

बाइबल पाठ: निर्गमन 3:1-14
Exodus 3:1 मूसा अपने ससुर यित्रो नाम मिद्यान के याजक की भेड़-बकरियों को चराता था; और वह उन्हें जंगल की परली ओर होरेब नाम परमेश्वर के पर्वत के पास ले गया। 
Exodus 3:2 और परमेश्वर के दूत ने एक कटीली झाड़ी के बीच आग की लौ में उसको दर्शन दिया; और उसने दृष्टि उठा कर देखा कि झाड़ी जल रही है, पर भस्म नहीं होती। 
Exodus 3:3 तब मूसा ने सोचा, कि मैं उधर फिरके इस बड़े अचम्भे को देखूंगा, कि वह झाड़ी क्यों नहीं जल जाती। 
Exodus 3:4 जब यहोवा ने देखा कि मूसा देखने को मुड़ा चला आता है, तब परमेश्वर ने झाड़ी के बीच से उसको पुकारा, कि हे मूसा, हे मूसा। मूसा ने कहा, क्या आज्ञा। 
Exodus 3:5 उसने कहा इधर पास मत आ, और अपने पांवों से जूतियों को उतार दे, क्योंकि जिस स्थान पर तू खड़ा है वह पवित्र भूमि है। 
Exodus 3:6 फिर उसने कहा, मैं तेरे पिता का परमेश्वर, और इब्राहीम का परमेश्वर, इसहाक का परमेश्वर, और याकूब का परमेश्वर हूं। तब मूसा ने जो परमेश्वर की ओर निहारने से डरता था अपना मुंह ढ़ांप लिया। 
Exodus 3:7 फिर यहोवा ने कहा, मैं ने अपनी प्रजा के लोग जो मिस्र में हैं उनके दु:ख को निश्चय देखा है, और उनकी जो चिल्लाहट परिश्रम कराने वालों के कारण होती है उसको भी मैं ने सुना है, और उनकी पीड़ा पर मैं ने चित्त लगाया है; 
Exodus 3:8 इसलिये अब मैं उतर आया हूं कि उन्हें मिस्रियों के वश से छुड़ाऊं, और उस देश से निकाल कर एक अच्छे और बड़े देश में जिस में दूध और मधु की धारा बहती है, अर्थात कनानी, हित्ती, एमोरी, परिज्जी, हिव्वी, और यबूसी लोगों के स्थान में पहुंचाऊं। 
Exodus 3:9 सो अब सुन, इस्राएलियों की चिल्लाहट मुझे सुनाई पड़ी है, और मिस्रियों का उन पर अन्धेर करना भी मुझे दिखाई पड़ा है, 
Exodus 3:10 इसलिये आ, मैं तुझे फिरौन के पास भेजता हूं कि तू मेरी इस्राएली प्रजा को मिस्र से निकाल ले आए। 
Exodus 3:11 तब मूसा ने परमेश्वर से कहा, मैं कौन हूं जो फिरौन के पास जाऊं, और इस्राएलियों को मिस्र से निकाल ले आऊं? 
Exodus 3:12 उसने कहा, निश्चय मैं तेरे संग रहूंगा; और इस बात का कि तेरा भेजने वाला मैं हूं, तेरे लिये यह चिन्ह होगा कि जब तू उन लोगों को मिस्र से निकाल चुके तब तुम इसी पहाड़ पर परमेश्वर की उपासना करोगे। 
Exodus 3:13 मूसा ने परमेश्वर से कहा, जब मैं इस्राएलियों के पास जा कर उन से यह कहूं, कि तुम्हारे पित्रों के परमेश्वर ने मुझे तुम्हारे पास भेजा है, तब यदि वे मुझ से पूछें, कि उसका क्या नाम है? तब मैं उन को क्या बताऊं? 
Exodus 3:14 परमेश्वर ने मूसा से कहा, मैं जो हूं सो हूं। फिर उसने कहा, तू इस्राएलियों से यह कहना, कि जिसका नाम मैं हूं है उसी ने मुझे तुम्हारे पास भेजा है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 41-42
  • 1 थिस्सलुनीकियों 1


गुरुवार, 6 अक्टूबर 2016

सहायक


   मेरे पिता का बचपन एक फार्म पर बीता, जहाँ उन्हें सौंपा गया कार्य था एकत्रित करे गए बचे हुए भोजन और झूठन को सूअरों को डालना। उन्हें यह कार्य बहुत नापसन्द था क्योंकि उनके बाड़े में झूठन लिए हुए घुसते ही सारे सूअर वह खाना खाने के लिए उनकी ओर आते और धक्का-मुक्की करने लगते जिससे मेरे पिता के उनके बीच में गिर जाने का खतरा रहता था। उनके लिए यह कार्य असंभव हो जाता यदि उनके साथ सूअरों के बाड़े में जाने के लिए एक वफादार सहायक ना होता; उनकी सहायक जर्मन शेपर्ड जाति की एक बड़ी सी कुतिया थी जो उनके साथ जाया करती थी और अपने आप को सूअरों और पिताजी के बीच में बनाए रखती थी, जब तक की पिताजी अपना कार्य पूरा करके बाड़े और खतरे से बाहर नहीं आ जाते थे।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में परमेश्वर के एक भविश्यद्वक्ता, यिर्मयाह को भी इस्त्राएलियों को परमेश्वर का वचन पहुंचाने का कठिन कार्य सौंपा गया था। इस ज़िम्मेदारी को पूरा करने के लिए यिर्मयाह को शारीरिक यात्नाएं, निन्दा और बुराई, कैद होना और सबसे अलग किए जा के ’कालापनी’ की सज़ा सहना पड़ा। यिर्मयाह को गहरी निराशा के साथ संघर्ष भी करना पड़ा (यिर्मयाह 20:7), लेकिन यिर्मयाह ने यह भी माना कि इस सारे संघर्ष में परमेश्वर उसका सहायक बनकर सदा साथ बना रहा (यिर्मयाह 20:11), जैसा कि परमेश्वर ने यह ज़िम्मेदारी देते समय उससे वायदा किया था: "वे तुझ से लड़ेंगे तो सही, परन्तु तुझ पर प्रबल न होंगे, क्योंकि बचाने के लिये मैं तेरे साथ हूँ, यहोवा की यही वाणी है" (यिर्मयाह 1:19)।

   परमेश्वर अपने वायदे पर अडिग रहा और यिर्मयाह को कभी अकेला या निःसहाय नहीं होने दिया। परमेश्वर का हम मसीही विश्वासियों से भी ऐसा ही वायदा है कि वह हमें कभी नहीं छोड़ेगा, कभी नहीं त्यागेगा (इब्रनियों 13:5)। हमारी सहायता के लिए परमेश्वर ने अपने पवित्र आत्मा को हमें दिया है जो प्रत्येक मसीही विश्वासी के अन्दर निवास करता है: "और मैं पिता से बिनती करूंगा, और वह तुम्हें एक और सहायक देगा, कि वह सर्वदा तुम्हारे साथ रहे। अर्थात सत्य का आत्मा, जिसे संसार ग्रहण नहीं कर सकता, क्योंकि वह न उसे देखता है और न उसे जानता है: तुम उसे जानते हो, क्योंकि वह तुम्हारे साथ रहता है, और वह तुम में होगा" (यूहन्ना 14:16-17)। हमारा यह सहायक हमें आशा देता है (रोमियों 15:13); हमें आत्मिक सत्यों की ओर ले जाता है (यूहन्ना 16:13) और हमारे हृदयों में परमेश्वर का प्रेम उंडेलता है (रोमियों 5:5)।

   हम विश्वास रख सकते हैं कि परमेश्वर हर कठिनाई में हमारी सहायता करता है जिससे कि हम उस परिस्थिति को झेल सकें और यिर्मयाह के समान ही हम भी कह सकें, "परन्तु यहोवा मेरे साथ है, वह भयंकर वीर के समान है; इस कारण मेरे सताने वाले प्रबल न होंगे, वे ठोकर खाकर गिरेंगे। वे बुद्धि से काम नहीं करते, इसलिये उन्हें बहुत लज्जित होना पड़ेगा। उनका अपमान सदैव बना रहेगा और कभी भूला न जाएगा" (यिर्मयाह 20:11)। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


यहां नीचे इस धरती पर हमारी सबसे बड़ी आशा ऊपर हमारे परमेश्वर पिता से है।

परन्तु जब वह अर्थात सत्य का आत्मा आएगा, तो तुम्हें सब सत्य का मार्ग बताएगा, क्योंकि वह अपनी ओर से न कहेगा, परन्तु जो कुछ सुनेगा, वही कहेगा, और आनेवाली बातें तुम्हें बताएगा। - यूहन्ना 16:13 

बाइबल पाठ: यिर्मयाह 20:7-13
Jeremiah 20:7 हे यहोवा, तू ने मुझे धोखा दिया, और मैं ने धोखा खाया; तू मुझ से बलवन्त है, इस कारण तू मुझ पर प्रबल हो गया। दिन भर मेरी हंसी होती है; सब कोई मुझ से ठट्ठा करते हैं। 
Jeremiah 20:8 क्योंकि जब मैं बातें करता हूँ, तब मैं जोर से पुकार पुकारकर ललकारता हूँ कि उपद्रव और उत्पात हुआ, हां उत्पात! क्योंकि यहोवा का वचन दिन भर मेरे लिये निन्दा और ठट्ठा का कारण होता रहता है। 
Jeremiah 20:9 यदि मैं कहूं, मैं उसकी चर्चा न करूंगा न उसके नाम से बोलूंगा, तो मेरे हृदय की ऐसी दशा होगी मानो मेरी हड्डियों में धधकती हुई आग हो, और मैं अपने को रोकते रोकते थक गया पर मुझ से रहा नहीं जाता। 
Jeremiah 20:10 मैं ने बहुतों के मुंह से अपना अपवाद सुना है। चारों ओर भय ही भय है! मेरी जान पहचान के सब जो मेरे ठोकर खाने की बाट जोहते हैं, वे कहते हैं, उसके दोष बताओ, तब हम उनकी चर्चा फैला देंगे। कदाचित वह धोखा खाए, तो हम उस पर प्रबल हो कर, उस से बदला लेंगे। 
Jeremiah 20:11 परन्तु यहोवा मेरे साथ है, वह भयंकर वीर के समान है; इस कारण मेरे सताने वाले प्रबल न होंगे, वे ठोकर खाकर गिरेंगे। वे बुद्धि से काम नहीं करते, इसलिये उन्हें बहुत लज्जित होना पड़ेगा। उनका अपमान सदैव बना रहेगा और कभी भूला न जाएगा। 
Jeremiah 20:12 हे सेनाओं के यहोवा, हे धर्मियों के परखने वाले और हृदय और मन के ज्ञाता, जो बदला तू उन से लेगा, उसे मैं देखूं, क्योंकि मैं ने अपना मुक़द्दमा तेरे ऊपर छोड़ दिया है। 
Jeremiah 20:13 यहोवा के लिये गाओ; यहोवा की स्तुति करो! क्योंकि वह दरिद्र जन के प्राण को कुकमिर्यों के हाथ से बचाता है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 26-27
  • फिलिप्पियों 2


रविवार, 15 नवंबर 2015

निर्भीक सहायक


   बचपन में मेरे लिए रात को सो जाना बड़ा चुनौतीपूर्ण कार्य था। जैसे ही मेरे माता-पिता कमरे की बत्ती बन्द करते, कुर्सी पर जो कपड़े बेतरतीब पड़े हुए थे, उनकी ऊबड़-खाबड़ दशा मेरे लिए विभिन्न काल्पनिक डरावने जानवरों का रूप ले लेती थी और साथ ही मुझे भय सताता था कि मेरे पलंग के नीचे कुछ है जो बस अभी बाहर निकलकर मुझ पर हमला कर देगा। भय की इस मनोदशा में नींद मेरी आँखों से कोसों दूर भाग जाती थी।

   उम्र और अनुभव के साथ मुझे यह एहसास हो चला है कि भय ना केवल बच्चों को वरन व्यसकों को भी कमज़ोर और जड़ कर देता है, सब कुछ जानते और समझते हुए भी सही कार्य को करने से रोक देता है। भय के कारण ही हम क्षमा नहीं करते, अपने कार्य स्थल पर सही बात के लिए निर्णय लेकर खड़े नहीं होते या अपने विचार सबके सामने नहीं रखते, अपने संसाधनों को परमेश्वर के राज्य में उपयोग होने के लिए नहीं देते, जब हमारे सब मित्र ’हाँ’ बोल रहे होते हैं तब ’ना’ कहने की हिम्मत नहीं रख पाते। यदि हम अपने सहारे हों तो हमारे जीवनों में ना जाने कितने डरावनी बातें हैं जो हमें सही और सच का साथ देने से रोकती रहती हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में दर्ज की गई प्रभु यीशु और उनके चेलों का तूफान में फंसी नाव की घटना को जब मैं देखता हूँ तो उस नाव में केवल एक ही था जो भयभीत नहीं था - प्रभु यीशु। ना तो प्रभु कभी किसी तूफान से डरा, ना ही दुष्ट-आतमाओं का सामना करने से और ना ही कब्रों में रहने वाले और दुष्ट-आत्मा की सेना से भरे उन व्यक्तियों से डरा जिन्हें कोई वश में नहीं कर सका था (मत्ती 8:23-34)। संसार या जीवन की कोई परिस्थिति, व्यक्ति, घटना, सामर्थ, अधिकार या कोई भी बात हमारे प्रभु को कभी ज़रा सा भी भयभीत नहीं करने पाई, उससे कभी कुछ गलत या अनुचित नहीं करवाने पाई; क्योंकि ऐसा कुछ नहीं है जिस पर हमारा प्रभु सामर्थी नहीं है, जिसे वश में नहीं कर सकता, जिसे बदल नहीं सकता, जिसकी दुषक्रीयाओं को विफल नहीं कर सकता, जिसकी हानिकारक योजनाओं को पलट नहीं सकता। हमारे प्रभु ने हम मसीही विश्वासियों से वायदा किया है, "...और देखो, मैं जगत के अन्‍त तक सदैव तुम्हारे संग हूं" (मत्ती 28:20)।

   अगली बार जब हमें किसी डर का सामना करना पड़े, या कोई भय हमें सही निर्णय लेने से रोकना चाहे, तब हमें चाहिए कि हम प्रभु यीशु द्वारा चेलों से किया गया प्रश्न अपने सामने रखें: "...हे अल्पविश्वासियों, क्यों डरते हो?..." (मत्ती 8:26) और स्मरण करें कि उसने वायदा किया है कि वह हमें ना तो कभी छोड़ेगा और ना त्यागेगा (इब्रानियों 13:5-6)। जब कभी संसार और शैतान की शक्तियाँ हमें कमज़ोर करने, हमसे गलत करने या करवाने, हमारी मसीही विश्वासी होने की गवाही को बिगाड़ने के लिए हमें किसी भय के द्वारा अपनी आधीनता में लाना चाहें तो अपने निर्भीक और सदैव जयवन्त प्रभु यीशु और उसके हमारे साथ सदा बने रहने के वायदे को याद करें और भयभीत होकर कभी कुछ भी गलत, अनुचित या असंगत ना करें। - जो स्टोवैल


हर भय के समय में अपने निर्भीक सहायक प्रभु यीशु को पुकारें।

तुम्हारा स्‍वभाव लोभरिहत हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा। इसलिये हम बेधड़क हो कर कहते हैं, कि प्रभु, मेरा सहायक है; मैं न डरूंगा; मनुष्य मेरा क्या कर सकता है। - इब्रानियों 13:5-6

बाइबल पाठ: मत्ती 8:23-34
Matthew 8:23 जब वह नाव पर चढ़ा, तो उसके चेले उसके पीछे हो लिए। 
Matthew 8:24 और देखो, झील में एक ऐसा बड़ा तूफान उठा कि नाव लहरों से ढंपने लगी; और वह सो रहा था। 
Matthew 8:25 तब उन्होंने पास आकर उसे जगाया, और कहा, हे प्रभु, हमें बचा, हम नाश हुए जाते हैं। 
Matthew 8:26 उसने उन से कहा; हे अल्पविश्वासियों, क्यों डरते हो? तब उसने उठ कर आन्‍धी और पानी को डांटा, और सब शान्‍त हो गया। 
Matthew 8:27 और लोग अचम्भा कर के कहने लगे कि यह कैसा मनुष्य है, कि आन्‍धी और पानी भी उस की आज्ञा मानते हैं। 
Matthew 8:28 जब वह उस पार गदरेनियों के देश में पहुंचा, तो दो मनुष्य जिन में दुष्टात्माएं थीं कब्रों से निकलते हुए उसे मिले, जो इतने प्रचण्‍ड थे, कि कोई उस मार्ग से जा नहीं सकता था। 
Matthew 8:29 और देखो, उन्होंने चिल्लाकर कहा; हे परमेश्वर के पुत्र, हमारा तुझ से क्या काम? क्या तू समय से पहिले हमें दु:ख देने यहां आया है? 
Matthew 8:30 उन से कुछ दूर बहुत से सूअरों का एक झुण्ड चर रहा था। 
Matthew 8:31 दुष्टात्माओं ने उस से यह कहकर बिनती की, कि यदि तू हमें निकालता है, तो सूअरों के झुण्ड में भेज दे। 
Matthew 8:32 उसने उन से कहा, जाओ, वे निकलकर सूअरों में पैठ गए और देखो, सारा झुण्ड कड़ाड़े पर से झपटकर पानी में जा पड़ा और डूब मरा। 
Matthew 8:33 और चरवाहे भागे, और नगर में जा कर ये सब बातें और जिन में दुष्टात्माएं थीं उन का सारा हाल कह सुनाया। 
Matthew 8:34 और देखो, सारे नगर के लोग यीशु से भेंट करने को निकल आए और उसे देखकर बिनती की, कि हमारे सिवानों से बाहर निकल जा।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 1-2
  • इब्रानियों 11:1-19


शुक्रवार, 31 जुलाई 2015

आश्वासन


   एक भारी आँधी के कारण फ्रैंकफर्ट के लिए हमारी उड़ान विलंबित हुई जिसके कारण उससे अगली उड़ान को पकड़ना हमारे लिए असंभव हो गया। संबंधित अधिकारियों द्वारा हमें बताया गया कि हमारा नाम अगली संध्या की एक उड़ान में पक्का कर दिया गया है। अगली संध्या जब हम वह उड़ान पकड़ने पहुँचे तो हमें बताया गया कि हमारा नाम पुष्टिकृत यात्रियों की सूची में नहीं वरन पुष्टि होने की प्रतीक्षा कर रहे यात्रियों में है और उड़ान में अभी कोई रिक्त स्थान हमारे लिए नहीं है। यह सब जानने के पश्चात मैं सोचने लगा कि जो कुछ हमें बताया गया क्या वह केवल जानकारी देने में हुई त्रुटि थी या यह उड़ान छूट जाने वाले यात्रियों से व्यवहार का तरीका था। यदि उन यात्रियों को पहले ही यह बता दिया जाता कि वे प्रतीक्षा वाली सूची में हैं तो वे क्षुब्ध होते, कुछ प्रतिक्रीया करते; इसलिए बात को टालने और समय प्राप्त करने के लिए कोई उन से कह दे कि उनके नाम पुष्टिकृत सूची में हैं और फिर बाद में कोई और, पहले व्यक्ति द्वारा दी गई जानकारी से पल्ला झाड़ते हुए उन्हें बताए कि उन्हें अभी प्रतीक्षा करनी होगी।

   यह बड़े धन्यवाद की बात है कि परमेश्वर ऐसा व्यवहार नहीं करता, वह हमें सब बातें स्पष्ट बताता है, कुछ भी नहीं छुपाता। परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि, "...सब ने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित हैं" (रोमियों 3:23)। मनुष्यों के पाप स्वभाव और उस पाप स्वभाव के निवारण के उपाय के विषय में परमेश्वर ने आरंभ से ही हमें बताया हुआ है (उत्पत्ति 3)। परमेश्वर के इसी उपाय का उल्लेख हम पौलुस प्रेरित द्वारा रोम के मसीही विशवासियों के नाम लिखी गई पत्री में भी पाते हैं: "परन्तु उसके अनुग्रह से उस छुटकारे के द्वारा जो मसीह यीशु में है, सेंत मेंत धर्मी ठहराए जाते हैं" (रोमियों 3:24)।

   परमेश्वर ने अपने पुत्र प्रभु यीशु को संसार के सभी लोगों के पापों के दण्ड को उठा लेने के लिए भेजा। उन पापों के लिए क्रूस पर दिए गए उसके बलिदान के द्वारा आज संसार के सभी लोगों के लिए पाप क्षमा का मार्ग खुला और उपलब्ध है। जो कोई प्रभु यीशु पर विश्वास करके उससे पापों की क्षमा माँगता है और अपना जीवन प्रभु को समर्पित करता है, वह सेंत-मेंत अपने पापों से क्षमा तथा परमेश्वर की सन्तान होने एवं उसकी आशीषों को प्राप्त करने का आदर पा लेता है।

   मैं बहुत धन्यवादी हूँ कि परमेश्वर ने सब के लिए सब कुछ इतना स्पष्ट कर के सब के समक्ष रख दिया है; उसने हमें मनुष्यों के अविश्वसनीय आशवासनों को लेकर इधर-उधर भटकते रहने के लिए नहीं छोड़ा। उसने आज तक कभी किसी को इस क्षमा को पाने से वंचित नहीं किया, किसी अन्य बात में नहीं उलझाया। जो कोई स्वेच्छा से उसे ग्रहण करना चाहे उसके लिए परमेश्वर का आश्वासन निश्चित है, कारगर है, सदा सेंत-मेंत उपलब्ध है। - सी. पी. हिया


प्रभु यीशु का बलिदान हमें सुरक्षित करता है; परमेश्वर का वचन उसके लिए हमें निश्चित करता है।

और जैसे आदम में सब मरते हैं, वैसा ही मसीह में सब जिलाए जाएंगे। - 1 कुरिन्थियों 15:22

बाइबल पाठ: रोमियों 3:20-26
Romans 3:20 क्योंकि व्यवस्था के कामों से कोई प्राणी उसके साम्हने धर्मी नहीं ठहरेगा, इसलिये कि व्यवस्था के द्वारा पाप की पहिचान होती है। 
Romans 3:21 पर अब बिना व्यवस्था परमेश्वर की वह धामिर्कता प्रगट हुई है, जिस की गवाही व्यवस्था और भविष्यद्वक्ता देते हैं। 
Romans 3:22 अर्थात परमेश्वर की वह धामिर्कता, जो यीशु मसीह पर विश्वास करने से सब विश्वास करने वालों के लिये है; क्योंकि कुछ भेद नहीं। 
Romans 3:23 इसलिये कि सब ने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित हैं। 
Romans 3:24 परन्तु उसके अनुग्रह से उस छुटकारे के द्वारा जो मसीह यीशु में है, सेंत मेंत धर्मी ठहराए जाते हैं। 
Romans 3:25 उसे परमेश्वर ने उसके लोहू के कारण एक ऐसा प्रायश्चित्त ठहराया, जो विश्वास करने से कार्यकारी होता है, कि जो पाप पहिले किए गए, और जिन की परमेश्वर ने अपनी सहनशीलता से आनाकानी की; उन के विषय में वह अपनी धामिर्कता प्रगट करे। 
Romans 3:26 वरन इसी समय उस की धामिर्कता प्रगट हो; कि जिस से वह आप ही धर्मी ठहरे, और जो यीशु पर विश्वास करे, उसका भी धर्मी ठहराने वाला हो।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 54-56
  • रोमियों 3


सोमवार, 21 जुलाई 2014

साथ


   हमारे क्षेत्र में इंग्लिश फुटबॉल खेल का एक प्रमुख आकर्षण है सालाना एफ ए कप प्रतियोगिता का फाइनल मैच। सौ वर्ष से भी अधिक समय से यह दिन उत्साह, उत्सव और प्रतिस्पर्धा के साथ मनाया जाता रहा है। लेकिन इस दिन को लेकर मेरे लिए जो सबसे रोमांचकारी बात रही है वह है खेल के आरंभ होने का तरीका। प्रति वर्ष इस सालाना प्रतियोगिता का यह फाईनल मैच आरम्भ होता है एक पारंपरिक भक्ति गीत Abide With Me (रह मेरे साथ) के गाए जाने के द्वारा।

   पहले मुझे यह बड़ा अटपटा सा लगा - भला फुटबॉल के साथ भक्ति गीत का क्या लेना-देना हो सकता है? जब मैंने इस पर थोड़ा विचार किया, तो मुझे समझ आया कि एक मसीही विश्वासी के लिए परमेश्वर की संगति हर समय महत्वपूर्ण है, चाहे वह खेल-कूद, बाज़ार-खरीददारी, व्यवसाय-कार्य स्थल, स्कूल, या अन्य कोई भी कार्य करना क्यों ना हो। प्रत्येक मसीही विश्वासी के जीवन का ऐसा कोई पहलु नहीं है जिसमें परमेश्वर की उपस्थिति का प्रभाव नहीं होता; इसलिए यह लालसा कि परमेश्वर हर समय साथ बना रहे हम मसीही विश्वासियों के लिए सबसे स्वाभाविक लालसा है।

   लेकिन परमेश्वर का यह लगातार बना रहने वाला साथ कोई ऐसी बात नहीं है जिसके लिए हमें परमेश्वर के सामने गिड़गड़ाते रहना पड़ेगा, वरन यह तो परमेश्वर पिता की ओर से अपने बच्चों को दिया गया वायदा है: "तुम्हारा स्‍वभाव लोभरिहत हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा" (इब्रानियों 13:5)। ना केवल परमेश्वर का साथ हम मसीही विश्वासियों की हर परिस्थिति में संतुष्टि की कुँजी है, वरन यह साथ हमें सद्बुद्धि, शांति, सांत्वना, और सामर्थ भी देता है - हम चाहे जहाँ हों, चाहे कोई भी कार्य कर रहे हों, चाहे जिस भी परिस्थिति में हों। - बिल क्राउडर


हम मसीही विश्वासियों का सबसे महान सौभग्य है प्रभु यीशु की संगति और उसका आनन्द।

तू हियाव बान्ध और दृढ़ हो, उन से न डर और न भयभीत हो; क्योंकि तेरे संग चलने वाला तेरा परमेश्वर यहोवा है; वह तुझ को धोखा न देगा और न छोड़ेगा। - व्यवस्थाविवरण 31:6

बाइबल पाठ: इब्रानियों 13:1-8
Hebrews 13:1 भाईचारे की प्रीति बनी रहे। 
Hebrews 13:2 पहुनाई करना न भूलना, क्योंकि इस के द्वारा कितनों ने अनजाने स्‍वर्गदूतों की पहुनाई की है। 
Hebrews 13:3 कैदियों की ऐसी सुधि लो, कि मानो उन के साथ तुम भी कैद हो; और जिन के साथ बुरा बर्ताव किया जाता है, उन की भी यह समझकर सुधि लिया करो, कि हमारी भी देह है। 
Hebrews 13:4 विवाह सब में आदर की बात समझी जाए, और बिछौना निष्‍कलंक रहे; क्योंकि परमेश्वर व्यभिचारियों, और परस्त्रीगामियों का न्याय करेगा। 
Hebrews 13:5 तुम्हारा स्‍वभाव लोभरिहत हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा। 
Hebrews 13:6 इसलिये हम बेधड़क हो कर कहते हैं, कि प्रभु, मेरा सहायक है; मैं न डरूंगा; मनुष्य मेरा क्या कर सकता है।
Hebrews 13:7 जो तुम्हारे अगुवे थे, और जिन्हों ने तुम्हें परमेश्वर का वचन सुनाया है, उन्हें स्मरण रखो; और ध्यान से उन के चाल-चलन का अन्‍त देखकर उन के विश्वास का अनुकरण करो। 
Hebrews 13:8 यीशु मसीह कल और आज और युगानुयुग एकसा है।

एक साल में बाइबल: 
  • सभोपदेशक 1-3