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Saturday, January 25, 2020

आशा



      कुछ समय पहले मैं अपने एक मित्र के साथ एम्पायर स्टेट बिलडिंग देखने गया। हमारे समान उसे देखने आए अन्य लोगों की लाइन छोटी ही लग रही थी, बस थोड़ा सा आगे जाकर कोना मुड़ने तक की। परन्तु जब हम ने उस बिलडिंग में प्रवेश किया तो पाया कि आए हुए लोगों की लाइन लॉबी से आगे सीढ़ियों , और फिर एक कमरे के अन्दर तक तक जा रही थी। हमारा हर मोड़ मुड़ना, कुछ और दूरी को दिखाता था। आकर्षणस्थल और घूमने के स्थानों के संचालक, आने वाले लोगों की भीड़ को ऐसे मार्गों से ले चलते हैं कि देखने वालों को भीड़ कम लगे, किन्तु वास्तविकता तो “मोड़ मुड़ते ही” दिखाई देती है।

      इसी प्रकार जीवन की निराशाएं भी कभी-कभी जितनी दिखाई देती हैं, उससे बढ़कर गंभीर होती हैं। हमने जिस नौकरी के मिलने की आशा रखी थी, वह नहीं मिलती है; जिन मित्रों पर हमने भरोसा किया था उन्होंने हमारे भरोसे को तोड़ दिया; जिस प्रेम संबंध पर हमने आशा रखी थी, वह सफल नहीं हुआ; आदि। परन्तु इन नाकामियों और दिल तोड़ने वाली घटनाओं में परमेश्वर का वचन बाइबल हमें एक नई आशा के प्रति प्रोत्साहित करता है। प्रेरित पौलुस ने लिखा, “केवल यही नहीं, वरन हम क्लेशों में भी घमण्ड करें, यही जानकर कि क्लेश से धीरज। और धीरज से खरा निकलना, और खरे निकलने से आशा उत्पन्न होती है। और आशा से लज्ज़ा नहीं होती, क्योंकि पवित्र आत्मा जो हमें दिया गया है उसके द्वारा परमेश्वर का प्रेम हमारे मन में डाला गया है” (रोमियों 5:3-5)।

      हम जब परमेश्वर में अपना भरोसा बनाए रखते हैं, तो परमेश्वर अपनी आत्मा के द्वारा हमें धीमी आवाज़ में बताता है कि वह हम से बिना किसी शर्त के प्रेम करता है और एक दिन हम उसके साथ होंगे – चाहे आज हमारे सामने कैसी भी बाधाएं क्यों न आ रही हों।

      एक ऐसे संसार में, जो हमें बहुधा निराश करता है, यह जानना कितना अच्छा है कि परमेश्वर में हमें एक वास्तविक आशा मिलती है। - जेम्स बैंक्स

मसीह यीशु में निराश लोगों को भी आशा मिलती है।

प्रभु यीशु ने कहा: “हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा।” (मत्ती 11:28)

बाइबल पाठ: रोमियों 5:1-11
Romans 5:1 सो जब हम विश्वास से धर्मी ठहरे, तो अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर के साथ मेल रखें।
Romans 5:2 जिस के द्वारा विश्वास के कारण उस अनुग्रह तक, जिस में हम बने हैं, हमारी पहुंच भी हुई, और परमेश्वर की महिमा की आशा पर घमण्ड करें।
Romans 5:3 केवल यही नहीं, वरन हम क्लेशों में भी घमण्ड करें, यही जानकर कि क्लेश से धीरज।
Romans 5:4 और धीरज से खरा निकलना, और खरे निकलने से आशा उत्पन्न होती है।
Romans 5:5 और आशा से लज्ज़ा नहीं होती, क्योंकि पवित्र आत्मा जो हमें दिया गया है उसके द्वारा परमेश्वर का प्रेम हमारे मन में डाला गया है।
Romans 5:6 क्योंकि जब हम निर्बल ही थे, तो मसीह ठीक समय पर भक्तिहीनों के लिये मरा।
Romans 5:7 किसी धर्मी जन के लिये कोई मरे, यह तो र्दुलभ है, परन्तु क्या जाने किसी भले मनुष्य के लिये कोई मरने का भी हियाव करे।
Romans 5:8 परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा।
Romans 5:9 सो जब कि हम, अब उसके लोहू के कारण धर्मी ठहरे, तो उसके द्वारा क्रोध से क्यों न बचेंगे?
Romans 5:10 क्योंकि बैरी होने की दशा में तो उसके पुत्र की मृत्यु के द्वारा हमारा मेल परमेश्वर के साथ हुआ फिर मेल हो जाने पर उसके जीवन के कारण हम उद्धार क्यों न पाएंगे?
Romans 5:11 और केवल यही नहीं, परन्तु हम अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा जिस के द्वारा हमारा मेल हुआ है, परमेश्वर के विषय में घमण्ड भी करते हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 12-13
  • मत्ती 16