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Wednesday, December 12, 2012

निर्भर


   हमारे वायुयान के उतरने के बाद मैं और जे उसमें से निकले और कीन्या के मसाई मारा में प्रवेश किया। हमारा स्वागत मसाई कबीले के एक व्यक्ति सैमी ने किया। उसने हमारा सामान लेकर गाड़ी में रखा और हमें हमारे खेमे की ओर ले चला जहां हम अगले दो दिन बिताने वाले थे। मार्ग में हम एक स्थान पर रुक गए कि मसाई मारा से सेरेन्गेटी को प्रवास कर रहे ज़ेबरा और विल्डरबीस्ट के झुंडों को देख सकें। सैमी ने हमें बताया कि इन दोनो प्रकार के जानवरों के ये विशाल झुंड सदा एक साथ ही एक स्थान से दूसरे की ओर प्रवास करते हैं। इसका कारण है दोनो की भिन्न क्षमताएं और कमज़ोरियां।

   ज़ेबरा की दृष्टि तो बहुत अच्छी होती है किंतु सूंघने की शक्ति बहुत कम; इसके विपरीत विल्डरबीस्ट की सूंघने की शक्ति बहुत अच्छी होती है किंतु आंखें कमज़ोर। एक साथ चलने से वे एक दुसरे कि शक्तियों का लाभ उठाते हैं और शिकारी जानवरों से अपना बचाव बेहतर कर लेते हैं, उनकी कमज़ोरियां उनकी परस्पर शक्तियों से ढंप जाती हैं। यह हमारे लिए परमेश्वर द्वारा सृष्टि में दिए गए अनेक पाठों में से एक महत्वपुर्ण पाठ था।

   जैसे परमेश्वर ने भिन्न जानवरों को भिन्न शक्ति और कमज़ोरियों के साथ बनाया है, वैसे ही वह मनुष्यों को भी एक दुसरे से भिन्न बनाता है जिससे वे मिल-जुलकर एक साथ एक दुसरे की भलाई के लिए कार्य कर सकें। परमेश्वर हमें ना केवल अपने ऊपर निर्भर देखना चाहता है, वरन यह भी कि हम एक दुसरे पर भी निर्भर रहें। प्रेरित पुलुस ने कुरिन्थियों के विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में इस विषय पर लिखा है। उसने उन्हें समझाया कि परमेश्वर ने अपनी देह अर्थात अपनी मण्डली में लोगों को भिन्न भिन्न वरदानों और क्षमताओं के साथ रखा है कि सब एक साथ मिल कर देह की उन्नति के लिए कार्य करें; किसी एक के कार्य के द्वारा ही मण्डली उन्नति नहीं पा सकती (१ कुरिन्थियों १२:१२-३१)।

   प्रभु की देह - उसकी मण्डली या चर्च तब ही स्वस्थ रहेगा और उन्नति करेगा जब उसके सदस्य एक साथ मिलकर अपनी अपनी क्षमताओं और सामर्थ को परस्पर एक दूसरे की भलाई और उन्नति के लिए प्रयोग करेंगे। अकेले या केवल अपने लिए कार्य करने से ना तो व्यक्ति उन्नति करेगा और ना ही प्रभु की मण्डली। - जूली ऐकैरमैन लिंक


मिल-जुलकर किया गया कार्य मात्रा और गुणवन्ता में किसी के अकेले द्वारा किए गए कार्य से सदा अधिक होता है।

ताकि देह में फूट न पड़े, परन्‍तु अंग एक दूसरे की बराबर चिन्‍ता करें। - १ कुरिन्थियों १२:२५

बाइबल पाठ: - १ कुरिन्थियों १२:१४-२७
1Co 12:14  इसलिये कि देह में एक ही अंग नहीं, परन्‍तु बहुत से हैं। 
1Co 12:15  यदि पांव कहे: कि मैं हाथ नहीं, इसलिये देह का नहीं, तो क्‍या वह इस कारण देह का नहीं? 
1Co 12:16  और यदि कान कहे कि मैं आंख का नहीं, इसलिये देह का नहीं, तो क्‍या वह इस कारण देह का नहीं? 
1Co 12:17   यदि सारी देह आंख ही होती तो सुनना कहां से होता? यदि सारी देह कान ही होती तो सूंघना कहां होता? 
1Co 12:18  परन्‍तु सचमुच परमेश्वर ने अंगो को अपनी इच्‍छा के अनुसार एक एक करके देह में रखा है। 
1Co 12:19   यदि वे सब एक ही अंग होते, तो देह कहां होती? 
1Co 12:20  परन्‍तु अब अंग तो बहुत से हैं, परन्‍तु देह एक ही है। 
1Co 12:21   आंख हाथ से नहीं कह सकती, कि मुझे तेरा प्रयोजन नहीं, और न सिर पांवों से कह सकता है, कि मुझे तुम्हारा प्रयोजन नहीं। 
1Co 12:22  परन्‍तु देह के वे अंग जो औरों से निर्बल देख पड़ते हैं, बहुत ही आवश्यक हैं। 
1Co 12:23  और देह के जिन अंगो को हम आदर के योग्य नहीं समझते हैं उन्‍ही को हम अधिक आदर देते हैं; और हमारे शोभाहीन अंग और भी बहुत शोभायमान हो जाते हैं। 
1Co 12:24  फिर भी हमारे शोभायमान अंगो को इस का प्रयोजन नहीं, परन्‍तु परमेश्वर ने देह को ऐसा बना दिया है, कि जिस अंग को घटी थी उसी को और भी बहुत आदर हो। 
1Co 12:25  ताकि देह में फूट न पड़े, परन्‍तु अंग एक दूसरे की बराबर चिन्‍ता करें। 
1Co 12:26  इसलिये यदि एक अंग दु:ख पाता है, तो सब अंग उसके साथ दु:ख पाते हैं; और यदि एक अंग की बड़ाई होती है, तो उसके साथ सब अंग आनन्‍द मनाते हैं। 
1Co 12:27  इसी प्रकार तुम सब मिल कर मसीह की देह हो, और अलग अलग उसके अंग हो।

एक साल में बाइबल: 
  • होशे ९-११ 
  • प्रकाशितवाक्य ३