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रविवार, 28 मार्च 2021

घेरे हुए

 

          एक व्यस्त हवाई अड्डे में, एक छोटे बच्चे को लिए हुए युवा माँ, जो बढ़ी हुई गर्भावस्था में भी थी, अपने छोटे बच्चे को संभालने के लिए संघर्ष कर रही थी; किन्तु वह बच्चा उसकी सुनने के बजाए चिल्ला रहा था, हाथ-पैर पटक रहा था, और हवाई-जहाज़ में चढ़ने जाने के लिए मना कर रहा था। आखिरकार, परेशान और थकी हुई, वह महिला वहीं फर्श पर बैठ गई और अपना मुँह अपने हाथों में छुपा कर सुबकने लगी।

          तुरंत ही आस-पास बैठे हुए लोगों में से छः या सात स्त्रियाँ उठीं, सभी एक दूसरे और उस महिला से बिलकुल अजनबी थीं, उन्होंने उसे और उसके बच्चे को घेर लिया, और मिलकर उन्हें सम्भालने लगीं, दिलासा देने लगीं। किसी ने उन्हें कुछ खाने-पीने की वस्तुएँ दीं, किसी ने पानी दिया, किसी ने बच्चे और माँ को आलिंगन में लेकर शांत किया, और एक तो बच्चों के लोकप्रिय गाने भी बच्चे के लिए गाने लगी। थोड़ी ही देर में परिस्थिति नियंत्रण में आ गई; वह माँ और उसका बच्चा शांत हो गए, बच्चा हवाई जहाज़ में चढ़ने के लिए तैयार हो गया, और वे सभी स्त्रियाँ, अपनी-अपनी सीट पर चली गईं। किसी ने किसी अन्य के साथ कोई चर्चा नहीं की, किन्तु सभी जानती थीं कि उन सभी की सहायता और सहयोग से उस युवा माँ को सही समय पर वह सहारा और हिम्मत मिली जिसकी उसे उस परिस्थिति में आवश्यकता थी।

          यह परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 125 में लिखे एक मनोहर सत्य,जिस प्रकार यरूशलेम के चारों ओर पहाड़ हैं, उसी प्रकार यहोवा अपनी प्रजा के चारों ओर अब से ले कर सर्वदा तक बना रहेगा” (पद 2) ,का सुन्दर चित्रण है। यह पद स्मरण करवाता है कि जिस प्रकार वह व्यस्त और हलचल से भरा शहर यरूशलेम, पहाड़ों से घिरा हुआ है, जिनमें जैतून का पहाड़, सिय्योन पर्वत, और मोरिय्याह पर्वत भी हैं, वैसे ही परमेश्वर के जन भी सदा उसके घेरे में बने रहते हैं।

          परमेश्वर भी अपने लोगों को घेरे रहता है – उन्हें सहारा दिए रहता है, उनकी सुरक्षा बनाए रखता है, और उनकी देखभाल करता रहता है, अभी और हर समय। इसलिए जब कोई दिन या समय कठिन हो तो जैसा भजनकार भजन 121:1 में कहता है, आप भी अपनी दृष्टि पर्वतों की ओर उठाएँ। परमेश्वर की सामर्थी सहायता, अटल आशा, और अनन्त प्रेम सदा उसके बच्चों के साथ बने रहते हैं, उसकी उपस्थिति उन्हें हमेशा घेरे रहती है। - पेट्रीशिया रेबोन

 

प्रभु हमारे कठिन समयों में हमें घेरे हुई आपकी उपस्थिति का एहसास करवाएँ।

मैं [प्रभु यीशु] तुम्हें अनाथ न छोडूंगा, मैं तुम्हारे पास आता हूं। - यूहन्ना 14:18

बाइबल पाठ: भजन 125:1-5

भजन 125:1 जो यहोवा पर भरोसा रखते हैं, वे सिय्योन पर्वत के समान हैं, जो टलता नहीं, वरन सदा बना रहता है।

भजन 125:2 जिस प्रकार यरूशलेम के चारों ओर पहाड़ हैं, उसी प्रकार यहोवा अपनी प्रजा के चारों ओर अब से ले कर सर्वदा तक बना रहेगा।

भजन 125:3 क्योंकि दुष्टों का राजदण्ड धर्मियों के भाग पर बना न रहेगा, ऐसा न हो कि धर्मी अपने हाथ कुटिल काम की ओर बढ़ाएं।

भजन 125:4 हे यहोवा, भलों का, और सीधे मन वालों का भला कर!

भजन 125:5 परन्तु जो मुड़ कर टेढ़े मार्गों में चलते हैं, उन को यहोवा अनर्थकारियों के संग निकाल देगा! इस्राएल को शान्ति मिले!

 

एक साल में बाइबल: 

  • न्यायियों 4-6
  • लूका 4:31-44

गुरुवार, 5 जुलाई 2018

सहायता


      माई आस्या के तीस सहपाठी और उनके अभिभावक देख रहे थे जब वह घबराई हुई स्कूल में पांचवीं कक्षा उत्तीर्ण करने के दीक्षांत समारोह में बोलने के लिए मंच की ओर बढ़ी। स्कूल की प्रधान-अध्यापिका ने उसके कद के अनुसार माईक की ऊँचाई को ठीक किया, परन्तु माई आस्या माईक और दर्शकों की ओर पीठ करके खड़ी हो गई। दर्शकों में से लोग उसका हौसला बढ़ाने के लिए  उस से कहने लगे, “डरो नहीं, तुम यह कर सकती हो” परन्तु वह हिली तक नहीं। फिर उसका एक सहपाठी चलकर उसके पास आया और उसके साथ खड़ा हो गया। तब, एक ओर उसका मित्र, और दूसरी ओर प्रधान-अध्यापिका, तीनों ने मिलकर उसके उस भाषण को इकठ्ठे पढ़ा। सहारा बनने और सहायता करने का यह कैसा सुन्दर उदाहरण था।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम पाते हैं कि अमालेकियों से हो रहे युद्ध के दौरान मूसा को भी सहायता और सहारे की आवश्यकता पड़ी (निर्गमन 17:10-16)। “और जब तक मूसा अपना हाथ उठाए रहता था तब तक तो इस्राएल प्रबल होता था; परन्तु जब जब वह उसे नीचे करता तब तब अमालेक प्रबल होता था” (पद 11); जब हारून और हूर ने देखा कि क्या हो रहा है, वे दोनों मूसा के साथ खड़े हो गए, एक इस ओर तो दूसरा दूसरी ओर, और उसके थकते हुए हाथों को सहारा दिया। उनके इस सहयोग की सहायता से, सांझ होने तक, इस्राएलियों को युद्ध में विजय मिल गई।

      हम सभी को एक दूसरे की सहायता, सहयोग और सहारे की आवश्यकता पड़ती है। परमेश्वर के परिवार के भाई-बहनों के रूप में, हमारे पास मसीही विश्वास की अपनी इस यात्रा में एक दूसरी की सहायता करने के अनेकों अवसर होते हैं। और परमेश्वर हमारे साथ, हमारे मध्य में रहता है, हमें ऐसा करने के लिए आवश्यक अनुग्रह प्रदान करता रहता है। -ऐनी सेटास

प्रोत्साहन की एक चिंगारी से आशा का दीपक जल उठता है।

प्रभु यहोवा ने मुझे सीखने वालों की जीभ दी है कि मैं थके हुए को अपने वचन के द्वारा संभालना जानूं। भोर को वह नित मुझे जगाता और मेरा कान खोलता है कि मैं शिष्य के समान सुनूं। - यशायाह 50:4

बाइबल पाठ: निर्गमन 17:8-16
Exodus 17:8 तब अमालेकी आकर रपीदीम में इस्राएलियों से लड़ने लगे।
Exodus 17:9 तब मूसा ने यहोशू से कहा, हमारे लिये कई एक पुरूषों को चुनकर छांट ले, ओर बाहर जा कर अमालेकियों से लड़; और मैं कल परमेश्वर की लाठी हाथ में लिये हुए पहाड़ी की चोटी पर खड़ा रहूंगा।
Exodus 17:10 मूसा की इस आज्ञा के अनुसार यहोशू अमालेकियों से लड़ने लगा; और मूसा, हारून, और हूर पहाड़ी की चोटी पर चढ़ गए।
Exodus 17:11 और जब तक मूसा अपना हाथ उठाए रहता था तब तक तो इस्राएल प्रबल होता था; परन्तु जब जब वह उसे नीचे करता तब तब अमालेक प्रबल होता था।
Exodus 17:12 और जब मूसा के हाथ भर गए, तब उन्होंने एक पत्थर ले कर मूसा के नीचे रख दिया, और वह उस पर बैठ गया, और हारून और हूर एक एक अलंग में उसके हाथों को सम्भाले रहें; और उसके हाथ सूर्यास्त तक स्थिर रहे।
Exodus 17:13 और यहोशू ने अनुचरों समेत अमालेकियों को तलवार के बल से हरा दिया।
Exodus 17:14 तब यहोवा ने मूसा से कहा, स्मरणार्थ इस बात को पुस्तक में लिख ले और यहोशू को सुना दे, कि मैं आकाश के नीचे से अमालेक का स्मरण भी पूरी रीति से मिटा डालूंगा।
Exodus 17:15 तब मूसा ने एक वेदी बनाकर उसका नाम यहोवानिस्सी रखा ;
Exodus 17:16 और कहा, यहोवा ने शपथ खाई है, कि यहोवा अमालेकियों से पीढिय़ों तक लड़ाई करता रहेगा।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 30-31
  • प्रेरितों 13:26-52


बुधवार, 23 मार्च 2016

एकता


   परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन 6:16-19 में उन सात बातों का उल्लेख है जिनसे परमेश्वर को घृणा है, और इन बातों में से एक है भाईयों के बीच में झगड़ा उत्पन्न करना। इसी बात के कारण वह एकता जो प्रभु यीशु मसीह मसीही विश्वासी भाईयों में देखना चाहता है (यूहन्ना 17:21-22) वह बिगड़ जाती है।

   जो भेदभाव या झगड़े उत्पन्न करते हैं, कई बार उनका इरादा ऐसा करने का नहीं होता है, वरन वे या तो अपनी व्यक्तिगत या जिस गुट के वे हैं उसकी आवश्यकताओं की पूर्ति करने के प्रयासों में ऐसा कर बैठते हैं (याकूब 4:1-10)। इन झगड़ों और मतभेदों के कारणों को समझने के लिए बाइबल में दी गई कुछ घटनाओं पर विचार कीजिए: क्यों लूत और अब्राहम के चरवाहों में झगड़े हुए (उत्पत्ति 13:1-18); या फिर प्रभु यीशु के चेलों में क्यों विवाद हुआ (लूका 9:46); या फिर कुरिन्थुस की मसीही मण्डली में गुटबाज़ी और मतभेद किस कारण आने पाए (1 कुरिन्थियों 3:1-7)?

   एकता को प्रोत्साहन देने का सबसे कारगर तरीका क्या है? यह आरंभ होता है मन परिवर्तन से; जब हम मसीह यीशु के स्वभाव को अपना लेते हैं तो हमारे अन्दर नम्रता और दूसरों की सेवकाई की भावना भी आ जाती है और केवल मसीह यीशु में होकर ही हम वह सामर्थ भी पा सकते जिसके द्वारा हम केवल अपनी ही नहीं वरन औरों की आवश्यकताओं की भी चिन्ता कर सकें (फिलिप्पियों 2:1-5)। जब हम ऐसा करने लगते हैं तो शीघ्र ही दूसरों की आशाएं और आवश्यकताएं हमारे लिए हमारी अपनी आशाओं और आवश्यकताओं से अधिक महत्वपूर्ण हो जाती हैं।

   जब हम परस्पर प्रेम के बन्धनों में बन्धने लगते हैं तो हमारे आपसी मतभेद और झगड़े आनन्द और एकता में बदल जाते हैं। - डेनिस फिशर


हम अकेले उतना कभी नहीं कर पाते जितना दूसरों के साथ मिलकर कर लेते हैं।

हे भाइयो, मैं तुम से यीशु मसीह जो हमारा प्रभु है उसके नाम के द्वारा बिनती करता हूं, कि तुम सब एक ही बात कहो; और तुम में फूट न हो, परन्तु एक ही मन और एक ही मत हो कर मिले रहो। - 1 कुरिन्थियों 1:10 

बाइबल पाठ: नीतिवचन 6:16-19; फिलिप्पियों 2:1-11
Proverbs 6:16 छ: वस्तुओं से यहोवा बैर रखता है, वरन सात हैं जिन से उसको घृणा है 
Proverbs 6:17 अर्थात घमण्ड से चढ़ी हुई आंखें, झूठ बोलने वाली जीभ, और निर्दोष का लोहू बहाने वाले हाथ, 
Proverbs 6:18 अनर्थ कल्पना गढ़ने वाला मन, बुराई करने को वेग दौड़ने वाले पांव, 
Proverbs 6:19 झूठ बोलने वाला साक्षी और भाइयों के बीच में झगड़ा उत्पन्न करने वाला मनुष्य। 

Philippians 2:1 सो यदि मसीह में कुछ शान्‍ति और प्रेम से ढाढ़स और आत्मा की सहभागिता, और कुछ करूणा और दया है। 
Philippians 2:2 तो मेरा यह आनन्द पूरा करो कि एक मन रहो और एक ही प्रेम, एक ही चित्त, और एक ही मनसा रखो। 
Philippians 2:3 विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो। 
Philippians 2:4 हर एक अपने ही हित की नहीं, वरन दूसरों के हित की भी चिन्‍ता करे। 
Philippians 2:5 जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो। 
Philippians 2:6 जिसने परमेश्वर के स्‍वरूप में हो कर भी परमेश्वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्तु न समझा। 
Philippians 2:7 वरन अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्‍वरूप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया। 
Philippians 2:8 और मनुष्य के रूप में प्रगट हो कर अपने आप को दीन किया, और यहां तक आज्ञाकारी रहा, कि मृत्यु, हां, क्रूस की मृत्यु भी सह ली। 
Philippians 2:9 इस कारण परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्ठ है। 
Philippians 2:10 कि जो स्वर्ग में और पृथ्वी पर और जो पृथ्वी के नीचे है; वे सब यीशु के नाम पर घुटना टेकें। 
Philippians 2:11 और परमेश्वर पिता की महिमा के लिये हर एक जीभ अंगीकार कर ले कि यीशु मसीह ही प्रभु है। 

एक साल में बाइबल: 
  • यहोशु 13-15
  • लूका 1:57-80


सोमवार, 30 दिसंबर 2013

भूमिका


   पिछले कई वर्षों से मेरी बेटी, रोज़ी, स्थानीय माध्यमिक विद्यालय में नाटकों की निर्देशक रही है। छात्र उसके पास आते हैं कि वे नाटकों में भाग ले सकें और वह उनका परीक्षण करके उनके लिए उपयुक्त भूमिकाएं निर्धारित करती है। कुछ छात्र प्रमुख पात्रों की भूमिकाएं पाते हैं, लेकिन फिर भी ऐसी कई सहायक भूमिकाएं होती हैं जो नाटक के लिए आवश्यक हैं और जिनके लिए छात्रों को निर्धारित करना नाटक के सफल प्रदर्शन के लिए अनिवार्य है।

   फिर, ऐसे भी छात्र होते हैं जो नाटक का भाग होना तो चाहते हैं पर पर्दे के सामने आना नहीं चाहते। उनको पर्दा उठाने-गिराने, मंच सज्जा को बदलने, रौशनी तथा विद्युत व्यवस्था की देखभाल करने, पात्रों के साज-सिंगार करने तथा वस्त्र आदि के बदलने में सहायता के लिए उपयोग किया जाता है। कुछ माता-पिता और अभिभावक भी नाटक का अप्रत्यक्ष भाग हो जाते हैं। जब नाटक का पूर्वाभ्यास चल रहा होता है तो वे लोग कार्य करने वालों के लिए अल्पाहार का प्रबंध करते हैं, आवश्यक वस्तुओं को भेंट करते हैं, मंच का सामान और वस्त्र बनाने में सहायता करते हैं, नाटक से संबंधित विज्ञापन और सूचनाएं बनाते तथा वितृत करते हैं। किसी भी नाटक के सफल प्रदर्शन के लिए 4 - 5 महीनों का अथक परिश्रम करना होता है जो अनेक समर्पित स्वयंसेवकों के सहयोग और सहायता से ही संभव होने पाता है।

   प्रभु यीशु मसीह की देह अर्थात उसकी मण्डली के सफल और पूर्णरूपेण कार्य के लिए भी प्रत्येक मसीही विश्वासी का योगदान अनिवार्य है। प्रत्येक मसीही विश्वासी को परमेश्वर द्वारा कोई ना कोई वरदान दिया गया है। जब ये सभी वरदान मिलकर कार्य करते हैं तब ही "सारी देह हर एक जोड़ की सहायता से एक साथ मिलकर, और एक साथ गठकर उस प्रभाव के अनुसार जो हर एक भाग के परिमाण से उस में होता है, अपने आप को बढ़ाती है, कि वह प्रेम में उन्नति करती जाए" (इफिसियों 4:16); ये सभी भिन्न भाग मिलकर ही एक देह बनते हैं (रोमियों 12:5)।

   हम सभी मसीही विश्वासियों को एक दूसरे की आवश्यकता है, मसीह की देह अर्थात मसीह की मण्डली की उन्नति के लिए आप क्या भूमिका निभा रहे हैं? - सिंडी हैस कैस्पर


किसी भी मण्डली के सुचारू रूप से कार्य करने के लिए उसके सभी सदस्यों को एक दूसरे के लिए अपने आत्मिक वर्दानों का उपयोग करते रहना चाहिए।

इसी प्रकार तुम सब मिल कर मसीह की देह हो, और अलग अलग उसके अंग हो। - 1 कुरिन्थियों 12:27

बाइबल पाठ: रोमियों 12:1-8
Romans 12:1 इसलिये हे भाइयों, मैं तुम से परमेश्वर की दया स्मरण दिला कर बिनती करता हूं, कि अपने शरीरों को जीवित, और पवित्र, और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान कर के चढ़ाओ: यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है। 
Romans 12:2 और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो। 
Romans 12:3 क्योंकि मैं उस अनुग्रह के कारण जो मुझ को मिला है, तुम में से हर एक से कहता हूं, कि जैसा समझना चाहिए, उस से बढ़कर कोई भी अपने आप को न समझे पर जैसा परमेश्वर ने हर एक को परिमाण के अनुसार बांट दिया है, वैसा ही सुबुद्धि के साथ अपने को समझे। 
Romans 12:4 क्योंकि जैसे हमारी एक देह में बहुत से अंग हैं, और सब अंगों का एक ही सा काम नहीं। 
Romans 12:5 वैसा ही हम जो बहुत हैं, मसीह में एक देह हो कर आपस में एक दूसरे के अंग हैं। 
Romans 12:6 और जब कि उस अनुग्रह के अनुसार जो हमें दिया गया है, हमें भिन्न भिन्न वरदान मिले हैं, तो जिस को भविष्यद्वाणी का दान मिला हो, वह विश्वास के परिमाण के अनुसार भविष्यद्वाणी करे। 
Romans 12:7 यदि सेवा करने का दान मिला हो, तो सेवा में लगा रहे, यदि कोई सिखाने वाला हो, तो सिखाने में लगा रहे। 
Romans 12:8 जो उपदेशक हो, वह उपदेश देने में लगा रहे; दान देनेवाला उदारता से दे, जो अगुआई करे, वह उत्साह से करे, जो दया करे, वह हर्ष से करे।

एक साल में बाइबल: 
  • ज़कर्याह 13-14 
  • प्रकाशितवाक्य 21


बुधवार, 16 अक्टूबर 2013

सफल

   प्रसिद्ध बास्केटबॉल प्रशिक्षक जौन वुडेन ने प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली टीम के लिए एक रोचक नियम बना रखा था; जब कभी कोई खिलाड़ी अंक बनाता तो उसे उस खिलाड़ी को धन्यवाद करना होता था जिसकी सहायता से अंक बनाने का अवसर उसे मिला। जब वे हाई-स्कूल में प्रशिक्षण दिया करते थे तो एक खिलाड़ी ने उनसे पूछा, "क्या ऐसा करने से खेल का बहुत समय व्यर्थ नहीं चला जाएगा?" उनका उत्तर था, "मैं तुम्हें हर बार खेल रोक कर उस खिलाड़ी के पास जाकर धन्यवाद करते रहने को नहीं कह रहा हूँ, केवल उसकी ओर देखकर अपना सिर हिलाकर उसकी सहायता के लिए आभारी होना ही काफी होगा।"

   बास्केटबॉल कोर्ट पर विजयी होने के लिए यह आवश्यक था कि सभी खिलाड़ी अपने आप को एक ही दल के अंग के रूप में देखें और इसी मनोवृति के साथ खेलें, ना कि स्वतंत्र खेलने वाले लोगों के झुंड जैसे। इसके लिए उनका एक दुसरे के साथ बन्धे रहना, एक दूसरे के प्रति धन्यवादी रहना बहुत आवश्यक था, तब ही वे एक साथ मिलकर एक दूसरे के पूरक होकर एक टीम के रूप में जीत सकते थे। जयवंत होने के लिए भिन्नता में एकता रखने की यह शिक्षा परमेश्वर के वचन बाइबल की शिक्षा पर आधारित है।

   प्रेरित पौलुस ने कुरिन्थुस की मसीही मण्डली को समझाया कि वे सब मसीह यीशु में एक देह होकर कार्य करें। वे सब एक ही देह के भिन्न अंगों के समान हैं और सब एक साथ मिलकर ही देह की उन्नति और स्वास्थ्य का कारण हो सकते हैं। कोई भी एक अंग किसी अन्य से अधिक महत्वपूर्ण नहीं और ना ही कोई अंग किसी अन्य से गौण। प्रत्येक का देह में अपना विशिष्ट स्थान है, और प्रत्येक अपने कार्य के लिए देह के लिए आवश्यक है। यदि एक भी अंग ठीक से कार्य नहीं करेगा तो सारी देह पर इसका दुषप्रभाव आएगा।

   क्या किसी चर्च मण्डली के पास्टर की, या किसी बाइबल अधय्यन की, या किसी अन्य मसीही कार्य योजना की सफलता केवल किसी एक व्यक्ति ही के कारण है? क्या उस प्रमुख दिखने वाले व्यक्ति के पीछे अन्य कई सहायक जन नहीं होते? क्या उनका योगदान इसलिए नज़रंदाज़ होना चाहिए क्योंकि वे प्रकट में सामने नहीं आए? चाहे टीम चर्च की हो, चाहे परिवार हो चाहे कोई संस्था, जब तक उसके सब लोग एक साथ मिलकर अपनी अपनी ज़िम्मेदारियों को भरसक नहीं निभाएंगे, सफलता तो दूर, सुचारू रीति से कार्य करना भी असंभव हो जाएगा।

   जौन वुडेन का नियम और प्रेरित पौलुस द्वारा कु्रिन्थुस की मण्डली को लिखे निर्देश दोनों एक ही सिद्धांत पर आधारित हैं - आगे बढ़ने के लिए हमें एक दुसरे की सहायता की आवश्यकता रहती है, कोई भी अकेले ही आगे नहीं बढ़ सकता, सफल नहीं हो सकता। परमेश्वर द्वारा प्रदान किए गए अपने वरदानों, गुणों और योग्यताओं को परमेश्वर की मण्डली की बढ़ोतरी के लिए, उसे मज़बूत बनाने के लिए और मण्डली से परमेश्वर के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए मिलजुल कर प्रयोग करें। - सिंडी हैस कैस्पर


मसीह यीशु की देह अर्थात उसकी मण्डली में व्यर्थ अथवा महत्वहीन अंग कोई नहीं है।

इसलिये कि देह में एक ही अंग नहीं, परन्तु बहुत से हैं। - 1 कुरिन्थियों 12:14

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 12:12-26
1 Corinthians 12:12 क्योंकि जिस प्रकार देह तो एक है और उसके अंग बहुत से हैं, और उस एक देह के सब अंग, बहुत होने पर भी सब मिलकर एक ही देह हैं, उसी प्रकार मसीह भी है। 
1 Corinthians 12:13 क्योंकि हम सब ने क्या यहूदी हो, क्या युनानी, क्या दास, क्या स्‍वतंत्र एक ही आत्मा के द्वारा एक देह होने के लिये बपतिस्मा लिया, और हम सब को एक ही आत्मा पिलाया गया। 
1 Corinthians 12:14 इसलिये कि देह में एक ही अंग नहीं, परन्तु बहुत से हैं। 
1 Corinthians 12:15 यदि पांव कहे कि मैं हाथ नहीं, इसलिये देह का नहीं, तो क्या वह इस कारण देह का नहीं? 
1 Corinthians 12:16 और यदि कान कहे; कि मैं आंख नहीं, इसलिये देह का नहीं, तो क्या वह इस कारण देह का नहीं? 
1 Corinthians 12:17 यदि सारी देह आंख ही होती तो सुनना कहां से होता? यदि सारी देह कान ही होती तो सूंघना कहां होता? 
1 Corinthians 12:18 परन्तु सचमुच परमेश्वर ने अंगो को अपनी इच्छा के अनुसार एक एक कर के देह में रखा है। 
1 Corinthians 12:19 यदि वे सब एक ही अंग होते, तो देह कहां होती? 
1 Corinthians 12:20 परन्तु अब अंग तो बहुत से हैं, परन्तु देह एक ही है। 
1 Corinthians 12:21 आंख हाथ से नहीं कह सकती, कि मुझे तेरा प्रयोजन नहीं, और न सिर पांवों से कह सकता है, कि मुझे तुम्हारा प्रयोजन नहीं। 
1 Corinthians 12:22 परन्तु देह के वे अंग जो औरों से निर्बल देख पड़ते हैं, बहुत ही आवश्यक हैं। 
1 Corinthians 12:23 और देह के जिन अंगो को हम आदर के योग्य नहीं समझते हैं उन्‍ही को हम अधिक आदर देते हैं; और हमारे शोभाहीन अंग और भी बहुत शोभायमान हो जाते हैं। 
1 Corinthians 12:24 फिर भी हमारे शोभायमान अंगो को इस का प्रयोजन नहीं, परन्तु परमेश्वर ने देह को ऐसा बना दिया है, कि जिस अंग को घटी थी उसी को और भी बहुत आदर हो। 
1 Corinthians 12:25 ताकि देह में फूट न पड़े, परन्तु अंग एक दूसरे की बराबर चिन्‍ता करें। 
1 Corinthians 12:26 इसलिये यदि एक अंग दु:ख पाता है, तो सब अंग उसके साथ दु:ख पाते हैं; और यदि एक अंग की बड़ाई होती है, तो उसके साथ सब अंग आनन्द मनाते हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 47-49 
  • 1 थिस्सुलुनीकियों 4


बुधवार, 17 जुलाई 2013

फिट

   जब मैं अपने पहनने के लिए कपड़े खरीदने जाती हूँ तो कुछ बातें हैं जो वहाँ उपस्थित लोगों को सुनने को मिलती हैं - बहुत लंबा है; बहुत छोटा है; बहुत बड़ा है; बहुत तंग है; बहुत ढीला है आदि! सही रीति से ’फिट’ आने वाले वस्त्र ढूँढ पाना लगभग असंभव लगता है।

   बहुत से लोगों के लिए यही समस्या एक ऐसा चर्च ढूँढने में भी होती है जो उनके लिए बिलकुल ’फिट’ हो! उन्हें प्रत्येक चर्च में कुछ ना कुछ ऐसा दिखता ही है जो उनके अनुसार सही नहीं है। कहीं उन्हें लगता है कि उनके गुण और उपयोगिता का सही आँकलन और आदर नहीं होता, तो कहीं उनके मस्खरेपन का गलत अर्थ लगाया जाता है, तो किसी चर्च में उन्हें औरों के आचरण, विश्वास, कार्यक्रमों या उपस्थित लोगों से परेशानी रहती है। बस उन्हें यही लगता रहता है कि वे उस चर्च में ’फिट’ नहीं हो पा रहे हैं; उन्हें उस मण्डली के लोगों में उनका सही स्थान नहीं मिल पा रहा है।

   लेकिन हम मसीही विश्वासी यह भी जानते हैं कि यह परमेश्वर कि आज्ञा है कि हम आपस में मेल-मिलाप के साथ और एक-दूसरे की सहायतार्थ चर्च में रहें। प्रेरित पौलुस ने इफिसियों की मण्डली को लिखा कि "जिस में सारी रचना एक साथ मिलकर प्रभु में एक पवित्र मन्दिर बनती जाती है। जिस में तुम भी आत्मा के द्वारा परमेश्वर का निवास स्थान होने के लिये एक साथ बनाए जाते हो" (इफिसियों 2:21-22)। अर्थात सभी मसीही विश्वासी मिलकर परमेश्वर का निवास स्थान बनते जा रहे हैं, जैसे मूसा के समय में मिलापवाला तम्बू (निर्गमन 26) और राजा सुलेमान के दिनों में वह भव्य मन्दिर (1 राजा 6:1-14) था। जैसे उस तम्बू और फिर उस मन्दिर में सभी भिन्न वस्तुएं मिलकर एक ऐसी इकाई बन गई थीं जो एक साथ मिलकर परमेश्वर के आदर, आरधना और निवास का स्थान हो गईं, वैसे ही आज हम मसीही विश्वासीयों को भी भिन्न होते हुए भी मिलजुल कर और एक मन होकर एक ऐसा समाज होना है जहाँ संसार परमेश्वर के आदर, आराधना और निवास को देख सके।

   हमें कभी भी कोई भी चर्च हमारे अपने आँकलन के अनुसार सिद्ध नहीं मिलेगा, लेकिन मसीही स्वभाव को लेकर यह हमारा प्रयास रहना चाहिए कि बजाए दूसरों को अपने प्रति ’फिट’ करने के, हम ही पहल करके उनके साथ ’फिट’ होने का प्रयास करें और हम सभी एक मन और एक उद्देश्य के लोग हों जो परमेश्वर की महिमा के लिए एक दूसरे के साथ ’फिट’ होकर रहें। - जूली ऐकैरमैन लिंक


मसीह यीशु का प्रेम भिन्नता में भी एकता और प्रेम उत्पन्न कर सकता है।

क्या तुम नहीं जानते, कि तुम परमेश्वर का मन्दिर हो, और परमेश्वर का आत्मा तुम में वास करता है? - 1 कुरिन्थियों 3:16 

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 2:1-11
Philippians 2:1 सो यदि मसीह में कुछ शान्‍ति और प्रेम से ढाढ़स और आत्मा की सहभागिता, और कुछ करूणा और दया है।
Philippians 2:2 तो मेरा यह आनन्द पूरा करो कि एक मन रहो और एक ही प्रेम, एक ही चित्त, और एक ही मनसा रखो।
Philippians 2:3 विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो।
Philippians 2:4 हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन दूसरों की हित की भी चिन्‍ता करे।
Philippians 2:5 जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो।
Philippians 2:6 जिसने परमेश्वर के स्‍वरूप में हो कर भी परमेश्वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्तु न समझा।
Philippians 2:7 वरन अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्‍वरूप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया।
Philippians 2:8 और मनुष्य के रूप में प्रगट हो कर अपने आप को दीन किया, और यहां तक आज्ञाकारी रहा, कि मृत्यु, हां, क्रूस की मृत्यु भी सह ली।
Philippians 2:9 इस कारण परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्ठ है।
Philippians 2:10 कि जो स्वर्ग में और पृथ्वी पर और जो पृथ्वी के नीचे है; वे सब यीशु के नाम पर घुटना टेकें।
Philippians 2:11 और परमेश्वर पिता की महिमा के लिये हर एक जीभ अंगीकार कर ले कि यीशु मसीह ही प्रभु है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 18-19 
  • प्रेरितों 20:17-38


बुधवार, 12 दिसंबर 2012

निर्भर


   हमारे वायुयान के उतरने के बाद मैं और जे उसमें से निकले और कीन्या के मसाई मारा में प्रवेश किया। हमारा स्वागत मसाई कबीले के एक व्यक्ति सैमी ने किया। उसने हमारा सामान लेकर गाड़ी में रखा और हमें हमारे खेमे की ओर ले चला जहां हम अगले दो दिन बिताने वाले थे। मार्ग में हम एक स्थान पर रुक गए कि मसाई मारा से सेरेन्गेटी को प्रवास कर रहे ज़ेबरा और विल्डरबीस्ट के झुंडों को देख सकें। सैमी ने हमें बताया कि इन दोनो प्रकार के जानवरों के ये विशाल झुंड सदा एक साथ ही एक स्थान से दूसरे की ओर प्रवास करते हैं। इसका कारण है दोनो की भिन्न क्षमताएं और कमज़ोरियां।

   ज़ेबरा की दृष्टि तो बहुत अच्छी होती है किंतु सूंघने की शक्ति बहुत कम; इसके विपरीत विल्डरबीस्ट की सूंघने की शक्ति बहुत अच्छी होती है किंतु आंखें कमज़ोर। एक साथ चलने से वे एक दुसरे कि शक्तियों का लाभ उठाते हैं और शिकारी जानवरों से अपना बचाव बेहतर कर लेते हैं, उनकी कमज़ोरियां उनकी परस्पर शक्तियों से ढंप जाती हैं। यह हमारे लिए परमेश्वर द्वारा सृष्टि में दिए गए अनेक पाठों में से एक महत्वपुर्ण पाठ था।

   जैसे परमेश्वर ने भिन्न जानवरों को भिन्न शक्ति और कमज़ोरियों के साथ बनाया है, वैसे ही वह मनुष्यों को भी एक दुसरे से भिन्न बनाता है जिससे वे मिल-जुलकर एक साथ एक दुसरे की भलाई के लिए कार्य कर सकें। परमेश्वर हमें ना केवल अपने ऊपर निर्भर देखना चाहता है, वरन यह भी कि हम एक दुसरे पर भी निर्भर रहें। प्रेरित पुलुस ने कुरिन्थियों के विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में इस विषय पर लिखा है। उसने उन्हें समझाया कि परमेश्वर ने अपनी देह अर्थात अपनी मण्डली में लोगों को भिन्न भिन्न वरदानों और क्षमताओं के साथ रखा है कि सब एक साथ मिल कर देह की उन्नति के लिए कार्य करें; किसी एक के कार्य के द्वारा ही मण्डली उन्नति नहीं पा सकती (१ कुरिन्थियों १२:१२-३१)।

   प्रभु की देह - उसकी मण्डली या चर्च तब ही स्वस्थ रहेगा और उन्नति करेगा जब उसके सदस्य एक साथ मिलकर अपनी अपनी क्षमताओं और सामर्थ को परस्पर एक दूसरे की भलाई और उन्नति के लिए प्रयोग करेंगे। अकेले या केवल अपने लिए कार्य करने से ना तो व्यक्ति उन्नति करेगा और ना ही प्रभु की मण्डली। - जूली ऐकैरमैन लिंक


मिल-जुलकर किया गया कार्य मात्रा और गुणवन्ता में किसी के अकेले द्वारा किए गए कार्य से सदा अधिक होता है।

ताकि देह में फूट न पड़े, परन्‍तु अंग एक दूसरे की बराबर चिन्‍ता करें। - १ कुरिन्थियों १२:२५

बाइबल पाठ: - १ कुरिन्थियों १२:१४-२७
1Co 12:14  इसलिये कि देह में एक ही अंग नहीं, परन्‍तु बहुत से हैं। 
1Co 12:15  यदि पांव कहे: कि मैं हाथ नहीं, इसलिये देह का नहीं, तो क्‍या वह इस कारण देह का नहीं? 
1Co 12:16  और यदि कान कहे कि मैं आंख का नहीं, इसलिये देह का नहीं, तो क्‍या वह इस कारण देह का नहीं? 
1Co 12:17   यदि सारी देह आंख ही होती तो सुनना कहां से होता? यदि सारी देह कान ही होती तो सूंघना कहां होता? 
1Co 12:18  परन्‍तु सचमुच परमेश्वर ने अंगो को अपनी इच्‍छा के अनुसार एक एक करके देह में रखा है। 
1Co 12:19   यदि वे सब एक ही अंग होते, तो देह कहां होती? 
1Co 12:20  परन्‍तु अब अंग तो बहुत से हैं, परन्‍तु देह एक ही है। 
1Co 12:21   आंख हाथ से नहीं कह सकती, कि मुझे तेरा प्रयोजन नहीं, और न सिर पांवों से कह सकता है, कि मुझे तुम्हारा प्रयोजन नहीं। 
1Co 12:22  परन्‍तु देह के वे अंग जो औरों से निर्बल देख पड़ते हैं, बहुत ही आवश्यक हैं। 
1Co 12:23  और देह के जिन अंगो को हम आदर के योग्य नहीं समझते हैं उन्‍ही को हम अधिक आदर देते हैं; और हमारे शोभाहीन अंग और भी बहुत शोभायमान हो जाते हैं। 
1Co 12:24  फिर भी हमारे शोभायमान अंगो को इस का प्रयोजन नहीं, परन्‍तु परमेश्वर ने देह को ऐसा बना दिया है, कि जिस अंग को घटी थी उसी को और भी बहुत आदर हो। 
1Co 12:25  ताकि देह में फूट न पड़े, परन्‍तु अंग एक दूसरे की बराबर चिन्‍ता करें। 
1Co 12:26  इसलिये यदि एक अंग दु:ख पाता है, तो सब अंग उसके साथ दु:ख पाते हैं; और यदि एक अंग की बड़ाई होती है, तो उसके साथ सब अंग आनन्‍द मनाते हैं। 
1Co 12:27  इसी प्रकार तुम सब मिल कर मसीह की देह हो, और अलग अलग उसके अंग हो।

एक साल में बाइबल: 
  • होशे ९-११ 
  • प्रकाशितवाक्य ३