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Sunday, December 20, 2015

शरण-स्थान


   संसार के इतिहास के मध्यकालीन समय में किसान मैदानों में अपने खेतों में कार्य करते, फसल की देखभाल करते थे। परन्तु यदि कोई दुश्मन आते दिखाई देते तो वे अपने परिवार सहित भागकर किसी निकट के गढ़ वाले नगर में शरण ले लेते थे जब तक कि खतरा टल ना जाए। सदियों से, फ्रांस में स्थित करकासोन, ऐसा ही एक नगर रहा है। ईसा पूर्व पांचवीं शताबदी में पत्थरों से बनाए गए इस गढ़ ने रोम के निवासियों, पश्चिमी यूरोप के निवासी गॉल, जर्मनी के बंजारे विज़िगौथ, जर्मनी के कबायली निवासी फ्रैंक्स और फ्रांस के लोगों को आक्रमणकारियों से शरण दी है। इसका विशाल आकार, ऊँचे बुर्ज, मोटी दीवारों और चहारदिवारियों ने अन्दर शरण लेने वालों को भरोसा और हौंसला दिया है, उन्होंने अपने आप को इसमें सुरक्षित अनुभव किया है।

   हम मसीही विश्वासियों के लिए हमारा जीवता परमेश्वर ही हमारा दृढ़ गढ़ है। परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन नामक पुस्तक में आया है, "यहोवा का नाम दृढ़ गढ़ है; धर्मी उस में भाग कर सब दुर्घटनाओं से बचता है" (नीतिवचन 18:10)। "यहोवा का नाम" द्वारा भजनकार का तात्पर्य है परमेश्वर के चरित्र से - उसकी विश्वसनीयता, सामर्थ और करुणा की भरपूरी से, तथा "बचता है" से तात्पर्य है खतरे के स्थान से निकालकर ऊँचे सुरक्षित स्थान पर रखने की क्षमता से।

   हमें जीवन में अनेक बार खतरों का सामना करना पड़ता है, और ऐसे में हमारी प्रतिक्रीया होती है कि हम बचकर, भागकर किसी सुरक्षित स्थान पर छिप जाएं, किसी का आश्रय ले लें। सामान्यतः लोग ऐसे में अपनी धन-संपदा या फिर रिश्तेदारों, मित्रों और जानकारों पर भरोसा करते हैं, उनकी ओर सहायता के लिए मुड़ते हैं। लेकिन मसीही विश्वासियों के लिए, अपने चरित्र और गुणों के कारण परमेश्वर ही सबसे सुरक्षित और विश्वासयोग्य शरण-स्थान रहता है।

   यदि आज आप किसी परेशानी में हैं, किसी भय का सामना कर रहे हैं तो निःसंकोच होकर परमेश्वर के पास आईए; वह आपका शरण-स्थान बनकर आपको आश्रय देगा, उसमें आप सुरक्षा और शान्ति पाएंगे। - डेनिस फिशर


समय अच्छा हो या बुरा, परमेश्वर सदा ही हमारा सुरक्षित विश्राम स्थान बना रहता है।

यहोवा मेरी चट्टान, और मेरा गढ़ और मेरा छुड़ाने वाला है; मेरा ईश्वर, मेरी चट्टान है, जिसका मैं शरणागत हूं, वह मेरी ढ़ाल और मेरी मुक्ति का सींग, और मेरा ऊँचा गढ़ है। - भजन 18:2

बाइबल पाठ: भजन 37:1-19
Psalms 37:1 कुकर्मियों के कारण मत कुढ़, कुटिल काम करने वालों के विषय डाह न कर! 
Psalms 37:2 क्योंकि वे घास की नाईं झट कट जाएंगे, और हरी घास की नाईं मुर्झा जाएंगे। 
Psalms 37:3 यहोवा पर भरोसा रख, और भला कर; देश में बसा रह, और सच्चाई में मन लगाए रह। 
Psalms 37:4 यहोवा को अपने सुख का मूल जान, और वह तेरे मनोरथों को पूरा करेगा।
Psalms 37:5 अपने मार्ग की चिन्ता यहोवा पर छोड़; और उस पर भरोसा रख, वही पूरा करेगा। 
Psalms 37:6 और वह तेरा धर्म ज्योति की नाईं, और तेरा न्याय दोपहर के उजियाले की नाईं प्रगट करेगा।
Psalms 37:7 यहोवा के साम्हने चुपचाप रह, और धीरज से उसका आसरा रख; उस मनुष्य के कारण न कुढ़, जिसके काम सफल होते हैं, और वह बुरी युक्तियों को निकालता है! 
Psalms 37:8 क्रोध से परे रह, और जलजलाहट को छोड़ दे! मत कुढ़, उस से बुराई ही निकलेगी। 
Psalms 37:9 क्योंकि कुकर्मी लोग काट डाले जाएंगे; और जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वही पृथ्वी के अधिकारी होंगे। 
Psalms 37:10 थोड़े दिन के बीतने पर दुष्ट रहेगा ही नहीं; और तू उसके स्थान को भलीं भांति देखने पर भी उसको न पाएगा। 
Psalms 37:11 परन्तु नम्र लोग पृथ्वी के अधिकारी होंगे, और बड़ी शान्ति के कारण आनन्द मनाएंगे। 
Psalms 37:12 दुष्ट धर्मी के विरुद्ध बुरी युक्ति निकालता है, और उस पर दांत पीसता है; 
Psalms 37:13 परन्तु प्रभु उस पर हंसेगा, क्योंकि वह देखता है कि उसका दिन आने वाला है।
Psalms 37:14 दुष्ट लोग तलवार खींचे और धनुष बढ़ाए हुए हैं, ताकि दीन दरिद्र को गिरा दें, और सीधी चाल चलने वालों को वध करें। 
Psalms 37:15 उनकी तलवारों से उन्हीं के हृदय छिदेंगे, और उनके धनुष तोड़े जाएंगे।
Psalms 37:16 धर्मी का थोड़ा से माल दुष्टों के बहुत से धन से उत्तम है। 
Psalms 37:17 क्योंकि दुष्टों की भुजाएं तो तोड़ी जाएंगी; परन्तु यहोवा धर्मियों को सम्भालता है।
Psalms 37:18 यहोवा खरे लोगों की आयु की सुधि रखता है, और उनका भाग सदैव बना रहेगा। 
Psalms 37:19 विपत्ति के समय, उनकी आशा न टूटेगी और न वे लज्जित होंगे, और अकाल के दिनों में वे तृप्त रहेंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • मीका 1-3
  • प्रकाशितवाक्य 11