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गुरुवार, 15 अगस्त 2019

शरण स्थान



      जब हम शरण स्थान के विषय विचार करते हैं, तो पक्षियों के पंखों का ध्यान करना स्वाभाविक नहीं होता है। यद्यपि पक्षियों के पंख बचाव के लिए बहुत कमज़ोर दिखाई दे सकते हैं, परन्तु जैसे वे दिखते हैं, उससे कहीं अधिक उनमें और भी है। पक्षियों के पंख परमेश्वर की कारीगरी का अद्भुत उदाहरण हैं। पंख के दो प्रकार होते हैं, एक कोमल सपाट और दूसरा रोएँदार। सपाट प्रकार के पंख में बहुत छोटे-छोटे हुक समान कांटे होते हैं जो आपस में फंस कर ज़िप के समान एक साथ बन्द हो जाते हैं; और रोएँदार पंख पक्षी को गरम रखते हैं। दोनों प्रकार के पंख मिलकर पक्षी की हवा और वर्षा से रक्षा करते हैं। परन्तु पक्षियों के बच्चों के केवल रोएँदार पंख ही होते हैं, इसलिए माता-पक्षी को उन्हें अपने पंखों तले ले कर उनकी हवा और वर्षा से रक्षा करनी पड़ती है।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में इसी प्रकार से परमेश्वर द्वारा हमें अपनी आड़ में लेकर हमारी रक्षा करने का चित्रण किया गया है (भजन 91:4)। इससे जो चित्र उभरता है वह आराम और सुरक्षा का है, जैसे कि माता पक्षी अपने बच्चों को अपने पंखों तले लेकर उन्हें बचा कर रखती है। जैसे बच्चे अपने माता-पिता की बाहों की छत्र-छाया में जीवन की कठिनाइयों की आँधियों से सुरक्षित बचे रहते हैं, उसी प्रकार परमेश्वर की उपस्थिति भी हम मसीही विश्वासियों के लिए जीवन की विभिन्न परिस्थितियों में एक सुरक्षित शरण-स्थान है।

      हम चाहे परेशानियों और दुखों से होकर निकलें, फिर भी हम उनका सामना बिना किसी भय के कर सकते हैं क्योंकि परमेश्वर हमारा शरण स्थान है। - लिंडा वॉशिंगटन


जब भय के कारण आशा धूमिल पड़ने लगे, 
तो हमारे शरण स्थान पिता परमेश्वर की आड़ में आ जाएँ।

तू जो अपने दाहिने हाथ के द्वारा अपने शरणगतों को उनके विरोधियों से बचाता है, अपनी अद्भुत करूणा दिखा। अपने आंखो की पुतली के समान सुरक्षित रख; अपने पंखों के तले मुझे छिपा रख, उन दुष्टों से जो मुझ पर अत्याचार करते हैं, मेरे प्राण के शत्रुओं से जो मुझे घेरे हुए हैं। - भजन 17:7-9

बाइबल पाठ: भजन 91
Psalms 91:1 जो परमप्रधान के छाए हुए स्थान में बैठा रहे, वह सर्वशक्तिमान की छाया में ठिकाना पाएगा।
Psalms 91:2 मैं यहोवा के विषय कहूंगा, कि वह मेरा शरणस्थान और गढ़ है; वह मेरा परमेश्वर है, मैं उस पर भरोसा रखूंगा।
Psalms 91:3 वह तो तुझे बहेलिये के जाल से, और महामारी से बचाएगा;
Psalms 91:4 वह तुझे अपने पंखों की आड़ में ले लेगा, और तू उसके पैरों के नीचे शरण पाएगा; उसकी सच्चाई तेरे लिये ढाल और झिलम ठहरेगी।
Psalms 91:5 तू न रात के भय से डरेगा, और न उस तीर से जो दिन को उड़ता है,
Psalms 91:6 न उस मरी से जो अन्धेरे में फैलती है, और न उस महारोग से जो दिन दुपहरी में उजाड़ता है।
Psalms 91:7 तेरे निकट हज़ार, और तेरी दाहिनी ओर दस हज़ार गिरेंगे; परन्तु वह तेरे पास न आएगा।
Psalms 91:8 परन्तु तू अपनी आंखों की दृष्टि करेगा और दुष्टों के अन्त को देखेगा।
Psalms 91:9 हे यहोवा, तू मेरा शरण स्थान ठहरा है। तू ने जो परमप्रधान को अपना धाम मान लिया है,
Psalms 91:10 इसलिये कोई विपत्ति तुझ पर न पड़ेगी, न कोई दु:ख तेरे डेरे के निकट आएगा।
Psalms 91:11 क्योंकि वह अपने दूतों को तेरे निमित्त आज्ञा देगा, कि जहां कहीं तू जाए वे तेरी रक्षा करें।
Psalms 91:12 वे तुझ को हाथों हाथ उठा लेंगे, ऐसा न हो कि तेरे पांवों में पत्थर से ठेस लगे।
Psalms 91:13 तू सिंह और नाग को कुचलेगा, तू जवान सिंह और अजगर को लताड़ेगा।
Psalms 91:14 उसने जो मुझ से स्नेह किया है, इसलिये मैं उसको छुड़ाऊंगा; मैं उसको ऊंचे स्थान पर रखूंगा, क्योंकि उसने मेरे नाम को जान लिया है।
Psalms 91:15 जब वह मुझ को पुकारे, तब मैं उसकी सुनूंगा; संकट में मैं उसके संग रहूंगा, मैं उसको बचा कर उसकी महिमा बढ़ाऊंगा।
Psalms 91:16 मैं उसको दीर्घायु से तृप्त करूंगा, और अपने किए हुए उद्धार का दर्शन दिखाऊंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 91-93
  • रोमियों 15:1-13



रविवार, 20 दिसंबर 2015

शरण-स्थान


   संसार के इतिहास के मध्यकालीन समय में किसान मैदानों में अपने खेतों में कार्य करते, फसल की देखभाल करते थे। परन्तु यदि कोई दुश्मन आते दिखाई देते तो वे अपने परिवार सहित भागकर किसी निकट के गढ़ वाले नगर में शरण ले लेते थे जब तक कि खतरा टल ना जाए। सदियों से, फ्रांस में स्थित करकासोन, ऐसा ही एक नगर रहा है। ईसा पूर्व पांचवीं शताबदी में पत्थरों से बनाए गए इस गढ़ ने रोम के निवासियों, पश्चिमी यूरोप के निवासी गॉल, जर्मनी के बंजारे विज़िगौथ, जर्मनी के कबायली निवासी फ्रैंक्स और फ्रांस के लोगों को आक्रमणकारियों से शरण दी है। इसका विशाल आकार, ऊँचे बुर्ज, मोटी दीवारों और चहारदिवारियों ने अन्दर शरण लेने वालों को भरोसा और हौंसला दिया है, उन्होंने अपने आप को इसमें सुरक्षित अनुभव किया है।

   हम मसीही विश्वासियों के लिए हमारा जीवता परमेश्वर ही हमारा दृढ़ गढ़ है। परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन नामक पुस्तक में आया है, "यहोवा का नाम दृढ़ गढ़ है; धर्मी उस में भाग कर सब दुर्घटनाओं से बचता है" (नीतिवचन 18:10)। "यहोवा का नाम" द्वारा भजनकार का तात्पर्य है परमेश्वर के चरित्र से - उसकी विश्वसनीयता, सामर्थ और करुणा की भरपूरी से, तथा "बचता है" से तात्पर्य है खतरे के स्थान से निकालकर ऊँचे सुरक्षित स्थान पर रखने की क्षमता से।

   हमें जीवन में अनेक बार खतरों का सामना करना पड़ता है, और ऐसे में हमारी प्रतिक्रीया होती है कि हम बचकर, भागकर किसी सुरक्षित स्थान पर छिप जाएं, किसी का आश्रय ले लें। सामान्यतः लोग ऐसे में अपनी धन-संपदा या फिर रिश्तेदारों, मित्रों और जानकारों पर भरोसा करते हैं, उनकी ओर सहायता के लिए मुड़ते हैं। लेकिन मसीही विश्वासियों के लिए, अपने चरित्र और गुणों के कारण परमेश्वर ही सबसे सुरक्षित और विश्वासयोग्य शरण-स्थान रहता है।

   यदि आज आप किसी परेशानी में हैं, किसी भय का सामना कर रहे हैं तो निःसंकोच होकर परमेश्वर के पास आईए; वह आपका शरण-स्थान बनकर आपको आश्रय देगा, उसमें आप सुरक्षा और शान्ति पाएंगे। - डेनिस फिशर


समय अच्छा हो या बुरा, परमेश्वर सदा ही हमारा सुरक्षित विश्राम स्थान बना रहता है।

यहोवा मेरी चट्टान, और मेरा गढ़ और मेरा छुड़ाने वाला है; मेरा ईश्वर, मेरी चट्टान है, जिसका मैं शरणागत हूं, वह मेरी ढ़ाल और मेरी मुक्ति का सींग, और मेरा ऊँचा गढ़ है। - भजन 18:2

बाइबल पाठ: भजन 37:1-19
Psalms 37:1 कुकर्मियों के कारण मत कुढ़, कुटिल काम करने वालों के विषय डाह न कर! 
Psalms 37:2 क्योंकि वे घास की नाईं झट कट जाएंगे, और हरी घास की नाईं मुर्झा जाएंगे। 
Psalms 37:3 यहोवा पर भरोसा रख, और भला कर; देश में बसा रह, और सच्चाई में मन लगाए रह। 
Psalms 37:4 यहोवा को अपने सुख का मूल जान, और वह तेरे मनोरथों को पूरा करेगा।
Psalms 37:5 अपने मार्ग की चिन्ता यहोवा पर छोड़; और उस पर भरोसा रख, वही पूरा करेगा। 
Psalms 37:6 और वह तेरा धर्म ज्योति की नाईं, और तेरा न्याय दोपहर के उजियाले की नाईं प्रगट करेगा।
Psalms 37:7 यहोवा के साम्हने चुपचाप रह, और धीरज से उसका आसरा रख; उस मनुष्य के कारण न कुढ़, जिसके काम सफल होते हैं, और वह बुरी युक्तियों को निकालता है! 
Psalms 37:8 क्रोध से परे रह, और जलजलाहट को छोड़ दे! मत कुढ़, उस से बुराई ही निकलेगी। 
Psalms 37:9 क्योंकि कुकर्मी लोग काट डाले जाएंगे; और जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वही पृथ्वी के अधिकारी होंगे। 
Psalms 37:10 थोड़े दिन के बीतने पर दुष्ट रहेगा ही नहीं; और तू उसके स्थान को भलीं भांति देखने पर भी उसको न पाएगा। 
Psalms 37:11 परन्तु नम्र लोग पृथ्वी के अधिकारी होंगे, और बड़ी शान्ति के कारण आनन्द मनाएंगे। 
Psalms 37:12 दुष्ट धर्मी के विरुद्ध बुरी युक्ति निकालता है, और उस पर दांत पीसता है; 
Psalms 37:13 परन्तु प्रभु उस पर हंसेगा, क्योंकि वह देखता है कि उसका दिन आने वाला है।
Psalms 37:14 दुष्ट लोग तलवार खींचे और धनुष बढ़ाए हुए हैं, ताकि दीन दरिद्र को गिरा दें, और सीधी चाल चलने वालों को वध करें। 
Psalms 37:15 उनकी तलवारों से उन्हीं के हृदय छिदेंगे, और उनके धनुष तोड़े जाएंगे।
Psalms 37:16 धर्मी का थोड़ा से माल दुष्टों के बहुत से धन से उत्तम है। 
Psalms 37:17 क्योंकि दुष्टों की भुजाएं तो तोड़ी जाएंगी; परन्तु यहोवा धर्मियों को सम्भालता है।
Psalms 37:18 यहोवा खरे लोगों की आयु की सुधि रखता है, और उनका भाग सदैव बना रहेगा। 
Psalms 37:19 विपत्ति के समय, उनकी आशा न टूटेगी और न वे लज्जित होंगे, और अकाल के दिनों में वे तृप्त रहेंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • मीका 1-3
  • प्रकाशितवाक्य 11


गुरुवार, 6 अक्टूबर 2011

सच्चा मार्ग

   सच्चे आनन्द की खोज सदा ज़ारी रहती है। नित नई पुस्तकें प्रकाशित होती हैं जो कलह और दुखः के अन्त का दावा करती हैं। आतिष्बाज़ी के समान, जो कुछ पल को आकाश को रौशन और रंगबिरंगा कर देती  है, फिर बुझकर नीचे गिर जाती है, और आकाश वैसा ही अन्धियारा रह जाता है, ये पुस्तकें और इनकी विचारधारा भी कुछ समय को लोगों को लुभाती हैं, फिर पुस्तकें और विचारधारा लुप्त हो जाती हैं और मनुष्य उसी अन्धकार में जीवन का मार्ग और शांति तलाशता रह जाता है; जब तक कि कोई नई पुस्तक नहीं आ जाती।

   लेखक एवं दार्शनिक हेन्री थोरियु ने कहा, "यह है मनुष्य: पुस्तकों का लिखने वाला, शब्दों के जाल बुनने वाला, चित्रकार, १०,००० प्रकार के दर्शन और तत्वज्ञान प्रस्तुत करने वाला। वह अपने विचारों में मगन होता है, दूसरे के विचारों का परिहास करता है; अपने मार्ग को ही सही मानता है, दूसरे के मार्गों को गलत मानता है। लेकिन उन करोड़ों पुस्तकों में जो उसने अपने लिए लिख ली हैं, एक भी ऐसी नहीं है जो उसे यह बता सके कि चैन और आराम से एक साँस भी वह कैसे ले सकता है। मनुष्य सृष्टि का इतिहास लिख लेता है, लेकिन उसे अपना इतिहास पता नहीं होता; राष्ट्रों की नियति के निर्णय लेता है, लेकिन अपनी नियति नहीं जानता और ना ही अगले १० मिनिट के लिए भी अपने भविष्य को निर्धारित अथवा निर्देषित कर सकता है।"

   थोरियु का यह कथन सही है कि हमारी अपनी लिखीं अच्छी से अच्छी पुस्तकें अथवा हमारा अपना उचत्तम दर्शन और ज्ञान हमें स्थायी शांति दे पाने में असमर्थ है। यदि हमारे पास निर्भर होने के लिए जो है वह केवल हमारे अपने ज्ञान और प्रयास का नतीजा होता, तो हम मार्ग विहीन तथा घोर निराशा की स्थिति में होते। लेकिन संसार के इतिहास में सभी पुस्तकों से भिन्न एक पुस्तक है - परमेश्वर का वचन, बाइबल। केवल यही वह पुस्तक है जो सृष्टि के आदि से अन्त तक का इतिहास सुनाती है; मनुष्य कि पिछली दशा तथा भविष्य का हाल बताती है; चिर स्थाई एवं अनन्त स्वतंत्रता, शांति और आनन्द का सच्चा मार्ग दिखाती है, क्योंकि इस पुस्तक के लेखक वह है जिसका दावा है कि, "मार्ग और सच्‍चाई और जीवन मैं ही हूं" (युहन्ना १४:६); और आज तक इस पुस्तक की कोई बात कोई दावा कभी गलत अथवा झूठी नहीं निकली।

   जीवन का सच्चा मार्ग खोज रहे हैं? प्रभु यीशु और परमेश्वर का वचन बाइबल ही वह मार्ग है। - डेव एग्नर


जो पुस्तकें मनुष्य बनाता है और जो पुस्तक मनुष्य को बना देती है, उनमें परस्पर ज़मीन आसमान का अन्तर है।

ईश्वर की गति खरी है; यहोवा का वचन ताया हुआ है; वह अपने सब शरणागतों की ढाल है। - २ शमुएल २२:३१

बाइबल पाठ: २ शमुएल २२:३१
    2Sa 22:31  ईश्वर की गति खरी है; यहोवा का वचन ताया हुआ है; वह अपने सब शरणागतों की ढाल है।
    2Sa 22:32  यहोवा को छोड़ क्या कोई ईश्वर है? हमारे परमेश्वर को छोड़ क्या और कोई चट्टान है?
    2Sa 22:33  यह वही ईश्वर है, जो मेरा अति दृढ़ क़िला है, वह खरे मनुष्य को अपने मार्ग में लिए चलता है।
    2Sa 22:34  वह मेरे पैरों को हरिणियों के से बना देता है, और मुझे ऊंचे स्थानों पर खड़ा करता है।
    2Sa 22:35  वह मेरे हाथों को युद्ध करना सिखाता है, यहां तक कि मेरी बांहें पीतल के धनुष को झुका देती हैं।
    2Sa 22:36  और तू ने मुझ को अपने उद्धार की ढाल दी है, और तेरी नम्रता मुझे बढ़ाती है।
    2Sa 22:37  तू मेरे पैरों के लिये स्थान चौड़ा करता है, और मेरे पैर नहीं फिसले।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह २६-२७ 
  • फिलिप्पियों २

बुधवार, 5 अक्टूबर 2011

तूफानों का सामना

   एक बुज़ुर्ग नाविक ने कहा, "जब भीष्ण समुद्री तूफान उठते हैं तो बचने के लिए हम केवल एक ही काम कर सकते हैं; बचने का केवल एक ही मार्ग होता है - जहाज़ को एक विशेष स्थिति में लाकर उसे वैसे ही बनाए रखने के प्रयास में लगे रहें, जब तक तूफान थम न जाए।"

   इस विचार पर टिप्पणी करते हुए रिचर्ड फुलर ने लिखा, "यही बात मसीही विश्वासी को भी करनी चाहिए। जैसे पौलुस प्रेरित की एक समुद्री यात्रा में हुआ, घने बादलों और तूफान की भीषणता के कारण न सूर्य दिखता था और न चाँद सितारे, बस तूफान के भयानक हिचकोले जहाज़ को झकझोर रहे थे (प्रेरितों २७:९-२५), वैसे ही कई बार जीवन के तूफान मसीही विश्वासी को भी झकझोरते रहते हैं। ऐसे में कोई युक्ति काम नहीं आती, कोई पिछला अनुभव मार्ग नहीं दिखाता, केवल एक ही मार्ग रह जाता है - अपनी जीवन नैया को एक विशेष स्थिति में लाकर, उसे वैसे ही बनाए रखें। अपने आप को परमेश्वर में अपने विश्वास में स्थिर कर लें और उसकी विश्वासयोग्यता तथा मसीह यीशु के अनन्त प्रेम को दृढ़ता से थामे रहें।"

   ज़िन्दगी के तूफानों और झकझोरों का सामना परमेश्वर के वचन की अडिग प्रतिज्ञाओं तथा परमेश्वर की विश्वासयोग्यता को दृढ़ता से थामे रह कर ही किया जा सकता है। हमारा विश्वास इतना दृढ़ होना चाहिए कि अय्युब के समान हम कह सकें कि चाहे वह मुझे घात भी करे तो भी मैं उस पर विश्वास बनाए रखूँगा (अय्युब १३:१५)। जो उस पर ऐसा विश्वास बनाए रखते हैं, उन्हें वह अपनी सिद्ध शांति प्रदान करता है - "जिसका मन तुझ में धीरज धरे हुए हैं, उसकी तू पूर्ण शान्ति के साथ रक्षा करता है, क्योंकि वह तुझ पर भरोसा रखता है" (यशायाह २६:३)।

   भजनकार के समान हमारे भी दिल की पुकार होनी चाहिए, "हे परमेश्वर, मुझ पर अनुग्रह कर, मुझ पर अनुग्रह कर, क्योंकि मैं तेरा शरणागत हूं; और जब तक ये विपत्तियां निकल न जाएं, तब तक मैं तेरे पंखों के तले शरण लिए रहूंगा" (भजन ५७:१)। - रिचर्ड डी हॉन


तूफान की प्रचण्डता ही लंगर की सामर्थ दिखाती है।

परमेश्वर मेरा उद्धार है, मैं भरोसा रखूंगा और न थरथराऊंगा; क्योंकि प्रभु यहोवा मेरा बल और मेरे भजन का विषय है, और वह मेरा उद्धारकर्ता हो गया है। - यशायाह १२:२
 
बाइबल पाठ: भजन ५७:१-११
    Psa 57:1  हे परमेश्वर, मुझ पर अनुग्रह कर, मुझ पर अनुग्रह कर, क्योंकि मैं तेरा शरणागत हूं; और जब तक ये विपत्तियां निकल न जाएं, तब तक मैं तेरे पंखों के तले शरण लिए रहूंगा।
    Psa 57:2  मैं परम प्रधान परमेश्वर को पुकारूंगा, ईश्वर को जो मेरे लिये सब कुछ सिद्ध करता है।
    Psa 57:3  ईश्वर स्वर्ग से भेज कर मुझे बचा लेगा, जब मेरा निगलने वाला निन्दा कर रहा हो। परमेश्वर अपनी करूणा और सच्चाई प्रगट करेगा।
    Psa 57:4  मेरा प्राण सिंहों के बीच में है, मुझे जलते हुओं के बीच में लेटना पड़ता है, अर्थात ऐसे मनुष्यों के बीच में जिन के दांत बर्छी और तीर हैं, और जिनकी जीभ तेज तलवार हैं।
    Psa 57:5  हे परमेश्वर तू स्वर्ग के ऊपर अति महान और तेजोमय है, तेरी महिमा सारी पृथ्वी के ऊपर फैल जाए!
    Psa 57:6  उन्होंने मेरे पैरों के लिये जाल लगाया है; मेरा प्राण ढला जाता है। उन्होंने मेरे आगे गड़हा खोदा, परन्तु आप ही उस में गिर पड़े।
    Psa 57:7  हे परमेश्वर, मेरा मन स्थिर है, मेरा मन स्थिर है; मैं गाऊंगा वरन भजन कीर्तन करूंगा।
    Psa 57:8  हे मेरी आत्मा जाग जा! हे सारंगी और वीणा जाग जाओ। मैं भी पौ फटते ही जाग उठूंगा।
    Psa 57:9  हे प्रभु, मैं देश के लोगों के बीच तेरा धन्यवाद करूंगा; मैं राज्य राज्य के लोगों के बीच में तेरा भजन गाऊंगा।
    Psa 57:10  क्योंकि तेरी करूणा स्वर्ग तक बड़ी है, और तेरी सच्चाई आकाशमण्डल तक पहुंची है।
    Psa 57:11  हे परमेश्वर, तू स्वर्ग के ऊपर अति महान है! तेरी महिमा सारी पृथ्वी के ऊपर फैल जाए!
 
एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह २३-२५ 
  • फिलिप्पियों १