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Tuesday, October 25, 2016

प्रार्थना


   जब मेरे पति को अचानक ही आपात स्थिति में ऑपरेशन के लिए अस्पताल ले कर जाना पड़ा, तब मैं फोन के द्वारा परिवार और निकट संबंधियों को इसके बारे में बताने लगी। मेरी बहन और उसके पति तुरंत ही मेरे साथ रहने के लिए मेरे पास अस्पताल में आ गए, और वहाँ प्रतीक्षा के समय में हम प्रार्थना करने लगे। मेरे पति की बहन ने जब फोन पर मेरी चिंतित आवाज़ को सुना तो उसने तुरंत कहा, "सिंडी क्या मैं अभी तुम्हारे साथ प्रार्थना कर सकती हूँ?" जब हमारे पास्टर और उनकी पत्नि आए, तो उन्होंने भी आकर हमारे साथ प्रार्थना करी।

   प्रसिद्ध मसीही लेखक और प्रचारक ऑस्वॉल्ड चैम्बर्स ने लिखा था: "हम अकसर प्रार्थना को अपने अन्तिम प्रयास की तरह प्रयोग करते हैं, जबकि परमेश्वर चाहता है कि प्रार्थना हमारी सुरक्षा की सर्वप्रथम पंक्ति होनी चाहिए। बहुदा हम तब प्रार्थना करते हैं जब करने के लिए और कुछ नहीं बचता, लेकिन परमेश्वर चाहता है कि कुछ भी करने से पहले हम प्रार्थना करें।"

   अपने मूल स्वरूप में प्रार्थना परमेश्वर से वार्तालाप के अलावा और कुछ भी नहीं है; ऐसा वार्तालाप जो इस आशा के साथ किया जाए कि परमेश्वर ना केवल सुनता है वरन उत्तर भी देता है। प्रार्थना हमारा अन्तिम प्रयास नहीं होना चाहिए। अपने वचन बाइबल में परमेश्वर हमें प्रोत्साहित करता है कि हम हर बात के लिए उसके साथ प्रार्थना में रहें: "किसी भी बात की चिन्‍ता मत करो: परन्तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं" (फिलिप्पियों 4:6)। हमारे प्रभु परमेश्वर ने हमें अपना वायदा दिया है, "क्योंकि जहां दो या तीन मेरे नाम पर इकट्ठे होते हैं वहां मैं उन के बीच में होता हूं" (मत्ती 18:20)।

   हम में से जिन लोगों ने परमेश्वर की सामर्थ को अनुभव किया है, उनके लिए हर बात में सर्वप्रथम परमेश्वर को पुकारना स्वाभाविक हो जाता है। उन्नीसवीं शताबदी के पास्टर एन्ड्रयू मर्रे ने कहा है, "प्रार्थना परमेश्वर के लिए मार्ग तैयार करती है कि वह हम में और हमारे लिए कार्य कर सके।" इसीलिए प्रथम मसीही मण्डली के चार आधारभूत सिद्धांतों में से एक था प्रार्थना (प्रेरितों  2:42) और प्रेरित पौलुस ने थिस्सुलुनिकीया के मसीही विश्वासियों को लिखा, "निरन्‍तर प्रार्थना में लगे रहो" (1 थिस्सुलुनीकियों 5:17)। - सिंडी कैस्पर


मसीही विश्वास के जीवन का सिद्धांत: सर्वप्रथम प्रार्थना, फिर कुछ अन्य।

और वे प्रेरितों से शिक्षा पाने, और संगति रखने में और रोटी तोड़ने में और प्रार्थना करने में लौलीन रहे। - प्रेरितों 2:42

बाइबल पाठ: याकूब 5:13-16
James 5:13 यदि तुम में कोई दुखी हो तो वह प्रार्थना करे: यदि आनन्‍दित हो, तो वह स्‍तुति के भजन गाए। 
James 5:14 यदि तुम में कोई रोगी हो, तो कलीसिया के प्राचीनों को बुलाए, और वे प्रभु के नाम से उस पर तेल मल कर उसके लिये प्रार्थना करें। 
James 5:15 और विश्वास की प्रार्थना के द्वारा रोगी बच जाएगा और प्रभु उसको उठा कर खड़ा करेगा; और यदि उसने पाप भी किए हों, तो उन की भी क्षमा हो जाएगी। 
James 5:16 इसलिये तुम आपस में एक दूसरे के साम्हने अपने अपने पापों को मान लो; और एक दूसरे के लिये प्रार्थना करो, जिस से चंगे हो जाओ; धर्मी जन की प्रार्थना के प्रभाव से बहुत कुछ हो सकता है।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 6-8
  • 1 तिमुथियुस 5