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Sunday, November 17, 2019

सेवा



      मैरिलिन कई सप्ताहों से बीमार पड़ी थी, और उसके इस कठिन समय में बहुत से लोग उसके सहायक और उसे प्रोत्साहित करते रहने वाले रहे थे। उसे चिंता रहने लगी – “मैं इन सभी की इस दयालुता को कैसे चुका पाऊँगी?” फिर एक दिन उसने एक लिखित प्रार्थना के शब्दों को पढ़ा, “प्रार्थना करें कि लोग नम्र हो सकें, जिससे न केवल वे औरों की सेवा करने वाले बनें, वरन औरों से सेवा स्वीकार भी कर सकें।” मैरिलिन को तुरंत यह बोध हुआ कि उसे कोई हिसाब चुकाने की चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं थी। उसे बस उसकी सहायता करने वालों के प्रति धन्यवादी बने रहना था, और दूसरों को सेवा करने के आनन्द को लेने देना था।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में, फिलिप्पियों 4 अध्याय में, प्रेरित पौलुस ने अपनी कृतज्ञता व्यक्त की, उन सभी के प्रति, जो उसके क्लेशों में उसके सहभागी बने थे (पद 18)। वह सुसमाचार प्रचार और मसीही शिक्षाएं देने के कार्य को करते समय अपनी देखरेख किए जाने  के लिए लोगों पर निर्भर था। वह यह समझता था कि उसे दिए जाने वाले उपहार और भेंटें, लोगों के परमेश्वर के प्रति प्रेम की अभिव्यक्ति थे: “मेरे पास सब कुछ है, वरन बहुतायत से भी है: जो वस्तुएं तुम ने इपफ्रुदीतुस के हाथ से भेजी थीं उन्हें पाकर मैं तृप्‍त हो गया हूं, वह तो सुगन्‍ध और ग्रहण करने के योग्य बलिदान है, जो परमेश्वर को भाता है” (पद 18)।

      किसी से कुछ स्वीकार कर लेना सरल नहीं है, विशेषकर तब जब आप स्वयं ही लोगों की सहायता करने के लिए देने में अग्रणीय रहे हों। परन्तु, जब हम किसी आवश्यकता में हों, तब नम्रता के साथ हम परमेश्वर की ओर से, लोगों से मिलने वाली सहायता को स्वीकार करने वाले बनें, जो विभिन्न स्वरूपों में हमें प्राप्त हो सकती है।

      पौलुस ने लिखा, “और मेरा परमेश्वर भी अपने उस धन के अनुसार जो महिमा सहित मसीह यीशु में है तुम्हारी हर एक घटी को पूरी करेगा” (पद 19)। उसने यह बात अपने संघर्षों के जीवन के अनुभवों से सीखी थी। परमेश्वर विश्वासयोग्य है, और हमारे लिए उसके प्रावधानों की कोई सीमा नहीं है; वह औरों की हमारी सेवा के द्वारा भी हमारे लिए उपलब्ध करवा सकता है। - सिंडी हैस कैस्पर

औरों से प्रेम प्राप्त करें; औरों को प्रेम दें; इसे दोहराते रहें!

क्‍लेश की बड़ी परीक्षा में उन के बड़े आनन्द और भारी कंगालपन के बढ़ जाने से उन की उदारता बहुत बढ़ गई। और उनके विषय में मेरी यह गवाही है, कि उन्होंने अपनी सामर्थ भर वरन सामर्थ से भी बाहर मन से दिया। - 2 कुरिन्थियों 8:2-3

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 4:10-19
Philippians 4:10 मैं प्रभु में बहुत आनन्‍दित हूं कि अब इतने दिनों के बाद तुम्हारा विचार मेरे विषय में फिर जागृत हुआ है; निश्‍चय तुम्हें आरम्भ में भी इस का विचार था, पर तुम्हें अवसर न मिला।
Philippians 4:11 यह नहीं कि मैं अपनी घटी के कारण यह कहता हूं; क्योंकि मैं ने यह सीखा है कि जिस दशा में हूं, उसी में सन्‍तोष करूं।
Philippians 4:12 मैं दीन होना भी जानता हूं और बढ़ना भी जानता हूं: हर एक बात और सब दशाओं में तृप्‍त होना, भूखा रहना, और बढ़ना-घटना सीखा है।
Philippians 4:13 जो मुझे सामर्थ देता है उस में मैं सब कुछ कर सकता हूं।
Philippians 4:14 तौभी तुम ने भला किया, कि मेरे क्‍लेश में मेरे सहभागी हुए।
Philippians 4:15 और हे फिलप्‍पियो, तुम आप भी जानते हो, कि सुसमाचार प्रचार के आरम्भ में जब मैं ने मकिदुनिया से कूच किया तब तुम्हें छोड़ और किसी मण्‍डली ने लेने देने के विषय में मेरी सहयता नहीं की।
Philippians 4:16 इसी प्रकार जब मैं थिस्सलुनीके में था; तब भी तुम ने मेरी घटी पूरी करने के लिये एक बार क्या वरन दो बार कुछ भेजा था।
Philippians 4:17 यह नहीं कि मैं दान चाहता हूं परन्तु मैं ऐसा फल चाहता हूं, जो तुम्हारे लाभ के लिये बढ़ता जाए।
Philippians 4:18 मेरे पास सब कुछ है, वरन बहुतायत से भी है: जो वस्तुएं तुम ने इपफ्रुदीतुस के हाथ से भेजी थीं उन्हें पाकर मैं तृप्‍त हो गया हूं, वह तो सुगन्‍ध और ग्रहण करने के योग्य बलिदान है, जो परमेश्वर को भाता है।
Philippians 4:19 और मेरा परमेश्वर भी अपने उस धन के अनुसार जो महिमा सहित मसीह यीशु में है तुम्हारी हर एक घटी को पूरी करेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 5-7
  • इब्रानियों 12