बाइबल और मसीही विश्वास सम्बन्धी अपने प्रश्नों के लिए यहाँ क्लिक करें:

GotQuestions?org

Saturday, April 25, 2015

कठिन


   बहुत साल पहले की बात है, युवकों के एक शिविर में मैं कुछ हठीले और अवाज्ञाकारी लड़कों के दल का संचालक एवं सलाहकार था। उनके आचरण तथा रवैये को देखते हुए उनके साथ सामन्य व्यवहार करना एक चुनौती भरा कार्य था। वे शिविर स्थल के चिड़ियाघर के जानवरों से दुर्व्यवहार करते, एक दुसरे के साथ लड़ते-झगड़ते और कठिनाई से ही बात मानते थे। उनके साथ व्यवहार रखने के लिए मैंने संयमी तथा शान्त किंतु अपने निर्देशों एवं निर्णयों में दृढ़ बने रहने का मार्ग अपनाया। अकसर वे मुझे खिसिया देते थे, किंतु मैं सदा इस बात का ध्यान रखता था कि उनकी भौतिक आवश्यकताएं पूरी होती रहें।

   चाहे बाहर से मेरा व्यवहार उनके प्रति प्रेम पूर्ण दिखाई देता था, परन्तु अन्दर ही अन्दर मैं अकसर अनुभव करता था कि बस किसी तरह से मैं उनके साथ निभा भर ही रहा हूँ। इस अनुभव ने मुझे हमारे स्वर्गीय परमेश्वर पिता द्वारा अपने उद्दण्ड एवं हठीले बच्चों को सहन करते हुए उनकी देखरेख करते रहने के बारे में एक गहरी समझ प्रदान करी। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने इस्त्राएलियों के मिस्त्र देश से निकल कर कनान देश में जाने की यात्रा का वर्णन दोहराते हुए परमेश्वर के लिए कहा, "और वह कोई चालीस वर्ष तक जंगल में उन की सहता रहा" (प्रेरितों 13:18); यद्यपि वह उन के व्यवहार के कारण उन इस्त्राएलियों से प्रसन्न नहीं था, वह उनकी देखभाल करता रहा, उनकी प्रत्येक आवश्यकता को पूरा करता रहा।

   संभव है कि हमारे द्वारा चिन्ता एवं सम्भाल करने के बावजूद कुछ लोग हमारे प्रति सकारात्मक रवैया ना दिखाएं; यदि ऐसा होता है तो हमें ध्यान करना चाहिए कि परमेश्वर भी हमारे प्रति बहुत धीरजवन्त रहता है, चाहे हम उसके प्रति कितने भी अनाज्ञाकारी रहें। साथ ही हमें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि हमारे परमेश्वर पिता ने हम मसीही विश्वासियों को अपना पवित्र आत्मा दिया है जिससे हम उसकी सामर्थ से इन कठिन परिस्थितियों का सामना करें, हमारे प्रति कृतघ्न रहने वाले तथा सामान्य व्यवहार रखने के लिए कठिन लोगों के प्रति भी हम धैर्य तथा प्रेम के साथ पेश आएं (मत्ती 5:44-45)।

   हम परमेश्वर से प्रार्थना करें और मांगें कि वह हमें उनसे भी प्रेम करने का धीरज और सामर्थ दे जिनसे प्रेम करना कठिन है। - डेनिस फिशर


जैसा परमेश्वर आपके साथ धीरजवन्त और प्रेमी रहा है, आप भी दूसरों के साथ वैसा ही व्यवहार रखें।

परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि अपने बैरियों से प्रेम रखो और अपने सताने वालों के लिये प्रार्थना करो। जिस से तुम अपने स्‍वर्गीय पिता की सन्तान ठहरोगे क्योंकि वह भलों और बुरों दोनों पर अपना सूर्य उदय करता है, और धर्मियों और अधर्मियों दोनों पर मेंह बरसाता है। - मत्ती 5:44-45

बाइबल पाठ: प्रेरितों 13:14-23
Acts 13:14 और पिरगा से आगे बढ़कर के पिसिदिया के अन्‍ताकिया में पहुंचे; और सब्त के दिन अराधनालय में जा कर बैठ गए। 
Acts 13:15 और व्यवस्था और भविष्यद्वक्ताओं की पुस्‍तक के पढ़ने के बाद सभा के सरदारों ने उन के पास कहला भेजा, कि हे भाइयों, यदि लोगों के उपदेश के लिये तुम्हारे मन में कोई बात हो तो कहो। 
Acts 13:16 तब पौलुस ने खड़े हो कर और हाथ से सैन कर के कहा; हे इस्त्राएलियों, और परमेश्वर से डरने वालों, सुनो। 
Acts 13:17 इन इस्त्राएली लोगों के परमेश्वर ने हमारे बापदादों को चुन लिया, और जब थे मिस्त्र देश में परदेशी हो कर रहते थे, तो उन की उन्नति की; और बलवन्‍त भुजा से निकाल लाया। 
Acts 13:18 और वह कोई चालीस वर्ष तक जंगल में उन की सहता रहा। 
Acts 13:19 और कनान देश में सात जातियों का नाश कर के उन का देश कोई साढ़े चार सौ वर्ष में इन की मीरास में कर दिया। 
Acts 13:20 इस के बाद उसने सामुएल भविष्यद्वक्ता तक उन में न्यायी ठहराए। 
Acts 13:21 उसके बाद उन्हों ने एक राजा मांगा: तब परमेश्वर ने चालीस वषै के लिये बिन्यामीन के गोत्र में से एक मनुष्य अर्थात कीश के पुत्र शाऊल को उन पर राजा ठहराया। 
Acts 13:22 फिर उसे अलग कर के दाऊद को उन का राजा बनाया; जिस के विषय में उसने गवाही दी, कि मुझे एक मनुष्य यिशै का पुत्र दाऊद, मेरे मन के अनुसार मिल गया है। वही मेरे सारी इच्छा पूरी करेगा। 
Acts 13:23 इसी के वंश में से परमेश्वर ने अपनी प्रतिज्ञा के अनुसार इस्त्राएल के पास एक उद्धारकर्ता, अर्थात यीशु को भेजा।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 शमूएल 21-22
  • लूका 18:24-43