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रविवार, 1 दिसंबर 2019

ऊँचा



      हाल ही में एक हवाई-यात्रा करते समय मैं विमान में चढ़ने वाले यात्रियों की पंक्ति में सबसे अंत में खड़ा था। मुझे बैठने के लिए दो सीटों के मध्य में सीट मिली थी, किन्तु अपना सामान रखने के लिए मुझे सीटों की सबसे अंतिम पंक्ति के ऊपर स्थित स्थान में सामान रखना पड़ा। इसका तात्पर्य यह हुआ कि मुझे अपना सामान लेकर विमान से बाहर निकलने के लिए सबसे अंत तक प्रतीक्षा करनी थी, जब अन्य सभी लोग अपने सामान को लेकर निकल चुकें।

      अपनी इस परिस्थिति पर मन ही में हँसते हुए मैं अपनी सीट पर बैठ गया, और फिर मुझे एक विचार आया, जो मुझे लगा कि प्रभु ने मुझे दिया: “इन बातों से कोई हानि नहीं होगी; वरन लाभ ही होगा।” इसलिए मैंने निर्णय लिया कि जो यह कुछ अतिरिक्त समय मुझे विमान में मिलेगा, इसे मैं औरों की सहायता के लिए प्रयोग करूंगा, और मैंने यही किया – विमान के उतरने के बाद मैंने अन्य यात्रियों को उनका सामान निकालने में तथा सफाई करने में विमान परिचारिका की सहायता करने में समय बिताया। जब तक मेरा सामान ले सकने की मेरी बारी आई, मुझे फिर से हंसी आ गई, क्योंकि एक व्यक्ति को लगा कि मैं भी विमान कर्मचारी हूँ।

      उस दिन के अनुभव ने मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल में दिए प्रभु यीशु के शब्दों पर विचार करने को बाध्य किया, जो उन्होंने अपने शिष्यों से कहे थे: “तब उसने बैठकर बारहों को बुलाया, और उन से कहा, यदि कोई बड़ा होना चाहे, तो सब से छोटा और सब का सेवक बने” (मरकुस 9:35)। मुझे तो प्रतीक्षा इसलिए करनी पड़ी क्योंकि मेरी मजबूरी थी, परन्तु इस संसार की मान्यताओं और धारणाओं से उल्ट प्रभु यीशु के राज्य में, उन लोगों के लिए प्रभु की ओर से आदर का स्थान है जो औरों की सहायता के लिए स्वेच्छा से अपनी सेवा अर्पित करते हैं।

      हमारे उतावलेपन और ‘पहले मैं’ की भावना से भरे संसार में, प्रभु यीशु ने अपने आने के उद्देश्य के विषय कहा, “जैसे कि मनुष्य का पुत्र, वह इसलिये नहीं आया कि उस की सेवा टहल करी जाए, परन्तु इसलिये आया कि आप सेवा टहल करे और बहुतों की छुड़ौती के लिये अपने प्राण दे” (मत्ती 20:28)। औरों की सेवा करने के द्वारा ही हम प्रभु की उत्तम सेवा करते हैं। हम जितना नीचे झुकते हैं, हम उतने उसके निकट आते हैं, और वह उतना ही हमें ऊँचा उठाता है।

प्रभु यीशु का राज्य, संसार के राज्यों से उलट है।

इसलिये परमेश्वर के बलवन्‍त हाथ के नीचे दीनता से रहो, जिस से वह तुम्हें उचित समय पर बढ़ाए। और अपनी सारी चिन्‍ता उसी पर डाल दो, क्योंकि उसको तुम्हारा ध्यान है। 1 पतरस 5:6-7

बाइबल पाठ: मरकुस 9:33-37
Mark 9:33 फिर वे कफरनहूम में आए; और घर में आकर उसने उन से पूछा कि रास्‍ते में तुम किस बात पर विवाद करते थे?
Mark 9:34 वे चुप रहे, क्योंकि मार्ग में उन्होंने आपस में यह वाद-विवाद किया था, कि हम में से बड़ा कौन है?
Mark 9:35 तब उसने बैठकर बारहों को बुलाया, और उन से कहा, यदि कोई बड़ा होना चाहे, तो सब से छोटा और सब का सेवक बने।
Mark 9:36 और उसने एक बालक को ले कर उन के बीच में खड़ा किया, और उसे गोद में ले कर उन से कहा।
Mark 9:37 जो कोई मेरे नाम से ऐसे बालकों में से किसी एक को भी ग्रहण करता है, वह मुझे ग्रहण करता है; और जो कोई मुझे ग्रहण करता, वह मुझे नहीं, वरन मेरे भेजने वाले को ग्रहण करता है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 40-41
  • 2 पतरस 3



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