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Sunday, March 11, 2012

परमेश्वर की करुणा

   "परमेश्वर की छोटी से छोटी करुणा के भी अयोग्य" - ये वे शब्द थे तो १७वीं सदी के कवि और पादरी जौर्ज हर्बर्ट ने अपनी अंगूठी पर खुदवा रखे थे, और यही वाक्यांश था जिसके प्रयोग के साथ वह अपनी पुस्तकें और पत्र हस्ताक्षरित करता था। ये शब्द परमेश्वर के वचन बाइबल के एक नायक याकूब द्वारा कहे गए शब्दों पर आधारित हैं। याकूब ने अपने पाप और शर्मनाक व्यवहार के बावजुद जब अपने प्रति परमेश्वर कि बनी हुई करुणा पर विचार किया तो कहा: "...हे यहोवा, हे मेरे दादा इब्राहीम के परमेश्वर, तू ने तो मुझ से कहा, कि अपने देश और जन्मभूमि में लौट जा, और मैं तेरी भलाई करूंगा; तू ने जो जो काम अपनी करूणा और सच्चाई से अपने दास के साथ किए हैं, कि मैं जो अपनी छड़ी ही लेकर इस यरदन नदी के पार उतर आया, सो अब मेरे दो दल हो गए हैं, तेरे ऐसे ऐसे कामों में से मैं एक के भी योग्य तो नहीं हूं" (उत्पत्ति ३२:९-१०)।

   करुणा के लिए मूल इब्रानी भाषा में जो शब्द याकूब ने प्रयोग किया था वह है chesed, जिसका तात्पर्य परमेश्वर के लगातार बने रहने प्रेम और दया से है। यह महत्वपूर्ण है कि यह बात ऐसे मनुष्य के हृदय से निकली जो अपने आप को इसके लिए सर्वथा अयोग्य जानता था।

   परमेश्वर के प्रेम पर पूर्ण्तया आधारित होकर याकूब इससे अगले ही वाक्य में पुकारता है, "मुझे छुड़ा ले!" विचारों का कैसा विरोधाभास - एक ओर वह अपने आप को परमेश्वर कि करुणा के सर्वथा अयोग्य कह रहा है, किंतु साथ ही उस से ही विपत्तियों से अपने छुड़ाए जाने की गुहार भी लगा रहा है। याकूब जानता था कि उसके पाप ने सब कुछ जो उसके पास है उसे परमेश्वर के उपयोग के लिए दूषित और अयोग्य कर दिया है; उसके पास ऐसा कुछ भी नहीं है जिसके आधार पर वह परमेश्वर को अपनी सहायता के लिए मना सके। उसने अपने आप को परमेश्वर की करुणा और अनुग्रह के अयोग्य व्यक्ति स्वीकार कर लिया। लेकिन परमेश्वर को लगाई गई उसकी गुहार उसकी अपनी किसी योग्यता पर आधारित नहीं थी वरन परमेश्वर की प्रतिज्ञा पर आधारित थी कि वह हर उस व्यक्ति पर अनुग्रह करेगा जो उसकी करुणा के आसरे पर अपने आप को छोड़ देता है। नम्रता और टूटा तथा पिसा हुआ मन ही वह कुंजी है जो परमेश्वर के हृदय द्वार को खोल देती है।

   जैसे उसने याकूब के साथ किया, आज परमेश्वर हमारी पुकार भी सुनता है, जब हम अपनी किसी योग्यता या किसी सामर्थ या किसी उपलब्धि के सहारे नहीं वरन नम्र और दीन होकर, अपने पापों तथा अयोग्यता को स्वीकार करते हुए, उसकी करुणा पर अपने आप को छोड़ देते हैं, क्षमा याचना के साथ उसके अनुग्रह की गुहार लगाते हैं। - डेविड रोपर


अनुग्रह, परमेश्वर द्वारा, उसके सर्वथा अयोग्य व्यक्ति को दिया जाने वाला वह दान है जो वह व्यक्ति किसी रीति से कभी कमा नहीं सकता।

...तेरे ऐसे ऐसे कामों में से मैं एक के भी योग्य तो नहीं हूं। - उत्पत्ति ३२:१०
बाइबल पाठ: उत्पत्ति ३२:३-१३
Gen 32:3 तब याकूब ने सेईर देश में, अर्थात एदोम देश में, अपने भाई एसाव के पास अपने आगे दूत भेज दिए।
Gen 32:4  और उस ने उन्हें यह आज्ञा दी, कि मेरे प्रभु एसाव से यों कहना; कि तेरा दास याकूब तुझ से यों कहता है, कि मैं लाबान के यहां परदेशी होकर अब तक रहा;
Gen 32:5  और मेरे पास गाय-बैल, गदहे, भेड़-बकरियां, और दास-दासियां है: सो मैं ने अपने प्रभु के पास इसलिये संदेशा भेजा है, कि तेरी अनुग्रह की दृष्टि मुझ पर हो।
Gen 32:6  वे दूत याकूब के पास लौट के कहने लगे, हम तेरे भाई एसाव के पास गए थे, और वह भी तुझ से भेंट करने को चार सौ पुरूष संग लिये हुए चला आता है।
Gen 32:7  तब याकूब निपट डर गया, और संकट में पड़ा : और यह सोचकर, अपने संगवालों के, और भेड़-बकरियों, और गाय-बैलों, और ऊंटो के भी अलग अलग दो दल कर लिये,
Gen 32:8  कि यदि एसाव आकर पहिले दल को मारने लगे, तो दूसरा दल भाग कर बच जाएगा।
Gen 32:9  फिर याकूब ने कहा, हे यहोवा, हे मेरे दादा इब्राहीम के परमेश्वर, तू ने तो मुझ से कहा, कि अपने देश और जन्मभूमि में लौट जा, और मैं तेरी भलाई करूंगा :
Gen 32:10  तू ने जो जो काम अपनी करूणा और सच्चाई से अपने दास के साथ किए हैं, कि मैं जो अपनी छड़ी ही लेकर इस यरदन नदी के पार उतर आया, सो अब मेरे दो दल हो गए हैं, तेरे ऐसे ऐसे कामों में से मैं एक के भी योग्य तो नहीं हूं।
Gen 32:11  मेरी बिनती सुनकर मुझे मेरे भाई एसाव के हाथ से बचा : मैं तो उस से डरता हूं, कहीं ऐसा ने हो कि वह आकर मुझे और मां समेत लड़कों को भी मार डाले।
Gen 32:12  तू ने तो कहा है, कि मैं निश्चय तेरी भलाई करूंगा, और तेरे वंश को समुद्र की बालू के किनकों के समान बहुत करूंगा, जो बहुतायत के मारे गिने नहीं जो सकते।

एक साल में बाइबल: 

  • व्यवस्थाविवरण १४-१६ 
  • मरकुस १२:२८-४४