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Saturday, January 11, 2014

सेवार्थ


   मेरा एक मित्र नौकरी पाने के लिए एक साक्षात्कार में गया। वहाँ उससे पूछे गए प्रश्नों में से एक था, "आपके पास हमारे लायक कौन सी योग्यताएं हैं?" प्रश्न पूछने का उद्देश्य था यह आंकलन करना कि मेरा वह मित्र उस कंपनी में किस स्तर और किस प्रकार के कार्य के लिए उपयुक्त हो सकता था। मेरे मित्र ने तुरंत मन ही मन अपनी योग्यताओं और गुणों को दोहराया, और कंपनी द्वारा विज्ञापित नौकरी की आवश्यकतानुसार उपयुक्त बातें उन्हें बता दीं। संसार के कार्यों के लिए तो हमें योग्यताएं और गुण सीखने, बनाने, बढ़ाने और बताने पड़ते हैं परन्तु परमेश्वर के लिए कार्य करने के लिए केवल एक ही गुण चाहिए - परमेश्वर के प्रति संपूर्ण समर्पण। हमारे परमेश्वर को समर्पण का स्तर ही परमेश्वर के प्रति हमारे विश्वास के स्तर को निर्धारित करता है, और हमारे विश्वास का स्तर हमारे परमेश्वर के लिए उपयोगी होने की क्षमता को निर्धारित करता है।

   परमेश्वर ने अपनी प्रत्येक सन्तान को कुछ आत्मिक वरदान प्रदान किए हैं। यह वरदान हमारे अनुभवों, हमारे प्रशिक्षण और हमारी स्वाभाविक योग्यताओं के साथ मिलकर हमें एक अद्वितीय व्यक्तित्व बनाते हैं; एक ऐसा जन जो परमेश्वर द्वारा हमारे लिए पहले से निर्धारित भले कार्यों को करने के लिए सर्वथा उपयुक्त है। यदि परमेश्वर आपसे कुछ कार्य लेना चाहता है, तो वह पहले आपको उस कार्य के लिए तैयार भी करेगा और आवश्यक गुण तथा योग्यताएं भी देगा। उसका चुनाव संसार के समान नहीं है जहाँ हम अपनी योग्यताओं के आधार पर संसार के अधिकारियों को प्रभावित करने का प्रयास करते हैं। परमेश्वर हमें हम से अधिक भली रीति से जानता है। वह जानता है कि हम क्या कुछ कर सकते हैं और वह हमें उसके द्वारा निर्धारित सेवकाई के लिए तैयार करके ही वह ज़िम्मेदारी सौंपता है। उसे केवल एक ही बात हमसे चाहिए, कि हम उसके प्रति विश्वासयोग्य बने रहें: "फिर यहां भण्‍डारी में यह बात देखी जाती है, कि विश्वासयोग्य निकले" (1 कुरिन्थियों 4:2)। इसलिए यदि परमेश्वर आपको किसी कार्य के लिए बुला रहा है तो विश्वास रखिए कि उसने आप को उस कार्य के लिए आवश्यक योग्यताओं से परिपूर्ण किया है और आप की सफलता के लिए मार्ग तथा सहायता वह ही प्रदान करेगा।

   क्या परमेश्वर ने आपको अपनी सेवार्थ बुलाया है? कार्य, कठिनाईयों या परिस्थितियों से ना घबराएं; कार्य को पूरा करने के लिए आपका सहायक, आपको सामर्थ देने वाला, आपका मार्गदर्शन करने वाला स्वयं परमेश्वर ही है। बस विश्वास में आगे बढ़ते जाएं। - सिंडी हैस कैसपर


आत्मिक वरदान परमेश्वर की सेवकाई में उपयोग के लिए हैं, अपनी प्रशंसा पाने के लिए नहीं।

यह बात सच है, और मैं चाहता हूं, कि तू इन बातों के विषय में दृढ़ता से बोले इसलिये कि जिन्हों ने परमेश्वर की प्रतीति की है, वे भले-भले कामों में लगे रहने का ध्यान रखें: ये बातें भली, और मनुष्यों के लाभ की हैं। - तीतुस 3:8

बाइबल पाठ: इफिसियों 2:1-10
Ephesians 2:1 और उसने तुम्हें भी जिलाया, जो अपने अपराधों और पापों के कारण मरे हुए थे। 
Ephesians 2:2 जिन में तुम पहिले इस संसार की रीति पर, और आकाश के अधिकार के हाकिम अर्थात उस आत्मा के अनुसार चलते थे, जो अब भी आज्ञा न मानने वालों में कार्य करता है। 
Ephesians 2:3 इन में हम भी सब के सब पहिले अपने शरीर की लालसाओं में दिन बिताते थे, और शरीर, और मन की मनसाएं पूरी करते थे, और और लोगों के समान स्‍वभाव ही से क्रोध की सन्तान थे। 
Ephesians 2:4 परन्तु परमेश्वर ने जो दया का धनी है; अपने उस बड़े प्रेम के कारण, जिस से उसने हम से प्रेम किया। 
Ephesians 2:5 जब हम अपराधों के कारण मरे हुए थे, तो हमें मसीह के साथ जिलाया; (अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है।) 
Ephesians 2:6 और मसीह यीशु में उसके साथ उठाया, और स्‍वर्गीय स्थानों में उसके साथ बैठाया। 
Ephesians 2:7 कि वह अपनी उस कृपा से जो मसीह यीशु में हम पर है, आने वाले समयों में अपने अनुग्रह का असीम धन दिखाए। 
Ephesians 2:8 क्योंकि विश्वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है, और यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर का दान है। 
Ephesians 2:9 और न कर्मों के कारण, ऐसा न हो कि कोई घमण्‍ड करे। 
Ephesians 2:10 क्योंकि हम उसके बनाए हुए हैं; और मसीह यीशु में उन भले कामों के लिये सृजे गए जिन्हें परमेश्वर ने पहिले से हमारे करने के लिये तैयार किया।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 33-36