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Saturday, August 8, 2015

जीवन के दृश्य


   छुट्टियों में भ्रमण के दौरान सारे साल बर्फ से ढके रहने वाले अलास्का प्रदेश के जितने दृश्य मैं देख पाई, उन में से अधिकांश मैंने चलती हुई गाड़ियों की खिड़की में से देखे। मैं धन्यवादी थी काँच की बनी खिड़कियों के लिए जिसके कारण बाहर ठंडा होने पर भी मैं गाड़ी के अन्दर गर्म रहते हुए बाहर की सुन्दरता को देखने पाई। लेकिन उन काँच की खिड़कियों से एक समस्या भी थी, जब बाहर बारिश पड़ती तो काँच पर पड़ता पानी बाहर के दृश्य को धुँधला कर देता और मैं कुछ स्पष्ट नहीं देख पाती। इसी प्रकार जब अन्दर का तापमन बदलता तो काँच पर हवा की नमी जम जाती, उसे धुन्धला कर देती और फिर मुझे बाहर का दृश्य स्पष्ट दिखाई देना बन्द हो जाता।

   इस बात ने मुझे यह समझने में सहायता करी कि क्यों हम जीवन को वैसा नहीं देख पाते जैसा परमेश्वर ने उसे हमारे चारों ओर रखा है। हमारा पाप परमेश्वर द्वारा हमारे जीवनों में भरी गई सुन्दरता को स्पष्ट देख पाने में बाधा बनता है। गाड़ी के काँच पर आई नमी की परत के समान कभी-कभी पाप हमारे अन्दर होता है, जैसे कि स्वार्थ का पाप, जिसके कारण हम हमारे आस-पास के लोगों की आवश्यकताओं को स्पष्ट नहीं देख पाते और अपने आप को औरों से अधिक महत्वपूर्ण समझने लगते हैं। कभी-कभी पाप बाहर होता है, जैसे कि औरों द्वारा किया जा रहा अन्याय जो हमारी आँखों को आँसुओं से धुन्धला कर देता है और हम परमेश्वर की भलाई को देख नहीं पाते। पाप चाहे कैसा भी, चाहे अन्दर हो या बाहर, हमारे और परमेश्वर के बीच में आता ही है और हमें जीवन के अद्भुत स्वरूप और परमेश्वर की भलाईयों को स्पष्ट देख पाने में बाधा बनता ही है।

   चाहे अभी, "...हमें दर्पण में धुंधला सा दिखाई देता है" (1 कुरिन्थियों 13:12), लेकिन फिर भी हम अभी इतना तो देख पाते हैं कि परमेश्वर भला है (भजन 34:8)। परमेश्वर ने जो अपनी भलाई और जीवन की अद्भुत बातें हमारे चारों ओर रखी हैं, यदि हम उन पर विचार करें, तो हम पाप से दूर हटकर संसार में होने वाले पाप के दुषप्रभावों को कम करने में सहायक हो सकते हैं। परमेश्वर और उसकी भलाईयों पर मनन कीजिए तो पाप जीवन के दृश्यों तथा आपकी नज़र को धुन्धला नहीं कर पाएगा। - जूली ऐकैअरमैन लिंक


जीवन को स्पष्ट देख पाने के लिए मसीह यीशु पर ध्यान केन्द्रित रखिए।

मेरी आंखें खोल दे, कि मैं तेरी व्यवस्था की अद्भुत बातें देख सकूं। - भजन 119:18

बाइबल पाठ: भजन 34:1-10
Psalms 34:1 मैं हर समय यहोवा को धन्य कहा करूंगा; उसकी स्तुति निरन्तर मेरे मुख से होती रहेगी। 
Psalms 34:2 मैं यहोवा पर घमण्ड करूंगा; नम्र लोग यह सुनकर आनन्दित होंगे। 
Psalms 34:3 मेरे साथ यहोवा की बड़ाई करो, और आओ हम मिलकर उसके नाम की स्तुति करें। 
Psalms 34:4 मैं यहोवा के पास गया, तब उसने मेरी सुन ली, और मुझे पूरी रीति से निर्भय किया। 
Psalms 34:5 जिन्होंने उसकी ओर दृष्टि की उन्होंने ज्योति पाई; और उनका मुंह कभी काला न होने पाया। 
Psalms 34:6 इस दीन जन ने पुकारा तब यहोवा ने सुन लिया, और उसको उसके सब कष्टों से छुड़ा लिया। 
Psalms 34:7 यहोवा के डरवैयों के चारों ओर उसका दूत छावनी किए हुए उन को बचाता है। 
Psalms 34:8 परखकर देखो कि यहोवा कैसा भला है! क्या ही धन्य है वह पुरूष जो उसकी शरण लेता है। 
Psalms 34:9 हे यहोवा के पवित्र लोगो, उसका भय मानो, क्योंकि उसके डरवैयों को किसी बात की घटी नहीं होती! 
Psalms 34:10 जवान सिंहों तो घटी होती और वे भूखे भी रह जाते हैं; परन्तु यहोवा के खोजियों को किसी भली वस्तु की घटी न होवेगी।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 74-76
  • रोमियों 9:16-33