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Thursday, November 26, 2015

वास्तविक प्रेम


   कुछ वर्ष पहले मेरी सहेली बेथ की माँ को दिमाग़ के एल्ज़ाईमर्स रोग का रोगी पाया गया, इस रोग का कोई इलाज नहीं है और इसका पीड़ित अपनी स्मरणशक्ति गंवाता तथा दूसरों पर निर्भर होता चला जाता है। तब से बेथ के लिए अपनी माँ की देखभाल करना अनेक कठिन और कष्टदायक निर्णयों का लेना बन गया है। अपनी ज़िन्दादिल और आनन्दप्रीय स्वभाव की माँ को धीरे धीरे कमज़ोर पड़ते तथा अपनी देखभाल के लिए दूसरों पर निर्भर होते देखना बेथ के लिए बहुत हृदयविदारक रहा है। इस प्रक्रिया के अनिभव से बेथ ने जाना है कि वास्तविक प्रेम सदा ही सरल या सुविधाजनक नहीं होता।

   पिछले वर्ष जब उसकी माँ को कुछ समय के लिए अस्पताल में भरती करना पड़ा था, बेथ ने अपने कुछ मित्रों को यह लिखा: "चाहे यह उल्टे रुख ही क्यों ना प्रतीत हो, अपनी माँ के साथ मैं जिस जीवन यात्रा पर हूँ, उसके लिए मैं बहुत धन्यवादी हूँ। उनकी स्मरणशक्ति क्षीण हो जाने, उलझनों में रहने और निःसहाय होने के पीछे एक अति सुन्दर व्यक्तित्व है जो जीवन से प्रेम करता है और अपने अन्दर पूर्णतः शान्ति से है। इस अनुभव से मैं सीख रही हूँ कि वास्तविक प्रेम क्या होता है। संभवतः स्वेच्छा से मैं कभी इस यात्रा और इसके साथ मिले दुखों तथा आँसुओं को पाने की चेष्टा कभी नहीं करती, लेकिन आज मैं इस अनुभव का सौदा किसी अन्य अनुभव से भी नहीं करूँगी।"

   परमेश्वर का वचन बाइबल हमें स्मरण दिलाती है कि प्रेम धीरजवन्त और कृपालु होता है। प्रेम स्वार्थ नहीं चाहता और ना ही शीघ्र क्रोधित होता है; जैसा बाइबल बताती है, "प्रेम धीरजवन्‍त है, और कृपाल है; प्रेम डाह नहीं करता; प्रेम अपनी बड़ाई नहीं करता, और फूलता नहीं। वह अनरीति नहीं चलता, वह अपनी भलाई नहीं चाहता, झुंझलाता नहीं, बुरा नहीं मानता। कुकर्म से आनन्‍दित नहीं होता, परन्तु सत्य से आनन्‍दित होता है। वह सब बातें सह लेता है, सब बातों की प्रतीति करता है, सब बातों की आशा रखता है, सब बातों में धीरज धरता है" (1 कुरिन्थियों 13:4-7)।

   वास्तविक प्रेम का उद्गम परमेश्वर पिता से है, जिसने अपने एकलौते पुत्र प्रभु यीशु मसीह को हमारे लिए बलिदान कर दिया। हम मसीही विश्वासी जब परमेश्वर के इस प्रेम की गवाही लोगों के समक्ष रखने का प्रयास करते हैं तो हमें प्रभु यीशु मसीह के उदाहरण का अनुसरण करना उचित है, जिसने समस्त संसार के उद्धार और पापों से मुक्ति के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया (1 यूहन्ना 3:16-18)। - सिंडी हैस कैसपर


वास्तविक प्रेम प्रभु यीशु के नाम से दूसरों की सहायता करना है, चाहे वे कभी इस भलाई को हमें वापस लौटा ना सकें।

हम ने प्रेम इसी से जाना, कि उसने हमारे लिये अपने प्राण दे दिए; और हमें भी भाइयों के लिये प्राण देना चाहिए। - 1 यूहन्ना 3:16

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 13:1-8
1 Corinthians 13:1 यदि मैं मनुष्यों, और सवर्गदूतों की बोलियां बोलूं, और प्रेम न रखूं, तो मैं ठनठनाता हुआ पीतल, और झंझनाती हुई झांझ हूं। 
1 Corinthians 13:2 और यदि मैं भविष्यद्वाणी कर सकूं, और सब भेदों और सब प्रकार के ज्ञान को समझूं, और मुझे यहां तक पूरा विश्वास हो, कि मैं पहाड़ों को हटा दूं, परन्तु प्रेम न रखूं, तो मैं कुछ भी नहीं। 
1 Corinthians 13:3 और यदि मैं अपनी सम्पूर्ण संपत्ति कंगालों को खिला दूं, या अपनी देह जलाने के लिये दे दूं, और प्रेम न रखूं, तो मुझे कुछ भी लाभ नहीं। 
1 Corinthians 13:4 प्रेम धीरजवन्‍त है, और कृपाल है; प्रेम डाह नहीं करता; प्रेम अपनी बड़ाई नहीं करता, और फूलता नहीं। 
1 Corinthians 13:5 वह अनरीति नहीं चलता, वह अपनी भलाई नहीं चाहता, झुंझलाता नहीं, बुरा नहीं मानता। 
1 Corinthians 13:6 कुकर्म से आनन्‍दित नहीं होता, परन्तु सत्य से आनन्‍दित होता है। 
1 Corinthians 13:7 वह सब बातें सह लेता है, सब बातों की प्रतीति करता है, सब बातों की आशा रखता है, सब बातों में धीरज धरता है। 
1 Corinthians 13:8 प्रेम कभी टलता नहीं; भविष्यद्वाणियां हों, तो समाप्‍त हो जाएंगी, भाषाएं हो तो जाती रहेंगी; ज्ञान हो, तो मिट जाएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 27-29
  • 1पतरस 3