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Saturday, April 30, 2011

विजयी जीवन का आधार

मैंने एक रिपोर्ट पढ़ी जिसमें दो तथाकथित "विशेष्ज्ञ" इस निष्कर्ष पर पहुँचे थे कि दैत्याकार और अति सामर्थी समझे जाने वाला गोलियत, जिसे दाउद ने युद्ध में हराया और मार डाला, वासत्व में एक कमज़ोर और रोगी व्यक्ति था; उसे मस्तिष्क के अन्दर एक ग्रंथी में रसौली थी जिसके कारण उसका शरीर दैत्याकार हो गया और उसकी नज़र कमज़ोर हो गई, इस कारण वह दाउद द्वारा गोफन से फेंका हुआ पत्थर नहीं देख सका और माथे पर लगी उस पत्थर की चोट से मारा गया।

लेकिन यथार्थ इससे बिलकुल भिन्न है। जिस मस्तिष्क रोग की बात ये तथाकथित "विशेष्ज्ञ" कर रहे हैं, उससे पीड़ित रोगी ठीक से चल नहीं सकता और शरीर के विशाल हो जाने के बावजूद इन रोगियों में एक साधारण मनुष्य के बाराबर भी ताकत नहीं रह जाती। लेकिन गोलियत कोई कमज़ोर मनुष्य नहीं था - वह जो कवच पहनता था केवल उसीका वज़न लगभग ६० किलो था, और उसके भाले के सिरे का वज़न लगभग ७ किलो था। यदि गोलियत वासत्व में रोग से ग्रसित कमज़ोर मनुष्य होता तो इतना वज़न उठा कर चलना उसके लिए संभव नहीं होता।

इस संदर्भ में गोलियत से संबंधित कुछ अन्य बातें भी विचारने योग्य हैं, वह एक प्रबल योद्धा था और समस्त इस्त्राएली उससे डरे हुए थे और उसकी लकार का सामना करने की उनमें हिम्मत नहीं थी। इस्त्राएलियों के दुश्मन फिलिस्तियों ने गोलियत को अपना नायक बना कर युद्ध में उतारा और इस्त्राएलियों को चुनौती दी। कोई सेनापति किसी बीमार और कमज़ोर नज़र वाले व्यक्ति को कभी इस तरह युद्ध में नहीं उतारता और न ही ऐसे बीमार योद्धा की चुनौती से कोई विरोधी भयभीत होता।

अवश्य ही परमेश्वर की सहायता के बिना दाउद के लिए गोलियत को मारना संभव नहीं था, और परमेश्वर में विश्वास के बिना दाउद के लिए गोलियत की चुनौती स्वीकार करके उससे लड़ने युद्ध में उतरना भी संभव नहीं था। दाउद ने केवल परमेश्वर पर विश्वास और परमेश्वर की सहायता के द्वारा गोलियत पर अद्भुत विजय प्राप्त करी।

प्रभु यीशु के अनुयायी चाहे दैत्याकार मनुष्यों अथवा शत्रुओं से शारीरिक युद्ध में संलग्न नहीं हैं, लेकिन उनका एक ऐसा युद्ध है जो निरंतर चलता रहता है और वह भी एक ऐसे शत्रु से जो गोलियत से कहीं अधिक सामर्थी है - वे अपने विरुद्ध शैतान के हमलों का आत्मिक युद्ध अविराम लड़ते रहते हैं, क्योंकि शैतान बार बार और अनेक उपायों से उन्हें पाप और परमेश्वर विरोधी कार्यों में फंसाना चाहता है।

हमारा परमेश्वर सर्वसामर्थी है। दाउद के समान हमें भी उसपर और उसकी सामर्थ पर विश्वास रखना है और तब हम शैतान और उसके षड़यंत्रों पर विजयी हो सकेंगे। जिसने दाउद को दैत्याकार गोलियत पर विजयी किया वही हमें शैतान पर भी विजयी करेगा।

हमारा परमेश्वर और उस पर हमारा विश्वास ही हमारे विजयी होने का आधार है। - हर्ब वैन्डर लुग्ट


हमारे विरुद्ध उठने वाली कोई भी परिस्थिति हमारी सामर्थ के बाहर तो हो सकती है, लेकिन हमारे परमेश्वर के संसाधानों के बाहर कभी नहीं हो सकती।

दाऊद ने पलिश्ती से कहा, तू तो तलवार और भाला और सांग लिए हुए मेरे पास आता है परन्तु मैं सेनाओं के यहोवा के नाम से तेरे पास आता हूं, जो इस्राएली सेना का परमेश्वर है, और उसी को तू ने ललकारा है। - १ शमूएल १७:४५


बाइबल पाठ: १ शमूएल १७:३२-५४

1Sa 17:32 तब दाऊद ने शाऊल से कहा, किसी मनुष्य का मन उसके कारण कच्चा न हो; तेरा दास जाकर उस पलिश्ती से लड़ेगा।
1Sa 17:33 शाऊल ने दाऊद से कहा, तू जाकर उस पलिश्ती के विरूद्ध नहीं युद्ध कर सकता क्योंकि तू तो लड़का ही है, और वह लड़कपन ही से योद्धा है।
1Sa 17:34 दाऊद ने शाऊल से कहा, तेरा दास अपने पिता की भेड़ बकरियां चराता था, और जब कोई सिंह वा भालू झुंड में से मेम्ना उठा ले गया,
1Sa 17:35 तब मैं ने उसका पीछा करके उसे मारा, और मेम्ने को उसके मुंह से छुड़ाया और जब उस ने मुझ पर चढ़ाई की, तब मैं ने उसके केश को पकड़कर उसे मार डाला।
1Sa 17:36 तेरे दास ने सिंह और भालू दोनों को मार डाला और वह खतनारहित पलिश्ती उनके समान हो जाएगा, क्योंकि उस ने जीवित परमेश्वर की सेना को ललकारा है।
1Sa 17:37 फिर दाऊद ने कहा, यहोवा जिस ने मुझे सिंह और भालू दोनों के पंजे से बचाया है, वह मुझे उस पलिश्ती के हाथ से भी बचाएगा। शाऊल ने दाऊद से कहा, जा, यहोवा तेरे साथ रहे।
1Sa 17:38 तब शाऊल ने अपने वस्त्र दाऊद को पहिनाए, और पीतल का टोप उसके सिर पर रख दिया, और झिलम उसको पहिनाया।
1Sa 17:39 और दाऊद ने उसकी तलवार वस्त्र के ऊपर कसी, और चलने का यत्न किया, उस ने तो उनको न परखा था। इसलिथे दाऊद ने शाऊल से कहा, इन्हें पहिने हुए मुझ से चला नहीं जाता, क्योंकि मैं ने नहीं परखा। और दाऊद ने उन्हें उतार दिया।
1Sa 17:40 तब उस ने अपनी लाठी हाथ में ले नाले में से पांच चिकने पत्थर छांट कर अपनी चरवाही की थैली, अर्थात अपने झोले में रखे और अपना गोफन हाथ में लेकर पलिश्ती के निकट चला।
1Sa 17:41 और पलिश्ती चलते चलते दाऊद के निकट पहुंचने लगा, और जो जन उसकी बड़ी ढाल लिए था वह उसके आगे आगे चला।
1Sa 17:42 जब पलिश्ती ने दृष्टि करके दाऊद को देखा, तब उसे तुच्छ जाना क्योंकि वह लड़का ही था, और उसके मुख पर लाली झलकती थी, और वह सुन्दर था।
1Sa 17:43 तब पलिश्ती ने दाऊद से कहा, क्या मैं कुत्ता हूं, कि तू लाठी लेकर मेरे पास आता है? तब पलिश्ती अपने देवताओं के नाम लेकर दाऊद को कोसने लगा।
1Sa 17:44 फिर पलिश्ती ने दाऊद से कहा, मेरे पास आ, मैं तेरा मांस आकाश के पक्षियों और बनपशुओं को दे दूंगा।
1Sa 17:45 दाऊद ने पलिश्ती से कहा, तू तो तलवार और भाला और सांग लिए हुए मेरे पास आता है परन्तु मैं सेनाओं के यहोवा के नाम से तेरे पास आता हूं, जो इस्राएली सेना का परमेश्वर है, और उसी को तू ने ललकारा है।
1Sa 17:46 आज के दिन यहोवा तुझ को मेरे हाथ में कर देगा, और मैं तुझ को मारूंगा, और तेरा सिर तेरे धड़ से अलग करूंगा और मैं आज के दिन पलिश्ती सेना की लोथें आकाश के पक्षियों और पृथ्वी के जीव जन्तुओं को दे दूंगा; तब समस्त पृथ्वी के लोग जान लेंगे कि इस्राएल में एक परमेश्वर है।
1Sa 17:47 और यह समस्त मण्डली जान लेगी की यहोवा तलवार वा भाले के द्वारा जयवन्त नहीं करता, इसलिये कि संग्राम तो यहोवा का है, और वही तुम्हें हमारे हाथ में कर देगा।
1Sa 17:48 जब पलिश्ती उठकर दाऊद का साम्हना करने के लिये निकट आया, तब दाऊद सेना की ओर पलिश्ती का साम्हना करने के लिये फुर्ती से दौड़ा।
1Sa 17:49 फिर दाऊद ने अपनी थैली में हाथ डालकर उस में से एक पत्थर निकाला, और उसे गोफन में रखकर पलिश्ती के माथे पर ऐसा मारा कि पत्थर उसके माथे के भीतर घुस गया, और वह भूमि पर मुंह के बल गिर पड़ा।
1Sa 17:50 यों दाऊद ने पलिश्ती पर गोफन और एक ही पत्थर के द्वारा प्रबल होकर उसे मार डाला परन्तु दाऊद के हाथ में तलवार न थी।
1Sa 17:51 तब दाऊद दौड़कर पलिश्ती के ऊपर खड़ा हुआ, और उसकी तलवार पकड़कर मियान से खींची, और उसको घात किया, और उसका सिर उसी तलवार से काट डाला। यह देखकर कि हमारा वीर मर गया पलिश्ती भाग गए।
1Sa 17:52 इस पर इस्राएली और यहूदी पुरूष ललकार उठे, और गत और एक्रोन से फाटकों तक पलिश्तियों का पीछा करते गए, और घायल पलिश्ती शारैम के मार्ग में और गत और एक्रोन तक गिरते गए।
1Sa 17:53 तब इस्राएली पलिश्तियों का पीछा छोड़कर लौट आए, और उनके डेरों को लूट लिया।
1Sa 17:54 और दाऊद पलिश्ती का सिर यरूशलेम में ले गया और उसके हथियार अपने डेरे में धर लिए।

एक साल में बाइबल:
  • १ राजा ८-९
  • लूका २१:१-१९

Friday, April 29, 2011

परमेश्वर की आवाज़

पतरस ने नए नियम की दो पत्रियाँ लिखीं, किंतु उसने यह एहसास किया कि वह केवल एक माध्यम भर है, जिसके द्वारा परमेश्वर अपना संदेश लोगों तक पहुंचा रहा है। पतरस ने अपने पाठकों को लिखा, " क्‍योंकि कोई भी भविष्यद्वाणी मनुष्य की इच्‍छा से कभी नहीं हुई पर भक्त जन पवित्र आत्मा के द्वारा उभारे जाकर परमेश्वर की ओर से बोलते थे" (२ पतरस १:२१)।

विख्यात सुसमाचार प्रचारक और बाइबल के ज्ञाता सी. एच. स्परजन ने लिखा, "बाइबल जीवित परमेश्वर की कृति है। उसने मूसा को नियुक्त किया कि उसकी प्रजा का इतिहास लिखे और परमेश्वर ने ही मूसा की कलम को निर्देशित किया। अवश्य ही दाउद ने अपनी वीणा के तारों को छेड़ा और मधुर भजन उसके हाथों से निकले, लेकिन परमेश्वर ही उसके हाथों की उंगलियों को वीणा पर चला रहा था और उसके मन में उन भजनों को भर रहा था। सुलेमान ने प्रेम के श्रेष्ठगीत गाए और उत्कॄष्ठ ज्ञान से भरे नीतिवचन बोले, लेकिन परमेश्वर ही था जो उसके होठों का निर्देशन कर उसे सुवक्ता बना रहा था। जब मैं नहूम की गर्जन और हबक्कूक के भविष्यदर्शन को पढ़ता हूँ, या मलाकी में लिखे पृथ्वी के अन्त समय की भविष्यवाणी को देखता हूँ, या पतरस की पत्रियों में परमेश्वर के शत्रुओं के आग में भस्म होने को पाता हूँ, या यहूदा की पत्री में परमेश्वर के विरोधियों पर घोर श्राप को पढ़ता हूँ - तो इन सब में मैं परमेश्वर की वाणी ही को पाता हूँ। हर पुस्तक में परमेश्वर ही बोल रहा है, कोई मनुष्य नहीं!"

"हर एक पवित्रशास्‍त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है..." (२ तिमुथियुस ३:१६); लेकिन महत्वपूर्ण है यह बात कि पवित्रशास्त्र बाइबल हमारे लिए रचि गई है, बाइबल के द्वारा परमेश्वर हमसे बातें करता है।

क्या अपने परमेश्वर की आवाज़ की ओर ध्यान दिया है? - रिचर्ड डी हॉन


बाइबल ही एक ऐसी पुस्तक है जिसका लेखक सदा वर्तमान है और अपने पाठकों के साथ विद्यमान रहता है।

हर एक पवित्रशास्‍त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है और उपदेश, और समझाने, और सुधारने, और धर्म की शिक्षा के लिये लाभदायक है। - २ तिमुथियुस ३:१६


बाइबल पाठ: २ पतरस १:१६-२१

2Pe 1:16 क्‍योंकि जब हम ने तुम्हें अपने प्रभु यीशु मसीह की सामर्थ का, और आगमन का समाचार दिया था तो वह चतुराई से गढ़ी हुई कहानियों का अनुकरण नहीं किया था वरन हम ने आप ही उसके प्रताप को देखा था।
2Pe 1:17 कि उस ने परमेश्वर पिता से आदर, और महिमा पाई जब उस प्रतापमय महिमा में से यह वाणी आई कि यह मेरा प्रिय पुत्र है जिस से मैं प्रसन्न हूं।
2Pe 1:18 और जब हम उसके साथ पवित्र पहाड़ पर थे, तो स्‍वर्ग से यही वाणी आते सुना।
2Pe 1:19 और हमारे पास जो भविष्यद्वक्ताओं का वचन है, वह इस घटना से दृढ़ ठहरा है और तुम यह अच्‍छा करते हो, कि जो यह समझकर उस पर ध्यान करते हो, कि वह एक दीया है, जो अन्‍धियारे स्थान में उस समय तक प्रकाश देता रहता है जब तक कि पौ न फटे, और भोर का तारा तुम्हारे हृदयों में न चमक उठे।
2Pe 1:20 पर पहिले यह जान लो कि पवित्र शास्‍त्र की कोई भी भविष्यद्वाणी किसी के अपने ही विचारधारा के आधार पर पूर्ण नहीं होती।
2Pe 1:21 क्‍योंकि कोई भी भविष्यद्वाणी मनुष्य की इच्‍छा से कभी नहीं हुई पर भक्त जन पवित्र आत्मा के द्वारा उभारे जाकर परमेश्वर की ओर से बोलते थे।

एक साल में बाइबल:
  • १ राजा ६-७
  • लूका २०:२७-४७

Thursday, April 28, 2011

शांत समय

खान में कठिन परिश्रम करने वाले कुछ मज़दूरों ने शाम के समय काम करते हुए एक पक्षी की मधुर चहचहाहट सुनी। उसे सुनकर वे एकदम शांत हो गए; उस शांत वातवरण में उनके मनों में बचपन की यादें ताज़ा हो गईं, जब वे इसी चहचहाहट का आनन्द लेते थे। इसी प्रकार जब हम शांत होते हैं तभी परमेश्वर की आवाज़ को सबसे साफ और प्रभावी रूप में सुन सकते हैं।

सर्दीयों की सुबह के शांत वातवरण में उठकर पाले की सफेद चादर से ढंके खेतों और मकानों का दृश्य अविस्मरणीय होता है। कब और कैसे रात के सन्नाटे में बर्फ खामोशी से आई और चांदी की सी परत से सब कुछ ढक दिया, पता ही नहीं चलता। किसी की अदृश्य उंगलियाँ प्रकृति को छू देती हैं और कायाकल्प हो जाता है। यह स्मरण दिलाता है भजन ४६:१० की पंक्ति को, "चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं।" तथा हबक्कूक की बात को, "परन्तु यहोवा अपने पवित्र मन्दिर में है; समस्त पृथ्वी उसके साम्हने शान्त रहे।" (हबक्कूक २:२०)

न केवल प्रकृति के शांत वातावारण में, वरन हमारे जीवन के अन्य शांत समयों में भी हम परमेश्वर की वाणी सुन सकते हैं। सभी के जीवन में ऐसे समय आते हैं जब किसी बिमारी, दुख या परेशानी के कारण नींद आंखों से दूर हो जाती है और वे बिसतर पर चुपचाप लेटे होते हैं; ये बहुमूल्य पल होते हैं जब हम परमेश्वर से बातें कर सकते हैं, उससे अपने दिल का हाल बयान कर सकते हैं, उससे कह सकते हैं कि हम उसे प्रेम करते हैं तथा अपने प्रति उसके प्रेम से आनन्दित हो सकते हैं। इन शांत समयों में जो हम सीख सकते हैं, वह किसी अन्य रीति से संभव नहीं है।

परमेश्वर के साथ शांत समय बिताने के खोजी बनें; ये शांत समय हमें एक नई शांति और स्फूर्ति से भर देते हैं, हमारे जीवनों में उसकी उपस्थिति का एक नया एहसास हमारे साथ होता है। इन अनमोल पलों को पाने के लिए आपको किसी अनिद्रा की रात की प्रतीक्षा करने की आवश्यक्ता नहीं है। बस अपने व्यस्त जीवन से बाहर निकलकर कुछ समय परमेश्वर के साथ बिताएं। - हर्ब वैन्डर लुग्ट


परमेश्वर के साथ बिताया शांत समय सामर्थ और शक्ति संजोने का समय है।

परन्तु यहोवा अपने पवित्र मन्दिर में है; समस्त पृथ्वी उसके साम्हने शान्त रहे। - हबक्कूक २:२०

बाइबल पाठ: हबक्कूक २:१५-२०

Hab 2:15 हाय उस पर, जो अपने पड़ोसी को मदिरा पिलाता, और उस में विष मिलाकर उसको मतवाला कर देता है कि उसको नंगा देखे।
Hab 2:16 तू महिमा की सन्ती अपमान ही से भर गया है। तू भी पी, और अपने को खतनाहीन प्रगट कर! जो कटोरा यहोवा के दाहिने हाथ में रहता है, सो घूमकर तेरी ओर भी जाएगा, और तेरा विभव तेरी छांट से अशुद्ध हो जाएगा।
Hab 2:17 क्योंकि लबानोन में तेरा किया हुआ उपद्रव और वहां के पशुओं पर तेरा किया हुआ उत्पात, जिन से वे भयभीत हो गए थे, तुझी पर आ पड़ेंगे। यह मनुष्यों की हत्या और उस उपद्रव के कारण होगा, जो इस देश और राजधानी और इसके सब रहने वालों पर किया गया है।
Hab 2:18 खुदी हुई मूरत में क्या लाभ देखकर बनाने वाले ने उसे खोदा है? फिर झूठ सिखाने वाली और ढली हुई मूरत में क्या लाभ देखकर ढालने वाले ने उस पर इतना भरोसा रखा है कि न बोलने वाली और निकम्मी मूरत बनाए?
Hab 2:19 हाय उस पर जो काठ से कहता है, जाग; वा अबोल पत्थर से, उठ! क्या वह सिखाएगा? देखो, वह सोने चान्दी में मढ़ा हुआ है, परन्तु उस में आत्मा नहीं है।
Hab 2:20 परन्तु यहोवा अपने पवित्र मन्दिर में है; समस्त पृथ्वी उसके साम्हने शान्त रहे।

एक साल में बाइबल:
  • १ राजा ३-५
  • लूका २०:१-२६

Wednesday, April 27, 2011

"प्रभु मुझे संवेदनशील बनाईये!"

एक चर्च में प्रचार करते हुए प्रचारक ने देखा कि उसकी सुनहरी घड़ी रौशनी में जगमगा रही थी। उसने लिखा, "मैं देख रहा था कि लोगों का ध्यान उस चमकती हुई घड़ी की वजह से बंट रहा है। परमेश्वर ने मुझसे कहा, ’इस घड़ी को उतार दो; यह लोगों का ध्यान सन्देश से हटा रही है।’ मैंने कहा, ’प्रभु अपने पिता की दी हुई घड़ी को तो मैं पहने रह सकता हूँ!’ लेकिन परमेश्वर मुझे छोटी छोटी बातों के लिए संवेदनशील होना सिखा रहा था। मैंने बात को समझा और घड़ी को उतार दिया, और उसके बाद कभी प्रचार करते समय उसे नहीं पहना।" परमेश्वर की आत्मा द्वारा छोटी छोटी बातों के लिए भी किये गए इशारों के प्रति संवेदनशील रहना एक परिपक्व मसीही विश्वासी की निशानी है।

हर बार निश्चित रूप से परमेश्वर की वाणी को पहचानना आसान नहीं है। अन्दर से उठने वाली आवाज़ कई बार किसी भय, किसी स्वार्थ या शैतान द्वारा भी उत्पन्न हो सकती है। किंतु फिर भी यदि हम परमेश्वर के वचन के अध्ययन द्वारा परमेश्वर के सिद्धांत समझ लें और अपने आप को परमेश्वर के आत्मा के आधीन कर दें तो हम उसके कही गई बातों को भी पहचान सकेंगे। इब्रानियों की पत्री का लेखक कहता है कि परिपक्व विश्वासीयों की ज्ञानेन्द्रियाँ अभ्यास द्वारा सही और गलत की पहचान करने में सक्षम हो जाती हैं (इब्रानियों ५:१४)।

जो भी मसीह को स्वयं से प्रथम स्थान देता है वह परमेश्वर की ओर से है और उसे हम आश्वस्त होकर मान सकते हैं। परन्तु जो कुछ भी दया रहित, प्रेम रहित या स्वार्थपूर्ण है वह परमेश्वर की ओर से नहीं है और यदि हम ऐसे कार्य करते हैं तो परमेश्वर के आत्मा को दुखी करते हैं। जब कभी किसी भी विश्वासी से ऐसा कोई भी कार्य हो जाए जिससे परमेश्वर का आत्मा दुखी होता है तो उसे तुरंत परमेश्वर के सम्मुख