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Thursday, October 20, 2011

सम्मानजनक कार्य

   चाहे वह कितनी भी छोटी लगे, परमेश्वर की सेवा में उपयोग होना वास्तव में बहुत बड़ा सम्मान है। भजन ८४ का लेखक इस बात को भली भांति जानता था। वह संभवतः परमेश्वर के मन्दिर की सेवकाई को समर्पित लेवी गोत्र का कोई सदस्य था जो, जब उसने यह भजन लिखा तब किसी कारणवश, मन्दिर में नहीं रहता था।
   उसकी अनुपस्थिति का जो भी कारण रहा हो, लेकिन भजन यह बात दर्शाता है कि वह बहुत लालसा से मन्दिर में उपस्थित रहना चाहता था; उसने मन्दिर में घोंसला बना कर रहने वाले पक्षियों के बारे में सोचकर उन्हें धन्य जाना (पद ३, ४); उन तीर्थयात्रियों के विष्य में सोचा जो मन्दिर में दर्शन की यात्रा कर रहे थे और उन्हें धन्य जाना (पद ५-७)। उसने परमेश्वर से प्रार्थना करी और चाहा कि परमेश्वर उसकी सुधि ले और चाहे उसे मन्दिर की डेवढ़ी पर खड़ा रहने वाला द्वारपाल ही बनने दे, तो यह भी उसे दुष्टों के साथ किसी ऊंचे स्थान पर बैठने की अपेक्षा स्वीकार होगा।

   कई वर्षों से परमेश्वर की सेवकाई में लगे लोगों के साथ काम करते करते, मैं ने उन लोगों का बहुत आदर करता हूँ जो परमेश्वर के नाम से और परमेश्वर के लिए छोटे से छोटा काम करने को भी बड़ी बात मानते हैं।  उनके पास जो भी कार्यकुशलता होती है, वे उसे परमेश्वर की सेवकाई में लगा देते हैं; जैसे, परमेश्वर के भवन की मरम्मत करना, किसी बुज़ुर्ग को चर्च लाने के लिए अपनी गाड़ी का उपयोग करना, जो चर्च नहीं आ पाते उनके पास जाकर कारण का पता करना और उनकी सुधि लेना, आदि। अन्य लोग स्वयंसेवक बनकर सौंपे गए किसी भी कार्य को सहर्ष कर देते हैं।

   ये वे समर्पित लोग हैं जो परमेश्वर के लिए, प्रसन्न्ता से कुछ भी करने को तैयार रहते हैं; इनके लिए कोई काम छोटा नहीं है, वरन परमेश्वर के लिए किया गया प्रत्येक कार्य सम्मानजनक है, तथा उनके लिए आदर की बात है। - हर्ब वैण्डर लुग्ट


परमेश्वर कई दफा हमें थोड़ा देकर परखता है कि हम बड़ा कैसे संभालेंगे।

क्योंकि तेरे आंगनों में का एक दिन और कहीं के हजार दिन से उत्तम है। दुष्टों के डेरों में वास करने से अपने परमेश्वर के भवन की डेवढ़ी पर खड़ा रहना ही मुझे अधिक भावता है। - भजन ८४:१०
 
बाइबल पाठ: भजन ८४
    Psa 84:1  हे सेनाओं के यहोवा, तेरे निवास क्या ही प्रिय हैं!
    Psa 84:2  मेरा प्राण यहोवा के आंगनों की अभिलाषा करते करते मूर्च्छित हो चला; मेरा तन मन दोंनो जीवते ईश्वर को पुकार रहे।
    Psa 84:3  हे सेनाओं के यहोवा, हे मेरे राजा, और मेरे परमेश्वर, तेरी वेदियों में गौरैया ने अपना बसेरा और शूपाबेनी ने घोंसला बना लिया है जिस में वह अपने बच्चे रखे।
    Psa 84:4  क्या ही धन्य हैं वे, जो तेरे भवन में रहते हैं; वे तेरी स्तुति निरन्तर करते रहेंगे।
    Psa 84:5  क्या ही धन्य है, वह मनुष्य जो तुझ से शक्ति पाता है, और वे जिनको सिय्योन की सड़क की सुधि रहती है।
    Psa 84:6  वें रोने की तराई में जाते हुए उस को सोतों का स्थान बनाते हैं, फिर बरसात की अगली वृष्टि उसमें आशीष ही आशीष उपजाती है।
    Psa 84:7  वे बल पर बल पाते जाते हैं; उन में से हर एक जन सिय्योन में परमेश्वर को अपना मुंह दिखाएगा।
    Psa 84:8  हे सेनाओं के परमेश्वर यहोवा, मेरी प्रार्थना सुन, हे याकूब के परमेश्वर, कान लगा!
    Psa 84:9  हे परमेश्वर, हे हमारी ढ़ाल, दृष्टि कर; और अपने अभिषिक्ति का मुख देख!
    Psa 84:10  क्योंकि तेरे आंगनों में का एक दिन और कहीं के हजार दिन से उत्तम है। दुष्टों के डेरों में वास करने से अपने परमेश्वर के भवन की डेवढ़ी पर खड़ा रहना ही मुझे अधिक भावता है।
    Psa 84:11  क्योंकि यहोवा परमेश्वर सूर्य और ढाल है; यहोवा अनुग्रह करेगा, और महिमा देगा; और जो लोग खरी चाल चलते हैं उन से वह कोई अच्छा पदार्थ रख न छोड़ेगा।
    Psa 84:12  हे सेनाओं के यहोवा, क्या ही धन्य वह मनुष्य है, जो तुझ पर भरोसा रखता है!
 
एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह ५९-६१ 
  • २ थिस्सलुनिकियों ३