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Thursday, March 22, 2012

प्रार्थना

   वॉशिंगटन पोस्ट के एक लेख में बताया गया कि एक लड़की ने एक महीने में अपने मोबाइल फोन द्वारा कुल मिलाकर ६४७३ संदेश भेजे और प्राप्त किए। अपने मित्रों से अपने इस लगातर संपर्क के बारे में उसने कहा कि अगर यह न हो तो वह जी नहीं सकती। शोधकर्ताओं का मानना है कि अमेरिका में मोबाइल फोन द्वारा किशोर युवक और युवतियाँ औसतन प्रति महीने २२०० संदेश भेजते या प्राप्त करते हैं।

   मेरे लिए यह लगातार चलने वाला संपर्क एक अद्भुत नमूना है उस वार्तालाप का जिसे मसीही विश्वासी परमेश्वर से प्रार्थना के रूप में जानते हैं और जिसमें उन्हें इसी प्रकार लगे रहने चाहिए। प्रेरित पौलुस ने अपने जीवन में दूसरों के लिए सदा प्रार्थना करते रहने का रवैया बना रखा था। उसने अपनी विभिन्न पत्रियों में लोगों को इसके बारे में बताया: "इसी लिये जिस दिन से यह सुना है, हम भी तुम्हारे लिये यह प्रा्र्थना करने और विनती करने से नहीं चूकते कि तुम सारे आत्मिक ज्ञान और समझ सहित परमेश्वर की इच्‍छा की पहिचान में परिपूर्ण हो जाओ" (कुलुस्सियों १:९); "और हर समय और हर प्रकार से आत्मा में प्रार्थना, और विनती करते रहो, और इसी लिये जागते रहो, कि सब पवित्र लोगों के लिये लगातार विनती किया करो" (इफिसियों ६:१८); "निरन्‍तर प्रार्थना मे लगे रहो" (१ थिस्सलुनिकीयों ५:१७)।

   मिशनरी फ्रैंक लौबैक ने, जिन लोगों से वह अपनी दिनचर्या में मिलते थे, उनके लिए अपनी लगातार प्रार्थना करते रहने की आदत के बारे में बताया। वे भी उन लोगों के लिए निरंतर परमेश्वर को संदेश भेजते या पाते रहते थे, एक प्रकार से वे परमेश्वर से लगातार संपर्क में बने रहते थे। लौबैक का मानना है कि प्रार्थना संसार में कार्यकारी सबसे सामर्थी शक्ति है, और वे कहते थे कि "मेरा कर्त्वय है कि मैं हर घड़ी परमेश्वर के साथ वार्तालाप में और उसकी इच्छानुसार कार्य करने की प्रतिक्रीया में लगा रहूँ।"

   जब हम मोबाइल फोन पर लगातर चलने वाले लोगों के एक दूसरे से संपर्क के बारे में पढ़ते और जानते हैं तो प्रेरित पौलुस द्वारा दिए गए आवाहन "निरन्‍तर प्रार्थना मे लगे रहो" का पालन करना असंभव नहीं हो सकता; आवश्यक्ता है इसके लिए हमारी इच्छा और सतत प्रयास की। - डेविड मैक्कैसलैंड


मसीही विश्वासी के लिए प्रार्थना करते रहना श्वास लेते रहने के समान ही स्वाभाविक होना चाहिए।

और हर समय और हर प्रकार से आत्मा में प्रार्थना, और विनती करते रहो, और इसी लिये जागते रहो, कि सब पवित्र लोगों के लिये लगातार विनती किया करो। - इफिसियों ६:१८

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों १:२-१४
Col 1:3  हम तुम्हारे लिये नित प्रार्थना करके अपने प्रभु यीशु मसीह के पिता अर्थात परमेश्वर का धन्यवाद करते हैं।
Col 1:4 क्‍योंकि हम ने सुना है, कि मसीह यीशु पर तुम्हारा विश्वास है, और सब पवित्र लोगों से प्रेम रखते हो।
Col 1:5 उस आशा की हुई वस्‍तु के कारण जो तुम्हारे लिये स्‍वर्ग में रखी हुई है, जिस का वर्णन तुम उस सुसमाचार के सत्य वचन में सुन चुके हो।
Col 1:6 जो तुम्हारे पास पहुंचा है और जैसा जगत में भी फल लाता, और बढ़ता जाता है; अर्थात जिस दिन से तुम ने उस को सुना, और सच्‍चाई से परमेश्वर का अनुग्रह पहिचाना है, तुम में भी ऐसा ही करता है।
Col 1:7  उसी की शि्क्षा तुम ने हमारे प्रिय सहकर्मी इपफ्रास से पाई, जो हमारे लिये मसीह का विश्वासयोग्य सेवक है।
Col 1:8  उसी ने तुम्हारे प्रेम को जो आत्मा में है हम पर प्रगट किया।
Col 1:9  इसी लिये जिस दिन से यह सुना है, हम भी तुम्हारे लिये यह प्रार्यना करने और विनती करने से नहीं चूकते कि तुम सारे आत्मिक ज्ञान और समझ सहित परमेश्वर की इच्‍छा की पहिचान में परिपूर्ण हो जाओ।
Col 1:10  ताकि तुम्हारा चाल-चलन प्रभु के योग्य हो, और वह सब प्रकार से प्रसन्न हो, और तुम में हर प्रकार के भले कामों का फल लगे, और परमेश्वर की पहिचान में बढ़ते जाओ।
Col 1:11 और उस की महिमा की शक्ति के अनुसार सब प्रकार की सामर्थ से बलवन्‍त होते जाओ, यहां तक कि आनन्‍द के साथ हर प्रकार से धीरज और सहनशीलता दिखा सको।
Col 1:12  और पिता का धन्यवाद करते रहो, जिस ने हमें इस योग्य बनाया कि ज्योति में पवित्र लोगों के साथ मीरास में समभागी हों।
Col 1:13 उसी ने हमें अन्‍धकार के वश से छुड़ाकर अपने प्रिय पुत्र के राज्य में प्रवेश कराया।
Col 1:14 जिस से हमें छुटकारा अर्थात पापों की क्षमा प्राप्‍त होती है।
एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू १०-१२ 
  • लूका १:३९-५६