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Saturday, August 18, 2012

लीक और नित्यक्रम


   ग्रीष्म ऋतु मेरी सबसे चहेती ऋतु है क्योंकि इस ऋतु में मैं फुरसत के साथ कार्य कर सकती हूँ। मुझे पहले से निर्धारित नित्यक्रम का सिलसिला तोड़कर आराम से काम करने में कोई परेशानी नहीं होती। यह वह समय भी होता है जब मैं कुछ नए कार्य कर सकती हूँ, कुछ नई जगह देख और घूम सकती हूँ और मन्द गति से नज़ारों और बातों का आनन्द लेते हुए अपनी आत्मा और जीवन के प्रति उत्साह को पुनः ताज़ा कर सकती हूँ।

   किंतु यह समय खतरनाक भी हो सकता है, जिसमें पहले से बनी हुई कुछ अच्छी आदतें टूट सकती हैं। कुछ आदतें अच्छी होती हैं, वे हमारी कार्यकुशलता बढ़ाती हैं, और तय करतीं हैं कि आवश्यक कार्य समय पर किए जाएं। आखिरकर कुछ बातों के लिए निर्धारित लीक के अनुसार कार्य होने आवश्यक हैं नहीं तो संसार बहुत अव्यवस्थित हो जाएगा। यह सृष्टि एक निर्धारित लीक के अनुसार कार्य करने के लिए बनाई गई है और इस सृष्टि का भाग होने के कारण हमें भी कुछ बातों में निर्धारित लीक के अनुसार कार्य करना होता है, जैसे हमें समय पर सोना और भोजन लेना आवश्यक है।

   कभी कभी हम नित्यक्रम को लीक बना लेने के बारे में वैध चेतावनियाँ सुनते हैं, परन्तु परमेश्वर का वचन बाइबल बताती है कि कुछ बातों के लिए निर्धारित समय होना भला है। दाऊद ने लिखा कि उसके लिए परमेश्वर की उपासना करने और उससे मार्गदर्शन पाने के लिए प्रातः का समय ही सही समय है (भजन ५:३; १४३:८)। बाइबल के एक और नायक दानिय्येल ने दिन में तीन बार प्रार्थना करना ठान रखा था और मृत्यु दण्ड का भय भी उसे इस नित्यक्रम से डिगा नहीं सका (दानिय्येल ६:१०)।

   जब हम अवकाश के समय में हों तो हमें परमेश्वर के साथ समय बिताने में लापरवाह नहीं हो जाना चाहिए। यह एक ऐसा नित्यक्रम है जिसकी लीक से हटना ठीक नहीं है। आत्मिक भोजन को नियमित रूप से ग्रहण करते रहना प्रत्येक ऋतु में एक समान ही आवश्यक रहता है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएंगे, वे उकाबों की नाई उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे। - यशायाह ४०:३१

अपनी करूणा की बात मुझे शीघ्र सुना, क्योंकि मैं ने तुझी पर भरोसा रखा है। जिस मार्ग से मुझे चलना है, वह मुझ को बता दे, क्योंकि मैं अपना मन तेरी ही ओर लगाता हूं। - भजन १४३:८

बाइबल पाठ: दानिय्येल ६:१-१०
Dan 6:1  दारा को यह अच्छा लगा कि अपने राज्य के ऊपर एक सौ बीस ऐसे अधिपति ठहराए, जो पूरे राज्य में अधिकार रखें। 
Dan 6:2  और उनके ऊपर उस ने तीन अध्यक्ष, जिन में से दानिय्येल एक था, इसलिये ठहराए, कि वे उन अधिपतियों से लेखा लिया करें, और इस रीति राजा की कुछ हानि न होने पाए। 
Dan 6:3  जब यह देखा गया कि दानिय्येल में उत्तम आत्मा रहती है, तब उसको उन अध्यक्षों और अधिपतियों से अधिक प्रतिष्ठा मिली; वरन राजा यह भी सोचता था कि उसको सारे राज्य के ऊपर ठहराए। 
Dan 6:4  तब अध्यक्ष और अधिपति राजकार्य के विषय में दानिय्येल के विरूद्ध दोष ढूंढ़ने लगे; परन्तु वह विश्वासयोग्य था, और उसके काम में कोई भूल वा दोष न निकला, और वे ऐसा कोई अपराध वा दोष न पा सके। 
Dan 6:5  तब वे लोग कहने लगे, हम उस दानिय्येल के परमेश्वर की व्यवस्था को छोड़ और किसी विषय में उसके विरूद्ध कोई दोष न पा सकेंगे।
Dan 6:6  तब वे अध्यक्ष और अधिपति राजा के पास उतावली से आए, और उस से कहा, हे राजा दारा, तू युगयुग जीवित रहे। 
Dan 6:7  राज्य के सारे अध्यक्षों ने, और हाकिमों, अधिपतियों, न्यायियों, और गवर्नरों ने भी आपास में सम्मति की है, कि राजा ऐसी आज्ञा दे और ऐसी कड़ी आज्ञा निकाले, कि तीस दिन तक जो कोई, हे राजा, तुझे छोड़ किसी और मनुष्य वा देवता से बिनती करे, वह सिंहों की मान्द में डाल दिया जाए। 
Dan 6:8  इसलिये अब हे राजा, ऐसी आज्ञा दे, और इस पत्र पर हस्ताक्षर कर, जिस से यह बात मादियों और फारसियों की अटल व्यवस्था के अनुसार अदल-बदल न हो सके। 
Dan 6:9  तब दारा राजा ने उस आज्ञापत्र पर हस्ताक्षर कर दिया।
Dan 6:10  जब दानिय्येल को मालूम हुआ कि उस पत्र पर हस्ताक्षर किया गया है, तब वह अपने घर में गया जिसकी उपरौठी कोठरी की खिड़कियां यरूशलेम के सामने खुली रहती थीं, और अपनी रीति के अनुसार जैसा वह दिन में तीन बार अपने परमेश्वर के साम्हने घुटने टेक कर प्रार्थना और धन्यवाद करता था, वैसा ही तब भी करता रहा।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन १००-१०२ 
  • १ कुरिन्थियों १