ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें : rozkiroti@gmail.com / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

आदत लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
आदत लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सोमवार, 1 जुलाई 2019

सफाई



      हाल ही में मैंने अपने रहने का कमरा एक से दूसरे स्थान को बदला। यह करने में मुझे अपेक्षा से अधिक समय लगा, क्योंकि मैं अपने एक कमरे का सारा कबाड़ दूसरे कमरे में स्थानांतरित कर देना नहीं चाहती थी। मैं उस नए स्थान में एक बिलकुल नया और सुव्यवस्थित आरंभ चाहती थी। घंटों की सफाई और छंटाई के बाद मेरे दरवाज़े पर कई थैले भरे हुए पड़े थे, उस सामान से जिसे फेंका, या बाँटा, या पुनःउपयोग के लिए पुनःचक्रित किया जाना था। परन्तु इस थका देने वाली मेहनत के बाद मेरे पास एक स्वच्छ सुन्दर कमरा था जिसे देखकर मैं उसमें रहने के लिए उत्साहित थी।

      मेरे घर के इस सफाई अभियान ने मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल में 1 पतरस 2:1 पर एक नया दृष्टिकोण प्रदान किया, जिसे इस प्रकार व्यक्त किया जा सकता है: “इसलिए घर की सफाई करो! प्रत्येक बैरभाव, छल, डाह, निन्दा, और दुःख देने वाली बातों को पूरी रीति से हटा दो।” यह रोचक है कि पतरस यह बात उन मसीही विश्वासियों से कह रहा है जिन्होंने मसीह यीशु विश्वास लाने के द्वारा नए आनंदपूर्ण नए जीवन की प्राप्ति का अंगीकार किया है (1:1-12), और पतरस उनसे कह रहा है कि वे हानिकारक व्यवहार को अपने जीवन से हटा दें (1:13-2:3)। जब प्रभु के साथ हमारा चलना हमें बाधित लगने लगे तथा औरों के प्रति हमारा प्रेम स्वभाविक या तनावपूर्ण प्रतीत हो, तो इससे हमें अपने उद्धार पर प्रश्न नहीं उठाना चाहिए। हम उद्धार पाने के लिए जीवन में परिवर्तन नहीं लाते है, परन्तु उद्धार पाया हुआ होने से हमारे जीवनों में परिवर्तन दिखाई देता है (1:23)।

      मसीह यीशु में हमारे विश्वास का जीवन अवश्य ही नया जीवन तो होता है, परन्तु हमारी पुरानी आदतों और बुराइयों को हमारे जीवन से जाते-जाते समय लगता है। इसलिए हमें प्रतिदिन अपने जीवन की सफाई करते रहने का रवैया बनाए रखना चाहिए; हमें उस प्रत्येक बात को अपने जीवन से निकाल देना चाहिए जो हमें औरों से प्रेम करने (1:22) और मसीही जीवन में उन्नत होने (2:2) से रोकती है।

      फिर उस स्वच्छ और साफ़ स्थिति में हम मसीह यीशु के जीवन और सामर्थ्य के द्वारा नए किए जाने (पद 5) के अचरज और आनन्द का अनुभव ले सकेंगे। - मोनिका ब्रैंड्स


प्रतिदिन हम हानिकारक आदतों का इन्कार करके 
मसीह यीशु में नए जीवन का अनुभव प्राप्त कर सकते हैं।

सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्‍टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गईं। - 2 कुरिन्थियों 5:17

बाइबल पाठ: 1 पतरस 1:22-2:5
1 Peter 1:22 सो जब कि तुम ने भाईचारे की निष्‍कपट प्रीति के निमित्त सत्य के मानने से अपने मनों को पवित्र किया है, तो तन मन लगा कर एक दूसरे से अधिक प्रेम रखो।
1 Peter 1:23 क्योंकि तुम ने नाशमान नहीं पर अविनाशी बीज से परमेश्वर के जीवते और सदा ठहरने वाले वचन के द्वारा नया जन्म पाया है।
1 Peter 1:24 क्योंकि हर एक प्राणी घास के समान है, और उस की सारी शोभा घास के फूल के समान है: घास सूख जाती है, और फूल झड़ जाता है।
1 Peter 1:25 परन्तु प्रभु का वचन युगानुयुग स्थिर रहेगा: और यह ही सुसमाचार का वचन है जो तुम्हें सुनाया गया था।
1 Peter 2:1 इसलिये सब प्रकार का बैर भाव और छल और कपट और डाह और बदनामी को दूर करके।
1 Peter 2:2 नये जन्मे हुए बच्‍चों के समान निर्मल आत्मिक दूध की लालसा करो, ताकि उसके द्वारा उद्धार पाने के लिये बढ़ते जाओ।
1 Peter 2:3 यदि तुम ने प्रभु की कृपा का स्‍वाद चख लिया है।
1 Peter 2:4 उसके पास आकर, जिसे मनुष्यों ने तो निकम्मा ठहराया, परन्तु परमेश्वर के निकट चुना हुआ, और बहुमूल्य जीवता पत्थर है।
1 Peter 2:5 तुम भी आप जीवते पत्थरों के समान आत्मिक घर बनते जाते हो, जिस से याजकों का पवित्र समाज बन कर, ऐसे आत्मिक बलिदान चढ़ाओ, जो यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर को ग्राह्य हों।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 20-21
  • प्रेरितों 10:24-48



शुक्रवार, 28 जुलाई 2017

बलवाई प्रवृत्ति


   जब मैं पहली कक्षा में अक्षर लिखना सीख रही थी, तब मेरी अध्यापिका इस बात पर बल देती थी कि मैं अपनी पेंसिल एक विशेष रीति से पकड़ूँ। जब तक वह मुझ पर ध्यान लगाए रखती थीं, मैं पेंसिल उनके कहे अनुसार पकड़े रहती थी; परन्तु जैसे ही उनका ध्यान मुझ पर से हटता, मैं फिर से पेंसिल उस रीति से पकड़ लेती जैसी मुझे सुविधाजनक लगती थी।

   मुझे लगता था कि पेंसिल पकड़ने के इस द्वंद में मैं ही विजयी हुई हूँ, मैं आज भी पेंसिल अपनी सुविधानुसार पकड़ती हूँ। परन्तु अब दशकों के बाद मुझे यह एहसास हुआ है कि मेरी अध्यापिका जानती थी कि यदि मैं पेंसिल को वैसे पकड़ूँगी जैसे पकड़ना मुझे अच्छा लगता है, तो मेरी यह हठीली आदत आगे चलकर लिखने में बाधा डालेगी क्योंकि मेरी इच्छानुसार पेंसिल पकड़ने से हाथ शीघ्र थक जाएगा और लिखाई अच्छी नहीं आएगी।

   अकसर बच्चे वह नहीं समझ पाते हैं जो उनके लिए अच्छा होता है; वे बस वही चाहते और करते हैं जो उस समय पर उन्हें अच्छा या सही लगता है। संभवतः इसीलिए परमेश्वर के वचन बाइबल में इस्त्राएल के लोगों को अनेकों बार "इस्त्राएल की सन्तान" कहकर संबोधित किया गया है - अपने व्यवहार में वे बच्चों के समान हठीले बने रहे। परमेश्वर द्वारा अनेकों बार चिताए, समझाए और ताड़ना दिए जाने के बाद भी वे उस एकमात्र सच्चे जीवते परमेश्वर की उपासना के स्थान पर अपने आस-पास के लोगों के देवी-देवताओं की उपासना में पड़ते रहे, और परिणामस्वरूप परमेश्वर ने अपनी आशीष भी उनपर से हटा ली (न्यायियों 2:20-22)। उनके ऐसे कार्यों ने परमेश्वर को बहुधा क्रोधित किया, क्योंकि वह जानता था कि उनके लिए क्या भला है, परन्तु तब भी वे इस्त्राएली उसकी बात अधिक समय तक नहीं मानते थे।

   पास्टर रिक वारेन का कहना है, "आज्ञाकारिता और ढिठाई एक ही सिक्के के दो पहलु हैं। आजाकारिता से आनन्द आता है, परन्तु ढिठाई का परिणाम दुःखद होता है।" यदि बलवाई प्रवृत्ति हमें परमेश्वर का आज्ञाकारी होने से रोक रही है, तो अभी समय है कि हम हृदय परिवर्तन कर लें। अपनी बलवाई प्रवृत्ति के आधीन होकर परमेश्वर के अनाज्ञाकारी न रहें, पश्चाताप और क्षमा याचना के साथ उसके पास लौट आएं; वह अनुग्रहकारी और दयालू क्षमा करने वाला परमेश्वर है। - सिंडी हैस कैस्पर


पहले हम आदतें बनाते हैं; फिर आदतें हमें बनाती हैं।

यहोवा कोप करने में धीरजवन्त और अति करूणामय है, और अधर्म और अपराध का क्षमा करने वाला है, परन्तु वह दोषी को किसी प्रकार से निर्दोष न ठहराएगा, और पूर्वजों के अधर्म का दण्ड उनके बेटों, और पोतों, और परपोतों को देता है। - गिनती 14:18

बाइबल पाठ: न्यायियों 2:11-22
Judges 2:11 इसलिये इस्राएली वह करने लगे जो यहोवा की दृष्टि में बुरा है, और बाल नाम देवताओं की उपासना करने लगे; 
Judges 2:12 वे अपने पूर्वजों के परमेश्वर यहोवा को, जो उन्हें मिस्र देश से निकाल लाया था, त्यागकर पराये देवताओं की उपासना करने लगे, और उन्हें दण्डवत किया; और यहोवा को रिस दिलाई। 
Judges 2:13 वे यहोवा को त्याग कर के बाल देवताओं और अशतोरेत देवियों की उपासना करने लगे। 
Judges 2:14 इसलिये यहोवा का कोप इस्राएलियों पर भड़क उठा, और उसने उन को लुटेरों के हाथ में कर दिया जो उन्हें लूटने लगे; और उसने उन को चारों ओर के शत्रुओं के आधीन कर दिया; और वे फिर अपने शत्रुओं के साम्हने ठहर न सके। 
Judges 2:15 जहां कहीं वे बाहर जाते वहां यहोवा का हाथ उनकी बुराई में लगा रहता था, जैसे यहोवा ने उन से कहा था, वरन यहोवा ने शपथ खाई थी; इस प्रकार से बड़े संकट में पड़ गए। 
Judges 2:16 तौभी यहोवा उनके लिये न्यायी ठहराता था जो उन्हें लूटने वाले के हाथ से छुड़ाते थे। 
Judges 2:17 परन्तु वे अपने न्यायियों की भी नहीं मानते थे; वरन व्यभिचारिन की नाईं पराये देवताओं के पीछे चलते और उन्हें दण्डवत करते थे; उनके पूर्वज जो यहोवा की आज्ञाएं मानते थे, उनकी उस लीक को उन्होंने शीघ्र ही छोड़ दिया, और उनके अनुसार न किया। 
Judges 2:18 और जब जब यहोवा उनके लिये न्यायी को ठहराता तब तब वह उस न्यायी के संग रहकर उसके जीवन भर उन्हें शत्रुओं के हाथ से छुड़ाता था; क्योंकि यहोवा उनका कराहना जो अन्धेर और उपद्रव करने वालों के कारण होता था सुनकर दु:खी था। 
Judges 2:19 परन्तु जब न्यायी मर जाता, तब वे फिर पराये देवताओं के पीछे चलकर उनकी उपासना करते, और उन्हें दण्डवत कर के अपने पुरखाओं से अधिक बिगड़ जाते थे; और अपने बुरे कामों और हठीली चाल को नहीं छोड़ते थे। 
Judges 2:20 इसलिये यहोवा का कोप इस्राएल पर भड़क उठा; और उसने कहा, इस जाति ने उस वाचा को जो मैं ने उनके पूर्वजों से बान्धी थी तोड़ दिया, और मेरी बात नहीं मानी, 
Judges 2:21 इस कारण जिन जातियों को यहोशू मरते समय छोड़ गया है उन में से मैं अब किसी को उनके साम्हने से न निकालूंगा; 
Judges 2:22 जिस से उनके द्वारा मैं इस्राएलियों की परीक्षा करूं, कि जैसे उनके पूर्वज मेरे मार्ग पर चलते थे वैसे ही ये भी चलेंगे कि नहीं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 46-48
  • प्रेरितों 28


गुरुवार, 28 मई 2015

महिमा


   खेलों में से मुझे बचपन से ही बेसबॉल बहुत पसन्द रहा है और मैं इस खेल का शौकीन रहा हूँ। बेसबॉल खेलने वाली टीमों में से मेरी पसन्दीदा टीम रही है डेट्रौइट टाइगर्स। लेकिन हाल ही में खेल की एक श्रंखला में खराब खेल के कारण इस टीम को कई बार हार का सामना करना पड़ा जिससे मुझे बड़ी निराशा हुई। इसलिए अपनी भलाई के लिए मैंने निर्णय किया कि मैं अवकाश लूँगा और अपनी मन-पसन्द टीम से संबंधित किसी भी बात में मैंने चार दिन तक कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। उन चार दिनों में मैं मनन करने लगा कि किसी ऐसी बात को छोड़ना, जिसके हम अभ्यस्त हो चुके हैं, कितना कठिन होता है।

  लेकिन हमारे निज जीवनों में भी कभी कभी ऐसे समय आते हैं जहाँ परमेश्वर हमें दिखाता है कि हम कुछ बातों को छोड़ दें। यह तब हो सकता है जब हम किसी ऐसे कार्य में संलग्न हो रखे हैं जो हमें किसी अन्य बात के लिए समय नहीं निकालने देती, और हम यह एहसास करने लगते हैं कि उस कार्य को सीमित कर देना ही भला होगा (1 कुरिन्थियों 6:12)। या फिर हमारे अन्दर कोई आदत या पसन्द है जिस के बारे में हम जानते हैं कि उस से परमेश्वर को प्रसन्ना नहीं हो सकता। क्योंकि हम मसीही विश्वासी परमेश्वर से प्रेम रखते हैं तथा अपने जीवनों से परमेश्वर को महिमा देना चाहते हैं, इसलिए हमें यह आभास भी होता है कि अपनी उस आदत या पसन्द को हमें छोड़ देना चाहिए।

   जब परमेश्वर की सहायता से हम उन बातों को पहचानने लगते हैं जो परमेश्वर के साथ हमारे संबंध में आड़े आती हैं, तो परमेश्वर की ही सहायता से हमें उन्हें छोड़ भी देना चाहिए। इसके लिए परमेश्वर ने हमें उचित प्रावधान दिए भी हैं (1 कुरिन्थियों 10:13), और हमारे अन्दर निवास करने वाला परमेश्वर का पवित्र आत्मा इसके लिए हमें सामर्थ भी देता है (रोमियों 8:5)।

   हम मसीही विश्वासियों का कर्तव्य और उद्देश्य है कि हम अपने जीवनों से परमेश्वर की महिमा करें (1 कुरिन्थियों 6:19-20); हम कुछ भी ऐसा ना करें जिससे संसार के सामने परमेश्वर की महिमा धूमिल होने पाए। - डेव ब्रैनन


मसीह यीशु के निकट बने रहने से हम मसीह यीशु की समानता में ढलते जाते हैं।

क्या तुम नहीं जानते, कि तुम्हारी देह पवित्रात्मा का मन्दिर है; जो तुम में बसा हुआ है और तुम्हें परमेश्वर की ओर से मिला है, और तुम अपने नहीं हो? क्योंकि दाम देकर मोल लिये गए हो, इसलिये अपनी देह के द्वारा परमेश्वर की महिमा करो। - 1 कुरिन्थियों 6:19-20

बाइबल पाठ: रोमियों 8:1-10
Romans 8:1 सो अब जो मसीह यीशु में हैं, उन पर दण्ड की आज्ञा नहीं: क्योंकि वे शरीर के अनुसार नहीं वरन आत्मा के अनुसार चलते हैं। 
Romans 8:2 क्योंकि जीवन की आत्मा की व्यवस्था ने मसीह यीशु में मुझे पाप की, और मृत्यु की व्यवस्था से स्वतंत्र कर दिया। 
Romans 8:3 क्योंकि जो काम व्यवस्था शरीर के कारण दुर्बल हो कर न कर सकी, उसको परमेश्वर ने किया, अर्थात अपने ही पुत्र को पापमय शरीर की समानता में, और पाप के बलिदान होने के लिये भेज कर, शरीर में पाप पर दण्ड की आज्ञा दी। 
Romans 8:4 इसलिये कि व्यवस्था की विधि हम में जो शरीर के अनुसार नहीं वरन आत्मा के अनुसार चलते हैं, पूरी की जाए। 
Romans 8:5 क्योंकि शरीरिक व्यक्ति शरीर की बातों पर मन लगाते हैं; परन्तु आध्यात्मिक आत्मा की बातों पर मन लगाते हैं। 
Romans 8:6 शरीर पर मन लगाना तो मृत्यु है, परन्तु आत्मा पर मन लगाना जीवन और शान्ति है। 
Romans 8:7 क्योंकि शरीर पर मन लगाना तो परमेश्वर से बैर रखना है, क्योंकि न तो परमेश्वर की व्यवस्था के आधीन है, और न हो सकता है। 
Romans 8:8 और जो शारीरिक दशा में है, वे परमेश्वर को प्रसन्न नहीं कर सकते। 
Romans 8:9 परन्तु जब कि परमेश्वर का आत्मा तुम में बसता है, तो तुम शारीरिक दशा में नहीं, परन्तु आत्मिक दशा में हो। यदि किसी में मसीह का आत्मा नहीं तो वह उसका जन नहीं। 
Romans 8:10 और यदि मसीह तुम में है, तो देह पाप के कारण मरी हुई है; परन्तु आत्मा धर्म के कारण जीवित है।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 4-6
  • यूहन्ना 10:24-42



गुरुवार, 23 अगस्त 2012

बचपन से आरंभ


   हम लोग रात्रि के भोजन के लिए एकत्रित होकर बैठे ही थे, कि हमारी ३ वर्षीय पोती चिंतित स्वर में बोल उठी - "हमने अभी भोजन के लिए ध्न्यवाद की प्रार्थना नहीं करी है!" हमने देखा कि एक व्यक्ति ने बैठते ही कुछ खाना आरंभ कर दिया था, जो हमारी पोती के लिए अनहोना और परेशानी का कारण था; क्योंकि वह जानती थी कि परमेश्वर को धन्यवाद दिए बिना हम भोजन आरंभ नहीं करते।

   उसकी यह चिंता एक अच्छा संकेत था; इससे यह पता चल रहा था कि हमारी पोती में एक अच्छी आदत, जो उसने अपने जीवन के आरंभ से अपने परिवार में देखी और सीखी थी, घर करना आरंभ कर चुकी थी और यह उसके जीवन भर उसके साथ रहेगी। यह छोटी सी बात उसे अभी उसकी छोटी उम्र से ही प्रार्थना और परमेश्वर के धन्यवादी होने के महत्व को सीखने में सहायक है, जो आगे चलकर उसे जीवन कि कई जटिल परिस्थितियों में सहायता और शांति पाने का मार्ग होगा।

   आज के इस समय में जब हर बात में मसीही विश्वास का कड़ा विरोध संसार भर में हो रहा है, बच्चों को मसीही विश्वास की शिक्षाओं के साथ बड़ा करना सरल नहीं है। कई माता-पिता चिंतित रहते हैं कि कैसे बच्चों को अपने प्रभु पर विश्वास करना और उसके भय में जीना सिखाएं, कैसे परमेश्वर के प्रति सही रवैया उनके मनों में डालें। परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन नामक पुस्तक इस में सहायक है। नीतिवचन की शिक्षाएं सिखातीं हैं माता-पिता द्वारा दिए गए श्रेष्ठ निर्देश इस बात की कुंजी हैं (नीतिवचन १:८)। वैसे तो ये बातें किसी भी उम्र में सीखी-सिखाई जा सकती हैं किंतु बचपन ही से माता-पिता द्वारा बच्चों को बुद्धि कि बात सुनने (नीतिवचन २:२), यत्न से समझ-बूझ प्राप्त करने (नीतिवचन २:३), परमेश्वर के भय को मानने (नीतिवचन २:५), माता-पिता की शिक्षाओं को स्मरण रखने (नीतिवचन ३:१), भले-बुरे को समझने की शिक्षाएं दी जानीं चाहिएं (नीतिवचन ४:१-४) जिससे आती उम्र में वे परमेश्वर की निकटता और उसके वचन कि आज्ञाकारिता में स्थिर खड़े रह सकें।

   यदि आपके पास बच्चे या नाती-पोते हैं उन्हें इन भली शिक्षाओं को सिखाना बचपन ही से आरंभ कर दीजिए। आज का बोया-सींचा हुआ अच्छा बीज कल उनके जीवन में भले फल लाएगा। - डेव ब्रैनन


आपके बच्चों के कल का चरित्र, उनके जीवनों में आज बोई गई बातों पर निर्भर करता है।

हे मेरे पुत्र, यदि तू मेरे वचन ग्रहण करे, और मेरी आज्ञाओं को अपने हृदय में रख छोड़े,...तो तू यहोवा के भय को समझेगा, और परमेश्वर का ज्ञान तुझे प्राप्त होगा। नीतिवचन २:१,५

बाइबल पाठ: नीतिवचन २
Pro 2:1  हे मेरे पुत्र, यदि तू मेरे वचन ग्रहण करे, और मेरी आज्ञाओं को अपने हृदय में रख छोड़े, 
Pro 2:2  और बुद्धि की बात ध्यान से सुने, और समझ की बात मन लगाकर सोचे; 
Pro 2:3  और प्रवीणता और समझ के लिये अति यत्न से पुकारे, 
Pro 2:4  ओर उसको चान्दी की नाईं ढूंढ़े, और गुप्त धन के समान उसी खोज में लगा रहे; 
Pro 2:5  तो तू यहोवा के भय को समझेगा, और परमेश्वर का ज्ञान तुझे प्राप्त होगा। 
Pro 2:6  क्योंकि बुद्धि यहोवा ही देता है; ज्ञान और समझ की बातें उसी के मुंह से निकलती हैं। 
Pro 2:7  वह सीधे लोगों के लिये खरी बुद्धि रख छोड़ता है; जो खराई से चलते हैं, उनके लिये वह ढाल ठहरता है। 
Pro 2:8  वह न्याय के पथों की देख भाल करता, और अपने भक्तों के मार्ग की रक्षा करता है। 
Pro 2:9  तब तू धर्म और न्याय, और सीधाई को, निदान सब भली-भली चाल समझ सकेगा; 
Pro 2:10  क्योंकि बुद्धि तो तेरे हृदय में प्रवेश करेगी, और ज्ञान तुझे मनभाऊ लगेगा; 
Pro 2:11  विवेक तुझे सुरक्षित रखेगा, और समझ तेरी रक्षक होगी; 
Pro 2:12  ताकि तुझे बुराई के मार्ग से, और उलट फेर की बातों के कहने वालों से बचाए, 
Pro 2:13  जो सीधाई के मार्ग को छोड़ देते हैं, ताकि अन्धेरे मार्ग में चलें; 
Pro 2:14  जो बुराई करने से आनन्दित होते हैं, और दुष्ट जन की उलट फेर की बातों में मगन रहते हैं; 
Pro 2:15  जिनकी चालचलन टेढ़ी मेढ़ी और जिनके मार्ग बिगड़े हुए हैं।
Pro 2:16  तब तू पराई स्त्री से भी बचेगा, जो चिकनी चुपड़ी बातें बोलती है, 
Pro 2:17  और अपनी जवानी के साथी को छोड़ देती, और जो अपने परमेश्वर की वाचा को भूल जाती है।
Pro 2:18  उसका घर मृत्यु की ढलान पर है, और उसी डगरें मरे हुओं के बीच पहुंचाती हैं? 
Pro 2:19  जो उसके पास जाते हैं, उन में से कोई भी लौट कर नहीं आता, और न वे जीवन का मार्ग पाते हैं।
Pro 2:20  तू भले मनुष्यों के मार्ग में चल, और धमिर्यों की बाट को पकड़े रह। 
Pro 2:21  क्योंकि धर्मी लोग देश में बसे रहेंगे, और खरे लोग ही उस में बने रहेंगे। 
Pro 2:22  दुष्ट लोग देश में से नाश होंगे, और विश्वासघाती उस में से उखाड़े जाएंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन ११३-११५ 
  • १ कुरिन्थियों ६

शनिवार, 18 अगस्त 2012

लीक और नित्यक्रम


   ग्रीष्म ऋतु मेरी सबसे चहेती ऋतु है क्योंकि इस ऋतु में मैं फुरसत के साथ कार्य कर सकती हूँ। मुझे पहले से निर्धारित नित्यक्रम का सिलसिला तोड़कर आराम से काम करने में कोई परेशानी नहीं होती। यह वह समय भी होता है जब मैं कुछ नए कार्य कर सकती हूँ, कुछ नई जगह देख और घूम सकती हूँ और मन्द गति से नज़ारों और बातों का आनन्द लेते हुए अपनी आत्मा और जीवन के प्रति उत्साह को पुनः ताज़ा कर सकती हूँ।

   किंतु यह समय खतरनाक भी हो सकता है, जिसमें पहले से बनी हुई कुछ अच्छी आदतें टूट सकती हैं। कुछ आदतें अच्छी होती हैं, वे हमारी कार्यकुशलता बढ़ाती हैं, और तय करतीं हैं कि आवश्यक कार्य समय पर किए जाएं। आखिरकर कुछ बातों के लिए निर्धारित लीक के अनुसार कार्य होने आवश्यक हैं नहीं तो संसार बहुत अव्यवस्थित हो जाएगा। यह सृष्टि एक निर्धारित लीक के अनुसार कार्य करने के लिए बनाई गई है और इस सृष्टि का भाग होने के कारण हमें भी कुछ बातों में निर्धारित लीक के अनुसार कार्य करना होता है, जैसे हमें समय पर सोना और भोजन लेना आवश्यक है।

   कभी कभी हम नित्यक्रम को लीक बना लेने के बारे में वैध चेतावनियाँ सुनते हैं, परन्तु परमेश्वर का वचन बाइबल बताती है कि कुछ बातों के लिए निर्धारित समय होना भला है। दाऊद ने लिखा कि उसके लिए परमेश्वर की उपासना करने और उससे मार्गदर्शन पाने के लिए प्रातः का समय ही सही समय है (भजन ५:३; १४३:८)। बाइबल के एक और नायक दानिय्येल ने दिन में तीन बार प्रार्थना करना ठान रखा था और मृत्यु दण्ड का भय भी उसे इस नित्यक्रम से डिगा नहीं सका (दानिय्येल ६:१०)।

   जब हम अवकाश के समय में हों तो हमें परमेश्वर के साथ समय बिताने में लापरवाह नहीं हो जाना चाहिए। यह एक ऐसा नित्यक्रम है जिसकी लीक से हटना ठीक नहीं है। आत्मिक भोजन को नियमित रूप से ग्रहण करते रहना प्रत्येक ऋतु में एक समान ही आवश्यक रहता है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएंगे, वे उकाबों की नाई उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे। - यशायाह ४०:३१

अपनी करूणा की बात मुझे शीघ्र सुना, क्योंकि मैं ने तुझी पर भरोसा रखा है। जिस मार्ग से मुझे चलना है, वह मुझ को बता दे, क्योंकि मैं अपना मन तेरी ही ओर लगाता हूं। - भजन १४३:८

बाइबल पाठ: दानिय्येल ६:१-१०
Dan 6:1  दारा को यह अच्छा लगा कि अपने राज्य के ऊपर एक सौ बीस ऐसे अधिपति ठहराए, जो पूरे राज्य में अधिकार रखें। 
Dan 6:2  और उनके ऊपर उस ने तीन अध्यक्ष, जिन में से दानिय्येल एक था, इसलिये ठहराए, कि वे उन अधिपतियों से लेखा लिया करें, और इस रीति राजा की कुछ हानि न होने पाए। 
Dan 6:3  जब यह देखा गया कि दानिय्येल में उत्तम आत्मा रहती है, तब उसको उन अध्यक्षों और अधिपतियों से अधिक प्रतिष्ठा मिली; वरन राजा यह भी सोचता था कि उसको सारे राज्य के ऊपर ठहराए। 
Dan 6:4  तब अध्यक्ष और अधिपति राजकार्य के विषय में दानिय्येल के विरूद्ध दोष ढूंढ़ने लगे; परन्तु वह विश्वासयोग्य था, और उसके काम में कोई भूल वा दोष न निकला, और वे ऐसा कोई अपराध वा दोष न पा सके। 
Dan 6:5  तब वे लोग कहने लगे, हम उस दानिय्येल के परमेश्वर की व्यवस्था को छोड़ और किसी विषय में उसके विरूद्ध कोई दोष न पा सकेंगे।
Dan 6:6  तब वे अध्यक्ष और अधिपति राजा के पास उतावली से आए, और उस से कहा, हे राजा दारा, तू युगयुग जीवित रहे। 
Dan 6:7  राज्य के सारे अध्यक्षों ने, और हाकिमों, अधिपतियों, न्यायियों, और गवर्नरों ने भी आपास में सम्मति की है, कि राजा ऐसी आज्ञा दे और ऐसी कड़ी आज्ञा निकाले, कि तीस दिन तक जो कोई, हे राजा, तुझे छोड़ किसी और मनुष्य वा देवता से बिनती करे, वह सिंहों की मान्द में डाल दिया जाए। 
Dan 6:8  इसलिये अब हे राजा, ऐसी आज्ञा दे, और इस पत्र पर हस्ताक्षर कर, जिस से यह बात मादियों और फारसियों की अटल व्यवस्था के अनुसार अदल-बदल न हो सके। 
Dan 6:9  तब दारा राजा ने उस आज्ञापत्र पर हस्ताक्षर कर दिया।
Dan 6:10  जब दानिय्येल को मालूम हुआ कि उस पत्र पर हस्ताक्षर किया गया है, तब वह अपने घर में गया जिसकी उपरौठी कोठरी की खिड़कियां यरूशलेम के सामने खुली रहती थीं, और अपनी रीति के अनुसार जैसा वह दिन में तीन बार अपने परमेश्वर के साम्हने घुटने टेक कर प्रार्थना और धन्यवाद करता था, वैसा ही तब भी करता रहा।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन १००-१०२ 
  • १ कुरिन्थियों १

बुधवार, 29 दिसंबर 2010

नया और पुराना

मैं सिंगापुर में एक पेट्रोलियम कंपनी में काम कर रहा था, वहां एक अन्य देश से, जो उस समय युद्ध में था, एक निरीक्षक उसके देश को भेजे जाने वाले तेल की खेप का परिक्षण करने आया। निरीक्षण के समय अचानक उपर से वायु सेना के युद्ध विमानों की आवाज़ सुनकर, आदत अनुसार वह छुपने के स्थान को ढूंढता हुआ भागा; फिर झेंपकर बोला, "क्षमा कीजिये, मुझे लगा कि मैं अपने देश में हूं"; उसने, आदत अनुसार, वही किया जो वह अपने युद्ध ग्रसित देश में होने पर करता।

मसीही विश्वासी के लिये, संसार की बातों और आकर्षणों में पड़कर, अपने पुराने पापमय चाल-चलन में तथा अपनी पुरानी आदतों के अनुसार चलने के प्रलोभन आते हैं। यद्यपि हम विश्वासी "मसीह यीशु में हैं" (रोमियों ८:१), फिर भी कभी कभी हम ऐसे जीने लगते हैं जैसे कि हम पाप में हों।

पाप के दासत्व से हमें छुड़ाने के लिये परमेश्वर ने बहुत भारी कीमत चुकाई। उसने यह "अपने ही पुत्र को पापमय शरीर की समानता में, और पाप के बलिदान होने के लिये भेजकर" किया (रोमियों ८:३)। अब हम "पाप की, और मृत्यु की व्यवस्था" के आधीन नहीं, वरन "जीवन की आत्मा की व्यवस्था" के आधीन हैं (रोमियों ८:२)। इसलिये पौलुस कहता है कि अब हमें आध्यात्मिक व्यक्तियों के समान आत्मिक बातों पर मन लगाना है (रोमियों ८:५)। इसका अर्थ है कि अब हमें परमेश्वर की आत्मा के निर्देश में परमेश्वर के वचन से मार्गदर्शन लेना है।

जब भी आपके सामने अपने पुराने पापमय जीवन की बातों के अनुसार चलने के प्रलोभन आएं, परमेश्वर के आत्मा के आधीन हो जाएं, जो मसीह के प्रत्येक विश्वासी आंदर निवास करता है। वह आपको "मसीह में" चलने और बने रहने का मार्ग दिखाएगा और उसमें लेकर चलेगा। - सी. पी. हिया


जब आप नया जन्म लेते हैं तो स्वर्ग के नागरिक बन जाते हैं।

क्‍योंकि जीवन की आत्मा की व्यवस्था ने मसीह यीशु में मुझे पाप की, और मृत्यु की व्यवस्था से स्‍वतंत्र कर दिया। - रोमियों ८:२


बाइबल पाठ: रोमियों ८:१-१०

सो अब जो मसीह यीशु में हैं, उन पर दण्‍ड की आज्ञा नहीं: क्‍योंकि वे शरीर के अनुसार नहीं वरन आत्मा के अनुसार चलते हैं।
क्‍योंकि जीवन की आत्मा की व्यवस्था ने मसीह यीशु में मुझे पाप की, और मृत्यु की व्यवस्था से स्‍वतंत्र कर दिया।
क्‍योंकि जो काम व्यवस्था शरीर के कारण र्दुबल होकर न कर सकी, उस को परमेश्वर ने किया, अर्थात अपने ही पुत्र को पापमय शरीर की समानता में, और पाप के बलिदान होने के लिये भेजकर, शरीर में पाप पर दण्‍ड की आज्ञा दी।
इसलिये कि व्यवस्था की विधि हम में जो शरीर के अनुसार नहीं वरन आत्मा के अनुसार चलते हैं, पूरी की जाए।
क्‍योंकि शरीरिक व्यक्ति शरीर की बातों पर मन लगाते हैं, परन्‍तु आध्यात्मिक आत्मा की बातों पर मन लगाते हैं।
शरीर पर मन लगाना तो मृत्यु है, परन्‍तु आत्मा पर मन लगाना जीवन और शान्‍ति है।
क्‍योंकि शरीर पर मन लगाना तो परमेश्वर से बैर रखना है, क्‍योंकि न तो परमेश्वर की व्यवस्था के अधीन है, और न हो सकता है।
और जो शारीरिक दशा में है, वे परमेश्वर को प्रसन्न नहीं कर सकते।
परन्‍तु जब कि परमेश्वर का आत्मा तुम में बसता है, तो तुम शारीरिक दशा में नहीं, परन्‍तु आत्मिक दशा में हो। यदि किसी में मसीह का आत्मा नहीं तो वह उसका जन नहीं।
और यदि मसीह तुम में है, तो देह पाप के कारण मरी हुई है, परन्‍तु आत्मा धर्म के कारण जीवित है।

एक साल में बाइबल:
  • ज़क्कर्याह ९-१२
  • प्रकाशितवाक्य २०