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Saturday, January 19, 2013

गिर जाने पर


   लोकप्रीय और प्रसिद्ध व्यक्तियों के द्वारा कोई बुराई करने के समाचार अब इतने आम हो गए हैं कि चाहे हम उन्हें पढ़-सुन कर निराश हों किंतु आश्चर्यचकित नहीं होते। किंतु जब किसी गणमान्य व्यक्ति या किसी मित्र के किसी अनैतिक कार्य अथवा असफलता का हमें पता चलता है तो हमारी प्रतिक्रीया कैसी होनी चाहिए; हमें क्या करना चाहिए?

   सबसे अच्छा तरीका है हम अपने आप को जांचें। लगभग एक शताब्दी पहले, प्रसिद्ध बाइबल शिक्षक ओस्वॉल्ड चैम्बर्स ने लंडन में अपने बाइबल कॉलेज के छात्रों को कहा था: "सदैव इस बात से सचेत रहो कि जहां कोई एक जन गिर गया है, वहीं कोई अन्य भी गिर सकता है, तुम भी! असुरक्षित सामर्थ कमज़ोर पड़ जाने का दोगुना कारण होती है।"

   चैम्बर्स के यह वचन दूसरों के पापों को देखकर स्वयं अपनी कमज़ोरियों के प्रति सचेत होने की परमेश्वर के वचन बाइबल में दी गई प्रेरित पौलुस की शिक्षा पर आधारित हैं। कुरिन्थुस की मण्डली को लिखी अपनी पहली पत्री में इस्त्राएलियों के पूर्वजों की अनाज्ञाकारिता की समीक्षा करने के पश्चात (१ कुरिन्थियों १०:१-५) पौलुस ने अपने पाठकों को सचेत किया कि वे उन बातों से सीखें और उनके से पापों में पड़ने से बचे रहें (पद ६-११)। उसकी शिक्षा का केंद्र बिंदु बीते समय के पाप नहीं वर्तमान समय का अहंकार था जो पाप में पड़ने का कारण बन सकता था, इसलिए पौलुस ने लिखा, "इसलिये जो समझता है, कि मैं स्थिर हूं, वह चौकस रहे; कि कहीं गिर न पड़े" (१ कुरिन्थियों १०:१२)।

   किसी दूसरे के पाप या कमज़ोरी पर दोषारोपण तथा निराशा में सिर हिलाना तो आम बात है, लेकिन सबसे अधिक लाभदायक वह सिर है जो इस स्वीकृति में हिलता है कि "हाँ! मुझ से भी यही पाप हो सकता है" और फिर परमेश्वर के सामने झुक कर हाथ प्रार्थना में बांध कर कहता है, "प्रभु उस पर दया कर और मुझे भी अपनी दया से इस पाप में पड़ने से बचाए रख।" - डेविड मैक्कैसलैंड


विनाश से पहिले गर्व, और ठोकर खाने से पहिले घमण्ड होता है। - नीतिवचन १६:१८

इसलिये जो समझता है, कि मैं स्थिर हूं, वह चौकस रहे; कि कहीं गिर न पड़े। - १ कुरिन्थियों १०:१२

बाइबल पाठ: १ कुरिन्थियों १०:१-१३
1Cor 10:1  हे भाइयों, मैं नहीं चाहता, कि तुम इस बात से अज्ञात रहो, कि हमारे सब बाप दादे बादल के नीचे थे, और सब के सब समुद्र के बीच से पार हो गए।
1Cor 10:2  और सब ने बादल में, और समुद्र में, मूसा का बपितिस्मा लिया।
1Cor 10:3  और सब ने एक ही आत्मिक भोजन किया।
1Cor 10:4  और सब ने एक ही आत्मिक जल पीया, क्योंकि वे उस आत्मिक चट्टान से पीते थे, जो उन के साथ-साथ चलती थी; और वह चट्टान मसीह था।
1Cor 10:5  परन्तु परमेश्वर उन में के बहुतेरों से प्रसन्न न हुआ, इसलिये वे जंगल में ढेर हो गए।
1Cor 10:6 ये बातें हमारे लिये दृष्‍टान्‍त ठहरी, कि जैसे उन्होंने लालच किया, वैसे हम बुरी वस्‍तुओं का लालच न करें।
1Cor 10:7  और न तुम मूरत पूजने वाले बनों; जैसे कि उन में से कितने बन गए थे, जैसा लिखा है, कि लोग खाने-पीने बैठे, और खेलने-कूदने उठे।
1Cor 10:8  और न हम व्यभिचार करें; जैसा उन में से कितनों ने किया: एक दिन में तेईस हजार मर गये ।
1Cor 10:9  और न हम प्रभु को परखें; जैसा उन में से कितनों ने किया, और सांपों के द्वारा नाश किए गए।
1Cor 10:10  और न हम कुड़कुड़ाएं, जिस रीति से उन में से कितने कुड़कुड़ाए, और नाश करने वाले के द्वारा नाश किए गए।
1Cor 10:11 परन्तु यें सब बातें, जो उन पर पड़ी, दृष्‍टान्‍त की रीति पर भी: और वे हमारी चितावनी के लिये जो जगत के अन्‍तिम समय में रहते हैं लिखी गईं हैं।
1Cor 10:12  इसलिये जो समझता है, कि मैं स्थिर हूं, वह चौकस रहे; कि कहीं गिर न पड़े।
1Cor 10:13  तुम किसी ऐसी परीक्षा में नहीं पड़े, जो मनुष्य के सहने से बाहर है: और परमेश्वर सच्चा है: वह तुम्हें सामर्थ से बाहर परीक्षा में न पड़ने देगा, वरन परीक्षा के साथ निकास भी करेगा; कि तुम सह सको।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति ४६-४८ 
  • मत्ती १३:१-३०