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Sunday, February 24, 2013

वास्तविक महत्व


   कुछ वर्ष पहले मेरा एक मित्र जाने माने जलपोत टाईटैनिक के अवशेषों की प्रदर्शनी देखने गया। प्रदर्शनी देखने आए प्रत्येक दर्शक को टाईटैनिक के टिकिट की प्रतिलिपि दी गई और प्रत्येक टिकिट पर उस जलपोत पर यात्रा करने वाले वास्तविक यात्रियों अथवा कर्मचारियों में से एक का नाम लिखा था। दर्शक जब वहाँ टाईटैनिक से एकत्रित सभी विविध वस्तुओं को देख चुके तो अन्त में उन्हें एक सूची पटल के समक्ष ला कर खड़ा किया गया। उस सूची पटल पर टाईटैनिक में सवार प्रत्येक व्यक्ति - यात्री अथवा कर्मचारी, का नाम लिखा हुआ था साथ ही यह भी वह किस श्रेणी में यात्री था। दर्शक वहाँ से देख सकते थे कि वे किस के नाम का टिकिट ले कर प्रदर्शनी देख रहे थे। मेरे मित्र ने एक और बात पर भी ध्यान दिया कि उस सूची पटल पर उन नामों को विभाजित करने वाली एक लाल रेखा थी - रेखा के ऊपर उन के नाम लिखे थे जो ’बच’ गए और रेखा के नीचे उनके नाम जो ’जाते रहे’ अर्थात उस दुर्घटना में मर गए।

   इस बात की पृथ्वी पर के हमारे जीवन के साथ समानन्तर तुलना गहन है। जैसे टाईटैनिक जलपोत, जिसके लिए कहा जाता था कि वह डूब नहीं सकता, का एकाएक और अनेपक्षित अन्त हो गया, इस पृथ्वी और संसार के प्रत्येक जन का एकाएक और अनेपक्षित अन्त निर्धारित है। कोई नहीं जानता कि किसे कब और कैसे पृथ्वी से जाना होगा। महत्व इस बात का नहीं है कि इस जीवनकाल में हम किस श्रेणी के यात्री हैं, वास्तविक महत्व इस बात का है कि पार्थिव जीवन समाप्त होने पर हम कहाँ होंगे - बचे हुओं में या उनमें जो अनन्त विनाश में ’जाते रहे’!

   प्रभु यीशु ने कहा: "यदि मनुष्य सारे जगत को प्राप्त करे, और अपने प्राण की हानि उठाए, तो उसे क्या लाभ होगा? या मनुष्य अपने प्राण के बदले में क्या देगा?" (मत्ती १६:२६) - यह एक बहुत गंभीर तथा गहन विचारयोग्य प्रश्न है। संसार, संसार की वस्तुएं, संसार की उपलब्धियाँ, संसार का यश, दौलत और बातें - सब यहीं संसार में ही छूट जाएंगी, अगर कुछ साथ जाएगा तो वह है कि हमने पापों की क्षमा प्राप्त कर ली थी कि नहीं; और यही एक बात निर्धारित करेगी कि हम अनन्त काल कहाँ बिताएंगे - स्वर्ग में परमेश्वर के साथ अथवा परमेश्वर से सदा सदा के लिए पृथक होकर नर्क की भयंकर पीड़ा में।

   हो सकता है कि आपने प्रभु यीशु में पापों की क्षमा और उद्धार प्राप्त कर लिया हो, पर आपके साथ के अन्य लोगों का क्या हाल है? इधर-उधर की और नाशमान संसार कि व्यर्थ बातों की बजाए क्या आपने उनसे उनके अन्तिम गन्तव्य के बारे में बात की? क्या वे संसार के सभी लोगों के लिए परमेश्वर की ओर से प्रभु यीशु में सेंत-मेंत उपलब्ध पापों की क्षमा और उद्धार के बारे में जानते हैं? क्या आपने उन्हें इस बारे में बताया है?- जो स्टोवैल


अनन्त के संदर्भ में संसार की उपलब्धियाँ नहीं मसीह यीशु पर विश्वास महत्वपूर्ण है।

और उसने हमें आज्ञा दी, कि लोगों में प्रचार करो; और गवाही दो, कि यह वही है; जिसे परमेश्वर ने जीवतों और मरे हुओं का न्यायी ठहराया है। उस की सब भविष्यद्वक्ता गवाही देते हें, कि जो कोई उस पर विश्वास करेगा, उसको उसके नाम के द्वारा पापों की क्षमा मिलेगी। - प्रेरितों १०:४२-४३

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों ३:१-१६
Colossians 3:1 सो जब तुम मसीह के साथ जिलाए गए, तो स्‍वर्गीय वस्‍तुओं की खोज में रहो, जहां मसीह वर्तमान है और परमेश्वर के दाहिनी ओर बैठा है।
Colossians 3:2 पृथ्वी पर की नहीं परन्तु स्‍वर्गीय वस्‍तुओं पर ध्यान लगाओ।
Colossians 3:3 क्योंकि तुम तो मर गए, और तुम्हारा जीवन मसीह के साथ परमेश्वर में छिपा हुआ है।
Colossians 3:4 जब मसीह जो हमारा जीवन है, प्रगट होगा, तब तुम भी उसके साथ महिमा सहित प्रगट किए जाओगे।
Colossians 3:5 इसलिये अपने उन अंगो को मार डालो, जो पृथ्वी पर हैं, अर्थात व्यभिचार, अशुद्धता, दुष्‍कामना, बुरी लालसा और लोभ को जो मूर्ति पूजा के बराबर है।
Colossians 3:6 इन ही के कारण परमेश्वर का प्रकोप आज्ञा न मानने वालों पर पड़ता है।
Colossians 3:7 और तुम भी, जब इन बुराइयों में जीवन बिताते थे, तो इन्‍हीं के अनुसार चलते थे।
Colossians 3:8 पर अब तुम भी इन सब को अर्थात क्रोध, रोष, बैरभाव, निन्‍दा, और मुंह से गालियां बकना ये सब बातें छोड़ दो।
Colossians 3:9 एक दूसरे से झूठ मत बोलो क्योंकि तुम ने पुराने मनुष्यत्‍व को उसके कामों समेत उतार डाला है।
Colossians 3:10 और नए मनुष्यत्‍व को पहिन लिया है जो अपने सृजनहार के स्‍वरूप के अनुसार ज्ञान प्राप्त करने के लिये नया बनता जाता है।
Colossians 3:11 उस में न तो यूनानी रहा, न यहूदी, न खतना, न खतनारिहत, न जंगली, न स्‍कूती, न दास और न स्‍वतंत्र: केवल मसीह सब कुछ और सब में है।
Colossians 3:12 इसलिये परमेश्वर के चुने हुओं की नाईं जो पवित्र और प्रिय हैं, बड़ी करूणा, और भलाई, और दीनता, और नम्रता, और सहनशीलता धारण करो।
Colossians 3:13 और यदि किसी को किसी पर दोष देने को कोई कारण हो, तो एक दूसरे की सह लो, और एक दूसरे के अपराध क्षमा करो: जैसे प्रभु ने तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी करो।
Colossians 3:14 और इन सब के ऊपर प्रेम को जो सिद्धता का कटिबन्‍ध है बान्‍ध लो।
Colossians 3:15 और मसीह की शान्‍ति जिस के लिये तुम एक देह हो कर बुलाए भी गए हो, तुम्हारे हृदय में राज्य करे, और तुम धन्यवादी बने रहो।
Colossians 3:16 मसीह के वचन को अपने हृदय में अधिकाई से बसने दो; और सिद्ध ज्ञान सहित एक दूसरे को सिखाओ, और चिताओ, और अपने अपने मन में अनुग्रह के साथ परमेश्वर के लिये भजन और स्‍तुतिगान और आत्मिक गीत गाओ।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती ९-११ 
  • मरकुस ५:१-२०