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Monday, March 25, 2013

असफल और अविश्वासयोग्य?


   जब कभी मेरी पत्नि को कुछ ऐसा खाना बनाना होता है जिसका कोई भाग कोयले की आँच पर सेक कर या तंदूर में डाल कर पकाया जाय तो यह सेकना और तंदूर का काम करना मेरी जिम्मेवारी होती है। यद्यपि मैं कोई बहुत अच्छा बावर्ची नहीं हूँ लेकिन कोयलों पर या तंदूर में सिकते हुए भोजन से उठने वाली गन्ध मुझे बहुत अच्छी लगती है, और यह करते हुए कुछ बीती बातें भी स्मरण हो आती हैं। इसलिए परमेश्वर के वचन बाइबल में यूहन्ना २१:९ में "कोयले की आग" के उल्लेख ने मेरा ध्यान खींचा, और मैं सोचने लगा कि क्यों अविश्वासयोग्य रहे पतरस की प्रभु यीशु द्वारा पुनःबुलाहट के इस वृतांत में यूहन्ना ने इस आग का भी ज़िक्र किया?

   इस अध्याय के पहले तीन पद पढ़ने से यह स्पष्ट है कि पतरस मछली पकड़ने के अपने पुराने व्यवसाय की ओर फिर से लौट रहा था। इससे कुछ दिन पहले पतरस बड़े बड़े दावे करने के बावजूद भी प्रभु यीशु का तीन बार इन्कार कर चुका था, और तीनों बार यह कार्य आग पर हाथ सेकते हुए प्रभु के विरोधियों के साथ मिल-बैठकर पतरस द्वारा भी आग पर हाथ सेकने समय हुआ (यूहन्ना 18:17-18)। तो अब जब पतरस प्रभु का इन्कार कर लोगों की नज़रों से गिर चुका, तो फिर वापस अपने पुराने धंधे में लौट जाने में क्या बुरा हो सकता था?

   जब पतरस और उसके साथी रात भर झील में जाल डालते रहे, तो उनके जाने बिना किनारे पर प्रभु यीशु आया और वहाँ पर उनके लिए आग जलाई और नाश्ता तैयार कर दिया। क्या यह आग जलाना केवल संयोग था? मैं ऐसा नहीं सोचता। उस जलती हुई आग और प्रभु यीशु की वहाँ उपस्थिति ने अवश्य ही पतरस के मन में कुछ ही दिन पहले की वे शर्मनाक यादें जगा दी होंगी जब अपनी जान के जोखिम से बचने के लिए उसने एक और आग के पास प्रभु का तीन बार इन्कार किया था। लेकिन प्रभु यीशु ने उससे किसी दुर्भावना में होकर व्यवहार नहीं किया। उसने पतरस को प्रेम से बुलाया, उसे नाश्ता कराया और फिर से उसे अपने लिए सेवकाई करने की ज़िम्मेदारी सौंप दी।

   ज़रा विचार कीजिए, हमारी असफलताओं और अविश्वासयोग्यता के बावजूद भी प्रभु यीशु हमें त्यागता नहीं, ना ही हमें लज्जित करता है; वरन वह अपने बड़े प्रेम में होकर हमें फिर से खड़ा करता है, सामर्थ देता है, और फिर से अपनी सेवकाई के लिए तैयार करके उसके लिए भेजता है। यदि केवल सिद्ध और योग्य लोग उसके लिए कार्य कर सकते तो क्या प्रभु यीशु को कार्य करने के लिए संसार में से कोई मिलता? यह प्रभु यीशु की महिमा और महानता है कि वह संसार के पापी, पराजित और अयोग्य लोगों को ले लेता है, ऐसों को जो जिनके लिए वह जानता है कि वे उसके प्रति वफादार भी नहीं रह पाएंगे, लेकिन फिर भी उन्हें स्वर्गीय सामर्थ और योग्यता से भरकर स्वर्गीय सेवकाई के लिए संसार में भेजता है, उनकी कमज़ोरीयों और असफलताओं में उनके प्रति धैर्यवान और सहिषुण रहता है, उनके गिरने पर भी उन्हें दुत्कारता नहीं, त्यागता नहीं वरन फिर से प्रेम सहित उठाकर खड़ा करता है और फिर से तैयार कर के फिर से उसी सेवकाई के लिए भेजता है।

   जो अपना हाथ एक बार प्रभु के हाथों में दे देता है, वह सदा सदा के लिए प्रभु का जन हो जाता है; प्रभु उसे फिर कभी नहीं छोड़ता, कभी नहीं त्यागता, और सदा उससे प्रेम करता है, सदा उसकी भलाई ही करता है। क्या आपने प्रभु यीशु के प्रेम को स्वीकार कर के अपना हाथ प्रभु यीशु के हाथों में दे दिया है? - जो स्टोवैल


सिद्ध ना होना हमें परमेश्वर की सेवकाई के अयोग्य नहीं करता; यह केवल उसकी करुणा पर हमारी निर्भरता को और दृढ़ कर देता है।

मनुष्य की गति यहोवा की ओर से दृढ़ होती है, और उसके चलन से वह प्रसन्न रहता है; चाहे वह गिरे तौभी पड़ा न रह जाएगा, क्योंकि यहोवा उसका हाथ थामे रहता है। - भजन 37:23-24

बाइबल पाठ: यूहन्ना 21:3-17
John 21:3 शमौन पतरस ने उन से कहा, मैं मछली पकड़ने को जाता हूं: उन्होंने उस से कहा, हम भी तेरे साथ चलते हैं: सो वे निकलकर नाव पर चढ़े, परन्तु उस रात कुछ न पकड़ा।
John 21:4 भोर होते ही यीशु किनारे पर खड़ा हुआ; तौभी चेलों ने न पहचाना कि यह यीशु है।