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Wednesday, October 9, 2013

लड़ाई की कीमत

   प्रथम विश्वयुद्ध को, उसके होने के समय, "सभी युद्धों का अन्त कर देने वाला युद्ध" कहा गया था। उस युद्ध पर बने एक लघुचलचित्र में बताया गया कि यदि उस युद्ध में काम आए ब्रिटैन के नागरिकों को चार-चार की पंक्ति में करके लंडन में बने उस युद्ध के स्मारक के सामने से निकलने को कहा जाता तो उस स्मारक के सामने से सभी लोगों को निकल पाने में 7 दिन लग जाते। इस स्तब्ध कर देने वाले तथ्य ने मुझे युद्ध की भयानक कीमत का एहसास दिलाया। यद्यपि युद्ध की कीमत आंकने में वित्तीय खर्चे, संपत्ति का विनाश और अर्थव्यवस्था का नाश सम्मिलित होते हैं, लेकिन कुछ भी युद्ध से होने वाली मानवीय क्षति और उसके दूरगामी प्रभावों का आंकलन नहीं कर सकता। सैनिकों तथा नागरिकों, दोनों को ही यह भारी कीमत चुकानी पड़ती है, और यह कीमत बचे हुए लोगों को होने वाले दुख और पीड़ा से और कई गुणा बढ़ जाती है। लड़ाई वासत्व में एक बहुत बड़ी कीमत मांगती है।

   यह बात केवल देशों की आपसी लड़ाईयों तक ही सीमित नहीं है। जब मसीही विश्वासी आपस में लड़ते हैं, तो इसकी भी एक बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है। परमेश्वर के वचन बाइबल में याकूब ने अपनी पत्री में लिखा: "तुम में लड़ाइयां और झगड़े कहां से आ गए? क्या उन सुख-विलासों से नहीं जो तुम्हारे अंगों में लड़ते-भिड़ते हैं?" (याकूब 4:1)। अपनी स्वार्थसिद्धी के अन्तर्गत हम अनेक बार आपस में लड़ने-भिड़ने लगते हैं, बिना इस बात का ध्यान करे कि इस लड़ाई की कीमत हमारे परस्पर संबंधों तथा मसीह यीशु के लिए हमारी गवाही पर बहुत भारी पड़ेगी। संभवतः इसीलिए याकूब ने यह प्रश्न उठाने से पहले मसीही विश्वासियों के सामने एक चुनौती रखी: "और मिलाप कराने वालों के लिये धामिर्कता का फल मेल-मिलाप के साथ बोया जाता है" (याकूब 3:18)।

   यदि हम मसीही विश्वासियों को संसार के सामने शांति के राजकुमार प्रभु यीशु के गवाह बनना है, तो आपसी रंजिश, विवाद, लड़ाई-झगड़े आदि छोड़कर उस प्रेम को अपने जीवनों से दिखाना होगा जो परमेश्वर ने हमसे दिखाया है और वह सहनशीलता प्रदर्शित करनी होगी जो मसीह यीशु ने हमारे प्रति रखी है। अन्यथा थोड़ी सी प्रतीत होने वाली आपसी लड़ाई के लिए हमें एक बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। - बिल क्राउडर


जब मसीही विश्वासी आपस में शांति से रहेंगे तब संसार शांति के राजकुमार को स्पष्टता से देख और जान पाएगा।

तुम में लड़ाइयां और झगड़े कहां से आ गए? क्या उन सुख-विलासों से नहीं जो तुम्हारे अंगों में लड़ते-भिड़ते हैं? - याकूब 4:1-10

बाइबल पाठ: याकूब 4:1-10
James 4:1 तुम में लड़ाइयां और झगड़े कहां से आ गए? क्या उन सुख-विलासों से नहीं जो तुम्हारे अंगों में लड़ते-भिड़ते हैं? 
James 4:2 तुम लालसा रखते हो, और तुम्हें मिलता नहीं; तुम हत्या और डाह करते हो, ओर कुछ प्राप्त नहीं कर सकते; तुम झगड़ते और लड़ते हो; तुम्हें इसलिये नहीं मिलता, कि मांगते नहीं। 
James 4:3 तुम मांगते हो और पाते नहीं, इसलिये कि बुरी इच्छा से मांगते हो, ताकि अपने भोग विलास में उड़ा दो। 
James 4:4 हे व्यभिचारिणयों, क्या तुम नहीं जानतीं, कि संसार से मित्रता करनी परमेश्वर से बैर करना है सो जो कोई संसार का मित्र होना चाहता है, वह अपने आप को परमेश्वर का बैरी बनाता है। 
James 4:5 क्या तुम यह समझते हो, कि पवित्र शास्त्र व्यर्थ कहता है जिस आत्मा को उसने हमारे भीतर बसाया है, क्या वह ऐसी लालसा करता है, जिस का प्रतिफल डाह हो? 
James 4:6 वह तो और भी अनुग्रह देता है; इस कारण यह लिखा है, कि परमेश्वर अभिमानियों से विरोध करता है, पर दीनों पर अनुग्रह करता है। 
James 4:7 इसलिये परमेश्वर के आधीन हो जाओ; और शैतान का साम्हना करो, तो वह तुम्हारे पास से भाग निकलेगा। 
James 4:8 परमेश्वर के निकट आओ, तो वह भी तुम्हारे निकट आएगा: हे पापियों, अपने हाथ शुद्ध करो; और हे दुचित्ते लोगों अपने हृदय को पवित्र करो। 
James 4:9 दुखी होओ, और शोक करा, और रोओ: तुम्हारी हंसी शोक में और तुम्हारा आनन्द उदासी में बदल जाए। 
James 4:10 प्रभु के साम्हने दीन बनो, तो वह तुम्हें शिरोमणि बनाएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 32-33 
  • कुलुस्सियों 1