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Wednesday, October 29, 2014

अनुकंपा


   एलिज़ाबेथ की कहानी मार्मिक थी। उसे अपने स्थान मैसाच्यूसेट्स में एक बहुत अपमानजनक अनुभव से होकर निकलना पड़ा, और उस बात की अन्य शर्मिन्दगी से बचने के लिए वह बस में बैठ कर न्यूजर्सी को चल दी। उस अनुभव की कटुताके कारण यात्रा में वह बेकाबू रोती ही रही, उसे पता भी नहीं चला कब बस एक स्थान पर थोड़ी देर के लिए रुक गई है। बस के यात्री नीचे उतरने लगे, उनमें से एक यात्री ने उसे रोते हुए देखा और लौट कर उसके पास आया और एलिज़ाबेथ को परमेश्वर के वचन बाइबल की अपनी प्रति पकड़ाई और कहा कि तुम्हें इसकी आवश्यकता है। एलिज़ाबेथ का वह अजनबी सह-यात्री बिलकुल सही था; ना केवल एलिज़ाबेथ को बाइबल की आवश्यकता थी वरन उसे बाइबल के प्रभु, यीशु मसीह की भी आवश्यकता थी। उस अजनबी द्वारा मसीही अनुकंपा में एक उपहार देने के छोटे से कार्य के कारण एलिज़ाबेथ ने प्रभु यीशु मसीह को जाना और उसे अपने उद्धारकर्ता के रूप में ग्रहण कर लिया।

   प्रभु यीशु मसीह हमारे लिए अनुकंपा का सजीव उदाहरण हैं। मत्ती के 9 अध्याय में उसके विषय में हम पढ़ते हैं कि "जब उसने भीड़ को देखा तो उसको लोगों पर तरस आया, क्योंकि वे उन भेड़ों की नाईं जिनका कोई रखवाला न हो, व्याकुल और भटके हुए से थे" (मत्ती 9:36)। हमारे प्रभु ने ना केवल लोगों के टूटे मन, दुख और पीड़ा को देखा, वरन उन्होंने अपने अनुयायियों को उभारा के वे उन लोगों के लिए परमेश्वर से प्रार्थना करें कि वह ऐसों को उन के मध्य भेजे जो नाश की ओर जा रहे इस संसार के दुखी लोगों की आवश्यकताओं और समस्याओं के समाधान के लिए काम आ सकें (पद 38)।

   आज भी संसार को ऐसे कार्यकर्ताओं की आवश्यकता है जो प्रभु यीशु की अनुकंपा को दुखी संसार में दिखा सकें। हम मसीही विश्वासियों का यह कर्तव्य है कि अपने प्रभु के मार्गदर्शन और निर्देशों का पालन करें और पाप के दुख को झेल रहे संसार के लोगों को प्रभु यीशु में विश्वास द्वारा पापों से मुक्ति, चिरस्थाई आनन्द एवं अनन्त जीवन का मार्ग दिखाएं, उन्हें प्रभु यीशु की अनुकंपा का अनुभव कराएं। - बिल क्राउडर


आवश्यकता है - दुख और निराशा में पड़े संसार को मसीह यीशु में आनन्द और आशा पहुँचाने वाले मसीही विश्वासियों की।

क्योंकि गृहदेवता अनर्थ बात कहते और भावी कहने वाले झूठा दर्शन देखते और झूठे स्वपन सुनाते, और व्यर्थ शान्ति देते हैं। इस कारण लोग भेड़-बकरियों की नाईं भटक गए; और चरवाहे न होने के कारण दुर्दशा में पड़े हैं। - ज़कर्याह 10:2

बाइबल पाठ: मत्ती 9:27-38
Matthew 9:27 जब यीशु वहां से आगे बढ़ा, तो दो अन्धे उसके पीछे यह पुकारते हुए चले, कि हे दाऊद की सन्तान, हम पर दया कर। 
Matthew 9:28 जब वह घर में पहुंचा, तो वे अन्धे उस के पास आए; और यीशु ने उन से कहा; क्या तुम्हें विश्वास है, कि मैं यह कर सकता हूं उन्होंने उस से कहा; हां प्रभु। 
Matthew 9:29 तब उसने उन की आंखे छूकर कहा, तुम्हारे विश्वास के अनुसार तुम्हारे लिये हो। 
Matthew 9:30 और उन की आंखे खुल गईं और यीशु ने उन्हें चिताकर कहा; सावधान, कोई इस बात को न जाने। 
Matthew 9:31 पर उन्होंने निकलकर सारे देश में उसका यश फैला दिया।
Matthew 9:32 जब वे बाहर जा रहे थे, तो देखो, लोग एक गूंगे को जिस में दुष्टात्मा थी उस के पास लाए। 
Matthew 9:33 और जब दुष्टात्मा निकाल दी गई, तो गूंगा बोलने लगा; और भीड़ ने अचम्भा कर के कहा कि इस्राएल में ऐसा कभी नहीं देखा गया। 
Matthew 9:34 परन्तु फरीसियों ने कहा, यह तो दुष्टात्माओं के सरदार की सहायता से दुष्टात्माओं को निकालता है।
Matthew 9:35 और यीशु सब नगरों और गांवों में फिरता रहा और उन की सभाओं में उपदेश करता, और राज्य का सुसमाचार प्रचार करता, और हर प्रकार की बीमारी और दुर्बलता को दूर करता रहा। 
Matthew 9:36 जब उसने भीड़ को देखा तो उसको लोगों पर तरस आया, क्योंकि वे उन भेड़ों की नाईं जिनका कोई रखवाला न हो, व्याकुल और भटके हुए से थे। 
Matthew 9:37 तब उसने अपने चेलों से कहा, पक्के खेत तो बहुत हैं पर मजदूर थोड़े हैं। 
Matthew 9:38 इसलिये खेत के स्‍वामी से बिनती करो कि वह अपने खेत काटने के लिये मजदूर भेज दे।

एक साल में बाइबल: 
  • लूका 10-13