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Tuesday, March 31, 2015

खुला एवं स्पष्ट


   वॉल स्ट्रीट जर्नल अखबार में छपे एक लेख में मिस्सी सलिवन ने ध्यान दिलाया कि विभिन्न उत्पादों के साथ आने वाले उपभोक्ता अनुबन्ध, वॉरण्टी, चेतावनियाँ आदि इतने छोटे अक्षरों में लिखे होते हैं कि वे प्रायः पढ़े नहीं जा सकते। उन उत्पादों के बनाने वालों द्वारा इन बातों को अस्पष्ट जान-बूझ कर किया जाता है, जिससे लोग उन बातों को पढ़ और समझ ना सकें। इसी कारण अधिकांशतः लोग उन अनुबन्धों पर हस्ताक्षर करके उन्हें स्वीकार कर लेने से पहले उन्हें पढ़ने का कष्ट ही नहीं करते। एक विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ने इस संदर्भ में अपने नए स्मार्ट-फोन के साथ आए 32 पन्नों के अनुबन्ध को दिखाते हुए उस फोन को बनाने वाले कंपनी के विषय कहा, "वे यह चाहते ही नहीं कि आप इसे पढ़ और समझ सकें।"

   इसकी तुलना में हमारा प्रभु परमेश्वर सदैव इस प्रयास में रहता है कि वह अपने लोगों के साथ साफ और स्वीकारीय रीति से संवाद तथा संपर्क करे; उसकी सब बातें बिलकुल खुली और स्पष्ट होती हैं, किसी को उलझन में डालने या उससे छल-कपट करने की, उन्हें टेढ़ी-मेढ़ी या दोहरे अर्थ वाली बातों में फंसाने की उसकी कतई मनशा नहीं है। इस्त्राएलियों के वाचा किए हुए कनान देश से प्रवेश करने से ठीक पहले मूसा ने उन लोगों से परमेश्वर के वचन और निर्देशों के सम्बंध में कहा: "देखो, यह जो आज्ञा मैं आज तुझे सुनाता हूं, वह न तो तेरे लिये अनोखी, और न दूर है। मैं आज आकाश और पृथ्वी दोनों को तुम्हारे साम्हने इस बात की साक्षी बनाता हूं, कि मैं ने जीवन और मरण, आशीष और शाप को तुम्हारे आगे रखा है; इसलिये तू जीवन ही को अपना ले, कि तू और तेरा वंश दोनों जीवित रहें" (व्यवस्थाविवरण 30:11, 19)।

   प्रभु परमेश्वर चाहता है कि हम उसके उद्देश्यों एवं योजनाओं को खुले तौर पर जाने, उन्हें स्पष्ट रीति से समझें जिससे किसी ज़ोर-ज़बर्दस्ती के अन्तर्गत अथवा अन्ध-विश्वास में नहीं वरन पूरी तरह से जाँच-परख कर और सन्तुष्ट होकर ही हम स्वेच्छा से उसे स्वीकार करने तथा उसके साथ चलने का निर्णय लें; तब ही उसके प्रति हमारा प्रेम, विश्वास और आज्ञाकारिता सही तथा सार्थक रहने पाएंगी और इससे हमारा जीवन सफल और दीर्घायु वाला बनने पाएगा (व्यवस्थाविवरण 30:20)। - डेविड मैक्कैसलैंड


परमेश्वर की हमारे साथ बातचीत में कहीं कुछ छुपा या अस्पष्ट नहीं है।

परखकर देखो कि यहोवा कैसा भला है! क्या ही धन्य है वह पुरूष जो उसकी शरण लेता है। - भजन 34:8

बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण 30:11-20
Deuteronomy 30:11 देखो, यह जो आज्ञा मैं आज तुझे सुनाता हूं, वह न तो तेरे लिये अनोखी, और न दूर है। 
Deuteronomy 30:12 और न तो यह आकाश में है, कि तू कहे, कि कौन हमारे लिये आकाश में चढ़कर उसे हमारे पास ले आए, और हम को सुनाए कि हम उसे मानें? 
Deuteronomy 30:13 और न यह समुद्र पार है, कि तू कहे, कौन हमारे लिये समुद्र पार जाए, और उसे हमारे पास ले आए, और हम को सुनाए कि हम उसे मानें? 
Deuteronomy 30:14 परन्तु यह वचन तेरे बहुत निकट, वरन तेरे मुंह और मन ही में है ताकि तू इस पर चले। 
Deuteronomy 30:15 सुन, आज मैं ने तुझ को जीवन और मरण, हानि और लाभ दिखाया है। 
Deuteronomy 30:16 क्योंकि मैं आज तुझे आज्ञा देता हूं, कि अपने परमेश्वर यहोवा से प्रेम करना, और उसके मार्गों पर चलना, और उसकी आज्ञाओं, विधियों, और नियमों को मानना, जिस से तू जीवित रहे, और बढ़ता जाए, और तेरा परमेश्वर यहोवा उस देश में जिसका अधिकारी होने को तू जा रहा है, तुझे आशीष दे। 
Deuteronomy 30:17 परन्तु यदि तेरा मन भटक जाए, और तू न सुने, और भटक कर पराए देवताओं को दण्डवत करे और उनकी उपासना करने लगे, 
Deuteronomy 30:18 तो मैं तुम्हें आज यह चितौनी दिए देता हूं कि तुम नि:सन्देह नष्ट हो जाओगे; और जिस देश का अधिकारी होने के लिये तू यरदन पार जा रहा है, उस देश में तुम बहुत दिनों के लिये रहने न पाओगे। 
Deuteronomy 30:19 मैं आज आकाश और पृथ्वी दोनों को तुम्हारे साम्हने इस बात की साक्षी बनाता हूं, कि मैं ने जीवन और मरण, आशीष और शाप को तुम्हारे आगे रखा है; इसलिये तू जीवन ही को अपना ले, कि तू और तेरा वंश दोनों जीवित रहें; 
Deuteronomy 30:20 इसलिये अपने परमेश्वर यहोवा से प्रेम करो, और उसकी बात मानों, और उस से लिपटे रहो; क्योंकि तेरा जीवन और दीर्घ जीवन यही है, और ऐसा करने से जिस देश को यहोवा ने इब्राहीम, इसहाक, और याकूब, तेरे पूर्वजों को देने की शपथ खाई थी उस देश में तू बसा रहेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों 11-12
  • लूका 6:1-26