बाइबल और मसीही विश्वास सम्बन्धी अपने प्रश्नों के लिए यहाँ क्लिक करें:

GotQuestions?org

Tuesday, October 11, 2016

परिवर्तन


   शिक्षक तथा सर्वाधिक बिकने वाली पुस्तकों के एक लेखक टोनी वैगनर विघटन द्वारा परिवर्तन में दृढ़ विश्वास रखते हैं, जिससे संसार के सोचने और कार्य करने की प्रणाली में परिवर्तन आ सके। अपनी पुस्तक, Creating Innovators: The Making of Young People Who Will Change the World, में वे कहते हैं कि "मनुष्य के प्रत्येक प्रयास के द्वारा परिवर्तन आता है", और, "यदि सही वातावरण और अवसर मिले तो अधिकांश लोग और अधिक रचनात्मक तथा परिवर्तनकारी हो सकते हैं।"

   प्रेरित पौलुस प्रथम शताब्दी में परिवर्तन लाने वाला एक व्यक्ति था जो प्रभु यीशु में लाए गए विश्वास द्वारा जीवन में आने वाले आधारभूत परिवर्तन का प्रचार करता हुआ एशिया माइनर में यात्रा करता रहा। रोम में रहने वाले मसीही विश्वासियों को पौलुस ने लिखा, कि वे अपने आप को पूर्णतः परमेश्वर को समर्पित कर दें, "और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो" (रोमियों 12:2)। पौलुस ने उन्हें सिखाया कि कैसे एक स्वार्थी, लालची और छीन कर ले लेने वाले संसार में वे मसीह यीशु पर केन्द्रित और औरों को देने वाला जीवन व्यतीत कर सकते हैं।

   पौलुस के समय से आज संसार बहुत भिन्न हो गया है, लेकिन संसार के लोगों के अन्दर प्रेम, क्षमा और परिवर्तन की लालसा वैसी ही है। संसार के इतिहास का महानतम परिवर्तनकारी प्रभु यीशु यही सब देता है और उसका संसार के सभी लोगों को खुला निमंत्रण है कि वे उसके पास आएं, और उस पर लाए गए विश्वास द्वारा एक नए और भिन्न परिवर्तित जीवन का अनुभव करें। - डेविड मैक्कैसलैंड


जैसे भी हम हैं, परमेश्वर हमें वैसा ही स्वीकार तो कर लेता है, 
परन्तु फिर वैसा रहने नहीं देता वरन अपनी समानता में ले आता है।

परन्तु जब हम सब के उघाड़े चेहरे से प्रभु का प्रताप इस प्रकार प्रगट होता है, जिस प्रकार दर्पण में, तो प्रभु के द्वारा जो आत्मा है, हम उसी तेजस्‍वी रूप में अंश अंश कर के बदलते जाते हैं। - 2 कुरिन्थियों 3:18

बाइबल पाठ: रोमियों 12:1-8
Romans 12:1 इसलिये हे भाइयों, मैं तुम से परमेश्वर की दया स्मरण दिला कर बिनती करता हूं, कि अपने शरीरों को जीवित, और पवित्र, और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान कर के चढ़ाओ: यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है। 
Romans 12:2 और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो। 
Romans 12:3 क्योंकि मैं उस अनुग्रह के कारण जो मुझ को मिला है, तुम में से हर एक से कहता हूं, कि जैसा समझना चाहिए, उस से बढ़कर कोई भी अपने आप को न समझे पर जैसा परमेश्वर ने हर एक को परिमाण के अनुसार बांट दिया है, वैसा ही सुबुद्धि के साथ अपने को समझे। 
Romans 12:4 क्योंकि जैसे हमारी एक देह में बहुत से अंग हैं, और सब अंगों का एक ही सा काम नहीं। 
Romans 12:5 वैसा ही हम जो बहुत हैं, मसीह में एक देह हो कर आपस में एक दूसरे के अंग हैं। 
Romans 12:6 और जब कि उस अनुग्रह के अनुसार जो हमें दिया गया है, हमें भिन्न भिन्न वरदान मिले हैं, तो जिस को भविष्यद्वाणी का दान मिला हो, वह विश्वास के परिमाण के अनुसार भविष्यद्वाणी करे। 
Romans 12:7 यदि सेवा करने का दान मिला हो, तो सेवा में लगा रहे, यदि कोई सिखाने वाला हो, तो सिखाने में लगा रहे। 
Romans 12:8 जो उपदेशक हो, वह उपदेश देने में लगा रहे; दान देने वाला उदारता से दे, जो अगुआई करे, वह उत्साह से करे, जो दया करे, वह हर्ष से करे।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 37-38
  • कुलुस्सियों 3