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Tuesday, April 11, 2017

मैं क्यों?


   ब्रिटिश पास्टर जोसफ पारकर से पूछा गया, "प्रभु यीशु ने यहूदा को अपना शिष्य होने के लिए क्यों चुना?" वे कुछ समय तक इसके बारे में बहुत गंभीरता से विचार करते रहे परन्तु उन्हें कोई उत्तर नहीं मिला। उन्होंने कहा, इस प्रश्न पर विचार करने के कारण वे इससे भी गंभीर एक अन्य प्रश्न पर जाकर बारंबार अटक जाते थे: "प्रभु यीशु ने मुझे क्यों चुना?"

   यह वह प्रश्न है जिसे संसार भर में अनेकों लोगों द्वारा सदियों से पूछा जा रहा है। जब लोगों को अपने पाप और दोष के बारे में बोध और उस बोध से गहरे दुःख का अनुभव होता है, वे प्रभु यीशु से उन पर दया करने को पुकारते हैं। और बड़े आनन्द से भरी अत्यंत अचरज की बात यह है कि सच्चे मन से निकली दया की इस पुकार के साथ ही वे तुरंत ही इस बात का अनुभव भी करते हैं कि परमेश्वर ने उनकी विनती सुन ली है, वह उनसे प्रेम करता है और प्रभु यीशु में उन्हें क्षमा दान देकर अपने साथ अपने परिवार का भाग बना लेता है। वे प्रभु यीशु द्वारा कलवरी के क्रूस पर दिए गए अपने बलिदान के महत्व, समझ से बाहर प्रभु के महान प्रेम तथा उससे भेंट के रूप में मिलने वाली पापों की क्षमा के यथार्थ को पहचान लेते हैं; यह सब उनके लिए जीवन तथा संसार का सबसे बड़ा और उत्तम सत्य बन जाता है। इसे समझाया नहीं जा सकता है, इसे केवल व्यक्तिगत रीति से अनुभव करके ही समझा और स्वीकार किया जा सकता है।

   मैंने भी अनेकों बार यह प्रश्न किया है, "मैं क्यों?" मैं अपने जीवन के काले और घिनौने पाप जानता हूँ; मैं अपने उस निकृष्ट हृदय को भी जानता हूँ जहाँ से ये सभी कुकृत्य निकलते हैं; परन्तु अत्यंत अचरज की बात तो यह है कि परमेश्वर, जो मुझे और मेरे हृदय की प्रत्येक बात को मुझसे भी अधिक भली-भांति तथा गहराई से जानता है, फिर भी मुझसे प्रेम करता है (रोमियों 5:6-8)। मैं उसके प्रेम और क्षमा के सर्वथा अयोग्य था, निकम्मा और असहाय था, परमेश्वर के विमुख और उससे दूर था, परन्तु फिर भी उसने मेरे लिए अपनी बाहें और हृदय को खोला और मुझे अपने प्रेम भरे आलिंगन में भर लिया।

   मैं जैसे उसकी प्रेम भरी धीमी आवाज़ अपने अन्दर सुन रहा था, "जितना प्रेम तू अपने पापों से करता है, उससे भी कहीं अधिक प्रेम मैं तुझ से करता हूँ।" यह सच है! मैं अपने पापों को बहुत चाहता था, उन्हें बचा कर रखता था, अपनी उन लालसाओं में कुछ भी गलत होने से दृढ़ता से इनकार करता था, उनमें लिप्त रहता था। परन्तु प्रभु ने फिर भी मुझ से इतना प्रेम किया कि मुझे ढूँढ़ता हुआ मेरे निकट आया, मुझे बुलाया, मेरे पापों को क्षमा किया और उनके बंधनों से मुझे सदा के लिए पूर्ण्तः स्वतंत्र कर दिया।

   "मैं क्यों?" यह प्रश्न मेरी समझ से बाहर है; मेरे पास इसका कोई उत्तर नहीं है; लेकिन यह मैं अपने व्यक्तिगत अनुभव से भली-भांति जानता हूँ कि प्रभु ने मुझ से मेरे पापों के बावजूद प्रेम किया, आज भी करता है और अनन्त काल तक करता ही रहेगा। ना केवल मुझ से वरन आपसे और संसार के प्रत्येक व्यक्ति से प्रभु इतना ही प्रेम करता है, और इतनी ही लालसा से अपने निकट अपने परिवार में लाना चाहता है; हिचकिचाएं नहीं, बस उसके निमंत्रण और क्षमा को स्वीकार कर लें। - डेव एग्नर


परमेश्वर हम से जो और जैसे हम हैं उसके कारण प्रेम नहीं करता है, 
वरन जो और जैसा वह है उसके कारण प्रेम करता है।

क्योंकि जब हम निर्बल ही थे, तो मसीह ठीक समय पर भक्तिहीनों के लिये मरा। किसी धर्मी जन के लिये कोई मरे, यह तो र्दुलभ है, परन्तु क्या जाने किसी भले मनुष्य के लिये कोई मरने का भी हियाव करे। परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा। - रोमियों 5:6-8

बाइबल पाठ: मरकुस 14:10-21
Mark 14:10 तब यहूदा इसकिरयोती जो बारह में से एक था, महायाजकों के पास गया, कि उसे उन के हाथ पकड़वा दे। 
Mark 14:11 वे यह सुनकर आनन्‍दित हुए, और उसको रूपये देना स्‍वीकार किया, और यह अवसर ढूंढ़ने लगा कि उसे किसी प्रकार पकड़वा दे।
Mark 14:12 अखमीरी रोटी के पर्व्‍व के पहिले दिन, जिस में वे फसह का बलिदान करते थे, उसके चेलों ने उस से पूछा, तू कहां चाहता है, कि हम जा कर तेरे लिये फसह खाने की तैयारी करें? 
Mark 14:13 उसने अपने चेलों में से दो को यह कहकर भेजा, कि नगर में जाओ, और एक मनुष्य जल का घड़ा उठाए, हुए तुम्हें मिलेगा, उसके पीछे हो लेना। 
Mark 14:14 और वह जिस घर में जाए उस घर के स्‍वामी से कहना; गुरू कहता है, कि मेरी पाहुनशाला जिस में मैं अपने चेलों के साथ फसह खाऊं कहां है? 
Mark 14:15 वह तुम्हें एक सजी सजाई, और तैयार की हुई बड़ी अटारी दिखा देगा, वहां हमारे लिये तैयारी करो।
Mark 14:16 सो चेले निकलकर नगर में आये और जैसा उसने उन से कहा था, वैसा ही पाया, और फसह तैयार किया।
Mark 14:17 जब सांझ हुई, तो वह बारहों के साथ आया। 
Mark 14:18 और जब वे बैठे भोजन कर रहे थे, तो यीशु ने कहा; मैं तुम से सच कहता हूं, कि तुम में से एक, जो मेरे साथ भोजन कर रहा है, मुझे पकड़वाएगा। 
Mark 14:19 उन पर उदासी छा गई और वे एक एक कर के उस से कहने लगे; क्या वह मैं हूं? 
Mark 14:20 उसने उन से कहा, वह बारहों में से एक है, जो मेरे साथ थाली में हाथ डालता है। 
Mark 14:21 क्योंकि मनुष्य का पुत्र तो, जैसा उसके विषय में लिखा है, जाता ही है; परन्तु उस मनुष्य पर हाय जिस के द्वारा मनुष्य का पुत्र पकड़वाया जाता है! यदि उस मनुष्य का जन्म ही न होता, तो उसके लिये भला होता।
एक साल में बाइबल: 1 शमूएल 17-18; लूका 11:1-28