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Wednesday, May 11, 2011

प्रभावी प्रार्थना

बालक जेसन द्वारा हुई गलती के लिए उसकी माँ ने उसे उसके कमरे में भेज दिया। कुछ देर अके बाद जेसन कमरे से बाहर माँ के पास वापस आ गया और बोला, "मैं अपने किए के बारे में विचार कर रहा था, और फिर मैंने प्रार्थना करी।" उसकी माँ को उसके इस व्यवहार से बहुत प्रसन्नता हुई, और उसे और प्रोत्साहित करने के लिए माँ ने जेसन से कहा, "यह तो बहुत अच्छी बात है। यदि तुम परमेश्वर से मांगोगे कि तुम्हें अच्छा बनाए, तो अवश्य ही वह ऐसा करेगा।" जेसन ने उत्तर दिया, "लेकिन मैंने प्रार्थना अपने अच्छे बनने के लिए थोड़े ही करी; मैंने परमेश्वर से मांगा कि वह मुझे सहने में तुम्हारी सहायता करे!"

जेसन की इस प्रार्थना के समान प्रार्थनाएं सामानयता करी जाती हैं। अधिकांशतः लोग यह स्वीकार करना नहीं चाहते कि वे किसी समस्या का कारण हो सकते हैं, इसलिए लोग अक्सर यही प्रार्थना करते हैं कि परमेश्वर संबंधित लोगों और परिस्थितियों को बदल दे। ऐसी प्रार्थनाएं समस्या के मुख्य कारण - हमारे अपने मन की दशा, को नज़रंदाज़ करके अन्य गैरज़रूरी बातों पर ध्यान केंद्रित करती हैं। अपनी परिस्थितियों के लिए प्रार्थना करना तब ही प्रभावी हो सकता है जब हम पहले अपने मन की दशा को ठीक से आँक कर उसे सही कर लें।

दाउद की प्रार्थना के भजन, भजन ५१ में, दाउद ने सर्वप्रथम अपने लिए परमेश्वर से दया की याचना करी (पद १)। फिर उसने अपने पाप का अंगीकार किया (पद ३), तब उसने परमेश्वर से स्वच्छ हृदय मांगा और अपने उद्धार के आनन्द की बहाली की प्रार्थना करी (पद १०,१२)। व्यभिचार और हत्या के अपने घिनौने पापों को मान लेने के लिए दाउद ने कोई बहाने नहीं बनाए।

परमेश्वर चाहता है कि जब हम उससे प्रार्थना करें तो हम पूरी ईमानदारी के साथ उसके पास आएं। इसके लिए हमें संघर्ष करना पड़ सकता है, क्योंकि ऐसी ईमानदारी से किया हुआ स्वयं विशलेषण और फिर उसका अंगीकार कठिन और दुखदायी होता है, लेकिन प्रभावी प्रार्थना की यही एकमात्र विधि है। - डेनिस डी हॉन


परमेश्वर ऐसों को भी क्षमा करने को सदा तैयार रहता है जो इस क्षमा के कदापि योग्य नहीं हैं।

मैं तो अपने अपराधों को जानता हूं, और मेरा पाप निरन्तर मेरी दृष्टि में रहता है। - भजन ५१:३


बाइबल पाठ: भजन ५१:१-१७

Psa 51:1 हे परमेश्वर, अपनी करूणा के अनुसार मुझ पर अनुग्रह कर; अपनी बड़ी दया के अनुसार मेरे अपराधों को मिटा दे।
Psa 51:2 मुझे भलीं भांति धोकर मेरा अधर्म दूर कर, और मेरा पाप छुड़ाकर मुझे शुद्ध कर!
Psa 51:3 मैं तो अपने अपराधों को जानता हूं, और मेरा पाप निरन्तर मेरी दृष्टि में रहता है।
Psa 51:4 मैं ने केवल तेरे ही विरूद्ध पाप किया, और जो तेरी दृष्टि में बुरा है, वही किया है, ताकि तू बोलने में धर्मी और न्याय करने में निष्कलंक ठहरे।
Psa 51:5 देख, मैं अधर्म के साथ उत्पन्न हुआ, और पाप के साथ अपनी माता के गर्भ में पड़ा।
Psa 51:6 देख, तू हृदय की सच्चाई से प्रसन्न होता है, और मेरे मन ही में ज्ञान सिखाएगा।
Psa 51:7 जूफा से मुझे शुद्ध कर, तो मैं पवित्र हो जाऊंगा, मुझे धो, और मैं हिम से भी अधिक श्वेत बनूंगा।
Psa 51:8 मुझे हर्ष और आनन्द की बातें सुना, जिस से जो हडि्डयां तू ने तोड़ डाली हैं वे मगन हो जाएं।
Psa 51:9 अपना मुख मेरे पापों की ओर से फेर ले, और मेरे सारे अधर्म के कामों को मिटा डाल।
Psa 51:10 हे परमेश्वर, मेरे अन्दर शुद्ध मन उत्पन्न कर, और मेरे भीतर स्थिर आत्मा नये सिरे से उत्पन्न कर।
Psa 51:11 मुझे अपने साम्हने से निकाल न दे, और अपने पवित्र आत्मा को मुझ से अलग न कर।
Psa 51:12 अपने किए हुए उद्धार का हर्ष मुझे फिर से दे, और उदार आत्मा देकर मुझे सम्भाल।
Psa 51:13 तब मैं अपराधियों को तेरा मार्ग सिखाऊंगा, और पापी तेरी ओर फिरेंगे।
Psa 51:14 हे परमेश्वर, हे मेरे उद्धारकर्ता परमेश्वर, मुझे हत्या के अपराध से छुड़ा ले, तब मैं तेरे धर्म का जयजयकार करने पाऊंगा।
Psa 51:15 हे प्रभु, मेरा मुंह खोल दे तब मैं तेरा गुणानुवाद कर सकूंगा।
Psa 51:16 क्योकि तू मेलबलि में प्रसन्न नहीं होता, नहीं तो मैं देता, होमबलि से भी तू प्रसन्न नहीं होता।
Psa 51:17 टूटा मन परमेश्वर के योग्य बलिदान है, हे परमेश्वर, तू टूटे और पिसे हुए मन को तुच्छ नहीं जानता।

एक साल में बाइबल:
  • २ राजा १३-१४
  • यूहन्ना २