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Thursday, June 16, 2011

वचन से शुद्धता

एक स्त्री ने अपने पापों की क्षमा माँगकर प्रभु यीशु मसीह को अपना निज उद्धारकर्ता ग्रहण किया और मसीही विश्वासी बन गई। जिस व्यक्ति के द्वारा उसने प्रभु यीशु मसीह और उद्धार के बारे में जाना था वह उसके पास नियमित बाइबल अध्ययन के लिए आने लगी। कुछ ही समय में उसे बाइबल सिखाने वाला व्यक्ति उससे बहुत निराश हो गया क्योंकि जो कुछ भी वह सिखाता था, वह स्त्री उसे जल्द ही भूल जाती थी। एक दिन शिक्षक ने अपनी छात्रा से व्याकुल होकर उससे कहा, "कभी कभी मैं सोचता हूँ कि तुम्हें कुछ सिखाने से क्या लाभ; तुम तो सब जल्द ही भूल जाती हो। तुम मुझे छलनी की याद दिलाती हो, जैसे छलनी में जितना भी पानी डाला जाए, वह सब उसमें से होकर निकल जाता है, उसमें रुकता नहीं; ऐसे ही मैं जो कुछ तुम्हारे दिमाग में डालने का प्रयास करता हूँ, वह सब कहीं बाहर बह जाता है, तुम्हारे अन्दर बिलकुल भी नहीं रुकता।" छात्रा ने तुरंत सहज भाव से अपने शिक्षक को उत्तर दिया, "यह सही है कि मैं आप के द्वारा सिखाई गई हर बात याद नहीं रख पाती। लेकिन जैसे छलनी में से होकर बहता पानी चाहे उसके भीतर न रुके तो भी पानी के बहने से छलनी साफ हो जाती है, वैसे ही जो भी आप मुझे बाइबल में से सिखाते हैं वह मेरे जीवन को स्वच्छ बनाता है और मुझे इस स्वच्छता की बहुत आवश्यक्ता है। मैं बाइबल से मिलने वाली इसी स्वच्छता के लिए आपके पास बार बार आती रहती हूँ।"

इस नई मसीही विश्वासी ने जो कुछ उसे सिखाया गया, सभी याद तो नहीं रखा, लेकिन बाइबल की सच्चाईयाँ जैसे जैसे उसके जीवन और दिमाग़ से होकर निकलती रहीं, वह उनकी शुद्ध करने वाली सामर्थ को अनुभव करती रही और यह शुद्धता का अनुभव उसे और नए अनुभव के लिए प्रेरित करता रहा। परमेश्वर के वचन बाइबल में मन और जीवन को शुद्ध करने की सामर्थ है। एक जयवन्त मसीही जीवन जीने का सबसे अचूक मार्ग है प्रतिदिन बाइबल की शिक्षाओं से अपने आप को स्व्च्छ करना। जब हम परमेश्वर के वचन बाइबल को नियमित रूप से पढ़ते हैं, उसकी बातों पर मनन करते हैं और उनका पालन करते हैं तो यह वचन हमारे मन-ध्यान-विचारों और जीवन को शुद्ध और स्वच्छ बनाता है।

यह आवश्यक है कि हम प्रतिदिन परमेश्वर के वचन के साथ पाए जाएं, परन्तु इससे भी कहीं अधिक आवश्यक है कि परमेश्वर का वचन प्रतिदिन हममें बहुतायत से निवास करता पाया जाये। तभी इस वचन का शुद्ध करने का कार्य हमारे जीवनों में प्रभावी होगा और सब के समक्ष विदित भी होगा। - रिचर्ड डी हॉन


यदि हम परमेश्वर के वचन का अध्ययन करते रहेंगे तो उसका शुद्ध करने का कार्य भी हमारे जीवनों में होता रहेगा।

तुम तो उस वचन के कारण जो मैं ने तुम से कहा है, शुद्ध हो। - यूहन्ना १५:३


बाइबल पाठ: यूहन्ना १५:१-७

Joh 15:1 सच्‍ची दाखलता मैं हूं और मेरा पिता किसान है।
Joh 15:2 जो डाली मुझ में है, और नहीं फलती, उसे वह काट डालता है, और जो फलती है, उसे वह छांटता है ताकि और फले।
Joh 15:3 तुम तो उस वचन के कारण जो मैं ने तुम से कहा है, शुद्ध हो।
Joh 15:4 तुम मुझ में बने रहो, और मैं तुम में: जैसे डाली यदि दाखलता में बनी न रहे, तो अपने आप से नहीं फल सकती, वैसे ही तुम भी यदि मुझ में बने न रहो तो नहीं फल सकते।
Joh 15:5 में दाखलता हूं: तुम डालियां हो, जो मुझ में बना रहता है, और मैं उस में, वह बहुत फल फलता है, क्‍योंकि मुझ से अलग होकर तुम कुछ भी नहीं कर सकते।
Joh 15:6 यदि कोई मुझ में बना न रहे, तो वह डाली की नाई फेंक दिया जाता, और सूख जाता है और लोग उन्‍हें बटोर कर आग में झोंक देते हैं, और वे जल जाती हैं।
Joh 15:7 यदि तुम मुझ में बने रहो, और मेरी बातें तुम में बनी रहें तो जो चाहो मांगो और वह तुम्हारे लिये हो जाएगा।

एक साल में बाइबल:
  • नहेम्याह ४-६
  • प्रेरितों २:२२-४७