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Friday, November 25, 2011

तिरिस्कार न करें, सुधारें

   कुछ वर्ष पहले की घटना है, एक मानसिक सन्तुलन खो चुका व्यक्ति दौड़ता हुआ ऐम्सटरडैम के एक अजायब घर में आया और विश्व-विख्यात कलाकार रेमब्रां के प्रसिद्ध चित्र Nightwatch पर आकर, अपनी जेब से एक चाकू निकाला और उस चित्र पर वार करके उसमें कई काटे लगा दिये। कुछ समय पश्चात, ऐसी ही एक और घटना में एक विक्षिप्त व्यक्ति रोम के प्रसिद्ध और विशाल सेंट पीटर चर्च में घुसा और मूर्तिकार माईकिलैंजलो की प्रसिद्ध और सुन्दर शिल्प The Pieta को तोड़ डाला।

   क्या अजायब घर और चर्च के रख-रखाव करने वालों ने इन बेमिसाल और अन्मोल कलाकृतियों को इस नुक्सान के कारण अब व्यर्थ और बेमोल समझ लिया और उन्हें कूड़े में फेंक दिया? कदापि नहीं; उन्होंने संसार में उपलब्ध सबसे उत्तम तकनीक और विशेषज्ञों की सहायता ली और फिर से उन्होंने इन बेश्कीमती कलाकृतियों को जहाँ तक संभव था पुनःस्थापित करने का पूरा पूरा प्रयास किया और अपने पास फिर संजो कर रख लिया।

   मसीही विश्वासियों को भी यही रवैया अपने उन साथियों के प्रति रखना चाहिए जिनकी गवाही किसी पाप द्वारा बिगड़ गई है। जब कोई परमेश्वर की सन्तान पाप में फंसती है, तो हमारा पहला प्रयास उसकी निन्दा करने का नहीं वरन उसे पुनःस्थापित करने का होना चाहिए। नम्रता और हमदर्दी के साथ हमें प्रार्थना और सहायता द्वारा उसे आत्मिक रूप से फिर से खड़े करने और मसीही संगति में स्थापित करने का प्रयास करना चाहिए। मूल युनानी भाषा में जो शब्द गलतियों ६:१ में पु्नःस्थापित करने के लिए प्रयोग हुआ है, वही शब्द मत्ती ४:२१ में मछुआरों द्वारा अपने जाल सुधारने के लिए प्रयोग हुआ है। इस शब्द का अर्थ होता है पूरी तरह से ठीक कर देना।

   निन्दा करना सुधारने से अधिक सरल होता है। अपनी विरक्ति और घृणा में हमारी इच्छा एक पाप करने वाले मसीही से अपना मूँह फेर लेने की हो सकती है, किंतु परमेश्वर के वचन की सलाह निन्दा और तिरिस्कार नहीं सुधारना और अपनाना है, जैसे प्रभु यीशु मसीह ने भी हमें तथा पाप में पड़े समस्त संसार को सुधारने और अपनाने के लिए अपने प्राण दिये, ना कि नाश होने के लिए छोड़ दिया। - डेव एग्नर

यदि हम किसी को नीची निगाह से देखते रहेंगे तो फिर उसके साथ नज़र मिला कर बात कैसे कर सकेंगे?

हे भाइयों, यदि कोई मनुष्य किसी अपराध में पकड़ा जाए, तो तुम जो आत्मिक हो, नम्रता के साथ ऐसे को संभालो, और अपनी भी चौकसी रखो, कि तुम भी परीक्षा में न पड़ो। - गलतियों ६:१

बाइबल पाठ: गलतियों ६:१-५
    Gal 6:1  हे भाइयों, यदि कोई मनुष्य किसी अपराध में पकड़ा जाए, तो तुम जो आत्मिक हो, नम्रता के साथ ऐसे को संभालो, और अपनी भी चौकसी रखो, कि तुम भी परीक्षा में न पड़ो।
    Gal 6:2  तुम एक दूसरे के भार उठाओ, और इस प्रकार मसीह की व्यवस्था को पूरी करो।
    Gal 6:3  क्‍योंकि यदि कोई कुछ न होने पर भी अपने आप को कुछ समझता है, तो अपने आप को धोखा देता है।
    Gal 6:4  पर हर एक अपने ही काम को जांच ले, और तब दूसरे के विषय में नहीं परन्‍तु अपने ही विषय में उसको घमण्‍ड करने का अवसर होगा।
    Gal 6:5  क्‍योंकि हर एक व्यक्ति अपना ही बोझ उठाएगा।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल २४-२६ 
  • १ पतरस २