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Tuesday, November 29, 2011

दोषी या धर्मी

   एक प्रचारक ने कुछ जवानों से पुछा, क्षमा प्राप्त करने के लिए उन्हें क्या करना होगा? एक ने चुटकी लेते हुए कहा, "पाप"; प्रचारक ने उत्तर दिया, "तब तो हम सब को क्षमा के प्रार्थी होना चाहिए!"

   डा० कार्ल मेनिन्गर ने एक व्यक्ति के बारे में लिखा जो शिकागो शहर में मार्गों के एक कोने पर खड़ा रहता था और अचानक किसी राह चलते की ओर अपनी ऊँगली उठा कर ऊँची आवाज़ में कहता ’दोषी’ फिर बिना अपना हाव-भाव बदले स्थिर होकर खड़ा हो जाता, और कुछ समय पश्चात फिर से यही क्रिया दोहराता। एक बार एक व्यक्ति ने, जिस की ओर उसने इशारा कर के ’दोषी’ कहा था, अपने साथ चलने वाले मित्र से पूछा, "इसे कैसे पता चल गया?" लेकिन वस्तुस्थिति यह है कि वह व्यक्ति हम में से किसी की ओर भी इशारा कर के यही बात कह सकता है, और वह गलत नहीं होगा।

   परमेश्वर का वचन बाइबल यह स्पष्ट बताती है "इसलिये कि सब ने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित हैं" (रोमियों ३:२३)। समस्त मानव इतिहास में प्रभु यीशु को छोड़ कोई ऐसा नहीं हुआ है जिसने पाप न किया हो; हर कोई पाप का दोषी है - जन्म से भी और जीवन से भी - चाहे कर्मों में हो अथवा विचारों में, पाप सभी ने किया है और करते रहते हैं। इसी लिए सभी अपने अपने पाप की मज़दूरी के भी भागी हैं, जो है मृत्यु - "क्‍योंकि पाप की मजदूरी तो मृत्यु है..." (रोमियों ६:२३)। यह मृत्यु शारीरिक भी है - आत्मा का शरीर से विच्छेद; और आत्मिक भी है - आत्मा का परमेश्वर से विच्छेद। किंतु जो बाइबल का जो पद पाप की मज़दूरी के बारे में बताता है, वही उसके निवारण के बारे में भी बताता है - "...परन्‍तु परमेश्वर का वरदान हमारे प्रभु यीशु मसीह में अनन्‍त जीवन है" (रोमियों ६:२३)।

   पाप का यह दोष प्रभु यीशु में विश्वास के द्वारा हटाया जा सकता है। क्योंकि प्रभु यीशु परमेश्वर का सिद्ध प्रतिरूप, परमेश्वर का पुत्र था, जन्म, कर्म और विचारों से संपूर्णतः निषपाप और निषकलंक था, इसलिए पाप के दण्ड, अर्थात मृत्यु का उस पर कभी कोई अधिकार नहीं था। हमारे पापों का दण्ड अपने ऊपर लेकर प्रभु यीशु ने हमारी म्रुत्यु भी अपने ऊपर ले ली और हमारे स्थान पर क्रूस की मृत्यु सह ली, और अपने मृत्यु पर जयवंत होने के प्रमाण के लिए वह कब्र में से तीसरे दिन जी भी उठा। इसलिए अब जो कोई साधारण विश्वास से अपने पापों की क्षमा उससे माँग लेता है और उसे अपने उद्धारकर्ता के रूप में स्वीकार कर लेता है, वह परमेश्वर से, प्रभु यीशु की मृत्यु और जी उठने के आधार पर, अपने पापों की क्षमा भी प्राप्त कर लेता है।

   जिस किसी ने प्रभु यीशु को अपना मुक्तिदाता स्वीकार नहीं किया है, उनके लिए आज और अभी यह अवसर है, केवल साधारण विश्वास द्वारा सच्चे मन से कही एक प्रार्थना - "हे प्रभु यीशु मेरे पाप क्षमा करें, मुझे अपनी शरण में लें" इस के लिए काफी है। प्रभु का सेंत-मेंत उद्धार का प्रस्ताव अभी सब के लिए उपलब्ध है; वह आपको दोषी से धर्मी बनाने में सक्षम है। - रिचर्ड डी हॉन


कोई भी अपने आप में इतना भला नहीं है कि अपने आप को पाप के दण्ड से बचा सके; कोई भी पाप में इतना गिरा भी नहीं है कि दण्ड से परमेश्वर उसे बचा ना सके।

इसलिये कि सब ने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित हैं। - रोमियों ३:२३
 
बाइबल पाठ: रोमियों ३:९-२५
    Rom 3:9  तो फिर क्‍या हुआ क्‍या हम उन से अच्‍छे हैं कभी नहीं? क्‍योंकि हम यहूदियों और यूनानियों दोनों पर यह दोष लगा चुके हैं कि वे सब के सब पाप के वश में हैं।
    Rom 3:10  जैसा लिखा है, कि कोई धर्मी नहीं, एक भी नहीं।
    Rom 3:11  कोई समझदार नहीं, कोई परमेश्वर का खोजने वाला नहीं।
    Rom 3:12  सब भटक गए हैं, सब के सब निकम्मे बन गए, कोई भलाई करने वाला नहीं, एक भी नहीं।
    Rom 3:13  उन का गला खुली हुई कब्र है: उन्‍हीं ने अपनी जीभों से छल किया है: उन के होठों में सापों का विष है।
    Rom 3:14  और उन का मुंह श्राप और कड़वाहट से भरा है।
    Rom 3:15  उन के पांव लोहू बहाने को र्फुतीले हैं।
    Rom 3:16  उन के मार्गों में नाश और क्‍लेश है।
    Rom 3:17  उन्‍होंने कुशल का मार्ग नहीं जाना।
    Rom 3:18  उन की आंखों के साम्हने परमेश्वर का भय नहीं।
    Rom 3:1