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Friday, January 6, 2012

स्थिर नियम

   यदि आप चन्द्रमा, शुक्र ग्रह और मंगल ग्रह को अगली बार एक ही स्थान पर देखने में रुचि रखते हैं तो अपने कैलैण्डर में तारीख़ चिन्हित कर लिजीए; यह होगा १८ नवंबर २०५२ में। आप उस दिन के शाम के झुटपुटे में, आकाश के एक छोटे से हिस्से में इन तीनों को एक साथ देखने पाएंगे। इससे पूर्व यह हुआ था १ दिसंबर २००८ को, और अगली बार ४ दशक के बाद होगा।

   यह पूर्व-निर्धारण, सूर्य ग्रहण, चन्द्र ग्रहण, हेली कॉमेट (पुच्छल तारा) की वापसी की तारीख (२८ जुलाई २०६१) आदि प्रमाणित करते हैं कि सृष्टि में एक स्थिर व्यवस्था है। यदि सृष्टि के संचालन के लिए स्थिर नियम ना होते तो इस तरह के किसी भी पूर्व-निर्धारण को करना और उसकी भविष्यवाणी कर पाना संभव नहीं हो सकता था।

   क्या ये स्थिर नियम केवल संयोग मात्र हैं? क्या नक्षत्रों और आकाशीय पिंडों की नियमित क्रमवार चाल में हम परमेश्वर का हाथ देख सकते हैं? परमेश्वर के वचन से लिए गए आज के पद यर्मियाह ३३:२५, २६ को देखिए। परमेश्वर अपने तथा अपने लोगों के बीच, उन के साथ उसकी वाचा पर आधारित संबंधों के परिप्रेक्ष्य में यह बात कह रहा है। इसे समझाने के लिए वह लोगों स्थिरता से स्थापित प्रकृति के संचालन के नियमों और क्रमों का हवाला दे रहा है, जिनसे वे विदित हैं। परमेश्वर के कहने का तात्पर्य है कि जैसे उसके आकाश और पृथ्वी के संचालन के नियम स्थिर और अटल हैं वैसे ही अपने लोगों के साथ उसकी वाचा भी स्थिर और अटल है, जैसे नियम नहीं बदल सकते वैसे ही उस की वाचा के बदले जाने की भी कोई संभावना नहीं है।

   सृष्टि के समय से ही परमेश्वर के नियम सृष्टि पर लागू हैं तथा अद्भुत विश्वासनियता से सृष्टि का संचालन कर रहे हैं। इसी विश्वासनियता के अधार पर ही वैज्ञानिक बाह्य अंतरिक्ष की खोज कर पाते हैं और पृथ्वी पर हम अपने कैलेण्डर बना पाए हैं तथा एक दूसरे को भविष्य की किसी आपसी मुलाकात का, किसी बात का या मिलने का आश्वासन दे पाते हैं। यदि इन नियमों की स्थिरता का आधार ना होता, तो ऐसा कुछ भी कर या कह पाना किसी के लिए भी संभव ना होता।

   क्या ऐसे स्थिर और अटल और विश्वासनीय नियमों के बनाने वाले स्थिर, अटल और विश्वासनीय परमेश्वर प्रभु यीशु के हाथ में समर्पित कर के आपने अपना जीवन तथा भविष्य सुरक्षित कर लिया है? - डेव ब्रैनन


सृष्टि के अचरज परमेश्वर के कार्यशील होने का प्रमाण हैं।

यहोवा यों कहता है, यदि दिन और रात के विषय मेरी वाचा अटल न रहे, और यदि आकाश और पृथ्वी के नियम मेरे ठहराए हुए न रह जाएं, तब ही मैं याकूब के वंश से हाथ उठाऊंगा, और इब्राहीम, इसहाक और याकूब के वंश पर प्रभुता करने के लिये अपने दास दाऊद के वंश में से किसी को फिर न ठहराऊंगा। परन्तु इसके विपरीत मैं उन पर दया कर के उन को बंधुआई से लौटा लाऊंगा। - यर्मियाह ३३:२५, २६

बाइबल पाठ: भजन १९:१-११
Psa 19:1  आकाश ईश्वर की महिमा वर्णन कर रहा है और आकशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है।
Psa 19:2  दिन से दिन बातें करता है, और रात को रात ज्ञान सिखाती है।
Psa 19:3  न तो कोई बोली है और न कोई भाषा जहां उनका शब्द सुनाई नहीं देता है।
Psa 19:4  उनका स्वर सारी पृथ्वी पर गूंज गया है, और उनके वचन जगत की छोर तक पहुंच गए हैं। उन में उस ने सूर्य के लिये एक मण्डप खड़ा किया है,
Psa 19:5  जो दुल्हे के समान अपने महल से निकलता है। वह शूरवीर की नाई अपनी दौड़ दौड़ने को हर्षित होता है।
Psa 19:6  वह आकाश की एक छोर से निकलता है, और वह उसकी दूसरी छोर तक चक्कर मारता है; और उसकी गर्मी सबको पहुंचती है।
Psa 19:7  यहोवा की व्यवस्था खरी है, वह प्राण को बहाल कर देती है; यहोवा के नियम विश्वासयोग्य हैं, साधारण लोगों को बुद्धिमान बना देते हैं;
Psa 19:8  यहोवा के उपदेश सिद्ध हैं, हृदय को आनन्दित कर देते हैं; यहोवा की आज्ञा निर्मल है, वह आंखों में ज्योति ले आती है;
Psa 19:9  यहोवा का भय पवित्र है, वह अनन्तकाल तक स्थिर रहता है; यहोवा के नियम सत्य और पूरी रीति से धर्ममय हैं।
Psa 19:10  वे तो सोने से और बहुत कुन्दन से भी बढ़ कर मनोहर हैं; वे मधु से और टपकने वाले छत्ते से भी बढ़ कर मधुर हैं।
Psa 19:11  और उन्हीं से तेरा दास चिताया जाता है; उनके पालन करने से बड़ा ही प्रतिफल मिलता है।
 
एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति १६-१७ 
  • मत्ती ५:२७-४८