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Thursday, August 9, 2012

सफल जीवन



   आईज़क हॉन मध्य १८वीं शताब्दी में, इंगलैंड में लौवुड नामक एक छोटे से स्थान के चर्च के पादरी थे; वे एक ऐसे पादरी थे जिनकी कोई खास पहचान नहीं थी। उनकी सेवकाई के अन्त समय उनके चर्च के सदस्यों में २६ महिलाएं और ७ पुरुष थे जिनमें से केवल ४ पुरुष ही चर्च किसी नियमित रूप से आते थे।

   आज के इस विशाल सामूहिक सम्पर्क और बड़े बड़े चर्चों के समय में कौन इस "सफल कार्य" मानता? हमारे आज के संसार में आईज़क हॉन ऐसे पादरियों में गिने जाते जो कुछ प्रभाव नहीं छोड़ सके; ना उन्हें किसी पादरियों की सभा को संभोधित करने का निमंत्रण मिलता और ना ही कोई उनसे चर्च की बढ़ोतरी से संबंधित कोई लेख लिखने का आग्रह करता।

   लेकिन फिर भी जब ८८ वर्ष की आयु में उनका देहान्त हुआ तब उनके चर्च के लोगों ने उनकी याद में अपने चर्च की दीवार पर एक पट्टी लगवाई जो आज भी विद्यमान है और जिस पर अन्य बातों के साथ साथ लिखा है: "बहुत ही कम ऐसे अगुवे हैं जो इतने नम्र हैं, जो इतने आदरणीय हैं। वे ईश्वरीय अनुग्रह द्वारा स्वर्ग के लिए तैयार किए गए थे और ौन्होंने पतझड़ आने तक भी डाल पर बने रहने वाले पक्के फल के समान जीवन समाप्त किया; पाठक, इनके जीवन के समान जीवन की लंबाई की नहीं वरन वैसे ही सफल जीवन की कामना करना।"

   उनका जीवन परमेश्वर के वचन बाइबल के १ पतरस ५:५-६ को स्मरण दिलाता है: "...क्‍योंकि परमेश्वर अभिमानियों का साम्हना करता है, परन्‍तु दीनों पर अनुग्रह करता है। इसलिये परमेश्वर के बलवन्‍त हाथ के नीचे दीनता से रहो, जिस से वह तुम्हें उचित समय पर बढ़ाए।"

   चाहे इस संसार के लोग पादरी आईज़क हॉन को सफल मानें या ना मानें, परन्तु वे स्वर्ग की दृष्टि से सफल थे और स्वर्ग में उनका प्रतिफल कोई उनसे ले नहीं सकता - वे परमेश्वर की दृष्टि में नम्र और सफल थे। हमारे प्रभु यीशु के द्वारा मिलने वाली सामर्थ से, उनके समान नम्रता और विश्वासयोग्यता के साथ जीवन व्यतीत करके हम भी सफल जीवन जीने वाले बन सकते हैं। - डेविड रोपर


नम्रता सफलता का नुसखा है।

जो तुम्हारे अगुवे थे, और जिन्‍होंने तुम्हें परमेश्वर का वचन सुनाया है, उन्‍हें स्मरण रखो; और ध्यान से उन के चाल-चलन का अन्‍त देख कर उन के विश्वास का अनुकरण करो। 

बाइबल पाठ: १ पतरस ५:१-७
1Pe 5:1  तुम में जो प्राचीन हैं, मैं उन की नाईं प्राचीन और मसीह के दुखों का गवाह और प्रगट होने वाली महिमा में सहभागी होकर उन्‍हें यह समझाता हूं। 
1Pe 5:2  कि परमेश्वर के उस झुंड की, जो तुम्हारे बीच में हैं रखवाली करो; और यह दबाव से नहीं, परन्‍तु परमेश्वर की इच्‍छा के अनुसार आनन्‍द से, और नीच-कमाई के लिये नहीं, पर मन लगा कर। 
1Pe 5:3   और जो लोग तुम्हें सौंपे गए हैं, उन पर अधिकार न जताओ, वरन झुंड के लिये आदर्श बनो। 
1Pe 5:4   और जब प्रधान रखवाला प्रगट होगा, तो तुम्हें महिमा का मुकुट दिया जाएगा, जो मुरझाने को नहीं। 
1Pe 5:5  हे नवयुवकों, तुम भी प्राचीनों के आधीन रहो, वरन तुम सब के सब एक दूसरे की सेवा के लिये दीनता से कमर बान्‍धे रहो, क्‍योंकि परमेश्वर अभिमानियों का साम्हना करता है, परन्‍तु दीनों पर अनुग्रह करता है। 
1Pe 5:6  इसलिये परमेश्वर के बलवन्‍त हाथ के नीचे दीनता से रहो, जिस से वह तुम्हें उचित समय पर बढ़ाए। 
1Pe 5:7  और अपनी सारी चिन्‍ता उसी पर डाल दो, क्‍योंकि उस को तुम्हारा ध्यान है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन ७७-७८ 
  • रोमियों १०